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Nainital Mania

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Nainital के आस पास की जगहों के नामो का मतबल जानिए | Bhowali | Ramnagar | Haldwani <nis:link nis:type=tag nis:id=bhowali nis:value=bhowali nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=ghorakhal nis:value=ghorakhal nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=chorgaliya nis:value=chorgaliya nis:enabled=true nis:link/>
आजादी मिलने के दिन हमने Kayamoodin Watch Maker वाली building को हमेशा के लिए खो दिया ✅

नैनीताल के Mallital बाजार में स्थित यह 3rd Floor वाली building कभी अंग्रेजों के दौर की सबसे खास और भव्य buildings में गिनी जाती थी। उस समय के हिसाब से यह नैनीताल की बड़ी buildings में से एक थी..इस building के Top Floor और 2nd Floor पर अंग्रेज रहा करते थे, जबकि Basement में Kayamoodin साहब की मशहूर watch maker की shop हुआ करती थी।

लेकिन आजादी का जश्न शुरू होने से पहले ही इस Heritage Building के साथ एक ऐसा हादसा हुआ, जिसने नैनीताल के इतिहास में एक गहरी छाप छोड़ दी।

1946 को इसी Heritage Building में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने building को अपनी चपेट में ले लिया और नैनीताल ने अपनी एक ऐतिहासिक पहचान हमेशा के लिए खो दी।

हालांकि, इस building की याद आज भी नैनीताल में मौजूद है। आप इसे गोल घर के पास आज भी देख सकते हैं, लेकिन अब यह अपने पुराने रूप में नहीं, बल्कि एक नए रूप में नजर आती है।

एक ऐसी Heritage Building, जो कभी अंग्रेजों के दौर की शान हुआ करती थी, आज नैनीताल के बदलते इतिहास की एक खामोश गवाह बनकर खड़ी है...Sirajuddin ने इसे जलने के बाद दोबारा चार पांच महीने में तैयार करवाया था.

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एक Couple अपने कुत्ते को लेकर केदारनाथ पहुँच जाता हैं | Reached Kedarnath along with his Dog <nis:link nis:type=tag nis:id=kedarnath nis:value=kedarnath nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=kedarnathtemple nis:value=kedarnathtemple nis:enabled=true nis:link/>
15 अगस्त 1947 जब Nainital ने पहली बार आजादी का नया सूरज देखा ✅

अंग्रेजों ने जिस Nainital को अपने नियम-कायदों और अनुशासन के साथ बसाया था, 15 August 1947 को उसी शहर की तस्वीर पूरी तरह बदल गई थी...14 August की रात से ही नैनीताल में जश्न शुरू हो चुका था। देर रात तक मशाल जुलूस, आतिशबाजी और देशभक्ति के नारों से पूरा शहर गूंजता रहा। करीब ढाई-तीन बजे तक लोग आजादी का जश्न मनाते रहे।

और फिर 15 August की सुबह ✅
सुबह होते ही लोग Mall Road पर जुलूस की शक्ल में निकल पड़े। इतनी भीड़ थी कि कहीं तिल रखने तक की जगह नहीं थी। हर तरफ खुशी, नाच-गाना और एक ही आवाज सुनाई दे रही थी...

"अब वतन आजाद है!" 🇮🇳

जिस नैनीताल में अंग्रेजों के समय भारतीयों को Upper Mall Road पर चलने तक की इजाजत नहीं थी, उसी Mall Road पर आज हजारों भारतीय आजादी का जश्न मना रहे थे....उस समय नैनीताल तत्कालीन United Provinces की ग्रीष्मकालीन राजधानी था। अंग्रेजों के Government House और Secretariat भी यहीं थे। अंग्रेजों के दौर में भारतीयों के लिए कई तरह की पाबंदियां थीं। Flats मैदान में बच्चों के खेलने पर रोक थी और अंग्रेजों के खास खेलों व कार्यक्रमों में भारतीयों की भूमिका अक्सर सिर्फ दर्शक या तालियां बजाने तक सीमित रहती थी।

इसलिए 15 August 1947 का दिन Nainital के लोगों के लिए सिर्फ आजादी का दिन नहीं था, बल्कि पुरानी पाबंदियों के खत्म होने का दिन भी था।

