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Mukesh Gautam

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🚨 आरटीओ साहब! हादसे के बाद कागज चलाने से बेहतर है हादसा होने से पहले बसों की जांच कर लीजिए!

*छतरपुर में आम आदमी की बाइक पर कानून का डंडा और यात्री बसों पर इतनी नरमी क्यों?*

एक गरीब आदमी मोटरसाइकिल लेकर सड़क पर निकले तो हेलमेट से लेकर बीमा और कागज तक सब कुछ चेक होता है। छोटी सी कमी मिली नहीं कि चालान तैयार।

लेकिन जब बात यात्री बसों की ओवरलोडिंग, फिटनेस, परमिट, सुरक्षा मानकों और कथित रूप से यात्री बसों में माल परिवहन की आती है, तो आखिर आरटीओ विभाग की निगरानी कहां चली जाती है?

❓ क्या बसों की नियमित जांच नहीं होनी चाहिए?
❓ क्या बस की निर्धारित क्षमता जांचना आरटीओ की जिम्मेदारी नहीं है?
❓ क्या फिटनेस और परमिट केवल कागजों में देखकर छोड़ दिए जाते हैं?
❓ क्या बस स्टैंड पर खड़ी बसों का भौतिक निरीक्षण नहीं होना चाहिए?
❓ क्या बार-बार शिकायत मिलने के बाद भी जांच जरूरी नहीं समझी जाती?

और सबसे बड़ा सवाल—
जब एक बस दुर्घटना में 9 लोगों की जान जा चुकी है, तब भी अगर कथित ओवरलोडिंग और नियमों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आती रहें और कार्रवाई हादसे के बाद ही दिखाई दे, तो फिर जवाबदेही किसकी तय होगी?

आरटीओ विभाग का काम केवल दुर्घटना होने के बाद चालान काटना या औपचारिक कार्रवाई करना नहीं है।

आरटीओ की असली जिम्मेदारी है—खतरनाक और नियम विरुद्ध वाहन सड़क पर उतरने से पहले उन्हें रोकना।
अगर कोई बस निर्धारित क्षमता से ज्यादा यात्रियों को लेकर चल रही है, अगर सुरक्षा मानकों का उल्लंघन हो रहा है, अगर परमिट की शर्तों के विपरीत संचालन हो रहा है या यात्री बस का इस्तेमाल नियम विरुद्ध माल परिवहन में किया जा रहा है, 

तो सवाल सीधे परिवहन विभाग से है—
“आपकी निगरानी व्यवस्था आखिर कर क्या रही है?”
छतरपुर बस स्टैंड पर यदि ऐसी गतिविधियां खुलेआम हो रही हैं, तो यह केवल बस संचालक का मामला नहीं है।
यह उस सरकारी व्यवस्था की भी परीक्षा है, जिसे इन वाहनों की जांच और निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।

सोशल मीडिया पर शिकायतें।
अधिकारियों को सूचना।
व्यक्तिगत रूप से जानकारी देने के दावे।
फिर भी अगर कार्रवाई दिखाई नहीं देती, तो जनता पूछेगी ही—
“आरटीओ साहब, आप किस दिन जागेंगे?”
क्या अगली बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है?

9 मौतें कम थीं क्या?
जनता को हादसे के बाद पंचनामा, बयान और औपचारिक जांच नहीं चाहिए।

जनता चाहती है कि—
जो बस सड़क पर यात्रियों की जान के लिए खतरा है, उसे हादसे से पहले रोका जाए।
और यदि शिकायतें गलत हैं तो आरटीओ विभाग खुलकर बताए कि जांच में क्या पाया गया।

लेकिन यदि शिकायतें सही हैं, तो जिम्मेदार बस संचालकों के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

कानून अगर गरीब की बाइक के लिए जागता है,
तो बस मालिकों के लिए भी जागना चाहिए।

क्योंकि—
सड़क पर गरीब की जान भी उतनी ही कीमती है, जितनी किसी बड़े आदमी की।

छतरपुर पूछ रहा है—
आरटीओ विभाग जवाब देगा या अगली दुर्घटना का इंतजार करेगा?
<nis:link nis:type=tag nis:id=छतरपुर nis:value=छतरपुर nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=rto nis:value=RTO nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=आरटीओ nis:value=आरटीओ nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=बस_ओवरलोडिंग nis:value=बस_ओवरलोडिंग nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=बस_दुर्घटना nis:value=बस_दुर्घटना nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=सड़क_सुरक्षा nis:value=सड़क_सुरक्षा nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=प्रशासन nis:value=प्रशासन nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=जनता_का_सवाल nis:value=जनता_का_सवाल nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=जवाबदेही nis:value=जवाबदेही nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=chhatarpur nis:value=Chhatarpur nis:enabled=true nis:link/>
Jansampark Madhya Pradesh CM Madhya Pradesh PRO Jansampark Chattarpur Collector Office Chattarpur Jitu Patwari Umang Singhar Dr. Narottam Mishra Peptech Time - मध्यप्रदेश समाचार SP Chhatarpur Uday Sharma
*जमीन पर अवैध रेत उत्खनन का आरोप, विरोध करने पर जान से मारने की धमकी—ग्रामीणों ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की*

छतरपुर जिले के गौरिहार तहसील क्षेत्र के मवईघाट गांव से जमीन पर कथित अवैध रेत उत्खनन और धमकी का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने पुलिस को आवेदन देकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और अपनी कृषि भूमि से रेत उत्खनन रुकवाने की मांग की है।

