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SA News Chhattisgarh

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क्रांति के मशाल थामने वाले वीर | SA News Chhattisgarh 

17-08-2026: भारत के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास उन वीरों के त्याग और साहस से भरा है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। ऐसे ही महान क्रांतिकारी थे मदन लाल ढींगरा, जिनका नाम भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में अदम्य साहस और राष्ट्रभक्ति के लिए सम्मान के साथ लिया जाता है। प्रत्येक वर्ष 17 अगस्त को उनके बलिदान दिवस पर देश उनके सर्वोच्च त्याग को श्रद्धापूर्वक याद करता है।

मदन लाल ढींगरा का जन्म 17 फरवरी 1883 को अमृतसर, पंजाब में एक समृद्ध परिवार में हुआ था। वर्ष 1906 में वे इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए। लंदन में रहते हुए उनका संपर्क भारतीय राष्ट्रवादी विचारों से हुआ और वे विनायक दामोदर सावरकर तथा अन्य क्रांतिकारियों के संपर्क में आए। इसके बाद उनके विचारों में भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराने का संकल्प और अधिक दृढ़ हुआ।

1 जुलाई 1909 को लंदन में नेशनल इंडियन एसोसिएशन की एक बैठक के दौरान मदन लाल ढींगरा ने ब्रिटिश अधिकारी सर विलियम हट कर्जन वायली (Curzon Wyllie) की गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना के बाद उन्हें गिरफ्तार कर मुकदमा चलाया गया। उन्होंने अपने कृत्य की जिम्मेदारी स्वीकार की और ब्रिटिश अदालत से मिली मृत्युदंड की सजा का सामना दृढ़ता के साथ किया।

17 अगस्त 1909 को लंदन में उन्हें फांसी दे दी गई। उस समय उनकी आयु केवल 26 वर्ष थी। उनका बलिदान भारतीय युवाओं में देशभक्ति और स्वतंत्रता की भावना को प्रेरित करने वाली घटनाओं में गिना जाता है।

मदन लाल ढींगरा का जीवन हमें यह संदेश देता है कि स्वतंत्रता केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि असंख्य वीरों के त्याग, संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। आज उनके बलिदान दिवस पर हमें उनके साहस को नमन करते हुए देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रहित के प्रति अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाने का संकल्प लेना चाहिए।
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NTA ने UGC NET 2026 के तीन विषयों की परीक्षा रद्द की | SA News Chhattisgarh 

नई दिल्ली | 17-08-2026: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने यूजीसी-नेट (UGC NET) परीक्षा के तीन प्रमुख विषयों– अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के पेपर रद्द कर दिए हैं। प्रश्न पत्रों में सामने आई गंभीर खामियों को देखते हुए एजेंसी ने यह कदम उठाया है। अब इन तीनों विषयों की परीक्षा 9 और 10 सितंबर को दोबारा आयोजित की जाएगी।

जांच के दौरान इन विषयों के प्रश्न पत्रों में भारी तथ्यात्मक, टाइपिंग और अनुवाद संबंधी अशुद्धियां पाई गईं। इसके अलावा विद्वानों के नाम, पुस्तकों के शीर्षक, व्याकरण तथा लिंग-वचन से जुड़ी कई गलतियां भी सामने आईं। पुराने प्रश्नों के अत्यधिक दोहराव के कारण NTA ने इसे केवल उत्तर कुंजी (Answer Key) चुनौती के माध्यम से सुधारने योग्य नहीं माना और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया।

जारी शेड्यूल के अनुसार, 9 सितंबर को पहली शिफ्ट (सुबह 9:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक) में अंग्रेजी और दूसरी शिफ्ट (दोपहर 3:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक) में कॉमर्स की परीक्षा होगी। वहीं 10 सितंबर को पहली शिफ्ट में समाजशास्त्र विषय की परीक्षा आयोजित की जाएगी।

इस पुनर्परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। नए परीक्षा केंद्रों और एडमिट कार्ड की जानकारी जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी जाएगी। वहीं शेष 84 विषयों के परिणाम तय समय पर ही घोषित होंगे, जिससे जेआरएफ और असिस्टेंट प्रोफेसर की चयन प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

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संत रामपाल जी महाराज ने सबसे ज्यादा पाखंड छुड़वाया है! | Dhanana | SA News Chhattisgarh
धर्मेन्द्र हुड्डा को जवाब | गाँव धनाना के लोगों ने क्या कहा? | SA News Chhattisgarh

