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इनर व्हील क्लब कुल्लू की अध्यक्ष पूनम शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि संस्था हर महीने कार्यक्रम करती है और सामाजिक क्षेत्र में जरूरतमंद लोगों की भी मदद उनकी ओर से की जा रही है इसी कड़ी में स्वतंत्रता दिवस और तीज के अवसर पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया इस कार्यक्रम में इनर व्हील क्लब की गतिविधियों के बारे में चर्चा की गई। Kullu Times

Kullu, Kullu | Aug 16, 2026

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वंदे मातरम गीत के प्रति कांग्रेस का व्यवहार निंदनीय - सुरेश चंदेल
कांग्रेस पार्टी और सोनिया गांधी का देश के प्रति अभद्र व्यवहार नहीं होगा बर्दाश्त। Kullu Times

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Kullu, Kullu | Aug 16, 2026

ढालपुर में आयोजित मॉनसून सॉकर फेस्ट 2026 का समापन नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष गोपाल कृष्ण महंत मुख्यतिथि के तौर पर उपस्थित, आयोजकों ने मुख्यातिथि को टोपी व पवित्र खताग और समृति चिन्ह भेंट कर स्वागत सम्मान किया गया इस दौरान मुख्यतिथि ने खिलाड़ियों को अपनी शुभकामनायें प्रेषित की। इस आयोजन में जिला कुल्लू के अनेकों गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे। Kullu Times

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Kullu, Kullu | Aug 16, 2026

कब तक असुरक्षित रज्जु मार्ग ट्रॉली पर टिकी रहेगी फलाचन घाटी की जिंदगी? झूला बना हादसों का रास्ता।

आजादी के दिन भी सुरक्षित रास्ते से महरूम दूर दराज क्षेत्र के लोग, 15 को अगस्त को स्कूल से लौट रही छात्रा की दो उंगलियां कटीं।

बेली ब्रिज बहने के एक साल बाद भी सुरक्षित अस्थाई पुल का इंतजार, स्थायी पुल अब भी दूर।

Kullu Times 

 जहां एक ओर पूरा देश 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस का उत्सव मना रहा था और आजादी की खुशियां बांट रहा था, वहीं बंजार उपमंडल की दूरदराज फलाचन घाटी में ग्रामीण आज भी अपनी बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षित आवाजाही के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्राम पंचायत मशियार के अंतर्गत फलाचन नदी पर सुरक्षित पुल न होने के कारण ग्रामीणों को जिस रज्जू मार्ग और लोहे की ट्रॉली के सहारे नदी पार करनी पड़ रही है, वह अब खुद हादसों का कारण बनता जा रहा है।

15 अगस्त को स्कूल से घर लौट रही बारहवीं कक्षा की छात्रा सलोचना ठाकुर की इस ट्रॉली से हाथ की दो उंगलियां बुरी तरह कटकर घायल हो गईं। बताया जा रहा है कि छात्रा स्कूल से घर लौटते समय रज्जू मार्ग से नदी पार कर रही थी, इसी दौरान उसके हाथ की दो उंगलियां रस्सी/ट्रॉली गरारी की व्यवस्था में फंस गईं और गंभीर रूप से घायल हो गईं। इससे पहले भी इसी स्थान पर एक महिला की उंगली रस्सी में फंसकर कटने की घटना सामने आ चुकी है।

बेली ब्रिज बहने के बाद रज्जू मार्ग बना मजबूरी.

ग्रामीणों के अनुसार दोगड़ा के पास फलाचन नदी पर बना बेली ब्रिज वर्ष 2025 की आपदा में बह गया था। इसके बाद ग्रामीणों की आवाजाही के लिए प्रशासन की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर रज्जू मार्ग और लोहे की ट्रॉली लगाई गई। शुरुआत में यह व्यवस्था लोगों के लिए मजबूरी में सहारा बनी, लेकिन अब यही व्यवस्था उनके लिए खतरे का कारण बनती जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि नदी के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने के लिए ट्रॉली को रस्सी के सहारे हाथों से खींचना पड़ता है। कई बार दूसरी तरफ ट्रॉली खींचने के लिए कोई व्यक्ति मौजूद नहीं होता। ऐसे में अकेले महिला, बच्चे, बुजुर्ग या मरीज के लिए नदी पार करना बेहद कठिन और जोखिम भरा हो जाता है।

हर दिन जान हथेली पर रखकर नदी पार कर रहे ग्रामीण.