मवईघाट गांव निवासी छोटेलाल पाल, कालीचरण पाल और रमेश पाल ने 30 सितंबर 2026 को पुलिस को दिए आवेदन में बताया कि उनकी पैतृक कृषि भूमि खसरा नंबर 48/8, 48/14/2, 48/3 और 48/16 में स्थित है। आवेदन के मुताबिक, उक्त भूमि पर वे लंबे समय से खेती करते आ रहे हैं और वर्तमान में भी कुछ हिस्से में ज्वार और अरहर की फसल बोई गई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि लालजी पटेल, देवीदयाल पटेल, श्रीविशाल पाल, लवकुश और दीपू शर्मा द्वारा उनकी भूमि से कथित तौर पर जबरन रेत निकाली जा रही है। विरोध करने पर गाली-गलौज करने और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।

आवेदन में यह भी बताया गया है कि रेत उत्खनन को लेकर पहले तहसीलदार गौरिहार के समक्ष शिकायत की गई थी। आवेदन के अनुसार, तहसीलदार द्वारा दस्तावेज और खसरा नक्शे का अवलोकन करने के बाद प्रार्थीगण के पक्ष में स्थगन आदेश भी जारी किया गया था।

इसके बावजूद, शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि 29 सितंबर 2026 से उनकी भूमि पर फिर से रेत उत्खनन शुरू कर दिया गया। मामले की सूचना चौकी पहरा और थाना गौरिहार में दिए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का भी आवेदन में उल्लेख है।
परिंदा पोस्ट PRO Jansampark Chattarpur Peptech Time - मध्यप्रदेश समाचार SP Chhatarpur Collector Office Chattarpur Jansampark Madhya Pradesh
<nis:link nis:type=tag nis:id=नेतृत्व nis:value=नेतृत्व nis:enabled=true nis:link/> कर्ता जेल की सलाखों के पीछे, <nis:link nis:type=tag nis:id=जमीन nis:value=जमीन nis:enabled=true nis:link/> पर फिर भी डटे विस्थापित: <nis:link nis:type=tag nis:id=अमित nis:value=अमित nis:enabled=true nis:link/> और <nis:link nis:type=tag nis:id=दिव्या nis:value=दिव्या nis:enabled=true nis:link/> की गिरफ्तारी के बाद 20वें दिन और प्रखर हुआ चिता आंदोलन
Journalist Mukesh Gautam 
<nis:link nis:type=tag nis:id=पन्ना। nis:value=पन्ना। nis:enabled=true nis:link/> मझगांव डैम परियोजना से बेदखल हुए विस्थापितों की हुंकार प्रशासनिक सख्ती के आगे झुकने को तैयार नहीं है। अपने वजूद, उचित मुआवजे और सम्मानजनक पुनर्वास की मांग को लेकर पिछले 19 दिनों से धधक रहा चिता आंदोलन मुख्य नेतृत्वकर्ता अमित भटनागर की गिरफ्तारी के बाद 20वें दिन और अधिक आक्रामक हो उठा है। उधर, जेल भेजे जाने के बावजूद अमित भटनागर का आमरण अनशन चौथे दिन भी जारी है। उन्होंने सलाखों के पीछे से ही संदेश दिया है कि विस्थापितों के हक की यह जंग अंतिम सांस तक जारी रहेगी।
<nis:link nis:type=tag nis:id=इधर nis:value=इधर nis:enabled=true nis:link/> आंदोलन स्थल पर डटे ग्रामीणों और महिलाओं के तेवर और तीखे हो चुके हैं। आंदोलनकारियों का दो-टूक कहना है कि किसी एक चेहरे को जेल में डालकर जनता के स्वाभिमान को कुचला नहीं जा सकता। आज हर विस्थापित अमित भटनागर बनकर सीना ताने खड़ा है और मातृशक्ति दिव्या अहिरवार के संघर्ष को आगे बढ़ाते हुए मोर्चे पर अडिग है। यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी से उजड़े सैकड़ों परिवारों के अधिकारों और भविष्य की है।
<nis:link nis:type=tag nis:id=आंदोलनकारियों nis:value=आंदोलनकारियों nis:enabled=true nis:link/> ने चेताया कि पुलिसिया दमन के बजाय शासन-प्रशासन प्रभावित परिवारों के घावों पर मरहम लगाए और घोषित मुआवजे का पूरा भुगतान, सर्वे से छूटे सभी पात्र परिवारों को न्याय तथा बुनियादी सुविधाओं से युक्त आदर्श पुनर्वास तुरंत सुनिश्चित करे। चिता की वेदी पर बैठे विस्थापितों का संकल्प अडिग है—जब तक कागजों पर नहीं, जमीन पर संपूर्ण न्याय नहीं उतरता, तब तक यह सत्याग्रह अनवरत जलता रहेगा।
Amit Bhatnagar Collector Office Panna PRO Panna
माननीय कलेक्टर महोदय आपसे निवेदन है कि भविष्य में घटने वाली बस दुर्घटनाओं से बचने हेतु यात्रियों को जीवनदान दे दिया जाए।

और समय रहते RTO मैडम को जगाया जाए और कहा जाए कि नियम विरुद्ध चलने वाली बसों पर निरंतर कार्यवाही की जाए ताकि छतरपुर और आस पड़ोस के यात्रियों की जानमाल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