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धर्मेन्द्र हुड्डा को माफी माँगनी चाहिए | गाँव धनाना का समर्थन | SA News Chhattisgarh

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मूक प्राणियों का संरक्षण | SA News Chhattisgarh 

राजस्थान | 16-08-2026: मानवीय संवेदना की एक अत्यंत अभूतपूर्व मिसाल राजस्थान के झुंझुनू में देखने को मिली है! प्राणिमात्र के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से, जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के पावन सानिध्य में एक युगांतरकारी प्रकल्प धरातल पर उतारा गया है।

बिना किसी सरकारी सहायता के, गुरुदेव के ऐतिहासिक मार्गदर्शन में ग्राम कालोटा की गौशाला में बेजुबान गौवंश की भूख मिटाने हेतु 420 क्विंटल पौष्टिक चारे की विशाल खेप पहुंचाई गई है। संकट के समय में की गई यह आहार आपूर्ति हजारों मूक पशुओं के लिए एक नई संजीवनी साबित हुई है।

संत रामपाल जी महाराज जी का विजन केवल मानव समाज के उत्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि सृष्टि के हर असहाय जीव की रक्षा करना उनके युगबोध का मुख्य हिस्सा है। गुरुदेव की इस अद्वितीय जीव दया और यथार्थवादी पहल की चहुंओर प्रशंसा हो रही है। समाज सुधार की यह महाक्रांति सचमुच वंदनीय है। 

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धर्मेन्द्र हुड्डा पर गाँव धनाना की राय | Sant Rampal Ji Maharaj | SA News Chhattisgarh
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एमेतरा में स्वतंत्रता दिवस समारोह 2026 | छात्रों का जोश, परेड में शानदार प्रदर्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रम

परेड में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों से बातचीत की गई, जिन्होंने अपनी उपलब्धि पर खुशी जाहिर की। वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रथम और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों एवं उनके शिक्षकों से भी बातचीत की गई। शिक्षकों ने अपने विद्यार्थियों की उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया।

समारोह के दौरान सांसद विजय बघेल ने NEET पेपर लीक मामले समेत विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी।

देशभक्ति से सराबोर इस पूरे आयोजन में छात्रों की प्रतिभा, अनुशासन और उत्साह ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।

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गाँव धनाना के सरपंच ने क्या कहा! | Dharmendra Hooda | SA News Chhattisgarh
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देहदान की अद्भुत पहल!
संत रामपाल जी महाराज के तत्वज्ञान से फैल रही जागरूकता!
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गौशाला का कायाकल्प | SA News Chhattisgarh 

हरियाणा | 15-08-2026: आज के स्वार्थी दौर में मूक प्राणियों के प्रति करुणा और मानवीय संवेदना की एक अत्यंत अभूतपूर्व मिसाल हिसार में देखने को मिली है! प्राणिमात्र के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से, जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के पावन सानिध्य में 'गौ सुरक्षा अभियान' के तहत एक युगांतरकारी कदम उठाया गया है। 

बिना किसी सरकारी सहायता के, गुरुदेव के ऐतिहासिक मार्गदर्शन में खासा महाजन स्थित 'श्री राधा कृष्ण गौशाला धर्मनगरी' में बेजुबान गौवंश की सेवा और चारा व्यवस्था की अवसंरचना को सुदृढ़ करने हेतु एक अत्याधुनिक 'स्वराज 855 FE’ ट्रैक्टर भेंट किया गया है। यह सौगात गौशाला के बुनियादी ढांचे को अत्यंत मजबूत करेगी। 

संत रामपाल जी महाराज जी का विजन केवल मानव समाज के उत्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि सृष्टि के हर असहाय जीव की रक्षा करना उनके युगबोध का मुख्य हिस्सा है। गुरुदेव की इस अद्वितीय जीव दया और यथार्थवादी पहल की चहुंओर प्रशंसा हो रही है। समाज सुधार की यह महाक्रांति सचमुच वंदनीय है। 

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मरणोपरांत देहदान कर स्व. विशंभर साहू जी ने पेश की मानवता की मिसाल

बालोद जिले के गुरूर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम डधारी से समाजसेवा और मानवता की एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है।

तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के शिष्य स्व. विशंभर साहू जी ने जीवित रहते मरणोपरांत देहदान का संकल्प लिया था। 12 अगस्त 2026 को उनके निधन के बाद उनके पुत्र हरख राम साहू और परिवार ने उनके संकल्प को पूरा करते हुए पार्थिव शरीर को चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज, राजनांदगांव की टीम को सौंप दिया।

परिजनों का कहना है कि देहदान के माध्यम से मृत्यु के बाद भी शरीर चिकित्सा शिक्षा और शोध के काम आ सकता है।

परिवार के इस निर्णय की क्षेत्र में सराहना हो रही है और इसे समाज में देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है।

🎥 देखिए पूरी Ground Report और जानिए परिवार ने क्यों लिया देहदान का फैसला।

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गौसेवा की नवक्रांति | SA News Chhattisgarh 

हरियाणा | 15-08-2026: स्वार्थ के इस दौर में मूक प्राणियों के प्रति करुणा और मानवीय संवेदना की एक अत्यंत अभूतपूर्व मिसाल रोहतक में देखने को मिलने वाली है! प्राणिमात्र के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से, जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के पावन सानिध्य में 'गौ सुरक्षा अभियान' के तहत एक युगांतरकारी कदम उठाया जा रहा है।

बिना किसी सरकारी सहायता के, गुरुदेव के ऐतिहासिक मार्गदर्शन में खरक बेंसी गूगाहेड़ी (महम चौबीसी) स्थित 'अखिल भारतीय महर्षि दयानन्द गौशाला' में बेजुबान गौवंश की सेवा और चारा व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु एक अत्याधुनिक 'जॉन डियर' ट्रैक्टर भेंट किया जाएगा। यह सौगात गौशाला के बुनियादी ढांचे को अत्यंत मजबूत करेगी। 

संत रामपाल जी महाराज जी का विजन केवल मानव समाज के उत्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि सृष्टि के हर असहाय जीव की रक्षा करना उनके युगबोध का मुख्य हिस्सा है। गुरुदेव की इस अद्वितीय जीव दया और यथार्थवादी पहल की चहुंओर प्रशंसा हो रही है। समाज सुधार की यह महाक्रांति सचमुच वंदनीय है। 

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🇮🇳 15 अगस्त स्पेशल — एक सवाल जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया

15 अगस्त की सुबह आरव, रिया और समीर तिरंगे के पास खड़े होकर देश की आज़ादी की बात कर रहे थे।

तभी पीछे खड़े कबीर ने एक सवाल पूछा—

“देश आज़ाद हुआ था… लेकिन हम नहीं?”

आखिर कबीर का मतलब क्या था?

क्या आज़ादी सिर्फ देश की सीमाओं तक है या इसके मायने कुछ और भी हैं?

🎬 देखिए “आखिर हम आज़ाद कब होंगे?” का पहला Scene.

अगले Scene में कहानी और भी दिलचस्प होने वाली है।

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अंग्रेजों से आज़ादी मिल गई… लेकिन क्या हम सच में आज़ाद हैं?

क्या नशे से आज़ादी मिली?
क्या दहेज से आज़ादी मिली?
क्या भ्रष्टाचार से आज़ादी मिली?

आज़ादी सिर्फ जश्न मनाने का नाम नहीं…
आज़ादी जिम्मेदारी का नाम भी है।

इस 15 अगस्त खुद से एक सवाल जरूर पूछिए—
हमारे देश को अब किस बुराई से आज़ादी चाहिए? 

👇 अपनी राय COMMENT में बताइए।

15 August | 15 August Status | Status | 15 August Viral | Parade | New Video 15 August | Independence Day | Bhashan | India 

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80 वाँ  स्वतंत्रता दिवस | SA News Chhattisgarh 

15-08-2026: भारत एक ऐसा देश है जहां सैकड़ों वर्षों से विभिन्न धर्मों, जातियों, भाषाओं और सांस्कृतिक विविधताओं के लोग एक साथ coexist करते आए हैं। इस देश ने लंबे समय से औपनिवेशिक शासन की चुनौतियों का सामना किया, जिसमें अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने संघर्ष और बलिदानों के माध्यम से स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी। 