फलाचन घाटी के कमेडा, मझली और मशियार सहित आसपास के गांवों के लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इसी रास्ते पर निर्भर हैं। स्कूली बच्चे पढ़ाई के लिए, महिलाएं दूध बेचने के लिए, किसान अपनी उपज लेकर और बुजुर्ग व मरीज इलाज के लिए इसी खतरनाक रास्ते से नदी पार करने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ उफनती फलाचन नदी है और दूसरी तरफ डगमगाती लोहे की ट्रॉली। ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। अब छात्रा की दो उंगलियां कटने की घटना ने इस व्यवस्था की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कुछ दिन पहले ही युवक मंडल ने डीसी को सौंपा था ज्ञापन.

इस समस्या को लेकर फलाचन वैली युवक मंडल, मशियार ने 1 अगस्त को उपायुक्त कुल्लू को ज्ञापन सौंपकर डोगड़ा स्थान पर जर्जर अस्थायी डिफी के स्थान पर तत्काल सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था करने तथा फलाचन नदी पर स्थायी पुल बनाने की मांग की थी।

युवक मंडल ने प्रशासन को चेताया था कि जर्जर व्यवस्था के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बाद इस समस्या को लेकर समाचार भी प्रकाशित हुआ। लेकिन कुछ ही दिनों बाद क्षेत्र में हुई भारी बारिश के कारण एक पुल और दो अस्थायी पुलिया भी बह गईं तथा ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई।

नए पुल की प्रक्रिया अभी भी टेंडर तक नहीं पहुंची.

लोक निर्माण विभाग बंजार की ओर से पहले ही बताया गया  है कि दोगड़ा में फलाचन नदी पर वाहन योग्य पुल के निर्माण को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना चरण-4 के तहत स्वीकृति मिल चुकी है। विभाग के अनुसार टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्थायी पुल का निर्माण शुरू हो सकेगा। नदी का जलस्तर कम होने पर अस्थायी पुल और अन्य सुरक्षा उपाय करने की बात भी कही गई थी।

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक स्थायी पुल का निर्माण शुरू नहीं होता, तब तक प्रशासन को लोगों की जान जोखिम में नहीं डालनी चाहिए और कम से कम सुरक्षित अस्थायी पैदल पुल की व्यवस्था करनी चाहिए।

ग्रामीणों ने उठाई तत्काल अस्थायी पुल की मांग.

स्थानीय निवासी मोती राम, पूर्ण चंद, भाग सिंह, तेजस्वी ठाकुर, अमर भारती, रुपेंद्र ठाकुर, नील चंद और हरीश ठाकुर सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तीनों गांवों के सैकड़ों लोगों की सुरक्षित आवाजाही के लिए फलाचन नदी पर तत्काल मजबूत अस्थायी पैदल पुल बनाया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि स्थायी पुल बनने में समय लग सकता है, लेकिन तब तक लोगों को इसी तरह जोखिम में छोड़ना उचित नहीं है। खासकर स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करना बेहद जरूरी है।

आजादी के अमृतकाल में सुरक्षित रास्ते की आस.

