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Rajanikant Prabhanjan

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जबलपुर में पति को दूसरी महिला के साथ होटल के कमरे में कथित आपत्तिजनक हालत में देखकर पत्नी का गुस्सा फूट पड़ा,फिर होटल के अंदर जमकर हंगामा हुआ। 

पत्नी और परिजनों ने विरोध जताया,जिसके बाद मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

 जबलपुर | वीडियो वायरल
संजयन त्रिपाठी का बड़ा ऐलान! सीट जीतकर अखिलेश यादव को देंगे जीत का तोहफा, सियासी गलियारों में मची हलचल! 

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वीडियो क्रेडिट The Red ink
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में एक व्यक्ति आदित्य विज़न के शोरूम के अंदर खड़े होकर कंपनी की सर्विस और सामान को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करता दिखाई दे रहा है।

वीडियो में वह लोगों से अपील करता है कि यहां से एसी और टीवी खरीदने से पहले अच्छी तरह सोच लें। उसका दावा है कि सामान खरीदने के बाद सर्विस के नाम पर ग्राहकों को परेशानी उठानी पड़ सकती है।

सबसे बड़ी बात यह है कि व्यक्ति लोगों को बार-बार सामान नहीं खरीदने की सलाह देता नजर आ रहा है।

अब सवाल यह है कि आखिर ग्राहक अपना खून-पसीने का पैसा खर्च करके सामान खरीदे और जरूरत पड़ने पर उसे सर्विस के लिए भटकना पड़े, तो जिम्मेदारी किसकी होगी?

कंपनी का शोरूम बड़ा होने से ग्राहक का भरोसा नहीं बनता, भरोसा बनता है बिक्री के बाद मिलने वाली सर्विस से।

हालांकि, वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों पर कंपनी का पक्ष भी सामने आना चाहिए।

लेकिन एक बात तय है—ग्राहक को सामान बेचने के साथ उसकी शिकायत सुनना और समाधान करना भी कंपनी की जिम्मेदारी है।

आपका क्या अनुभव रहा है आदित्य विज़न के साथ? क्या खरीदारी के बाद भी ग्राहकों को वैसी ही सर्विस मिलती है, जैसे खरीदते समय वादे किए जाते हैं?

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पूर्वांचल की सियासत में अखिलेश यादव का बड़ा उलटफेर!

डॉ. संजयन त्रिपाठी ने भाजपा को छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। इतना ही नहीं,अखिलेश यादव  ने उन पर भरोसा जताते हुए MLC का प्रत्याशी भी बना दिया है।

खास बात यह है कि डॉ. संजयन त्रिपाठी पूर्वांचल, खासकर गोरखपुर की राजनीति में एक जाना-पहचाना चेहरा हैं। गोरखपुर, जिसे योगी आदित्यनाथ का मजबूत राजनीतिक क्षेत्र माना जाता है, वहां उनकी पहचान सियासी मायने रखती है।

कभी भाजपा के साथ रहे डॉ. त्रिपाठी को अब अखिलेश यादव ने ऐसा मौका दिया है,जब भाजपा में उनकी अनदेखी की चर्चा हो रही थी।

अब देखना दिलचस्प होगा कि अखिलेश यादव का यह भरोसा पूर्वांचल की राजनीति में कितना असर दिखाता है और डॉ. संजयन त्रिपाठी सपा की उम्मीदों पर कितना खरा उतरते हैं।

भाजपा ने नजरअंदाज किया,अखिलेश ने भरोसा जताया… अब पूर्वांचल की सियासत में क्या नया समीकरण बनेगा?
सैदपुर गंगा पुल पर खराब हुई मदरसे की बोलेरो, 14 बच्चे थे सवार।

गाड़ी खराब होने के बाद गर्मी से परेशान बच्चों को तिरगांव के रोरी यादव ने पानी और बिस्किट उपलब्ध कराए। सूचना पर 112 की मदद से बच्चों को सुरक्षित पहुंचाया गया।

मदरसे में ₹500 मासिक फीस लिए जाने की बात भी सामने आई है। घटना के बाद बच्चों के सुरक्षित आवागमन और वाहन की देखरेख को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

मामले में मदरसा प्रबंधन का पक्ष और पूरी जानकारी सामने आना जरूरी है।

वीडियो देखिए और अपनी राय दीजिए।

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एक दल से अचानक दूसरे दल में पलटी मारकर टिकट हासिल कर लेना और फिर चुनाव जीत जाना इतना आसान नहीं होता। क्योंकि राजनीति में सिर्फ पार्टी बदलने से जनता का भरोसा ट्रांसफर नहीं होता!

