
आजमगढ़ से महंगा पड़ा तो गोरखपुर जिले में ही काटने लगे गोवंश, आजाद निकला मास्टरमाइंड
गोला, (गोरखपुर)। गोवंशीय पशुओं के मांस के अवैध कारोबार की जांच आगे बढ़ने के साथ जिले में फैले नेटवर्क की कड़ियां सामने आने लगी हैं। पुलिस के अनुसार, इस गोरखधंधे का मास्टरमाइंड आजाद है।
पहले गिरोह के लोग आजमगढ़ से मांस मंगाकर बेचता था।
वहां से मांस लाने में लागत बढ़ने लगी तो जिले में ही छुट्टा गोवंश को काटकर मांस बेचने की योजना बनाई गई। गोला के धौसहर उर्फ बेलवाबारी से लेकर उरुवा और पीपीगंज तक इसके तार जुड़े होने की जानकारी पुलिस की पूछताछ में सामने आई है।
पुलिस के मुताबिक आजमगढ़ से मांस 270 से 230 रुपये किलो तक पड़ता था। लाने-ले जाने का खर्च अलग था। इसके बाद गोरखपुर में यही मांस 330 से 400 रुपये किलो तक बेचते थे। इसी मुनाफे को देखते हुए जिले में ही पशुओं को काटने का रास्ता अपनाया गया। स्थानीय स्तर पर ग्राहक तैयार होने से कारोबारियों को बाहर से मांस मंगाने की जरूरत भी कम हो गई।
आजाद इस नेटवर्क की मुख्य कड़ी है। उसकी ससुराल पीपीगंज क्षेत्र में है और वहीं रहकर वह आजमगढ़ से मांस लाने और उसे अलग-अलग ग्राहकों तक पहुंचाने का काम करता था। वह एक बार में करीब 10 से 12 किलो मांस लाता था। कभी आजमगढ़ तो कभी कुशीनगर से मांस लाने की बात भी पुलिस की जांच में सामने आई है। पुलिस के अनुसार, पीपीगंज और आसपास की कालोनियों तथा नातेदारों के बीच इसकी बिक्री की जाती थी।
वर्ष 2024 में पुलिस ने आजाद को पकड़ा था और 2026 में जेल से छूटा। बाहर आने के बाद काम नहीं मिलने पर वह फिर इसी धंधे में लग गया। गोला पुलिस ने सत्यापन कर उसे पीपीगंज में रहने वाला बताया था। पुलिस अब उसके पुराने आपराधिक इतिहास और संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है।
गोला में बनाया था नया ठिकाना:
पुलिस के मुताबिक बाहर से मांस मंगाने में लागत अधिक पड़ने लगी तो आजाद ने जिले में ही कटान की योजना बनाई। करीब एक माह पहले उसकी मुलाकात अब्दुल रहमान से गोला में हुई। पुलिस के अनुसार, अब्दुल रहमान पहली बार इस मामले में पकड़ा गया है। वह आजाद और उसके चाचा नूरूल हसन के बीच कड़ी का काम करता था।
नूरूल हसन पर मांस खरीदकर स्थानीय स्तर पर बेचने की बात पुलिस की पूछताछ में सामने आई है। शुक्रवार को धौसहर उर्फ बेलवाबारी में कार्रवाई से पहले तीन पशुओं को काटने की तैयारी थी। दो पशुओं को काट दिया गया था, जबकि तीसरे का कटान पूरा नहीं हो सका। इसी दौरान वाहन आने की आहट पर आरोपित मांस छोड़कर भाग निकले। पुलिस अब यह पता कर रही है कि कटे मांस को किस-किस स्थान पर पहुंचाया जाना था और इसके खरीदार कौन थे।
सप्ताह में तीन दिन होती थी गतिविधि :
ग्रामीणों के मुताबिक आसपास के गांवों में सप्ताह के तीन दिन रविवार, बुधवार और शुक्रवार को इस तरह की गतिविधियां होने की चर्चा थी। परसा उर्फ अगलगहवा में फायर स्टेशन से करीब 500 मीटर दूर खाली स्थान को भी कटान और मांस बिक्री से जोड़कर देखा जा रहा है। पुलिस इन दावों की भी जांच कर रही है। घटनास्थल के आसपास मांस पकाने की भट्ठी, प्याज के छिलके और शराब की खाली बोतलें मिलने की बात सामने आई है।
बाइक पर रोटी-चावल लेकर पहुंचे तीन लोग
घटना वाले दिन दोपहर में बाइक से तीन लोग मौके पर पहुंचे थे। एलआइयू की टीम ने उन्हें पकड़ लिया। उनके पास रोटी और चावल मिले। पूछताछ में उन्होंने खुद को हरपुर चीनी मिल क्षेत्र का निवासी बताया। बाद में उन्हें पुलिस को सौंप दिया गया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में ऐसे लोगों के बारे में जानकारी मिली जो गांव में ही किराये के मकान में रहते थे। इसके बाद रात में पुलिस ने कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की।
पुलिस अब बाहरी लोगों के साथ स्थानीय मददगारों की भूमिका भी तलाश रही है। थाना प्रभारी सीपी पांडेय के अनुसार, कारोबार में शामिल स्थानीय लोगों को चिह्नित किया जा रहा है और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
छुट्टा पशुओं के मांस का अवैध कारोबार करने वालों पर गैंग्सटर एक्ट के तहत कार्रवाई करने के साथ ही अपराध से अर्जित उनकी संपत्ति जब्त कराई जाएगी। गिरोह से जुड़े लोगों की तलाश चल रही है। फरार चल रहे आरोपितों को भी पकड़ लिया जाएगा।
Hardoi, Hardoi | Oct 4, 2026