ग्रामीणों का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस पर देश विकास और तरक्की की बात करता है, लेकिन फलाचन घाटी के लोग आज भी एक सुरक्षित पुल जैसी मूलभूत सुविधा के लिए तरस रहे हैं। बच्चों को स्कूल जाने के लिए, महिलाओं को रोजी-रोटी के लिए और मरीजों को उपचार के लिए जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है।

छात्रा की दो उंगलियां कटने की घटना को ग्रामीण केवल एक हादसा नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही असुरक्षित व्यवस्था का परिणाम मान रहे हैं। उनका कहना है कि किसी बड़े हादसे या जनहानि का इंतजार करने के बजाय प्रशासन को अभी जागना होगा।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सुरक्षित अस्थायी पैदल पुल की व्यवस्था की जाए और स्थायी पुल का निर्माण कार्य प्राथमिकता के आधार पर जल्द शुरू कराया जाए, ताकि फलाचन घाटी के लोगों को सुरक्षित आवाजाही का मूलभूत अधिकार मिल सके।

कब तक असुरक्षित रज्जु मार्ग ट्रॉली पर टिकी रहेगी फलाचन घाटी की जिंदगी? झूला बना हादसों का रास्ता। आजादी के दिन भी सुरक्षित रास्ते से महरूम दूर दराज क्षेत्र के लोग, 15 को अगस्त को स्कूल से लौट रही छात्रा की दो उंगलियां कटीं। बेली ब्रिज बहने के एक साल बाद भी सुरक्षित अस्थाई पुल का इंतजार, स्थायी पुल अब भी दूर। Kullu Times जहां एक ओर पूरा देश 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस का उत्सव मना रहा था और आजादी की खुशियां बांट रहा था, वहीं बंजार उपमंडल की दूरदराज फलाचन घाटी में ग्रामीण आज भी अपनी बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षित आवाजाही के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्राम पंचायत मशियार के अंतर्गत फलाचन नदी पर सुरक्षित पुल न होने के कारण ग्रामीणों को जिस रज्जू मार्ग और लोहे की ट्रॉली के सहारे नदी पार करनी पड़ रही है, वह अब खुद हादसों का कारण बनता जा रहा है। 15 अगस्त को स्कूल से घर लौट रही बारहवीं कक्षा की छात्रा सलोचना ठाकुर की इस ट्रॉली से हाथ की दो उंगलियां बुरी तरह कटकर घायल हो गईं। बताया जा रहा है कि छात्रा स्कूल से घर लौटते समय रज्जू मार्ग से नदी पार कर रही थी, इसी दौरान उसके हाथ की दो उंगलियां रस्सी/ट्रॉली गरारी की व्यवस्था में फंस गईं और गंभीर रूप से घायल हो गईं। इससे पहले भी इसी स्थान पर एक महिला की उंगली रस्सी में फंसकर कटने की घटना सामने आ चुकी है। बेली ब्रिज बहने के बाद रज्जू मार्ग बना मजबूरी. ग्रामीणों के अनुसार दोगड़ा के पास फलाचन नदी पर बना बेली ब्रिज वर्ष 2025 की आपदा में बह गया था। इसके बाद ग्रामीणों की आवाजाही के लिए प्रशासन की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर रज्जू मार्ग और लोहे की ट्रॉली लगाई गई। शुरुआत में यह व्यवस्था लोगों के लिए मजबूरी में सहारा बनी, लेकिन अब यही व्यवस्था उनके लिए खतरे का कारण बनती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने के लिए ट्रॉली को रस्सी के सहारे हाथों से खींचना पड़ता है। कई बार दूसरी तरफ ट्रॉली खींचने के लिए कोई व्यक्ति मौजूद नहीं होता। ऐसे में अकेले महिला, बच्चे, बुजुर्ग या मरीज के लिए नदी पार करना बेहद कठिन और जोखिम भरा हो जाता है। हर दिन जान हथेली पर रखकर नदी पार कर रहे ग्रामीण. फलाचन घाटी के कमेडा, मझली और मशियार सहित आसपास के गांवों के लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इसी रास्ते पर निर्भर हैं। स्कूली बच्चे पढ़ाई के लिए, महिलाएं दूध बेचने के लिए, किसान अपनी उपज लेकर और बुजुर्ग व मरीज इलाज के लिए इसी खतरनाक रास्ते से नदी पार करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ उफनती फलाचन नदी है और दूसरी तरफ डगमगाती लोहे की ट्रॉली। ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। अब छात्रा की दो उंगलियां कटने की घटना ने इस व्यवस्था की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ दिन पहले ही युवक मंडल ने डीसी को सौंपा था ज्ञापन. इस समस्या को लेकर फलाचन वैली युवक मंडल, मशियार ने 1 अगस्त को उपायुक्त कुल्लू को ज्ञापन सौंपकर डोगड़ा स्थान पर जर्जर अस्थायी डिफी के स्थान पर तत्काल सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था करने तथा फलाचन नदी पर स्थायी पुल बनाने की मांग की थी। युवक मंडल ने प्रशासन को चेताया था कि जर्जर व्यवस्था के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बाद इस समस्या को लेकर समाचार भी प्रकाशित हुआ। लेकिन कुछ ही दिनों बाद क्षेत्र में हुई भारी बारिश के कारण एक पुल और दो अस्थायी पुलिया भी बह गईं तथा ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई। नए पुल की प्रक्रिया अभी भी टेंडर तक नहीं पहुंची. लोक निर्माण विभाग बंजार की ओर से पहले ही बताया गया है कि दोगड़ा में फलाचन नदी पर वाहन योग्य पुल के निर्माण को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना चरण-4 के तहत स्वीकृति मिल चुकी है। विभाग के अनुसार टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्थायी पुल का निर्माण शुरू हो सकेगा। नदी का जलस्तर कम होने पर अस्थायी पुल और अन्य सुरक्षा उपाय करने की बात भी कही गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक स्थायी पुल का निर्माण शुरू नहीं होता, तब तक प्रशासन को लोगों की जान जोखिम में नहीं डालनी चाहिए और कम से कम सुरक्षित अस्थायी पैदल पुल की व्यवस्था करनी चाहिए। ग्रामीणों ने उठाई तत्काल अस्थायी पुल की मांग. स्थानीय निवासी मोती राम, पूर्ण चंद, भाग सिंह, तेजस्वी ठाकुर, अमर भारती, रुपेंद्र ठाकुर, नील चंद और हरीश ठाकुर सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तीनों गांवों के सैकड़ों लोगों की सुरक्षित आवाजाही के लिए फलाचन नदी पर तत्काल मजबूत अस्थायी पैदल पुल बनाया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि स्थायी पुल बनने में समय लग सकता है, लेकिन तब तक लोगों को इसी तरह जोखिम में छोड़ना उचित नहीं है। खासकर स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करना बेहद जरूरी है। आजादी के अमृतकाल में सुरक्षित रास्ते की आस. ग्रामीणों का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस पर देश विकास और तरक्की की बात करता है, लेकिन फलाचन घाटी के लोग आज भी एक सुरक्षित पुल जैसी मूलभूत सुविधा के लिए तरस रहे हैं। बच्चों को स्कूल जाने के लिए, महिलाओं को रोजी-रोटी के लिए और मरीजों को उपचार के लिए जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है। छात्रा की दो उंगलियां कटने की घटना को ग्रामीण केवल एक हादसा नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही असुरक्षित व्यवस्था का परिणाम मान रहे हैं। उनका कहना है कि किसी बड़े हादसे या जनहानि का इंतजार करने के बजाय प्रशासन को अभी जागना होगा। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सुरक्षित अस्थायी पैदल पुल की व्यवस्था की जाए और स्थायी पुल का निर्माण कार्य प्राथमिकता के आधार पर जल्द शुरू कराया जाए, ताकि फलाचन घाटी के लोगों को सुरक्षित आवाजाही का मूलभूत अधिकार मिल सके।

Kullu, Kullu | Aug 16, 2026

वन अधिकार से पर्यावरण संरक्षण तक, सहारा के कार्यों को प्रशासन ने सराहा।

स्वतंत्रता दिवस समारोह में निदेशक राजेंद्र सिंह चौहान को प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित।

गांव, जंगल और नदी के अधिकारों की लड़ाई से लेकर आपदा राहत तक निभाई महत्वपूर्ण भूमिका।

