मऊ- ब्रह्मसरोवर तट पर गूंजा जितिया पर्व का उल्लास
संतान की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रती महिलाओं ने की भगवान जीमूतवाहन की पूजा
मऊ, नगर क्षेत्र के ब्रह्मस्थान स्थित ब्रह्मसरोवर तट पर शनिवार को जीवित्पुत्रिका (जितिया) पर्व की भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। संतान की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर व्रती महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान ब्रह्मसरोवर तट पर श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा।
जितिया पर्व माताओं द्वारा संतान की दीर्घायु और मंगलकामना के लिए रखा जाने वाला महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। व्रती महिलाएं कठिन नियमों का पालन करते हुए भगवान जीमूतवाहन की पूजा-अर्चना करती हैं और अपनी संतान के सुखी एवं सुरक्षित जीवन की कामना करती हैं।
तीन दिवसीय होता है जितिया पर्व
जितिया पर्व सामान्यतः आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के आसपास मनाया जाता है। पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। पहले दिन व्रती महिलाएं स्नान कर सात्त्विक भोजन ग्रहण करती हैं और व्रत के लिए स्वयं को तैयार करती हैं।
इसके बाद व्रत के मुख्य दिन महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं। इस दौरान अन्न और जल का त्याग कर भगवान जीमूतवाहन की पूजा-अर्चना की जाती है। कई व्रती महिलाएं लंबे समय तक निर्जला व्रत रखकर अपनी संतान की लंबी उम्र और परिवार के मंगल की कामना करती हैं।
व्रत के अगले दिन शुभ मुहूर्त में पारण किया जाता है। पूजा-अर्चना के बाद व्रती महिलाएं अन्न-जल ग्रहण कर व्रत का समापन करती हैं।
ब्रह्मसरोवर तट पर आयोजित पूजा के दौरान महिलाओं में पर्व को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया। धार्मिक आस्था, परंपरा और संतान के प्रति मातृ प्रेम से जुड़ा यह पर्व क्षेत्र में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया।