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अंग्रेजो का नैनीताल में आखिरी समय, Nainital Early 1940's ✅ दोस्तों 1944 आते-आते नैनीताल में अंग्रेजी हुकूमत की पकड़ ढीली पड़ने लगी थी। पूरे देश में आज़ादी की लहर तेज़ हो चुकी थी और उसका असर कुमाऊँ की वादियों तक साफ़ दिखाई देने लगा था। नैनीताल ही नहीं, बल्कि अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चंपावत के लोगों में भी आज़ादी का जोश चरम पर था। जगह-जगह सभाएँ होने लगीं, क्रांतिकारी गतिविधियाँ बढ़ने लगीं और अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज़ बुलंद होने लगी। सबसे दिलचस्प बात यह थी कि ऊधम सिंह नगर (तत्कालीन तराई क्षेत्र) से भी बड़ी संख्या में लोग नैनीताल पहुँचकर जुलूस और रैलियाँ निकालते थे। इसकी वजह साफ़ थी। उस समय नैनीताल पूरे कुमाऊँ में अंग्रेजों का सबसे बड़ा प्रशासनिक और सामाजिक केंद्र (Hub) था। यहाँ ब्रिटिश अधिकारी, बड़े व्यापारी और अंग्रेज परिवार बड़ी संख्या में रहते थे। 1947 तक नैनीताल में लगभग 40,000 अंग्रेज निवासी बताए जाते हैं। उन्होंने यहाँ luxurious bungalows, luxurious hotels, churches, schools, clubs और अनेक व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्थापित किए थे। गर्मियों में तो नैनीताल किसी छोटे से अंग्रेजी शहर जैसा दिखाई देता था। लेकिन इतिहास ने करवट ली क्योकि 15 अगस्त 1947 को भारत के स्वतंत्र होते ही अधिकांश अंग्रेज भारत छोड़ने लगे। कहा जाता है कि नैनीताल से लगभग 98% अंग्रेज आज़ादी के समय तक जा चुके थे। जो कुछ परिवार बचे, वे भी 1948 तक धीरे-धीरे यहाँ से चले गए। केवल बहुत कम संख्या में ब्रिटिश नागरिक भारत में रहे, जिनमें से कुछ को English-medium schools के प्रतिष्ठित विद्यालयों और अन्य संस्थानों के संचालन के लिए भारतीय सरकार ने अस्थायी रूप से कार्य जारी रखने की अनुमति दी। हालाँकि इतिहास का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह स्वीकार करना होगा कि आधुनिक नैनीताल की बुनियादी पहचान अंग्रेजी शासन के दौरान ही विकसित हुई। पहाड़ों को काटकर सड़कें बनाना, नैनीताल तक बिजली पहुँचाना, काठगोदाम तक रेलवे लाना, शानदार drainage system तैयार करना, व्यवस्थित बाज़ार बसाना, churches, schools, hospitalsऔर खूबसूरत colonial buildings बनाना, यह सब उसी दौर की देन है। यही कारण है कि इतिहासकार अक्सर कहते हैं कि ब्रिटिश काल का नैनीताल अपनी साफ़-सफाई, अनुशासित नगर व्यवस्था और वास्तुकला के कारण आज के नैनीताल से बिल्कुल अलग और बेहद आकर्षक दिखाई देता था। आज भी मॉल रोड, पुराने होटल, चर्च और अनेक ऐतिहासिक इमारतें उस दौर की कहानी सुनाती हैं। Follow Nainital Mania Page for Nainital History

Nainital, Nainital | Aug 12, 2026

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Nainital, Nainital | Aug 16, 2026

आजादी मिलने के दिन हमने Kayamoodin Watch Maker वाली building को हमेशा के लिए खो दिया ✅

नैनीताल के Mallital बाजार में स्थित यह 3rd Floor वाली building कभी अंग्रेजों के दौर की सबसे खास और भव्य buildings में गिनी जाती थी। उस समय के हिसाब से यह नैनीताल की बड़ी buildings में से एक थी..इस building के Top Floor और 2nd Floor पर अंग्रेज रहा करते थे, जबकि Basement में Kayamoodin साहब की मशहूर watch maker की shop हुआ करती थी।

लेकिन आजादी का जश्न शुरू होने से पहले ही इस Heritage Building के साथ एक ऐसा हादसा हुआ, जिसने नैनीताल के इतिहास में एक गहरी छाप छोड़ दी।

1946 को इसी Heritage Building में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने building को अपनी चपेट में ले लिया और नैनीताल ने अपनी एक ऐतिहासिक पहचान हमेशा के लिए खो दी।

हालांकि, इस building की याद आज भी नैनीताल में मौजूद है। आप इसे गोल घर के पास आज भी देख सकते हैं, लेकिन अब यह अपने पुराने रूप में नहीं, बल्कि एक नए रूप में नजर आती है।

एक ऐसी Heritage Building, जो कभी अंग्रेजों के दौर की शान हुआ करती थी, आज नैनीताल के बदलते इतिहास की एक खामोश गवाह बनकर खड़ी है...Sirajuddin ने इसे जलने के बाद दोबारा चार पांच महीने में तैयार करवाया था.

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Nainital, Nainital | Aug 16, 2026