क्योंकि आज के समय में भगवान मंदिर में नहीं AC ऑफिसों की कुर्सी पर बैठे हुए हैं। 

छतरपुर जिले के यात्री आपके सदैव आभारी रहेंगे।
Collector Office Chattarpur
*छतरपुर के विभिन्न विषयों को लेकर आईसना पत्रकार संगठन के द्वारा एक विशेष चर्चा की गई LIVE*
सुप्रीम कोर्ट के चालान सुझाव के बाद नेहा चौधरी ने रखे 7 सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने बकाया ट्रैफिक ई-चालानों की वसूली के लिए बिजली बिल से जोड़ने समेत कई उपायों पर विचार करने का सुझाव दिया। इसी संदर्भ में इस पोस्ट में नेहा चौधरी ने जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों, पुलिस और न्यायपालिका से जुड़े 7 सुझाव सामने रखे हैं।

28 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में बिजली बिल से बकाया ट्रैफिक चालान जोड़ने का सुझाव CJI सूर्यकांत ने नहीं, बल्कि जस्टिस जे.बी. पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ (जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन) की सुनवाई में आया था। कोर्ट ने इसे सुझाव के रूप में रखा था, लागू करने का आदेश नहीं दिया था। 

कोर्ट के सामने करीब ₹45,000 करोड़ के ई-चालान बकाया की जानकारी रखी गई थी, जिसमें लगभग ₹25,000 करोड़ की वसूली हो चुकी थी। कोर्ट ने बिजली बिल के अलावा वाहन रजिस्ट्रेशन/ट्रांसफर, फिटनेस, PUC और ड्राइविंग लाइसेंस जैसी सेवाओं पर रोक जैसे विकल्पों पर भी विचार करने को कहा। 

नोट: बिजली बिल से चालान जोड़ना फिलहाल कोर्ट का सुझाव था, कोई लागू आदेश नहीं। 

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छतरपुर पुलिस एवं ट्रैफिक वार्डन के सदस्यों द्वारा छतरपुर नगर में दो पहिया, चार पहिया, ई रिक्शा, बस चालकों एवं नागरिकों को यातायात नियमों के प्रति किया गया जागरूक*

छतरपुर पुलिस द्वारा सड़क सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से निरंतर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में पुलिसकर्मी एवं ट्रैफिक वार्डन के सदस्यों द्वारा छतरपुर नगर के विभिन्न प्रमुख मार्गों एवं चौराहों पर दो पहिया, चार पहिया, ई रिक्शा, बस चालकों, कंडक्टर एवं नागरिकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया गया।

इस दौरान ट्रैफिक वार्डन सदस्यों द्वारा वाहन चालकों को यातायात नियमों का पालन करने, निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाने, सड़क पर अनुशासन बनाए रखने तथा स्वयं एवं अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा का ध्यान रखने के संबंध में समझाइश दी गई। पम्पलेट वितरित किए गए।

- यातायात नियमों का पालन करें और सुरक्षित घर पहुंचें।
- दोपहिया वाहन चलाते समय अनिवार्य रूप से हेलमेट का प्रयोग करें।
- चारपहिया वाहन चलाते समय चालक सहित सभी यात्रियों द्वारा सीट बेल्ट का उपयोग किया जाए।
- वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग न करें।
- दोपहिया वाहन पर तीन सवारी न बैठाएं।
- चौराहों एवं प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक सिग्नल एवं यातायात संकेतों का पालन करें।
- नशे की स्थिति में वाहन न चलाएं।
- वाहन चलाते समय धैर्य एवं संयम बनाए रखें और अनावश्यक हॉर्न का प्रयोग न करें।
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*ब्राह्मण सर्वोच्च था और सर्वोपरि रहेगा*  🙏
Dr. Narottam Mishra
*पुलिस कर्मियों की ए के -47 धरी रह गई और आरोपियों को छुड़ा ले गए बदमाश*

पूरी खबर देखें कमेंट बॉक्स में...
<nis:link nis:type=tag nis:id=पन्ना nis:value=पन्ना nis:enabled=true nis:link/> जिले में प्रदर्शन कर रहे आदिवासियों के साथ पुलिस द्वारा कथित तौर पर बल प्रयोग किए जाने का मामला सामने आया है। 

<nis:link nis:type=tag nis:id=आदिवासियों nis:value=आदिवासियों nis:enabled=true nis:link/> के हक की लड़ाई लड़ने वाले नेता अमित भटनागर ने पीड़ित एक महिला का वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया है, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

वीडियो में महिला आरोप लगाती हुई नजर आ रही है कि इंद्रपाल आदिवासी को पुलिस दो दिन पहले अपने साथ ले गई थी। दिव्या अहिरवार के साथ भी कथित रूप से मारपीट की गई, जिससे उसके सिर, छाती और मुंह पर चोटें आई हैं।

आरोप है कि पुलिस इंद्रपाल को अपने साथ ले गई और उसके बाद से उसका पता नहीं चल रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उसे न्यायालय के समक्ष पेश कर जेल भेजे जाने के बजाय कथित तौर पर गायब कर दिया गया है।

चीता आंदोलन कर रहे सत्याग्रहियों के साथ इस तरह की कथित बर्बरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी के विरोध में अमित भटनागर ने गिरफ्तारी देने की बात कही है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। पुलिस और प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
Amit Bhatnagar Collector Office Panna Jansampark Madhya Pradesh
यह आदमी अभी जेल में है आरोप है कि आत्महत्या करने का प्रयास कर रहा था।