भारत का इतिहास समृद्धि और सांस्कृतिक वैभव से भरा हुआ है, जिस कारण इसे ‘सोने की चिड़िया’ के नाम से भी जाना गया। इसकी इस समृद्धि ने विश्व के विभिन्न हिस्सों से व्यापारियों को आकर्षित किया। इसके विपरीत, इसी समृद्धि के चलते भारत को अनेक बार विदेशी आक्रमणों और लूटपाट का भी सामना करना पड़ा।

15 अगस्त 1947 को भारत ने ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त की। देश इस वर्ष 2026 में अपने 80वें स्वतंत्रता दिवस का उत्सव मनाएगा। आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में शुरू किया गया 
17वीं शताब्दी में यूरोपीय औपनिवेशिक शक्तियों का भारत में आगमन शुरु हो गया था। 

18वीं शताब्दी के अंत तक ईस्ट इंडिया कम्पनी ने भारत में अपने पैर पूरी तरह पसार लिए थे। 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बाद भारत सरकार अधिनियम 1858 के अनुसार भारत पर सीधा आधिपत्य ब्रितानी ताज अर्थात ब्रिटेन की राजशाही का हो गया। सन 1857 की क्रांति इसी अंसतोष और अंग्रेजों की दमनकारी नीति का परिणाम थी।

इसी कड़ी में अनेकों आंदोलन हुए। महात्मा गांधी ने एक ओर जहां अहिंसा का मार्ग अपनाया। वहीं दूसरी ओर भगत सिंह, चन्द्र शेखर आजाद, खुदीराम बोस जैसे क्रांतिकारी युवाओं ने उग्र नीति रखी। भारत माता के प्रेम में अनेकों वीर जवान फाँसी पर चढ़े। फिर सन 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गठन किया गया।

भारत 15 अगस्त 1947 को आज़ाद हुआ। लेकिन इसी के साथ भारत दो टुकड़ों में बंट गया, जिसका एक हिस्सा पाकिस्तान और एक भारत कहलाया। प्रत्येक वर्ष इस स्वन्त्रता दिवस (Independence Day) को पूरे भारत में निष्ठा और उत्साह के साथ मनाया जाता है एवं शहीदों और भारत की आज़ादी में योगदान देने वालों को भावविभोर होकर याद किया जाता है।

देश को आज़ाद करने की धुन में जान दांव पर लगाकर इस मुहिम में कूद पड़े। कई लोगों, नेताओं, क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों की आहुति दी। निश्चित ही वे योद्धा सम्मान के पात्र हैं जो जनमानस में अविस्मरणीय रहेंगे।

भारत की आज़ादी तो हम सभी ने प्राप्त कर ली, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हम अभी भी आज़ाद नहीं हुए। जी हाँ, हम अभी भी आज़ाद नहीं हुए और हम अभी भी एक ऐसी जेल में हैं, जहाँ से बचकर निकलना बहुत मुश्किल है, वो जेल है काल भगवान की जेल। आजादी का मतलब केवल विदेशी शासन से छूट पाना नहीं है।

संत रामपाल जी महाराज की शिक्षाओं के अनुसार, वास्तविक स्वतंत्रता केवल सांसारिक बंधनों से मुक्ति नहीं, बल्कि आत्मा को जन्म-मरण के चक्र से मुक्त कर मोक्ष प्राप्त करना है। उनके अनुसार शास्त्रानुकूल सतभक्ति और तत्वज्ञान के माध्यम से मनुष्य अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझ सकता है।

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भारत एक ऐसा देश है जहां सैकड़ों वर्षों से विभिन्न धर्मों, जातियों, भाषाओं और सांस्कृतिक विविधताओं के लोग एक साथ coexist करते आए हैं। इस देश ने लंबे समय से औपनिवेशिक शासन की चुनौतियों का सामना किया, जिसमें अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने संघर्ष और बलिदानों के माध्यम से स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी। 

15 अगस्त 1947 को भारत ने ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त की। देश इस वर्ष 2026 में अपने 80वें स्वतंत्रता दिवस का उत्सव मनाएगा। आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में शुरू किया गया।

17वीं शताब्दी में यूरोपीय औपनिवेशिक शक्तियों का भारत में आगमन शुरु हो गया था।इसी कड़ी में अनेकों आंदोलन हुए। महात्मा गांधी ने एक ओर जहां अहिंसा का मार्ग अपनाया। वहीं दूसरी ओर भगत सिंह, चन्द्र शेखर आजाद, खुदीराम बोस जैसे क्रांतिकारी युवाओं ने उग्र नीति रखी। भारत माता के प्रेम में अनेकों वीर जवान फाँसी पर चढ़े। फिर सन 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गठन किया गया।

भारत 15 अगस्त 1947 को आज़ाद हुआ। लेकिन इसी के साथ भारत दो टुकड़ों में बंट गया, जिसका एक हिस्सा पाकिस्तान और एक भारत कहलाया। प्रत्येक वर्ष इस स्वन्त्रता दिवस (Independence Day) को पूरे भारत में निष्ठा और उत्साह के साथ मनाया जाता है एवं शहीदों और भारत की आज़ादी में योगदान देने वालों को भावविभोर होकर याद किया जाता है। 

देश को आज़ाद करने की धुन में जान दांव पर लगाकर इस मुहिम में कूद पड़े। कई लोगों, नेताओं, क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों की आहुति दी। निश्चित ही वे योद्धा सम्मान के पात्र हैं जो जनमानस में अविस्मरणीय रहेंगे।

भारत की आज़ादी तो हम सभी ने प्राप्त कर ली, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हम अभी भी आज़ाद नहीं हुए। जी हाँ, हम अभी भी आज़ाद नहीं हुए और हम अभी भी एक ऐसी जेल में हैं, जहाँ से बचकर निकलना बहुत मुश्किल है, वो जेल है काल भगवान की जेल। आजादी का मतलब केवल विदेशी शासन से छूट पाना नहीं है।

संत रामपाल जी महाराज की शिक्षाओं के अनुसार, वास्तविक स्वतंत्रता केवल सांसारिक बंधनों से मुक्ति नहीं, बल्कि आत्मा को जन्म-मरण के चक्र से मुक्त कर मोक्ष प्राप्त करना है। उनके अनुसार शास्त्रानुकूल सतभक्ति और तत्वज्ञान के माध्यम से मनुष्य अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझ सकता है।
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स्वर्णिम भविष्य की सशक्त नींव | SA News Chhattisgarh 

मध्यप्रदेश | 14-08-2026: आज का युवा वर्ग जहाँ एक ओर समाज में सकारात्मक बदलाव और यथार्थवादी कार्यों की तलाश में है, वहीं शिक्षा व परोपकार के क्षेत्र में एक ऐसी ही जमीनी हकीकत आकार ले रही है। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के पावन मार्गदर्शन में संचालित 'अन्नपूर्णा मुहिम' ने अब केवल भोजन तक सीमित न रहकर, भावी पीढ़ी के बौद्धिक उत्कर्ष का बीड़ा उठाया है। इसी कड़ी में जिले के जामठी स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए एक उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण तैयार करने हेतु व्यापक नवनिर्माण की शुरुआत की गई है, जो आधुनिक समाज के लिए एक बड़ा सरोकार है।

जमीनी स्तर पर शिक्षा के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के इस संकल्प के तहत, विद्यालय परिसर में 20×20 फीट के 5 हवादार और सर्वसुविधायुक्त कमरों का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही, विद्यार्थियों की सहूलियत के लिए 10 फीट चौड़ा बरामदा, बालक-बालिकाओं के लिए पृथक स्वच्छ शौचालय और परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु 1100 फीट लंबी मजबूत बाउंड्री वॉल का निर्माण प्रस्तावित है। यह पहल स्पष्ट करती है कि सशक्त समाज की नींव केवल किताबी ज्ञान से नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और उन्नत वातावरण से रखी जाती है। इस निस्वार्थ सेवा ने समूचे क्षेत्र में एक नई सामाजिक चेतना को जन्म दिया है।

