#सेवा_संकल्प_अभियान
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कहानी बदलाव की
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मजदूरी से दुकानदारी तक… आज ललिता दीदी बनीं ‘लखपति दीदी’
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आजीविका मिशन से जुड़कर शुरू किया जूता-चप्पल का व्यवसाय, अब हर साल डेढ़ लाख रुपये तक की आय
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कभी परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए मजदूरी करने वाली सरदारपुर विकासखंड के ग्राम अमोदिया निवासी ललिता बाई पति कैलाश लछेटा आज अपने व्यवसाय की स्वयं संचालक हैं। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया, बल्कि मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर ‘लखपति दीदी’ बनने की उपलब्धि हासिल की है।
*छोटी बचत से शुरू हुआ आत्मनिर्भरता का सफर*
ललिता दीदी को आजीविका मिशन के समूह प्रेरक के माध्यम से स्व-सहायता समूह के गठन, संचालन और उससे मिलने वाले लाभों की जानकारी मिली। इसके बाद वर्ष 2020 में वे अपने गांव के नव शक्ति आजीविका स्व-सहायता समूह से जुड़ीं और नियमित रूप से छोटी-छोटी बचत करना शुरू किया। समूह से जुड़ने के बाद उनके भीतर आत्मनिर्भर बनने का विश्वास मजबूत हुआ।
वर्ष 2021 में समूह से 50 हजार रुपये का ऋण लेकर उन्होंने गांव में जूता-चप्पल की दुकान शुरू करने का निर्णय लिया। छोटे स्तर से शुरू हुआ यह व्यवसाय धीरे-धीरे उनकी आय का महत्वपूर्ण साधन बन गया।
*ऋण मिला तो कारोबार ने पकड़ी रफ्तार*
व्यवसाय को विस्तार देने के लिए ललिता दीदी ने सखी स्वावलंबन योजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक शाखा धुलेट से वर्ष 2025 में 1 लाख 75 हजार रुपये का ऋण लिया। इस राशि से उन्होंने अपनी जूता-चप्पल की दुकान को और व्यवस्थित एवं सुचारु रूप से संचालित करना शुरू किया। व्यवसाय बढ़ने के साथ उनकी मासिक आय में भी वृद्धि हुई।
ललिता दीदी दुकान संचालन के साथ खाली समय में सिलाई कार्य भी करती हैं। इस अतिरिक्त गतिविधि से उन्हें अतिरिक्त आमदनी प्राप्त होती है। वर्तमान में वे प्रतिमाह लगभग 12 से 15 हजार रुपये तथा प्रतिवर्ष लगभग 1.30 से 1.50 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। यही बढ़ी हुई आय उन्हें ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी तक लेकर गई है।
*साहूकारों के कर्ज से मुक्ति, बच्चों की शिक्षा पर बढ़ा ध्यान*
आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ ललिता दीदी अब अपने बैंक ऋण की किश्तें समय पर जमा कर रही हैं। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि उनका परिवार साहूकारों के कर्ज से मुक्त हो गया है। अब वे अपने बच्चों की शिक्षा पर भी पहले से अधिक ध्यान दे पा रही हैं और अपने दो पुत्रों एवं एक पुत्री को बेहतर शिक्षा एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत हैं।
*पहले मजदूरी और कर्ज, अब खुद का व्यवसाय*
ललिता दीदी बताती हैं कि आजीविका मिशन से जुड़ने से पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। परिवार में पति, दो पुत्र, एक पुत्री और स्वयं सहित पांच सदस्य हैं। पति खेती का कार्य करते थे, जबकि वे स्वयं मजदूरी करके परिवार के भरण-पोषण में सहयोग करती थीं। सीमित आय के कारण बच्चों की पढ़ाई और परिवार की अन्य आवश्यकताओं को पूरा करना कठिन था।
खेती और घरेलू जरूरतों के लिए उन्हें कई बार दूसरों से ब्याज पर रुपये लेने पड़ते थे। आय का एक हिस्सा कर्ज का ब्याज चुकाने में चला जाता था, जिससे आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा था। ऐसे समय में स्व-सहायता समूह से जुड़ना उनके लिए आर्थिक बदलाव की नई शुरुआत साबित हुआ।
*“समूह ने गरीब महिला को आर्थिक रूप से आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया”*
ललिता दीदी अपनी सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को देते हुए हृदय से आभार व्यक्त करती हैं। वे कहती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं मिली, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होकर स्वयं का व्यवसाय करने और मजदूर से मालिक बनने का आत्मविश्वास भी मिला।
आज ललिता दीदी की सफलता समूह की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। उनके आत्मविश्वास और मेहनत से प्रेरित होकर समूह की अन्य महिलाएं भी आर्थिक गतिविधियों से जुड़कर ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
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Jansampark Madhya Pradesh