
सीडीओ डी.पी. पाल के मुख्य आतिथ्य में कृषि ज्ञान दूतों की कार्यशाला सम्पन्न, प्राकृतिक खेती एवं स्वावलंबन पर दिया जोर
दिनांक 01.10.2026 को कृषि विज्ञान केन्द्र, गनीवां में संचालित जिला खनिज न्यास (DMF) से पोषित कृषि ज्ञान दूत योजना के अंतर्गत विकास खण्ड कर्वी की एक दिवसीय वृहद कार्यशाला का आयोजन रामायण मेला परिसर, सीतापुर, कर्वी में किया गया। इस कार्यशाला में कर्वी ब्लॉक के 168 राजस्व गांवों से चयनित कृषि ज्ञान दूतों ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डी.पी. पाल, मुख्य विकास अधिकारी, चित्रकूट रहे। मंच पर दीनदयाल शोध संस्थान के वरिष्ठ कार्यकर्ता अशोक पाण्डेय जी एवं राजेन्द्र सिंह भी उपस्थित रहे।
डी.पी. पाल जी ने कहा कि - "आप सभी कृषि ज्ञान दूत सरकार और किसान के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। आप सभी को अपने-अपने राजस्व गांव में जाकर किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित करना है। रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से हमारी मिट्टी बीमार हो रही है, हमें इसे बचाना है। गौ-आधारित प्राकृतिक खेती ही हमारे बुंदेलखंड को फिर से खुशहाल बनाएगी। शासन की सहभागिता योजना के तहत आप 4 देशी गायों का पालन कर सकते हैं, सरकार आपको प्रति गाय 50 रुपये प्रतिदिन अर्थात एक महीने में 1500 रुपये प्रति गाय के हिसाब से अनुदान देगी।"
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कृषि विज्ञान केन्द्र, गनीवां के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. राजेन्द्र सिंह नेगी ने कहा कि - "रबी सीजन हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है। गेहूँ की बुवाई 10 से 25 नवम्बर के बीच करें, HD-2967, DBW-187, HD-3086 किस्में लगाएं। बीज को 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति किलो से उपचारित अवश्य करें। सरसों की बुवाई अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े तक पूरी कर लें, पायोनियर 45S46, RH-725 जैसी किस्में लगाएं। चने में RVG-202, RVG-203, JG-16 किस्में इस क्षेत्र के लिए बहुत अच्छी हैं। चने के बीज को राइजोबियम कल्चर से उपचारित करने से 15 से 20 प्रतिशत तक उत्पादन बढ़ता है। मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरक का प्रयोग करें।"
जे.एल. गुप्ता, उप निदेशक, कृषि, चित्रकूट ने कहा कि - "कृषि विभाग द्वारा पीएम किसान सम्मान निधि, पीएम फसल बीमा, बीज ग्राम, कृषि यंत्रों पर 50 प्रतिशत अनुदान, सोलर पंप जैसी अनेकों योजनाएं चलाई जा रही हैं। हमारा प्रयास है कि किसानों के पास उपलब्ध संसाधनों के आधार पर कम लागत से खेती कैसे की जाए, कम लागत, अधिक मुनाफा यही हमारा लक्ष्य है।"
रतन कुमार, जिला विकास प्रबंधक, नाबार्ड ने कहा कि - "किसानों को वित्तीय रूप से साक्षर होना जरूरी है। किसान क्रेडिट कार्ड पर 4 प्रतिशत ब्याज पर 3 लाख तक का लोन मिलता है। पशुपालन क्रेडिट कार्ड से पशुपालन के लिए भी सस्ता ऋण लें। आप सभी ज्ञान दूत अपने गांव में 15-20 किसानों का समूह बनाकर FPO बनाएं, हम पूरा सहयोग करेंगे।"
परियोजना प्रभारी एवं कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक उत्तम कुमार त्रिपाठी ने कहा कि - "हर किसान को अपने खेत का बीज स्वयं तैयार करना सीखना होगा, इससे लागत आधी हो जाएगी। कृषि रसायनों और उर्वरकों का प्रयोग आवश्यकता अनुसार ही करें। आप सभी व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़े रहें, अपने खेत की समस्या की फोटो, वीडियो ग्रुप में डालें, हम कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक तुरंत समाधान बताएंगे।"
कार्यक्रम का संचालन एवं कार्यक्रम संयोजन डॉ. सतीश कुमार पाठक, वरिष्ठ शोध अध्येता, निकरा परियोजना द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में विशेष सहयोग अंकुर त्रिपाठी, सुरेश यादव एवं अभय कुमार शुक्ला का रहा। साथ ही सीएफआई प्रोजेक्ट, बांदा कृषि विश्वविद्यालय के कार्यकर्ता नरेन्द्र कुमार भी उपस्थित रहे।