सुबह CRST Inter College के बच्चों ने Mall Road होते हुए Tallital Government High School तक जुलूस निकाला। वहां Headmaster Harish Chandra Pant ने बच्चों को 15 अगस्त 1947 की तारीख अंकित स्मृति-चिह्न और राष्ट्रीय ध्वज प्रदान किए।

उन्होंने बच्चों से कहा कि देश आजाद हो गया है, लेकिन अब देश को जाति और धर्म से ऊपर उठकर एक रखने और उसके निर्माण की जिम्मेदारी हमारी है।

इसके बाद Municipality में Chairman Rai Bahadur Jasaunt Singh Bisht की अध्यक्षता में कार्यक्रम हुआ। Banke Lal Kansal ने Khan Bahadur Abdul Qayum को पीतल का तिरंगा बैज लगाया। फिर Chairman ने Union Jack उतारकर तिरंगा फहरा दिया। 🇮🇳

वहीं Flats मैदान में ADM Arif Ali Shah ने परेड की सलामी ली। कार्यक्रम में Manohar Lal Sah, Shyam Lal Verma और Sitawar Pant सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे।

यानी जिस शहर में कभी अंग्रेजों का राज और उनके नियम चलते थे, उसी नैनीताल में 15 अगस्त 1947 को हर जाति, हर धर्म और हर वर्ग के लोग एक साथ आजादी का जश्न मना रहे थे।

Independence Day Nainital
क्या अंग्रेजों के दौर में नैनीताल भारतीयों के लिए अलग था?

ब्रिटिशकाल में नैनीताल की कई खास जगहों पर भारतीयों का प्रवेश प्रतिबंधित था। Upper Mall Road, Elected Clubs, Churches, English Schools और Capital Cinema जैसे स्थान मुख्यतः अंग्रेजों के लिए आरक्षित माने जाते थे…Raj Regatta जैसी प्रतियोगिताओं में भी भारतीयों को दर्शक बनाकर अलग बैठाया जाता था।

कहा जाता है कि 1920 के दशक तक नैनीताल में अंग्रेजों और भारतीयों के लिए सामाजिक तौर पर स्पष्ट भेदभाव मौजूद था।

नैनीताल का यह काला अध्याय शायद आपने पहले नहीं सुना होगा।

Note ✅: पूरी वीडियो को आप Nainital Mania Youtube Channel में या Nainital Mania Facebook Page में देख सकते है.

You may not have heard of this dark chapter of Nainital before.

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Gorkhao की Divya Parikshaye Part 2 : EAST India Company destroyed all Divine Testes, Gorkha Shashan In Uttarakhand, Uttarakhand History
अंग्रेजो का नैनीताल में आखिरी समय, Nainital Early 1940's ✅

दोस्तों 1944 आते-आते नैनीताल में अंग्रेजी हुकूमत की पकड़ ढीली पड़ने लगी थी। पूरे देश में आज़ादी की लहर तेज़ हो चुकी थी और उसका असर कुमाऊँ की वादियों तक साफ़ दिखाई देने लगा था। नैनीताल ही नहीं, बल्कि अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चंपावत के लोगों में भी आज़ादी का जोश चरम पर था। जगह-जगह सभाएँ होने लगीं, क्रांतिकारी गतिविधियाँ बढ़ने लगीं और अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज़ बुलंद होने लगी।

सबसे दिलचस्प बात यह थी कि ऊधम सिंह नगर (तत्कालीन तराई क्षेत्र) से भी बड़ी संख्या में लोग नैनीताल पहुँचकर जुलूस और रैलियाँ निकालते थे। इसकी वजह साफ़ थी। उस समय नैनीताल पूरे कुमाऊँ में अंग्रेजों का सबसे बड़ा प्रशासनिक और सामाजिक केंद्र (Hub) था। यहाँ ब्रिटिश अधिकारी, बड़े व्यापारी और अंग्रेज परिवार बड़ी संख्या में रहते थे।

1947 तक नैनीताल में लगभग 40,000 अंग्रेज निवासी बताए जाते हैं। उन्होंने यहाँ luxurious bungalows, luxurious hotels, churches, schools, clubs और अनेक व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्थापित किए थे। गर्मियों में तो नैनीताल किसी छोटे से अंग्रेजी शहर जैसा दिखाई देता था।