आरोप पुलिस के साथ मार पीट की पुलिस के हाथ में काटा।

अब बेचारी पुलिस क्या करती इसकी फरियाद सुनते सुनते थक गई क्योंकि 19 माह में चोर तो ढूंढ नहीं पाई ।

और आरोपों के अनुसार टी.आई. ने माल हजम नहीं किया क्योंकि आईटीआई पर सागर जिले में भी इसी तरीके का आरोप लगा था और पेपर की सुर्खियां बनी थी इसलिए बेचारी पुलिस पिट रही है हां पीटने वाले पर भी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करके जेल भेज दिया।

इस पूरे मामले की छानबीन और चोरों को पकड़ने का काम देश की आर्मी या अन्य एजेंसियों को ही करना पड़ेगा।

जोरदार अभिनंदन करिए हमारे छतरपुर जिले की पुलिस का 
CM Madhya Pradesh Home Department of Madhya Pradesh Jitu Patwari Rahul Gandhi
छतरपुर में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस का हल्ला बोल। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध दर्ज कराया। देखिए प्रदर्शन की तस्वीरें।
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*सोने की चोरी से शुरू हुआ विवाद, पुलिस कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल*

<nis:link nis:type=tag nis:id=फरियादी nis:value=फरियादी nis:enabled=true nis:link/> के लगातार वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद चोरी का खुलासा नहीं; पुलिस पर गंभीर आरोप, अब मारपीट, एफआईआर और फरियादी की सुरक्षा को लेकर भी सवाल

<nis:link nis:type=tag nis:id=छतरपुर। nis:value=छतरपुर। nis:enabled=true nis:link/> प्रमोद तिवारी के लाखों रुपये कीमत के सोने की चोरी का मामला अब केवल चोरी के खुलासे तक सीमित नहीं रह गया है। लगातार वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत, थाना प्रभारी पर लगाए गए गंभीर आरोप, पुलिस और फरियादी के बीच हुआ विवाद, पुलिसकर्मियों के घायल होने की पुलिस की बात, फरियादी और उसकी पत्नी की ओर से लगाए गए मारपीट के आरोप तथा फरियादी द्वारा अपनी जान को खतरा होने की आशंका जताए जाने के बाद यह पूरा मामला अब पुलिस की कार्यप्रणाली और उसकी निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

फरियादी का दावा है कि <nis:link nis:type=tag nis:id=चोरी nis:value=चोरी nis:enabled=true nis:link/> के खुलासे और अपना चोरी गया माल बरामद कराने के लिए उसने थाना स्तर से लेकर <nis:link nis:type=tag nis:id=आईजी, nis:value=आईजी, nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=डीआईजी, nis:value=डीआईजी, nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=कमिश्नर, nis:value=कमिश्नर, nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=मुख्यमंत्री nis:value=मुख्यमंत्री nis:enabled=true nis:link/> और गृहमंत्री तक आवेदन दिए। मीडिया के माध्यम से भी उसने लगातार अपनी बात सामने रखी, लेकिन उसके अनुसार अभी तक चोरी का संतोषजनक खुलासा नहीं हो सका है।

<nis:link nis:type=tag nis:id=यह nis:value=यह nis:enabled=true nis:link/> सही है कि कई मामलों में चोरी का खुलासा काफी समय बाद होता है और पुलिस जांच में समय लग सकता है। लेकिन जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक लगातार वरिष्ठ अधिकारियों के सामने एक ही शिकायत लेकर पहुंचता रहे, तो उसकी शिकायत की स्थिति और उस पर हुई कार्रवाई को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना भी पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी बन जाती है।

****थाना प्रभारी पर गंभीर आरोप, जांच कौन करेगा?*****

फरियादी की ओर से थाना प्रभारी पर चोरी गए माल की कथित जब्ती और उस माल को हड़पने जैसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है और अंतिम सत्य जांच के बाद ही सामने आ सकता है।

***लेकिन सवाल बेहद महत्वपूर्ण है—***

जब आरोप स्वयं थाना प्रभारी पर लगे हों, तो उस थाना तंत्र के भीतर रहकर निष्पक्ष जांच किस प्रकार सुनिश्चित होगी?

क्या ऐसे मामले में किसी दूसरे थाने या स्वतंत्र वरिष्ठ अधिकारी को जांच सौंपी गई?

क्या आरोपों की जांच के दौरान थाना प्रभारी को जांच से अलग रखा गया?

क्या जब्ती और बरामदगी से संबंधित दस्तावेजों का स्वतंत्र सत्यापन कराया गया?

और सबसे महत्वपूर्ण—फरियादी द्वारा लगाए गए आरोपों पर जांच का निष्कर्ष क्या है?

<nis:link nis:type=tag nis:id=#नवागत nis:value=#नवागत nis:enabled=true nis:link/> आईजी से न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचा था फरियादी?<nis:link nis:type=tag nis:id=## nis:value=## nis:enabled=true nis:link/>

बताया जा रहा है कि नवागत आईजी की छवि एक न्यायप्रिय अधिकारी के रूप में बनी है। संभवतः इसी उम्मीद के साथ प्रमोद तिवारी अपनी शिकायत लेकर आईजी से मिलने पहुंचा।

लेकिन इसके बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया।

जानकारी के अनुसार फरियादी और पुलिस के बीच विवाद हुआ और उसके साथ मारपीट किए जाने के आरोप सामने आए। फरियादी की पत्नी ने भी आरोप लगाया कि उसके साथ पुरुष पुलिसकर्मियों ने मारपीट की।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

लेकिन यदि पुलिसकर्मियों पर मारपीट के आरोप लगाकर लिखित शिकायत दी गई है तो जनता यह जानना चाहेगी कि—

क्या उस शिकायत पर एफआईआर दर्ज हुई?