संत रामपाल जी महाराज जी का युगबोध केवल आध्यात्मिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण सामाजिक कायांतरण का शंखनाद है। आज की पीढ़ी को सबसे अधिक खोखला करने वाली बुराइयों पर कड़ा प्रहार करते हुए, गुरुदेव के निर्देशन में अनेक यथार्थवादी महाभियान चलाए जा रहे हैं। इनमें युवाओं को डिप्रेशन और नशे के गर्त से निकालने हेतु 'नशामुक्ति अभियान', आर्थिक बोझ व दिखावे को खत्म करने वाला 'दहेज मुक्त विवाह' (रमैनी), महिलाओं के सम्मान में 'कन्या भ्रूण हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध', 'रक्तदान महादान' और बेजुबानों के प्रति संवेदनशीलता जगाने वाला 'गौ रक्षा अभियान' प्रमुख रूप से शामिल हैं। बिना किसी सरकारी तंत्र पर निर्भर हुए, स्व-प्रेरणा से चल रही यह महाक्रांति आज के युवाओं के लिए 'सिस्टम चेंज' का सबसे बड़ा और जीवंत उदाहरण बन चुकी है। <nis:link nis:type=tag nis:id=santrampaljimaharaj nis:value=SantRampalJiMaharaj nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=betul nis:value=Betul nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=annapurnamuhim nis:value=AnnapurnaMuhim nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=education nis:value=Education nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=socialreform nis:value=SocialReform nis:enabled=true nis:link/> SANewsChhattisgarh
🚆 काउंटर टिकट कैंसिल कराने के लिए क्या आपको भी रेलवे स्टेशन की लाइन में लगना पड़ता है?

अगर आपने PRS काउंटर से टिकट बुक किया है, तो टिकट कैंसिलेशन से जुड़ी कुछ जरूरी बातें जानना आपके लिए बेहद काम की हो सकती हैं। 📱

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मन चंगा तो कठौती में गंगा | SA News Chhattisgarh 

14-08-2026: एक बार की बात है, संत शिरोमणि रविदास जी जूते बनाने का अपना नित्य कर्म कर रहे थे। तभी उनका एक मित्र वहां आए और बोले कि पूरा नगर गंगा स्नान को जा रहा है, तुम भी हमारे साथ चलो। इस पर रविदास जी ने मुस्कुराकर उत्तर दिया कि मेरी गंगा तो मेरी सच्ची भक्ति, सुमिरण और मेरे कर्म में ही समाहित है "मन चंगा तो कठौती में गंगा।" मित्रों के अधिक आग्रह करने पर उन्होंने एक सिक्का दिया और कहा कि यदि गंगा मैया स्वयं अपने हाथों से लें, तभी यह उन्हें अर्पित करना। मित्र ने घाट पर जाकर जब संत रविदास जी का नाम लेकर सिक्का देना चाहा, तो एक अद्भुत चमत्कार हुआ। जल से स्वयं मां गंगा का हाथ बाहर आया और उन्होंने सिक्का स्वीकार कर बदले में एक अनमोल स्वर्ण कंगन भेंट किया।

दुर्भाग्यवश, उस मित्र ने लालच में आकर वह स्वर्णिम कंगन राजा को सौंप दिया। राजा ने वह कंगन अपनी रानी को भेंट किया। कंगन की अद्वितीय सुंदरता देख रानी ने ठीक वैसे ही दूसरे कंगन की हठ कर दी। राजा ने तुरंत उस मित्र को बुलाकर दूसरा कंगन लाने का कड़ा आदेश दिया। भयभीत मित्र ने राजा को सच्चाई बता दी, किंतु राजा ने उसकी एक न सुनी और उसके पूरे परिवार को बंदी बना लिया। खौफजदा और लाचार मित्र भागकर संत रविदास जी की शरण में पहुंचा और अपनी भूल स्वीकार करते हुए क्षमा मांगी। तब रविदास जी ने चमड़ा भिगोने वाली अपनी सामान्य कठौती (बर्तन) की ओर इशारा करते हुए कहा कि इसमें ऐसे कई कंगन पड़े हैं, हाथ डाल और निकाल ले।

मित्र ने कांपते हाथों से कठौती के मैले जल में हाथ डाला और हूबहू वैसा ही एक और सोने का कंगन निकालकर राजा के दरबार में पेश कर दिया। जब राजा ने वह दूसरा कंगन रानी को दिया, तो रानी चकित रह गई। राजा ने संत रविदास जी और कठौती की पूरी महिमा बताई। रानी तुरंत समझ गई कि ये कोई साधारण इंसान नहीं, बल्कि कोई पहुंचे हुए पूर्ण महापुरुष हैं। रानी ने बिना देर किए संत रविदास जी की शरण ली, उनसे नाम उपदेश प्राप्त किया और सच्ची भक्ति में लीन हो गई।

