उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में नीलाम पत्र पदाधिकारियों (सर्टिफिकेट ऑफिसर) का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न; सरकारी बकाये की वसूली और नीलाम पत्र वादों के त्वरित निष्पादन हेतु अधिकारियों को दिए गए अहम निर्देश,
जिलाधिकारी, शिवहर के कड़े निर्देश और मार्गदर्शन में, जिले में लोक-माँगों और सरकारी राजस्व की ससमय वसूली सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उप विकास आयुक्त (डीडीसी), शिवहर की अध्यक्षता में आयोजित इस विशेष सत्र में जिले के सभी नीलाम पत्र पदाधिकारियों (सर्टिफिकेट ऑफिसर्स) को 'बिहार एवं उड़ीसा लोक-माँग वसूली अधिनियम एवं नियमावली' की विस्तृत जानकारी दी गई।
इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य सरकारी बकाये की वसूली में आने वाली तकनीकी और कानूनी बाधाओं को दूर करना तथा नीलाम पत्र वादों (Certificate Cases) की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं त्वरित बनाना था। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों को क़ानूनी प्रावधानों की बारीकियों से अवगत कराया गया। मुख्य रूप से निम्नलिखित अधिनियमों और नियमावलियों पर विस्तार से चर्चा की गई:
1. मूल अधिनियम: बिहार एवं उड़ीसा लोक माँग वसूली अधिनियम, 1914 के तहत कानूनी प्रक्रिया।
2. नियमावली: बिहार एवं उड़ीसा लोक मांग वसूली नियमावली का व्यावहारिक अनुप्रयोग।
3. राजस्व बोर्ड के प्रपत्र: अधिनियम की धारा 48 के अधीन राजस्व बोर्ड (Board of Revenue) द्वारा विहित नियमावली और आवश्यक प्रपत्रों (Forms) को भरने की सही विधि।
4. बोर्ड के अनुदेश: लोक मांग वसूली अधिनियम के अधीन राजस्व बोर्ड द्वारा समय-समय पर जारी किए गए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश और अनुदेश।
5. जमाकर्ताओं का संरक्षण: बिहार जमाकर्ताओं के हितों का संरक्षण (वित्तीय स्थापनाओं में) नियमावली, 2004 के तहत कार्रवाई और शक्तियां।
उप विकास आयुक्त ने प्रशिक्षण के दौरान स्पष्ट किया कि सरकारी राशि या लोक-माँग की वसूली प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से पदाधिकारियों को कानूनी पहलुओं में दक्ष किया गया है, ताकि सर्टिफिकेट वादों के निष्पादन में किसी भी प्रकार की प्रक्रियात्मक त्रुटि न हो और वादों का निपटारा तेजी से किया जा सके। इससे न केवल सरकारी राजस्व की शत-प्रतिशत वसूली सुनिश्चित होगी, बल्कि वित्तीय अनियमितताओं पर भी लगाम लगेगी।
इस उच्च स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में निदेशक (एन.ई.पी.)-सह-ज़िला नीलाम पत्र पदाधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त, जिले के विभिन्न विभागों से जुड़े सभी नीलाम पत्र पदाधिकारियों ने इस सत्र में भाग लिया और वसूली से जुड़ी अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त किया।