यदि नहीं, तो क्यों नहीं?

क्या मामले की स्वतंत्र जांच कराई गई?

क्या फरियादी और उसकी पत्नी का मेडिकल परीक्षण कराया गया?

इन सवालों का जवाब भी उतनी ही स्पष्टता से सामने आना चाहिए, जितनी स्पष्टता से पुलिस ने फरियादी के विरुद्ध दर्ज मामले की जानकारी सार्वजनिक की है।

**पुलिस का पक्ष भी सामने आया**

दूसरी ओर, छतरपुर एसपी की ओर से जारी बयान में बताया गया कि फरियादी पुलिस पर अनावश्यक दबाव बनाने का प्रयास कर रहा था और घटनाक्रम के दौरान उसने कुछ पुलिसकर्मियों को घायल किया। इसी आधार पर उसके विरुद्ध संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किए जाने की बात कही गई है।

यदि पुलिस का यह पक्ष सही है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होना स्वाभाविक है।

लेकिन इसी के साथ यह भी जरूरी है कि फरियादी और उसकी पत्नी द्वारा लगाए गए पुलिस पर मारपीट के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच हो।

कानून सभी के लिए समान होना चाहिए—चाहे आरोप पुलिसकर्मी पर हों या आम नागरिक पर।

आखिर प्रमोद तिवारी बार-बार थाना प्रभारी का नाम क्यों ले रहा है?

****यह पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है।****

यदि प्रमोद तिवारी की शिकायत निराधार है, तो जांच के बाद उसे स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि उसके आरोप तथ्यहीन क्यों हैं। जिसको लेकर आज के पूर्व आधिकारिक बयान जारी नहीं हुए।

लेकिन यदि उसकी शिकायत में प्रथम दृष्टया कोई तथ्य सामने आता है, तो उसकी स्वतंत्र जांच क्यों नहीं कराई जाए?

आखिर ऐसा क्या है कि एक व्यक्ति वर्षों से अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने का दावा कर रहा है?

क्यों वह लगातार थाना प्रभारी का नाम ले रहा है?

क्या उसकी मूल शिकायत की जांच पूरी हुई?

क्या उसे लिखित रूप में जांच का निष्कर्ष दिया गया?

क्या चोरी गए माल की बरामदगी और जब्ती के संबंध में उसे स्पष्ट जानकारी दी गई?

इन सवालों का जवाब इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकता है।

***थाना प्रभारी की पूर्व <nis:link nis:type=tag nis:id=पृष्ठभूमि nis:value=पृष्ठभूमि nis:enabled=true nis:link/> की भी हो निष्पक्ष जांच***

फरियादी की ओर से यह भी दावा किया जा रहा है कि संबंधित थाना प्रभारी पर पूर्व में <nis:link nis:type=tag nis:id=सागर nis:value=सागर nis:enabled=true nis:link/> में भी आरोप लग चुके हैं और विभागीय कार्रवाई की बात सामने आई थी।

यदि यह दावा रिकॉर्ड में उपलब्ध है, तो इसकी आधिकारिक पुष्टि होना आवश्यक है।

क्या वास्तव में पूर्व में शिकायत हुई थी?

क्या विभागीय जांच हुई थी?

यदि हुई थी तो उसका परिणाम क्या रहा?

क्या कोई विभागीय कार्रवाई की गई?

इन सवालों को वर्तमान मामले की जांच से अलग नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यदि किसी अधिकारी के विरुद्ध पूर्व में भी गंभीर शिकायतों का आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद है, तो उसकी पृष्ठभूमि की समीक्षा जांच की निष्पक्षता के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

हालांकि केवल पूर्व शिकायत होना किसी अधिकारी को दोषी सिद्ध नहीं करता। दोष सिद्धि केवल सक्षम जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकती है।

***सबसे गंभीर पहलू—फरियादी ने अपनी जान को खतरा बताया***

इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू प्रमोद तिवारी द्वारा कथित रूप से अपनी सुरक्षा को लेकर जताई गई आशंका है।

बताया जा रहा है कि अस्पताल आने-जाने के दौरान वह समय-समय पर यह कहता रहा कि उसे अपनी जान का खतरा है और उसका एनकाउंटर हो सकता है।

यदि किसी नागरिक ने पुलिस या प्रशासन के सामने ऐसी आशंका व्यक्त की है, तो इसे केवल बयान मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

<nis:link nis:type=tag nis:id=प्रशासन nis:value=प्रशासन nis:enabled=true nis:link/> को यह स्पष्ट करना चाहिए कि—

क्या प्रमोद तिवारी ने लिखित रूप में अपनी सुरक्षा को लेकर शिकायत की थी?

यदि की थी तो उस पर क्या कार्रवाई हुई?

क्या उसकी सुरक्षा को लेकर कोई खतरा आंका गया?

क्या उसकी शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में थी?

यह विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बाद में यदि कोई अप्रिय घटना होती है तो पहले से जताई गई सुरक्षा संबंधी शिकायतों की जिम्मेदारी और कार्रवाई पर भी सवाल उठ सकते हैं।

क्या जनता के मन में डर पैदा हो रहा है?

आज इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सबसे बड़ी चिंता यही है कि क्या आम नागरिक के मन में यह धारणा बन रही है कि पुलिस व्यवस्था के खिलाफ बार-बार शिकायत करना उसके लिए परेशानी का कारण बन सकता है?

यदि ऐसा माहौल बन रहा है तो यह किसी भी पुलिस व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

एक नागरिक को यह विश्वास होना चाहिए कि—

वह पुलिस के खिलाफ भी शिकायत कर सकता है।

उसकी शिकायत सुनी जाएगी।

जांच निष्पक्ष होगी।

और यदि उसकी शिकायत गलत है तो उसे भी कानून के अनुसार कारण सहित बताया जाएगा।

छतरपुर पुलिस की छवि भी दांव पर

इस मामले में अब केवल प्रमोद तिवारी और पुलिस के बीच विवाद नहीं है।

इस मामले में छतरपुर पुलिस की सार्वजनिक छवि भी दांव पर है।

पूर्व में छतरपुर पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर जनता के बीच संतोषजनक धारणा नहीं होने की चर्चाएं रही हैं। ऐसे में वर्तमान प्रकरण पुलिस प्रशासन के लिए अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता दिखाने का अवसर भी है।

यदि पुलिस सही है, तो स्वतंत्र जांच से पुलिस की स्थिति और मजबूत होगी।

यदि फरियादी के आरोप गलत हैं, तो जांच से यह तथ्य सामने आएगा।

और यदि पुलिस के किसी अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो कार्रवाई से जनता का विश्वास और मजबूत होगा।

निष्पक्ष जांच पुलिस के खिलाफ नहीं होती—निष्पक्ष जांच पुलिस की विश्वसनीयता को मजबूत करती है।

अब वरिष्ठ अधिकारियों को क्या करना चाहिए?

इस मामले में सबसे बेहतर रास्ता यही दिखाई देता है कि आरोप-प्रत्यारोप के बीच किसी एक पक्ष को सही या गलत घोषित करने के बजाय एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच टीम गठित की जाए।

जांच में निम्न बिंदुओं को शामिल किया जाए—

1. चोरी की मूल घटना और उसकी जांच।
2. चोरी गए माल का विवरण और अनुमानित कीमत।
3. कथित बरामदगी और जब्ती का पूरा रिकॉर्ड।
4. थाना प्रभारी पर लगाए गए आरोप।
5. फरियादी और उसकी पत्नी द्वारा लगाए गए मारपीट के आरोप।
6. पुलिसकर्मियों के घायल होने से संबंधित मेडिकल और अन्य साक्ष्य।
7. घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज और उपलब्ध अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य।
8. फरियादी द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को दिए गए सभी आवेदनों की समीक्षा।
9. थाना प्रभारी के विरुद्ध पूर्व में हुई शिकायतों/विभागीय कार्रवाई के आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच।
10. फरियादी द्वारा जताई गई सुरक्षा संबंधी आशंका और उस पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई।

और यदि आवश्यक हो तो इस जांच की निगरानी किसी स्वतंत्र वरिष्ठ अधिकारी अथवा सक्षम न्यायिक प्राधिकारी की निगरानी में कराई जाए।

अब जनता सिर्फ बयान नहीं, परिणाम चाहती है

इस पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह नहीं है कि किसने किस पर क्या आरोप लगाया।

महत्वपूर्ण यह है कि सच क्या है?

क्या प्रमोद तिवारी की चोरी का वास्तव में खुलासा हुआ?

क्या चोरी गया माल बरामद हुआ?

क्या जब्ती की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी?

क्या थाना प्रभारी पर लगाए गए आरोप निराधार हैं या उनमें कोई तथ्य है?

क्या पुलिसकर्मियों पर लगाए गए मारपीट के आरोपों की निष्पक्ष जांच हुई?

क्या फरियादी की पत्नी की शिकायत पर कार्रवाई हुई?

और सबसे महत्वपूर्ण—

क्या एक नागरिक को अपनी शिकायत लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक जाने के बाद सुरक्षा और न्याय का भरोसा मिला या नहीं?

इन सवालों का जवाब किसी बयान से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और उसके परिणाम से मिलना चाहिए।

क्योंकि अब सवाल सिर्फ प्रमोद तिवारी का नहीं है।

सवाल छतरपुर की पुलिस की विश्वसनीयता का है।

सवाल जनता के पुलिस पर भरोसे का है।

और इस मामले में होने वाली कार्रवाई ही यह तय करेगी कि आने वाले समय में छतरपुर की जनता पुलिस को किस नजर से देखेगी।

*आरोप किसी को दोषी नहीं बनाते और पुलिस की वर्दी किसी को जांच से ऊपर नहीं रखती।*

*सच सामने आना चाहिए—और निष्पक्ष तरीके से सामने आना चाहिए।*

CM Madhya Pradesh Jansampark Madhya Pradesh PRO Jansampark Chattarpur Collector Office Chattarpur BJP Madhya Pradesh SP Chhatarpur Jitu Patwari Umang Singhar Rahul Gandhi
*“लाठियां चल सकती हैं, हौसले नहीं तोड़े जा सकते।”*

<nis:link nis:type=tag nis:id=छतरपुर-पन्ना nis:value=छतरपुर-पन्ना nis:enabled=true nis:link/> में चिता आंदोलन के 16वें दिन शांतिपूर्ण सत्याग्रहियों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने आज से आमरण अनशन शुरू करने का ऐलान किया है।

<nis:link nis:type=tag nis:id=अमित nis:value=अमित nis:enabled=true nis:link/> भटनागर ने पुलिस कार्रवाई को “सत्ता प्रायोजित गुंडागर्दी” करार देते हुए कहा कि 16 दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से बैठे सत्याग्रहियों पर रात के समय भारी पुलिस बल भेजकर कार्रवाई करना लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी महिलाओं के साथ अभद्रता की गई और सत्याग्रहियों के साथ मारपीट की गई।

उन्होंने कहा, “क्या यही वह भारत है जहां अपने हक और न्याय की मांग करने वाले नागरिकों को लाठियों और दमन का सामना करना पड़े?”