इस अमर कथा का रहस्य यह है कि यदि इंसान का मन निर्मल हो और वह सतभक्ति में लीन हो, तो तीर्थ स्वयं उसके द्वार आते हैं। वर्तमान समय में ठीक ऐसी ही यथार्थ और सच्ची भक्ति संत रामपाल जी महाराज जी प्रदान कर रहे हैं, जिनसे नाम दीक्षा लेकर मनुष्य अपना पूर्ण आध्यात्मिक कल्याण करवा सकता है। <nis:link nis:type=tag nis:id=santravidasji nis:value=SantRavidasJi nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=truedevotion nis:value=TrueDevotion nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=spiritualknowledge nis:value=SpiritualKnowledge nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=sanewschhattisgarh nis:value=SANewsChhattisgarh nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=santrampaljimaharaj nis:value=SantRampalJiMaharaj nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=kabirgod nis:value=KabirGod nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=inspirationalstory nis:value=InspirationalStory nis:enabled=true nis:link/>
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निराश्रित बेजुबानों के रक्षक | SA News Chhattisgarh 

राजस्थान | 13-08-2026: आज के स्वार्थी युग में जहां बेजुबान पशु भूख और चारे के संकट से जूझ रहे हैं, वहीं इंसानियत और जीवदया की एक अद्भुत मिसाल पेश की गई है। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के पावन सानिध्य में चल रहे 'गौ सुरक्षा अभियान' के तहत राजस्थान के चूरू जिले (गांव झाड़सर कांधलान) की गौशाला में बेजुबान गोवंश के लिए 500 क्विंटल सूखा चारा पहुंचाया गया। 

इस विशाल राहत सामग्री को देखकर गौशाला प्रबंधन और स्थानीय ग्रामीणों ने गुरुदेव का हृदय से आभार व्यक्त किया। संत रामपाल जी महाराज जी हमेशा सिखाते हैं कि बेजुबान जीवों की रक्षा करना ही मानव का सबसे बड़ा परमार्थ है। इसी ज्ञान से प्रेरित होकर आज पूरे देश में उनके अनुयायी निस्वार्थ भाव से गोसेवा और समाज सुधार के कार्यों में जुटे हुए हैं। आइए, हम सब भी दिखावे से दूर हटकर जीवदया के इस नेक कार्य से प्रेरणा लेंकर उनके तत्वज्ञान से जुड़े। 

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महादान से मुस्कुराई दो जिंदगियां | SA News Chhattisgarh 

महासमुंद | 13-08-2026: इंसानियत की एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली! डिलीवरी के दौरान मात्र 4 ग्राम खून के साथ जिंदगी और मौत से जूझ रही एक प्रसूता लक्ष्मी चौधरी की जान बचाने के लिए, जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के 4 शिष्य देवदूत बनकर पहुंचे।

जैसे ही रक्त की आवश्यकता की सूचना मिली, भगत छन्नू दास, सेवन दास, घनश्याम दास और शरद दास ने तत्काल अस्पताल पहुंचकर 4 यूनिट 'O Positive' स्वैच्छिक रक्तदान किया। इस महादान से न केवल प्रसूता की जान बची, बल्कि कोख में पल रहे नवजात बच्चे को भी नया जीवनदान मिला!

परिजनों ने सच्चे संत रामपाल जी महाराज जी के समाज-कल्याण के इस दिव्य ज्ञान का अभार व्यक्त किया। वहीं शिष्यों ने उन्हें गुरुदेव द्वारा रचित पवित्र 'ज्ञान गंगा' पुस्तक भेंट करते हुए बताया कि निस्वार्थ सेवा की यह प्रेरणा उन्हें सिर्फ संत रामपाल जी महाराज जी की शिक्षाओं से मिली है।

आज के स्वार्थी दौर में गुरुदेव का यह तत्वज्ञान सचमुच समाज में एक नई और सकारात्मक क्रांति ला रहा है! <nis:link nis:type=tag nis:id=santrampaljimaharaj nis:value=SantRampalJiMaharaj nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=blooddonation nis:value=BloodDonation nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=mahasamund nis:value=Mahasamund nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=savelives nis:value=SaveLives nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=humanity nis:value=Humanity nis:enabled=true nis:link/> SANewsChhattisgarh
रेलवे रिफंड का स्मार्ट तरीका | SA News Chhattisgarh 