लेकिन इतिहास ने करवट ली क्योकि 15 अगस्त 1947  को भारत के स्वतंत्र होते ही अधिकांश अंग्रेज भारत छोड़ने लगे। कहा जाता है कि नैनीताल से लगभग 98% अंग्रेज आज़ादी के समय तक जा चुके थे। जो कुछ परिवार बचे, वे भी 1948 तक धीरे-धीरे यहाँ से चले गए। केवल बहुत कम संख्या में ब्रिटिश नागरिक भारत में रहे, जिनमें से कुछ को English-medium schools के प्रतिष्ठित विद्यालयों और अन्य संस्थानों के संचालन के लिए भारतीय सरकार ने अस्थायी रूप से कार्य जारी रखने की अनुमति दी।

हालाँकि इतिहास का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह स्वीकार करना होगा कि आधुनिक नैनीताल की बुनियादी पहचान अंग्रेजी शासन के दौरान ही विकसित हुई। पहाड़ों को काटकर सड़कें बनाना, नैनीताल तक बिजली पहुँचाना, काठगोदाम तक रेलवे लाना, शानदार drainage system तैयार करना, व्यवस्थित बाज़ार बसाना, churches, schools, hospitalsऔर खूबसूरत colonial buildings बनाना, यह सब उसी दौर की देन है।

यही कारण है कि इतिहासकार अक्सर कहते हैं कि ब्रिटिश काल का नैनीताल अपनी साफ़-सफाई, अनुशासित नगर व्यवस्था और वास्तुकला के कारण आज के नैनीताल से बिल्कुल अलग और बेहद आकर्षक दिखाई देता था। आज भी मॉल रोड, पुराने होटल, चर्च और अनेक ऐतिहासिक इमारतें उस दौर की कहानी सुनाती हैं।

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अंग्रेजो के जमाने में नैनीताल की कुछ Famous Personalities ✅:

दोस्तों ब्रिटिशकाल के दौरान नैनीताल के कुछ पुराने लोग ऐसे थे जो नैनीताल के प्रारंभिक काल से लेकर आजादी के बाद तक रहे, कुछ लोगो ने अंग्रेजो के जमाने में ऐतिहासिक कार्य किये तो कुछ आजादी के बाद नैनीताल के प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई...आइये कुछ विशेष लोगो के बारे में जानते है.

1. Shyam Lal Shah✅: नैनीताल में सबसे पुराने लोगो में से गिने जाने वाले एक भारतीय जिनकी 1840 में सबसे पहली कपड़ो की दुकान खुली.

2. Moti Ram Shah ✅: ये नैनीताल के शिल्पकार कहे जाते है क्योकि इन्होने ही अंग्रेजो के जमाने में कई European Building को बनाने में मदद की, इसके अलावा 1843 में इन्होने तल्लीताल में बहुत पुराने नयनादेवी मंदिर जो आज के Post Office के समीप था उसको स्थानांतरिक करके मल्लीताल में पुराने Boathouse के पास स्थापित किया.

3. Banke Lal Shah ✅:ये Alka Hotel के मालिक थे, इन्होने नैनीताल में सबसे पहले दुर्गादेवी मेले की शुरुवात की.

इसके अलावा बाकी लोगों के बारे में जानने के लिए इन तस्वीरों पर क्लिक करके देखिए, जहां आपको उनके जीवन और नैनीताल में उनके योगदान से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी मिल जाएगी।

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Garhwal Panwar Kings Real Photos | 1690 से 1947 तक गढ़वाल के पंवार शासक की आज Real Photos को देखिये ✅

इस Short Video में पहली बार देखिए 1698 से 1949 तक गढ़वाल और टिहरी रियासत पर शासन करने वाले सभी पंवार शासकों की Real Photos..इन दुर्लभ तस्वीरों के माध्यम से जानिए कि पंवारवंश के राजा कैसे दिखते थे, किस तरह के शाही वस्त्र पहनते थे, उनका व्यक्तित्व कैसा रहा होगा और उनका राजसी जीवन कैसा दिखाई देता होगा।

Step back in time and witness realistic portraits of every Panwar king who ruled Garhwal and the British Tehri Kingdom between 1698 and 1947. Discover how these legendary rulers may have appeared, the majestic clothing they wore, their royal presence, and what life in the Panwar court might have looked like.