प्रशासन को चुनौती देते हुए अमित भटनागर ने कहा कि वर्दी और ताकत के बल पर इस <nis:link nis:type=tag nis:id=आंदोलन nis:value=आंदोलन nis:enabled=true nis:link/> को दबाया नहीं जा सकता। आदिवासी अस्मिता, अधिकार और न्याय की लड़ाई संविधान के दायरे में जारी रहेगी।

उन्होंने घोषणा की कि <nis:link nis:type=tag nis:id=पुलिस nis:value=पुलिस nis:enabled=true nis:link/> कार्रवाई और प्रशासनिक मनमानी के विरोध में उनका आमरण अनशन तब तक जारी रहेगा, जब तक आदिवासियों को न्याय नहीं मिलता और कथित रूप से दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं होती।

*“जुल्म की लाठियां टूट सकती हैं, लेकिन हमारा सत्याग्रह नहीं टूटेगा।”*
<nis:link nis:type=tag nis:id=amitbhatnagar nis:value=AmitBhatnagar nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=छतरपुर_पन्ना nis:value=छतरपुर_पन्ना nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=आमरण_अनशन nis:value=आमरण_अनशन nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=चिता_आंदोलन nis:value=चिता_आंदोलन nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=आदिवासी_अधिकार nis:value=आदिवासी_अधिकार nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=सत्याग्रह nis:value=सत्याग्रह nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=न्याय nis:value=न्याय nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=संविधान nis:value=संविधान nis:enabled=true nis:link/> Amit Bhatnagar Collector Office Panna CM Madhya Pradesh Jansampark Madhya Pradesh Jitu Patwari Rahul Gandhi
मझगवां डैम विस्थापितों के आंदोलन में तनाव, कई प्रदर्शनकारियों के हिरासत में लिए जाने की खबर

पन्ना। मझगवां डैम परियोजना से प्रभावित क्षेत्र में उचित मुआवजे और न्यायसंगत पुनर्वास की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शन के दौरान मंगलवार को पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच तनाव की स्थिति सामने आई।

आंदोलनकारियों के अनुसार, पुलिस ने प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं दिव्या अहिरवार और हिसाबी राजपूत सहित कई ग्रामीणों को हिरासत में लिया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान हुए कथित बल प्रयोग में कुछ महिलाओं को चोटें भी आई हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।

उचित मुआवजे और पुनर्वास की मांग
प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि जब तक प्रशासन की ओर से पूर्ण मुआवजा और न्यायसंगत पुनर्वास सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक वे विस्थापन स्वीकार नहीं करेंगे। हिरासत और तनावपूर्ण माहौल के बावजूद आंदोलनकारियों ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें उठाते रहने की बात कही है।
आधिकारिक पक्ष का इंतजार

घटना के बाद क्षेत्र में पुलिस सतर्कता बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई है। हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या, कथित बल प्रयोग और घटना की परिस्थितियों को लेकर स्थानीय पुलिस एवं प्रशासन का विस्तृत आधिकारिक बयान अभी सामने आना बाकी है।
Amit Bhatnagar Collector Office Panna
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नौगांव युवती के अपहरण के वायरल वीडियो के मामले में क्या कुछ बोले एडिशनल एसपी आदित्य पटले 

देखिए तस्वीरें स्पेशल रिपोर्ट सिर्फ 
<nis:link nis:type=tag nis:id=chhatarpurnews nis:value=chhatarpurnews nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=highlightsシ゚ nis:value=highlightsシ゚ nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=nonfollowers nis:value=nonfollowers nis:enabled=true nis:link/>
*“नौ मौतों के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था! छतरपुर बस स्टैंड पर फिर ओवरलोडिंग का खेल”*

छतरपुर। जिले में नौ लोगों की मौत के बाद भी परिवहन व्यवस्था में सुधार होता नजर नहीं आ रहा है। छतरपुर बस स्टैंड पर बुंदेलखंड ट्रांसपोर्ट कंपनी की बस क्रमांक MP 16 ZC 9623 में क्षमता से अधिक माल लदा हुआ दिखाई दिया।

बस पर निर्धारित क्षमता से अधिक माल लादे जाने से यात्री सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नियमों के मुताबिक बसों में क्षमता से अधिक माल लादना दुर्घटना का बड़ा कारण बन सकता है। 

इसके बावजूद बस स्टैंड पर खुलेआम ओवरलोडिंग का यह मामला सामने आना परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाता है।

गौरतलब है कि जिले में हाल ही में हुए हादसे में नौ लोगों की जान जा चुकी है, इसके बाद भी अगर बसों में क्षमता से अधिक माल लादकर संचालन किया जा रहा है तो यह जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