नई दिल्ली | 13-08-2026: भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए कई शानदार विकल्प दिए हैं, जिनकी जानकारी के अभाव में लोग आज भी परेशान होते हैं। हाल ही में रेलवे के सख्त नियम की काफी चर्चा रही, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि चार्ट बनने के बाद प्रतीक्षा सूची वाले यात्री आरक्षित डिब्बों (स्लीपर या AC) में सफर नहीं कर सकेंगे। इस स्थिति में, या अचानक यात्रा योजना बदलने पर, सबसे बड़ी समस्या PRS काउंटर से लिए गए टिकट को कैंसिल कराने की आती है। आम जनता आज भी टिकट रद्द कराने के लिए तुरंत रेलवे स्टेशन भागती है और काउंटर की लंबी लाइनों में खड़े होकर अपना समय बर्बाद करती है। लेकिन बहुत कम यात्री यह जानते हैं कि रेलवे की एक पुरानी और बेहद काम की सुविधा के जरिए काउंटर टिकट को ऑनलाइन भी रद्द किया जा सकता है।

इस स्मार्ट तकनीक का इस्तेमाल करके आप अपना पीआरएस काउंटर टिकट घर बैठे IRCTC मोबाइल ऐप के माध्यम से आसानी से कैंसिल कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले अपने स्मार्टफोन में आईआरसीटीसी ऐप खोलें। ऐप के 'कैंसिल टिकट’ सेक्शन में जाने पर आपको 'काउंटर टिकट कैंसिलेशन' का विकल्प दिखाई देगा। इस पर क्लिक करते ही सिस्टम आपसे आपके टिकट का PNR नंबर और ट्रेन नंबर दर्ज करने को कहेगा। यहाँ सबसे महत्वपूर्ण और ध्यान रखने वाली बात यह है कि टिकट बुक करते समय रिज़र्वेशन फॉर्म में जो असली मोबाइल नंबर भरा गया था, उसका चालू हालत में पास होना एकदम अनिवार्य है।

जैसे ही आप पीएनआर और ट्रेन की डिटेल डालकर सबमिट करेंगे, रेलवे के सुरक्षित सिस्टम द्वारा सत्यापन के लिए उसी रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP भेजा जाएगा। बिना इस सुरक्षा कोड के आपका टिकट किसी भी हाल में रद्द नहीं हो सकेगा। ओटीपी दर्ज करते ही स्क्रीन पर आपके टिकट की पूरी डिटेल आ जाएगी। इसे ध्यान से जांचने के बाद 'कैंसिल' बटन दबा दें। प्रक्रिया पूरी होते ही आपके फोन पर टिकट रद्द होने और रिफंड राशि का एक कन्फर्मेशन मैसेज तुरंत आ जाएगा। समय रहते ऑनलाइन टिकट कैंसिल होने से आप भारी कैंसिलेशन चार्ज कटने से भी बच सकते हैं। इसके बाद, आप अपनी सुविधानुसार तय समय-सीमा के भीतर किसी भी स्टेशन के काउंटर पर जाकर वह मैसेज दिखाकर अपना नकद रिफंड आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। 
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डीजल में इथेनॉल ब्लेंडिंग | SA News Chhattisgarh 

नई दिल्ली | 12-08-2026: डीजल में इथेनॉल मिलाने के प्रयोग को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंता सामने आई है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने संसद में बताया कि इथेनॉल मिलाने से डीजल का फ्लैश पॉइंट काफी कम हो गया, जिसके कारण मिश्रित ईंधन निर्धारित सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरा।

सरकार के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं और वाहन निर्माताओं के सहयोग से इथेनॉल मिश्रित डीजल का परीक्षण किया। परीक्षण के दौरान इसके फ्लैश पॉइंट में उल्लेखनीय कमी पाई गई। इसके चलते डीजल में इथेनॉल की व्यापक ब्लेंडिंग को लेकर सुरक्षा संबंधी चुनौती सामने आई है।

वहीं, डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिलाने को लेकर भी प्रारंभिक अध्ययन किया गया है। सरकार ने बताया कि फिलहाल इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इथेनॉल-डीजल मिश्रण के व्यापक इस्तेमाल से पहले तकनीकी और सुरक्षा मानकों को पूरा करना जरूरी होगा। <nis:link nis:type=tag nis:id=diesel nis:value=Diesel nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=ethanolblending nis:value=EthanolBlending nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=fuelsafety nis:value=FuelSafety nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=parliamentsession nis:value=ParliamentSession nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=indiangovernment nis:value=IndianGovernment nis:enabled=true nis:link/> SANewsChhattisgarh Ethanol E20