शराफत अली के बयान पर गरमाई हरदोई की सियासत, प्रेमावती वर्मा ने किया पलटवार; बोलीं- आरक्षण किसी की खैरात नहीं
हरदोई। समाजवादी पार्टी के नेता शराफत अली के जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती पीके वर्मा को लेकर दिए गए कथित विवादित बयान के बाद हरदोई की सियासत गरमा गई है। गोपामऊ विधानसभा क्षेत्र में आयोजित पीडीए सम्मेलन के दौरान शराफत अली ने आरक्षण का जिक्र करते हुए प्रेमावती वर्मा को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिसका वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं।
सामने आए वीडियो के संबंध में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार शराफत अली ने कहा कि यदि पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने आरक्षण में संशोधन नहीं किया होता तो प्रेमावती आज जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर नहीं बैठी होतीं, बल्कि धोबी घाट पर कपड़े साफ कर रही होतीं। इस टिप्पणी को प्रेमावती वर्मा ने अपने सामाजिक वर्ग और व्यक्तिगत पृष्ठभूमि को निशाना बनाने वाला बयान बताया है।
बयान सामने आने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती पीके वर्मा ने पलटवार करते हुए कहा कि उनके माता-पिता ने भी कभी उनके साथ इस तरह के अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने अपने जीवन के संघर्ष का उल्लेख करते हुए बताया कि परिवार ने उन्हें पढ़ाया-लिखाया और उन्होंने शिक्षिका के रूप में कार्य किया। बाद में नौकरी से त्यागपत्र देकर राजनीति में कदम रखा।
प्रेमावती वर्मा ने आरक्षण को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आरक्षण किसी व्यक्ति विशेष की देन या खैरात नहीं, बल्कि संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में प्रतिनिधित्व की व्यवस्था संविधान और उससे संबंधित प्रावधानों के तहत है।
गौरतलब है कि शराफत अली इससे पहले भी विवादों में रह चुके हैं। जून 2026 में उनकी पार्टी की वरिष्ठ महिला नेताओं को लेकर कथित वायरल वीडियो/ऑडियो सामने आने के बाद विवाद हुआ था। उस समय शराफत अली ने आरोपों को खारिज करते हुए वीडियो-ऑडियो को काट-छांटकर पेश किए जाने का दावा किया था। इसके बाद सपा ने हरदोई की जिला कार्यकारिणी भंग कर दी थी।
अब जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती वर्मा के खिलाफ कथित टिप्पणी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर शराफत अली के बयान का वीडियो राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर प्रेमावती वर्मा ने सार्वजनिक रूप से जवाब देते हुए कानूनी कार्रवाई की बात कही है। मामले में आगे पुलिस शिकायत, जांच और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया पर नजर बनी हुई है।