अब देखना होगा कि परिवहन विभाग इस बस के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है और ओवरलोडिंग के इस खेल पर कब लगाम लगती है। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए बसों की नियमित जांच और नियमों का सख्ती से पालन कराया जाना बेहद जरूरी है।
Jansampark Madhya Pradesh  PRO Jansampark Chattarpur CM Madhya Pradesh  Jitu Patwari  Collector Office Chattarpur  SP Chhatarpur
*पटवारी संघ ने अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन* LIVE
छात्रावासों में भोजन व्यवस्था पर संकट, रसोइया और चौकीदारों के वेतन में कटौती से आक्रोश

छतरपुर। जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित छात्रावासों में कार्यरत रसोइयों और चौकीदारों के वेतन में कथित कटौती को लेकर कर्मचारियों और उनके परिजनों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, जिले के विभिन्न छात्रावासों में रसोइया और चौकीदार के पद पर कार्यरत कर्मचारियों को पूर्व में करीब 8,500 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाता था। आरोप है कि अब बिना कोई स्पष्ट कारण बताए उनके खातों में महज 5,000 रुपये ही जमा किए जा रहे हैं। वेतन में अचानक हुई इस कटौती से कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

इसी समस्या को लेकर सोमवार को बड़ी संख्या में महिलाएं जिला संयोजक, आदिम जाति कल्याण विभाग के कार्यालय पहुंचीं और अपनी मांगों को लेकर आवेदन सौंपा। महिलाओं का आरोप है कि वे अपनी समस्या लेकर अधिकारी से मुलाकात करना चाहती थीं, लेकिन जिला संयोजक कार्यालय में उपस्थित नहीं हुए।

अधिकारी के नहीं मिलने से महिलाओं में काफी नाराजगी देखी गई। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि रसोइयों और चौकीदारों को पूर्व की तरह पूरा वेतन दिया जाए और बिना जानकारी दिए वेतन में की गई कटौती का कारण स्पष्ट किया जाए।

कर्मचारियों का कहना है कि यदि जल्द ही उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे आगे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। वहीं, वेतन में कटौती के कारण छात्रावासों में भोजन व्यवस्था भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
Jansampark Madhya Pradesh CM Madhya Pradesh PRO Jansampark Chattarpur Collector Office Chattarpur BJP Madhya Pradesh Dileep Bjp Dileep Ahirwar Dr. Virendra Kumar Arvind Pateriya Puspendra Pratap Singh Umang Singhar Jitu Patwari
सागर: रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय में छात्रों को जबरन राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल किए जाने का आरोप!

बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालय के ‘सेवा संकल्प अभियान’ के दौरान छात्रों को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए एकत्रित किया गया। इसका विरोध करते हुए छात्रों ने अपनी लोकतांत्रिक मांग रखी कि वे विश्वविद्यालय में पढ़ने आते हैं, किसी राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नहीं।

आरोप है कि इस विरोध के बाद लोकतांत्रिक मांग का समर्थन कर रहे श्री अंशुल शर्मा सहित 6 छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज की गई।

यदि यह आरोप सही हैं, तो यह बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला है। छात्रों को अपनी बात रखने, सवाल पूछने और शांतिपूर्ण ढंग से असहमति व्यक्त करने के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।

पूरे घटनाक्रम के वीडियो फुटेज उपलब्ध होने की बात सामने आ रही है। इसलिए मांग है कि वीडियो फुटेज सहित सभी तथ्यों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए तथा वास्तविकता जनता के सामने लाई जाए।

विश्वविद्यालय शिक्षा और विचार-विमर्श के केंद्र हैं। उन्हें राजनीतिक दबाव का केंद्र नहीं बनने दिया जाना चाहिए।

मध्य प्रदेश के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री से आग्रह है कि मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें।
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PRO Jansampark Chattarpur
<nis:link nis:type=tag nis:id=पनवाड़ी nis:value=पनवाड़ी nis:enabled=true nis:link/> में कल्पना ट्रेवल्स बस सहित 2 बसों को जिला प्रशासन ने फिटनिस कमी को लेकर <nis:link nis:type=tag nis:id=सीज nis:value=सीज nis:enabled=true nis:link/> किया पुलिस ने पनवाड़ी थाना परिसर में खड़ी कीं!!
बोलेरो और ट्रक की जोरदार भिड़ंत, पांच लोगों की मौके पर मौत; एक घायल

छतरपुर। मातगवां थाना क्षेत्र में ईडी फे स्कूल के पास शनिवार को बोलेरो और ट्रक के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि बोलेरो सवार पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया।
घायल को उपचार के लिए जिला अस्पताल छतरपुर भेजा गया है। हादसे की सूचना मिलते ही एडिशनल एसपी आदित्य पटेल, एसडीओपी, थाना प्रभारी सहित पुलिस बल मौके पर पहुंच गया और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे में मृतक और घायल बिजावर के रैकवार समाज से बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि सभी लोग बिजावर से बगौता में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जा रहे थे।

पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। मृतकों की पहचान और हादसे के कारणों की आधिकारिक जानकारी पुलिस की जांच के बाद स्पष्ट हो सकेगी।
युवक ने ससुराल वालों के द्वारा गाली गलौज करने ,मारपीट करने एवं झूठे केस में फसाने की धमकी देने के संबंध में sp छतरपुर को आवेदन देकर कार्यवाही की मांग की।
*मातगुवा थाना अंतर्गत हुए सड़क हादसे में एडि. एस.पी. ने जारी किया बयान*