सबसे बड़ी बात यह है कि जिस नेता का टिकट काटकर बाहर से आए हुए नेता को उम्मीदवार बनाया जाता है,वह भी उसी पार्टी का पुराना कार्यकर्ता होता है। उसके समर्थक, उसकी मेहनत और उसका अपना जनाधार होता है।

ऐसे में नए नेता को सिर्फ विपक्ष से नहीं,बल्कि कई बार अपनी ही पार्टी के नाराज कार्यकर्ताओं और टिकट से वंचित नेताओं के समर्थकों से भी मुकाबला करना पड़ता है।

स्वामी प्रसाद मौर्य भाजपा छोड़कर सपा में आए और फाजिलनगर से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए।

धर्म सिंह सैनी भाजपा छोड़कर सपा में आए और नकुड़ से चुनाव लड़े,लेकिन हार गए।

अवतार सिंह भड़ाना भाजपा छोड़कर रालोद में गए और जेवर से चुनाव लड़े,लेकिन जीत नहीं पाए।

रोशन लाल वर्मा भाजपा छोड़कर सपा में आए और तिलहर से चुनाव लड़े,लेकिन हार गए।

बृजेश प्रजापति भाजपा छोड़कर सपा में आए और तिंदवारी से चुनाव लड़े, लेकिन जीत नहीं सके।

भगवती प्रसाद सागर भाजपा छोड़कर सपा में आए और घाटमपुर से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए।

हरिओम यादव सपा छोड़कर भाजपा में गए और सिरसागंज से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए।

शत्रुघ्न सिन्हा भाजपा छोड़कर कांग्रेस में गए और 2019 में पटना साहिब से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए।

कीर्ति आजाद भाजपा छोड़कर कांग्रेस में गए और 2019 में धनबाद से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए।

ज्योति मिर्धा कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आईं और 2024 में नागौर से चुनाव लड़ीं, लेकिन हार गईं।

कृपाशंकर सिंह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए और 2024 में जौनपुर से चुनाव लड़े, लेकिन जीत नहीं पाए।

रवनीत सिंह बिट्टू कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए और 2024 में लुधियाना से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए।

गीता कोड़ा कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आईं और 2024 में सिंहभूम से चुनाव लड़ीं, लेकिन हार गईं।

प्रणीत कौर कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आईं और 2024 में पटियाला से चुनाव लड़ीं,लेकिन जीत नहीं सकीं।

हालांकि,यह भी सच है कि हर दल-बदलू नेता चुनाव नहीं हारता। लेकिन इन उदाहरणों से एक बात साफ होती है कि पार्टी बदलने के बाद पुराने समर्थकों का भरोसा और नए संगठन का साथ मिलना अपने आप में बड़ी चुनौती होती है।

सियासत में टिकट मिलना किसी नेता की व्यक्तिगत उपलब्धि हो सकती है,लेकिन जीत सिर्फ टिकट से नहीं मिलती। जिस कार्यकर्ता का टिकट काटकर बाहर से आए नेता को उम्मीदवार बनाया जाता है, उसकी नाराजगी भी चुनावी समीकरण बदल सकती है।

आखिरकार, चुनाव में नेता का नाम ही नहीं, संगठन की जमीन, कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता का भरोसा भी मायने रखता है।
लगता है इस वीडियो ने एल्गोरिदम की नींद उड़ा दी है! 🔥😂

हर जगह बस यही वीडियो छाया हुआ है। लोग धड़ाधड़ शेयर कर रहे हैं, और अब तो हर कोई अपने फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए इसी वीडियो को पोस्ट कर रहा है।

ये वीडियो पहले मेरे ही चैनल से वायरल हुआ था,जहां इसने 5 MILLION VIEWS का आंकड़ा पार किया था।

अब वही वीडियो दोबारा ट्रेंड में है और हर तरफ इसकी धूम मची है।
जिसे फॉलोअर्स बढ़ाने हैं,वो भी यही वीडियो डाल रहा है!

भाई, कंटेंट हमारा वायरल होने का फायदा सब उठा रहे हैं! 😎
फिर मत कहिएगा कि बताया नहीं था! 😂

अभी तो दो तीन अकाउंट्स के ss हैं हजारो id से यह वीडियो पोस्ट हो चुका है और सबके फालोअर बढ़ रहे हैं आप भी बढ़ा सकते हैं इस वीडियो को अपलोड करते ही वायरल ......

