(महात्मा गांधी और दमोह का इतिहास, स्मृति शेष)
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 157वीं जयंती पर शत-शत पर उन्हें सादर नमन, विनम्र श्रद्धांजलि...🙏
महात्मा गांधी जी का जीवन सत्य, अहिंसा, स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और जनभागीदारी की ऐसी प्रेरणादायी यात्रा है, जिसने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को जन-जन का आंदोलन बनाया। उनका विश्वास था कि देश का निर्माण केवल सरकारों से नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी से होता है।
गांधी जी ने शिक्षा को केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और जिम्मेदार नागरिक तैयार करने का साधन माना। उनका संदेश था कि युवा केवल अपने अधिकारों के प्रति जागरूक न रहें, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को भी समझें।
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में गांधी जी का राजनीतिक जीवन सत्याग्रह, असहयोग और अहिंसक आंदोलनों के माध्यम से जनता को जोड़ने का उदाहरण रहा। उन्होंने कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान, सामाजिक एकता और स्वच्छता को भी राष्ट्र निर्माण से जोड़ा।
दमोह की धरती से भी गांधी जी की स्मृतियां जुड़ी हुई हैं। वर्ष 1933 में उनके दमोह आगमन ने यहां के सामाजिक जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव छोड़ा। और शहर के गडरयाउ मोहल्ला स्थित बाल्मिकी गुरुद्वारा की उन्होंने नींव रखी। उनके विचारों से प्रेरित होकर समाजसेवा और जनजागरण की अनेक गतिविधियों को नई दिशा मिली।
आज गांधी जयंती पर हमें उनके विचारों को केवल स्मरण करने के बजाय अपने आचरण में उतारने का संकल्प लेना चाहिए। स्वच्छता, सद्भाव, सत्य, अहिंसा और जनसेवा के माध्यम से ही हम एक मजबूत और समृद्ध भारत के निर्माण में अपना योगदान दे सकते हैं।
महात्मा गांधी जी को कोटि-कोटि नमन...🙏🇮🇳
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Damoh, Damoh | Oct 2, 2026