I have written below the names of the real photos of the Panwar rulers.
Fatehpati Shah Real Photo - 1698
Pradeep Shah Real Photo - 1760
Jayakrit Shah Real Photo - 1780
King Pradyumna Shah  Real Photo - 1790
King Parakram Shah  Real Photo - 1790
Sudarshan Shah - Real Photo 
Bhawani Shah Tehri Garhwal - Real Photo 
Pratap Shah Tehri Garhwal - Real Photo 
Maharaja Kirti Shah - Real Photo 
Maharaja Narendra Shah - Real Photo 
Maharaja Manvendra Shah - Real Photo 
Manujendra Shah - Real Photo 

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1880 से लेकर 1930 के जमाने का अनोखा नैनीताल, Nainital at its Golden Days ✅

Many historians believe that 1880 से 1947 के बीच का समय नैनीताल के इतिहास का स्वर्णिम काल माना जाता है। इस दौरान नैनीताल केवल एक खूबसूरत पहाड़ी नगर नहीं रहा, बल्कि Education, Tourism, Trade, Administration और Social Life का एक प्रमुख केंद्र बन चुका था। भारत ही नहीं, विदेशों तक नैनीताल की पहचान बन गई थी और हर साल बड़ी संख्या में British Officials, Tourists और Prominent Families यहां आते थे।

हालांकि, British Nainital आज के Nainital से बिल्कुल अलग था। उस समय पूरे शहर का संचालन British Administration और उनके बनाए नियमों के अनुसार होता था। शहर की योजना, Cleanliness, Traffic, Construction और Public Welfare पर विशेष ध्यान दिया जाता था। वहीं आज का नैनीताल भारतीय प्रशासन के अधीन है, जहां परिस्थितियां, चुनौतियां और प्रशासनिक प्राथमिकताएं समय के साथ बदल चुकी हैं।

This is why a clear historical difference is visible between Nainital during the British period and the Nainital of today.

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When Akbar and Chand Ruler Rudra Chand Met First Time | Rudrachand & Akbar Meeting | Chand King | Chand Dynasty | Rudrapur | Uttarakhand History
अंग्रेजो के जमाने का पुराना नैनीताल, Nainital During British Era ✅

ब्रिटिशकाल के दौरान का नैनीताल वर्तमान नैनीताल से काफी अलग हुआ करता था, अंग्रेजो ने नैनीताल को London की तरह विकसित किया था और नैनीताल का प्रशासन भी England की तरह चलता था.

उस दौर में जितने भी भारतीय थे अधिकांश अंग्रेजी बोलना सीख गए थे क्योकि अंग्रेजो ने अंग्रेजी शिक्षा पर काफी जोर दिया था.

उम्मीद करता हूँ कि नैनीताल की यह 1905 से लेकर 1945 तक की फोटोज आपको पसंद आयेगी। 

Hope you enjoy these photos of Nainital from 1905 to 1945.
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Gorkha Rifles, जब अंग्रेजों ने गोरखाओ की बहादुरी देखकर, Gorkha Rifles की इस्थापना की और yahi आगे चलकर Gorkha Regiment बना | Anglo Nepalese War & Gorkha Rifles History
अंग्रेज़ लोग नैनीताल में तब नैनीताल London जैसा लगता था ✅:

आज जिस नैनीताल की खूबसूरती पर हर कोई फिदा है, उसकी आधुनिक पहचान की नींव अंग्रेज़ों ने रखी थी। 1839 में नैनीताल की खोज के बाद 1841 से अंग्रेज़ों ने इसे बसाना शुरू किया और धीरे-धीरे इसे भारत के सबसे अनुशासित और खूबसूरत हिल स्टेशनों में बदल दिया......उस समय नैनीताल में कुछ ऐसे नियम लागू थे, जिन्हें सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे!