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भाई का कॉन्फिडेंस देखिए! सेल्फी लेने आए थे या गाल पकड़ने का सपना पूरा करने?

कन्नड़ अभिनेत्री रचिता एक इवेंट में थीं! एक फैन सेल्फी लेने पहुंचा, लेकिन सेल्फी के बाद उसने सीधे अभिनेत्री का गाल पकड़ लिया!

भाई,फैन होना अच्छी बात है,लेकिन किसी की मर्जी के बिना उसे छूना कौन-सी फैनगिरी है? 

हैरानी की बात ये है कि रचिता ने भी इस असहज स्थिति को काफी सहजता से संभाला। सेल्फी तक ठीक था भाई,आगे बढ़ने की परमिशन किसने दी? 

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एक पिता को अपने ही बेटे की पहचान साबित करने के लिए महीनों संघर्ष करना पड़ा!

उत्तर प्रदेश के बलिया के अखिलेश मिश्रा का 12 वर्षीय बेटा रजत 13 मई 2025 को लापता हो गया था। दो दिन बाद घाघरा नदी किनारे मिले एक अज्ञात शव को पिता ने अपने बेटे का बताया, लेकिन पुलिस ने उसे रजत का मानने से इनकार कर दिया और लावारिस मानकर अंतिम संस्कार कर दिया।

पिता ने हार नहीं मानी। महीनों तक अधिकारियों के चक्कर काटे और DNA जांच की मांग करते रहे। आखिरकार DNA रिपोर्ट में शव की पहचान रजत के रूप में होने की बात सामने आई।

अब एक बेबस पिता ने बेटे के कपड़ों से पुतला बनाकर उसका अंतिम संस्कार किया और अंतिम विदाई दी। सोचिए,जिस पिता ने अपने बेटे को खोया,उसे उसकी पहचान साबित करने के लिए भी महीनों संघर्ष करना पड़ा।

सबसे बड़ा सवाल—जब परिवार शुरुआत से पहचान का दावा कर रहा था, तो आखिर जांच में इतनी देर क्यों हुई? इस पूरे मामले में जिम्मेदारी किसकी है?

एक पिता को अब सिर्फ बेटे का दुख नहीं, बल्कि जवाब का भी इंतजार है।

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ये भिखारीस्तानी हमारे सामने हमेशा बुरी तरह हारते हैं,इनका रिकॉर्ड इतना गंदा है कि इन्हें शर्म आनी चाहिए लेकिन ये इतने बेशर्म और ढीठ हैं कि इन्हें शर्म नहीं आती।

आज के मैच में वैभव सूर्यवंशी को आउट करने के बाद भिखरिस्तानी का Saim Ayub बच्चा झुलाने वाला घटिया सेलिब्रेशन करता नजर आया😡

बाप के सामने खड़े होने की औकात नहीं है और चले हैं हमारे 15 साल के बच्चे को चिढ़ाने।😀

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आराधना मिश्रा के नाम से वायरल इस बयान में दावा किया जा रहा है कि भारत माता की जय के नारे लगाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी और कांग्रेस की जय के नारे लगाने को कहा गया।

सवाल है कि जिस पार्टी के लिए देशभक्ति के नारे भी अनुशासन का मुद्दा बन जाएं, उसकी सोच पर सवाल उठना लाजिमी है।

भारत माता किसी एक पार्टी, परिवार या संगठन की जागीर नहीं है। देश सबसे ऊपर है, राजनीति उसके बाद! भारत माता की जय बोलना अपराध नहीं, करोड़ों भारतीयों की भावना है।

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वायरल वीडियो में एक व्यक्ति अपनी TV तोड़ते हुए दुकानदार के खिलाफ शिकायत करता नजर आ रहा है।

ग्राहक और दुकानदार का रिश्ता भरोसे पर चलता है। लेकिन जब यही भरोसा टूटता है,तो सवाल दोनों तरफ उठते हैं।

आदित्य विज़न की ओर से कोई आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है,इसलिए किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

लेकिन एक बात सोचने वाली है अगर किसी ग्राहक को अपनी शिकायत के समाधान के बजाय निराशा हाथ लगे,तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? 

और अगर ग्राहक गुस्से में आकर नुकसान करने लगे,तो क्या उसे सही ठहराया जा सकता है?

