#सेवा_संकल्प_अभियान
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कहानी बदलाव की
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तालाब बना तरक्की का आधार: मत्स्य पालन से जीरापुरा के आदिवासी परिवारों को मिला रोजगार और आर्थिक संबल
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श्री अन्तरसिंह और मयाराम की पहल से समिति ने अर्जित की 10.26 लाख रुपये की आय, 7.76 लाख रुपये का शुद्ध लाभ
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कभी रोजगार के लिए गांव से बाहर पलायन करने को मजबूर जीरापुरा के आदिवासी परिवारों के लिए गांव का ही तालाब आज रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन गया है। विकासखंड नालछा के ग्राम जीरापुरा स्थित 12.747 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले ग्रामीण तालाब में मत्स्य पालन ने ग्रामीणों की आर्थिक तस्वीर बदलने का काम किया है। 'आदिवासी मत्स्योद्योग सहकारी समिति मर्यादित, जीरापुरा' के माध्यम से समिति के 22 सदस्य मत्स्य पालन से जुड़कर अपने परिवारों की आजीविका को मजबूत कर रहे हैं।
ग्राम जीरापुरा अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्र है। सीमित रोजगार अवसरों के कारण पूर्व में समिति के कई सदस्य मजदूरी और रोजगार की तलाश में गांव से बाहर पलायन करते थे। वर्ष 1995 में गठित आदिवासी मत्स्योद्योग सहकारी समिति को जीरापुरा ग्रामीण तालाब मत्स्य पालन के लिए पट्टे पर आवंटित होने के बाद स्थानीय स्तर पर ही रोजगार का अवसर उपलब्ध हुआ। बारहमासी तालाब होने से मत्स्य पालन समिति के सदस्यों के लिए निरंतर आय का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया।
मेहनत, सामूहिक प्रयास और मत्स्य पालन से बढ़ी आमदनी ने समिति के सदस्यों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। समिति के 10 सदस्य मोटरसाइकिल के माध्यम से स्थानीय बाजारों तक मछली पहुंचाकर उसका विक्रय करते हैं। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़े हैं, बल्कि स्थानीय बाजार से सीधे जुड़कर आय अर्जित करने का रास्ता भी मजबूत हुआ है।
वर्ष 2024-25 में समिति द्वारा 12.747 हेक्टेयर जलक्षेत्र में मत्स्यबीज संचयन एवं मत्स्योत्पादन का कार्य किया गया। इस दौरान मत्स्य उत्पादन पर लगभग 2 लाख 50 हजार रुपये की लागत आई, जबकि मछली विक्रय से समिति को कुल 10 लाख 26 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई। लागत घटाने के बाद समिति को 7 लाख 76 हजार रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित हुआ।
इस उपलब्धि का सीधा लाभ समिति के सदस्यों तक पहुंचा। शुद्ध लाभ के आधार पर प्रति सदस्य लगभग 38 हजार 800 रुपये प्राप्त हुए। इस आय ने ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ ही उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार और आत्मनिर्भरता का भरोसा दिया है।
समिति के अध्यक्ष श्री अन्तरसिंह एवं श्री मयाराम बताते हैं कि पहले रोजगार की तलाश में गांव से बाहर जाना पड़ता था, लेकिन तालाब में मत्स्य पालन की गतिविधि शुरू होने से गांव में ही रोजगार का अवसर मिला। आज यही तालाब परिवार की आय बढ़ाने और बेहतर जीवन की दिशा में आगे बढ़ने का माध्यम बन गया है।
जीरापुरा ग्रामीण तालाब की यह कहानी केवल मत्स्य उत्पादन की सफलता नहीं, बल्कि स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से ग्रामीणों को रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ने की प्रेरक मिसाल है। श्री अन्तरसिंह एवं श्री मयाराम ने इस अवसर और सहयोग के लिए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव तथा संबंधित विभाग के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।
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2 views | Dhar, Madhya Pradesh | Oct 2, 2026