श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम एवं समापन दिवस पर सुदामा चरित्र एवं व्यास पूजा का विशेष दर्शन कराया गया। इस अवसर पर हवन-यज्ञ का आयोजन भी किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने आहुति देकर सुख-शांति एवं लोकमंगल की कामना की।
कथा के सप्तम दिवस में सुदामा चरित्र ने श्रद्धालुओं को सच्चे मित्र प्रेम, निष्काम भाव और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण का भावुक संदेश दिया। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता यह सिखाती है कि सच्चा प्रेम धन-दौलत, पद और प्रतिष्ठा का मोहताज नहीं होता। बचपन का सखा जब द्वारका पहुंचा तो भगवान श्रीकृष्ण ने राजसी वैभव को छोड़कर अपने निर्धन मित्र का जिस आत्मीयता से स्वागत किया, वह मित्रता की मर्यादा और प्रेम की पराकाष्ठा का अनुपम उदाहरण है।
भागवत मर्मज्ञ तेजभूषण शास्त्री जी ने भागवत की विशेष व्याख्या करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मुक्ति का सबसे सहज और सरल साधन है। राजा परीक्षित ने सात दिनों तक भागवत श्रवण करके जीवन के अंतिम समय में भगवान की प्राप्ति की, इसलिए भागवत केवल कथा नहीं, बल्कि मनुष्य को संसार के बंधनों से मुक्त कर भगवान के चरणों तक पहुंचाने वाला दिव्य मार्ग है।
तेजभूषण शास्त्री जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा के सखा प्रेम को इतना ऊंचा स्थान दिया कि मित्र की गरीबी उन्हें दिखाई नहीं दी, उन्हें केवल प्रेम दिखाई दिया। सुदामा कुछ मांगने नहीं गए थे, लेकिन भगवान ने बिना मांगे ही उनके जीवन की दरिद्रता दूर कर दी। यही भगवान की भक्ति का रहस्य हैकृजहां मांग समाप्त होती है, वहां प्रेम आरंभ होता है और जहां प्रेम पूर्ण होता है, वहां भगवान स्वयं भक्त के हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता आज के समाज के लिए भी बड़ा संदेश है। सच्चा मित्र वही है जो सुख में साथ खड़ा होने के साथ-साथ दुख में हाथ थामे और मित्र की परिस्थिति देखकर उसके प्रति अपने प्रेम में कोई परिवर्तन न करे। भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा को यह संदेश दिया कि रिश्तों की पहचान वैभव से नहीं, हृदय के भाव से होती है।
कथा में व्यास पूजा का भी विशेष आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने व्यासपीठ का पूजन कर गुरु के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता प्रकट की। इस अवसर पर गुरु की महिमा बताते हुए कहा गया कि गुरु मनुष्य को केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि जीवन को सही दिशा देकर अज्ञान के अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। गुरु वह दीपक हैं, जो स्वयं जलकर शिष्य के जीवन को प्रकाशित करते हैं।
सप्तम दिवस के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर कथा श्रवण किया। पूरे कथा आयोजन में भक्ति, ज्ञान, प्रेम और संस्कार का सुंदर संगम देखने को मिला। हवन-यज्ञ एवं व्यास पूजा के साथ कथा का समापन लोककल्याण, परिवारों में सुख-शांति तथा समाज में प्रेम और सद्भाव की मंगलकामना के साथ हुआ।
इस अवसर पर कथा आयोजक शिक्षाविद त्रिलोकचंद गोयल, आनंद गोयल, डॉ संजय गोयल, डॉ पवन गोयल, सुमन गोयल, सीमा गोयल, भावना गोयल, समाजसेवी रमेश हेतमपुरिया जी, सज्जन अग्रवाल, मुकेश कुमार, सुधीर जालान जी, अजय बंसल, अजय जालान, सुन्दरलाल गोटेवाले, देवराज तोशामिया, नरेश गर्ग, शुभम सिंगला, सतीश गोयल, रवि गोयल, राहुल गोयल, निश्चल गोयल, ऐश्वर्या, मेघा, मुस्कान, साक्षी, श्री राम जी, संचित कुमार, विनय कुमार, प्रो. संजीव कुमार, अनिल तंवर, आयुश गोयल, पवन गर्ग, अमित कुमार, श्याम सुंदर शर्मा, समाजसेवी अशोक भारद्वाज, रामू जेवड़ी वाला सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति व श्रद्धालु मौजूद रहे।
Bhiwani, Bhiwani | Oct 2, 2026