आखिर गलती की शुरुआत कहां से हुई और जिम्मेदारी किसकी बनती है? फैसला तथ्यों के आधार पर होना चाहिए,भावनाओं के आधार पर नहीं।

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Facebook ज्यादा पैसा देता है या YouTube? 💰🔥

आज दोनों प्लेटफॉर्म की कमाई का फर्क समझ लीजिए!

सबसे पहले बात करते हैं Facebook की।

👉 Facebook पर 1 लाख Long Video Views आने पर लगभग ₹40 से ₹45 मिलते हैं। कभी इससे थोड़ा ज्यादा तो कभी कम।

👉 वहीं Facebook Reels पर 1 लाख Views के बदले सिर्फ ₹10 से ₹15 तक की कमाई होती है।

अब आइए YouTube की कमाई पर! 👇

👉 YouTube पर 1 लाख Long Video Views आने पर लगभग $10 से $15 यानी भारतीय रुपये में करीब ₹850 से ₹1,300 तक मिल सकते हैं। कभी-कभी इससे ज्यादा भी।

👉 वहीं YouTube Shorts पर 1 लाख Views के बदले लगभग ₹80 से ₹85 मिलते हैं। कभी $1 यानी करीब ₹85, तो कभी ₹60–₹70 भी।

अब आप खुद हिसाब लगाइए! 🤔

एक तरफ Facebook की कमाई और दूसरी तरफ YouTube की कमाई!

लेकिन सवाल सिर्फ Views का नहीं, बल्कि Revenue का है।

आपके हिसाब से Content Creator के लिए कौन-सा प्लेटफॉर्म ज्यादा फायदेमंद है—Facebook या YouTube?

अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए! 🔥

ये मेरे खुद के SS हैं मेरा मानना है नाम फ्रेम जल्दी फेमस होना है तो फेसबुक पर काम कीजिए ज्यादा कमाई चाहिए तो यूट्यूब पर काम कीजिए 

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ये भिखारीस्तानी खिलाड़ी भी ना, अपनी जाहिलियत दिखाने से पीछे नहीं हटते..😀

देखिए, वैभव सूर्यवंशी को आउट करके कैसे जश्न मना रहे हैं अयूब साहब! लेकिन बेटा, जिस बच्चे को आउट करके इतना उछल रहे हो, वही बच्चा तुम्हारी गेंदों पर छक्के बरसा रहा था! 🔥

बेटा अयूब, जश्न थोड़ा संभलकर मनाना… मैदान में दोबारा वैभव से मुलाकात हो गई ना, तो ये जश्न याद रह जाएगा!

अगली भिड़ंत का इंतजार रहेगा! 

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बेटा Ayub Dropped 2 Catches in 3 Balls
ABHISHEK SHARMA DESTROYS PAKISTAN! 

28 BALLS | 61 RUNS | 3 FOURS | 7 SIXES 

A BRUTAL TREATMENT FOR PAKISTAN! ABHISHEK SHOWED NO MERCY! 

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कांग्रेस ब्राह्मण वोट साधने के कयास में है क्या लगता है ब्राह्मण कांग्रेस के साथ जाएंगे? या फिर इतना सब होने के साथ bjp के लिए फिर ताली बजाएंगे?
पिछले कुछ महीनों से मायावती जी और आकाश आनंद के बीच चल रही सियासी खींचतान अब एक अलग ही मोड़ पर पहुंच गई है। आज एक बार फिर आकाश आनंद ने सोशल मीडिया के माध्यम से मायावती जी से माफी मांग ली।

सवाल यह है कि जिस रिश्ते में पारिवारिक संवाद होना चाहिए,वहां हर बात सोशल मीडिया पोस्ट और माफीनामे के जरिए क्यों हो रही है?

आकाश आनंद को शायद लगता है कि अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निकाले जाने वाली पोस्ट को रीपोस्ट न करना ही उनकी पार्टी से निष्कासन की वजह बना।

अब उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है। देखना दिलचस्प होगा कि इस माफीनामे के बाद मायावती का अगला कदम क्या होता है और क्या आकाश आनंद की बसपा में दोबारा वापसी का रास्ता खुलता है?

फिलहाल तो यही लग रहा है कि बसपा की अंदरूनी राजनीति में पारिवारिक रिश्तों से ज्यादा सोशल मीडिया पोस्ट की अहमियत बढ़ गई है!
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद से ही CJP वालों का आत्मविश्वास बढ़ा हुआ है,अब तो कुछ लोग CJP को विपक्ष मानने लगे हैं।

अक्खा मुंबई इस प्रोटेस्ट को समर्थन कर रहा है,ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर खूब नारे लग रहे हैं। नारों को सुनकर यही लग रहा है की मुंबई के लोग दिल्ली से ज्यादा क्रिएटिव हैं।

माहौल पिछली बार की तरह सेट होता हुआ दिख रहा है,अब देखना है अगले एक दो दिन सरकार का क्या स्टैंड रहता है।
प्रेमानंद महाराज जी को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं,लेकिन किसी संत के जीवन और परिस्थितियों को समझे बिना उन पर टिप्पणी करना कितना उचित है?

