कोडरमा बांझेडीह स्थित केटीपीएस से निकलने वाली फ्लाई ऐश से प्रदूषण की समस्या लगातार चर्चा
कोडरमा बांझेडीह स्थित केटीपीएस से निकलने वाली फ्लाई ऐश और उसकी ढुलाई को लेकर आसपास के इलाकों में प्रदूषण की समस्या लगातार चर्चा में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि राख लदे वाहनों की आवाजाही से सड़कों पर धूल और फ्लाई ऐश फैल रही है, जिससे राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हाल में चंदवारा के ग्रामीणों ने भी केटीपीएस से डस्ट लेकर आने वाले वाहनों के सर्विस लेन में खड़े किए जाने से उड़ने वाली धूल की समस्या को लेकर प्रशासन से समाधान की मांग की थी।फ्लाई ऐश के सुरक्षित परिवहन और प्रबंधन को लेकर सरकारी स्तर पर धूल नियंत्रण के उपायों, वाहनों को ढककर चलाने और राख को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से ले जाने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। वहीं, केटीपीएस से कंडीशंड फ्लाई ऐश उठाने और उसके परिवहन के लिए 2026 में टेंडर भी जारी किया गया था।इसके बावजूद स्थानीय लोगों का सवाल है कि अगर राख की ढुलाई के दौरान धूल सड़कों और आबादी तक पहुंच रही है, तो जिम्मेदारी किसकी है? लोगों का कहना है कि विकास और रोजगार जरूरी हैं, लेकिन उसकी कीमत आम जनता की सेहत और स्वच्छ वातावरण से नहीं चुकाई जानी चाहिए।वोट के समय विकास के वादे किए जाते हैं, लेकिन अब सवाल है—राख के इस गुबार में जनता की सांसों की कीमत कौन चुकाएगा? प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को फ्लाई ऐश के परिवहन, वाहनों को ढकने, सड़क की नियमित सफाई और धूल नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।