1. पेड़ों की कटाई पर सख्त रोक ★
अंग्रेज़ नैनीताल की हरियाली को अपनी सबसे बड़ी धरोहर मानते थे। बिना अनुमति कोई पेड़ नहीं काट सकता था। पूरे इलाके को छावनी (Cantonment) के नियमों के तहत रखा गया था।

2. शहर की सफाई और विकास सबसे पहले ★
नैनीताल को एक आदर्श Hill Station बनाने के लिए नगरपालिका की लगभग 60% आय शहर की सफाई, सड़कों, पार्कों और अन्य विकास कार्यों पर खर्च की जाती थी।

3. Mall Road पर थूकना या गंदगी फैलाना अपराध था 🚫
अगर कोई Mall Road पर थूकता या कूड़ा फैलाता पकड़ा जाता, तो उस पर तुरंत जुर्माना लगाया जाता था।

4. Upper Mall Road पर भारतीयों का प्रवेश प्रतिबंधित था ★
उस दौर में Upper Mall Road पर केवल अंग्रेज़ और चुनिंदा Elite भारतीयों को ही जाने की अनुमति थी। आम भारतीयों का प्रवेश प्रतिबंधित था।

5. कंक्रीट के मकानों की अनुमति नहीं थी ★
अंग्रेज़ चाहते थे कि नैनीताल का प्राकृतिक सौंदर्य बना रहे, इसलिए केवल European Style के लकड़ी के मकानों को ही अनुमति दी जाती थी।

6. आवारा पशुओं पर भी सख्ती ★
अगर कोई आवारा गाय, बैल या कुत्ता शहर में घूमता मिलता, तो उसे तुरंत नैनीताल शहर की सीमा से बाहर भेजने के आदेश दिए जाते थे।

7. व्यापारियों से ईमानदारी की अपेक्षा ★
व्यवसाय करने वाले लोगों से ईमानदारी और जनता के हित में काम करने के form भराये जाते थे, ताकि शहर की प्रतिष्ठा और व्यवस्था बनी रहे।

यही वजह थी कि...1839 से लेकर 1947 तक का Nainital अपनी साफ-सफाई, अनुशासन, खूबसूरत लकड़ी के भवनों और शांत वातावरण के कारण इतना प्रसिद्ध था कि लोग इसे "The British Nainital", "स्वर्ग" और "London Of India" जैसे नामों से भी पुकारते थे।

आपको क्या लगता है? अगर आज भी नैनीताल में ऐसे नियम लागू हों, तो क्या शहर पहले से भी ज्यादा खूबसूरत बन सकता है? अपनी राय Comment में ज़रूर बताइए - Nainital Mania 

Note: All Photos were Black & White but for better visual I have colorize them.

Nainital History and Nainital Old Photos
1947 तक जब भारतीय लोग नैनीताल में चलते थे तो हर जगह अंग्रेज़ ही दिखते थे ✅:

आज का खूबसूरत नैनीताल कभी पूरी तरह British City हुआ करता था। बहुत कम लोग जानते हैं कि 1841 में जब अंग्रेजों ने यहाँ बसना शुरू किया, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह छोटा सा पहाड़ी इलाका कुछ ही दशकों में British India का सबसे शानदार Hill Station बन जाएगा।

1880 तक Nainital में लगभग 10,000 अंग्रेज रह रहे थे, जिनमें करीब 5,000 English Ladies (Memsahibs) थीं। उस दौर के कई इतिहासकार लिखते हैं कि 1947 तक अगर कोई व्यक्ति Mall Road, Church, Schools, Colleges, Clubs, Shops या Government Office में घूमता था, तो उसे हर तरफ अंग्रेज ही दिखाई देते थे। भारतीय और स्थानीय लोग बहुत कम संख्या में थे। उस समय ऐसा माहौल था कि मानो आप भारत में नहीं, बल्कि सीधे England की किसी सड़क पर घूम रहे हों।

सोचिए... आज जिस Mall Road पर लाखों भारतीय पर्यटक घूमते हैं, कभी वहाँ अंग्रेज अफसर, उनकी Memsahibs, बच्चे और सैनिक ही सबसे ज़्यादा नज़र आते थे। नैनीताल की पहचान ही एक English Town के रूप में थी।

Nainital History 1841✅: 
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती क्योकि जब नैनीताल के बारे में स्थानीय लोगों के अलावा लगभग कोई नहीं जानता था, तब अंग्रेजों ने ही इसकी खूबसूरती की चर्चा पूरी दुनिया में फैला दी। British India से लेकर England, Scotland, Poland और यहाँ तक कि USA तक नैनीताल का नाम पहुँच चुका था।

इसी प्रसिद्धि का असर था कि 1858 में USA से आए एक American Missionary ने यहाँ ईसाई धर्म के प्रचार का कार्य शुरू किया। उसी दौर में Methodist Church (1858) और CRST School जैसी संस्थाएँ स्थापित हुईं, जो आज भी उस ऐतिहासिक विरासत की गवाही देती हैं।

यानी आज का नैनीताल सिर्फ झीलों और पहाड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा शहर है जिसने कभी पूरी दुनिया, खासकर British Empire, का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। और यही इतिहास नैनीताल को भारत के सबसे अनोखे शहरों में से एक बनाता है।

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गोरखाओ की ख़तरनाक दिव्य परीक्षाये जिनको सुनकर हर किसी के रोंगटे खड़े हो जाते है, Gorkha's Judicial System called Divya Parikshaye 😱
Nainital के आस पास की जगहों के नामो का मतबल जानिए | Bhowali | Ramnagar | Haldwani <nis:link nis:type=tag nis:id=bhowali nis:value=bhowali nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=ghorakhal nis:value=ghorakhal nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=chorgaliya nis:value=chorgaliya nis:enabled=true nis:link/>
अंग्रेजो के जमाने का आखिरी नैनीताल, Nainital 1940's ✅

अंग्रेजों ने नैनीताल की अर्थव्यवस्था से लेकर उसके Infrastructure और उसकी modernity तक, हर चीज का ध्यान रखा.
Gorkha Rifles, जब अंग्रेजों ने गोरखाओ की बहादुरी देखकर, Gorkha Rifles की इस्थापना की और yahi आगे चलकर Gorkha Regiment बना | Anglo Nepalese War & Gorkha Rifles History
एक Couple अपने कुत्ते को लेकर केदारनाथ पहुँच जाता हैं | Reached Kedarnath along with his Dog <nis:link nis:type=tag nis:id=kedarnath nis:value=kedarnath nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=kedarnathtemple nis:value=kedarnathtemple nis:enabled=true nis:link/>
Gorkhao की Divya Parikshaye Part 2 : EAST India Company destroyed all Divine Testes, Gorkha Shashan In Uttarakhand, Uttarakhand History
अंग्रेजो के जमाने का है Grand Hotel✅
Grand Hotel Nainital की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक विरासत इमारतों में से एक है। यह मल्लीताल में नैनीझील के किनारे स्थित है और लगभग 150 वर्ष से भी अधिक समय से पर्यटकों का स्वागत कर रहा है. 

History of the Grand Hotel ✅
1872 में एक अंग्रेज़ Tom Murray ने इस होटल का निर्माण कराया। उस समय यह नैनीताल के शुरुआदा होटलों में से एक था...शुरुआत में इसका नाम The Albion था...बाद में इसका नाम Mayo Hotel रखा गया....लेकिन 1898 में इसका नाम बदलकर The Grand Hotel कर दिया गया, जो आज भी  Grand Hotel के नाम से ही जाना जाता है. 

Pandey Family की Ownership 1933 में Grand Hotel✅
7 अक्टूबर 1933 को कुमाऊँ के प्रसिद्ध पांडे परिवार के Badri Dutt Pandey ने इस होटल को लगभग ₹60,000 (₹20.5 Crore Today) में खरीद लिया.....तब से आज तक यह होटल उसी परिवार की चौथी पीढ़ी द्वारा संचालित किया जा रहा है।

1976 की आग, When a part of the Grand Hotel Caught Fire 🔥
November 1976 में Grand Hotel के एक हिस्से में आग लग गई थी, जिससे लकड़ी का एक पूरा विंग नष्ट हो गया। लेकिन कड़ी मेहनत से उसे उसी सर्दियों में दोबारा बनाया गया और अगले tourist season में होटल फिर से खुल गया।

Famous Guests in Grand Hotel 💐
1.Pandit Jawaharlal Nehru
2. Dilip Kumar
3. Rajesh Khanna
4. Queen of Nepal (in the 1950s)

बताया जाता है कि फिल्म "Kati Patang 1970's" की शूटिंग के दौरान भी इस होटल का उपयोग किया गया था।

Interesting Facts ✅
यह नैनीताल का सबसे पुराना और अंग्रेजो के जमाने से लगातार संचालित (oldest continuously running) होटल माना जाता है....इसकी झील के सामने वाली लोकेशन इसे नैनीताल के सबसे Prestigious Heritage होटलों में शामिल करती है। Grand Hotel अपने Colonial Era की वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।

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