#नेतृत्व कर्ता जेल की सलाखों के पीछे, #जमीन पर फिर भी डटे विस्थापित: #अमित और #दिव्या की गिरफ्तारी के बाद 20वें दिन और प्रखर हुआ चिता आंदोलन
Journalist Mukesh Gautam
#पन्ना। मझगांव डैम परियोजना से बेदखल हुए विस्थापितों की हुंकार प्रशासनिक सख्ती के आगे झुकने को तैयार नहीं है। अपने वजूद, उचित मुआवजे और सम्मानजनक पुनर्वास की मांग को लेकर पिछले 19 दिनों से धधक रहा चिता आंदोलन मुख्य नेतृत्वकर्ता अमित भटनागर की गिरफ्तारी के बाद 20वें दिन और अधिक आक्रामक हो उठा है। उधर, जेल भेजे जाने के बावजूद अमित भटनागर का आमरण अनशन चौथे दिन भी जारी है। उन्होंने सलाखों के पीछे से ही संदेश दिया है कि विस्थापितों के हक की यह जंग अंतिम सांस तक जारी रहेगी।
#इधर आंदोलन स्थल पर डटे ग्रामीणों और महिलाओं के तेवर और तीखे हो चुके हैं। आंदोलनकारियों का दो-टूक कहना है कि किसी एक चेहरे को जेल में डालकर जनता के स्वाभिमान को कुचला नहीं जा सकता। आज हर विस्थापित अमित भटनागर बनकर सीना ताने खड़ा है और मातृशक्ति दिव्या अहिरवार के संघर्ष को आगे बढ़ाते हुए मोर्चे पर अडिग है। यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी से उजड़े सैकड़ों परिवारों के अधिकारों और भविष्य की है।
#आंदोलनकारियों ने चेताया कि पुलिसिया दमन के बजाय शासन-प्रशासन प्रभावित परिवारों के घावों पर मरहम लगाए और घोषित मुआवजे का पूरा भुगतान, सर्वे से छूटे सभी पात्र परिवारों को न्याय तथा बुनियादी सुविधाओं से युक्त आदर्श पुनर्वास तुरंत सुनिश्चित करे। चिता की वेदी पर बैठे विस्थापितों का संकल्प अडिग है—जब तक कागजों पर नहीं, जमीन पर संपूर्ण न्याय नहीं उतरता, तब तक यह सत्याग्रह अनवरत जलता रहेगा।
Amit Bhatnagar Collector Office Panna PRO Panna