इन दिनों एक CCTV वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में रसिक दुलारी पहले छत पर बैठे कुछ सोचते नजर आते हैं। फिर अचानक लेट जाते हैं और कुछ ही देर बाद एकाएक उठकर नीचे कूद जाते हैं।

आखिर उस पल उनके मन में क्या चल रहा था? ऐसी कौन-सी परिस्थिति या मजबूरी थी, जिसने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर किया?

फिलहाल वीडियो को लेकर तरह-तरह की बातें हो रही हैं, लेकिन बिना पूरी जानकारी के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा।

सवाल सिर्फ एक वीडियो का नहीं, बल्कि उस पूरी घटना के पीछे की सच्चाई जानने का है।

प्रेमानंद महाराज जी के प्रति श्रद्धा रखने वाले लोगों के लिए यह मामला भावनात्मक भी है।
आजकल प्रोटेस्ट में मुद्दे से ज्यादा Reel बनाने की होड़ दिखाई देने लगी है! 

आज के प्रदर्शन में एक लड़की ने भी कुछ ऐसा ही कारनामा कर दिया। पुलिस आंदोलनकारियों को बस में बैठाकर ले जा रही थी, तभी मैडम बस के सामने जाकर ऐसे डट गईं,मानो आज बस को रोककर ही इतिहास रच देंगी!

पुलिस को भी आखिरकार बस रोकनी पड़ी। उधर कैमरा चालू, इधर Reel का पूरा सीन तैयार!अब सोशल मीडिया पर बहादुरी के चर्चे हैं, Instagram पर वीडियो की चर्चा है और मैडम की Reel भी कट चुकी है!

लेकिन सवाल यह है कि क्या अब हर आंदोलन में मुद्दों से ज्यादा वायरल होने की प्रतियोगिता चल रही है? कुछ लोग हक की लड़ाई लड़ने आते हैं,तो कुछ कैमरे के सामने अपनी पहचान बनाने!

प्रोटेस्ट आंदोलन के लिए होता है या Instagram पर फेमस होने के लिए? लगता है अब आंदोलन में भी नारे कम और Reel का एंगल ज्यादा देखा जा रहा है!
यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर खींचतान जारी थी।इमरान मसूद से लेकर राजेंद्र पाल गौतम तक 150 सीटों की मांग की चर्चा कर चुके थे।

इसी बीच अजय राय ने प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया और कांग्रेस ने विधायक आराधना मिश्रा मोना को यूपी की कमान सौंप दी।

अब देखना दिलचस्प होगा कि यह बदलाव कांग्रेस की नई सियासी रणनीति है या गठबंधन की राजनीति में कोई नया दांव!
महिला शिक्षिका से अभद्रता का वीडियो वायरल, प्रबंधक पर गंभीर आरोप!

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिला मुख्यालय रवींद्रनगर स्थित एक स्कूल से ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा के मंदिर की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में स्कूल प्रबंधक दिनेश रॉय कथित तौर पर अपनी ही संस्था की महिला शिक्षिका के साथ अभद्र व्यवहार करते और अनुचित दबाव बनाते दिखाई दे रहे हैं।

वीडियो में महिला शिक्षिका बार-बार उनसे दूरी बनाए रखने की गुहार लगाती नजर आ रही हैं। सवाल यह है कि जिस संस्थान में बच्चों को संस्कार और सम्मान की शिक्षा दी जाती है, वहां महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?

मामले को लेकर पीड़िता ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने वायरल वीडियो और मिली तहरीर के आधार पर जांच शुरू कर दी है।

अब देखना होगा कि जांच में क्या सच्चाई सामने आती है और आरोपों पर पुलिस क्या कार्रवाई करती है।

महिला की गरिमा और कार्यस्थल की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

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क्या ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा होगा? आपकी क्या राय है?
2027 में 5 राज्यों में चुनाव होने हैं! अब जरा दूर की सोचिए और फिर अपनी राय दीजिए। 🤔
यादवों को यदमुल्ला कहने वालों को गोलू यादव की चेतावनी