सहारा संस्था के 25 साल की जनसेवा को मिला प्रशासन का सम्मान।

Kullu Times 

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के 80वें वर्ष के अवसर पर बंजार में आयोजित समारोह के दौरान सामाजिक संस्था सहारा (SAHARA) द्वारा लंबे समय से किए जा रहे जनहित, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक विकास के कार्यों को प्रशासन ने सराहा है। संस्था के निदेशक राजेंद्र सिंह चौहान को उनके नेतृत्व में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

यह सम्मान बंजार के उप-मंडलाधिकारी पंकज शर्मा द्वारा प्रदान किया गया। प्रशस्ति पत्र में वन अधिकार अधिनियम  2006 के क्रियान्वयन, पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक वन अधिकारों की रक्षा, स्थानीय समुदायों में जागरूकता पैदा करने तथा उप-मंडल स्तरीय समिति और जिला स्तरीय समिति  के साथ समन्वय के लिए सहारा के कार्यों की सराहना की गई है।

2000 से जनहित और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय.

सहारा की शुरुआत वर्ष 2000 के आसपास ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के साथ एक साझेदार संगठन के रूप में हुई। संस्था का उद्देश्य इकोज़ोन क्षेत्र में स्थानीय लोगों के लिए सतत आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना रहा। प्रारंभिक दौर में महिलाओं के बचत एवं ऋण समूहों को सहयोग देने के साथ संस्था ने समुदाय आधारित कार्यों की शुरुआत की।

वर्ष 2002 से 2004 के दौरान सहारा ने स्थानीय समुदाय और पूर्व विधायक दिलाराम शबाब के साथ मिलकर तीर्थन नदी को प्रस्तावित जलविद्युत परियोजनाओं से बचाने के लिए अभियान चलाया। संस्था इस मामले में शिमला उच्च न्यायालय में सह-याचिकाकर्ता भी रही।

वर्ष 2005 में सहारा ने सैंज-रोपा/साई रोपा में वर्ल्ड माउंटेन पीपल एसोसिएशन के सम्मेलन का आयोजन किया तथा सिक्किम में आयोजित सम्मेलन में भी भागीदारी की।

नेशनल पार्क की निहारनी जन सुनवाई में निभाई भूमिका.

वर्ष 2013-14 के दौरान सहारा ने स्थानीय समुदायों को उनके अधिकारों के प्रति संगठित करने तथा ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क क्षेत्र में विश्व धरोहर स्थल के गठन एवं प्रबंधन से जुड़े विषयों पर निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था के लिए UNESCO के साथ पैरवी और संवाद किया। संस्था के अनुसार, इन प्रयासों का एक प्रमुख परिणाम निहारनी जन सुनवाई के रूप में सामने आया।

वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन पर विशेष जोर.

वर्ष 2014 के बाद सहारा ने बंजार विकासखंड में वन अधिकार अधिनियम  2006 के क्रियान्वयन को अपने प्रमुख कार्यक्षेत्रों में शामिल किया। संस्था ने ग्रामीणों को वन अधिकारों के प्रति जागरूक करने, दावों की प्रक्रिया को समझाने तथा SDLC और DLC के साथ समन्वय एवं संवाद में सहयोग किया।

वर्तमान समय में भी वन अधिकार कानून के तहत ग्राम स्तर पर कार्य, वन अधिकार समितियों का गठन एवं प्रशिक्षण, सामुदायिक वन अधिकार  दावों की प्रक्रिया और देव स्थलों एवं वनों से संबंधित दस्तावेजीकरण जैसे कार्य किए जा रहे हैं।

सहारा के अनुसार वर्ष 2022-23 के दौरान ग्राम सभाओं को 24 सामुदायिक वन अधिकार दावों के अधिकार-पत्र प्राप्त हुए। संस्था ने CFR प्रक्रिया के तहत Google Earth के माध्यम से देव स्थलों की मैपिंग का कार्य भी किया। इसके अलावा वन अधिकार समितियों के गठन और क्षमता निर्माण के लिए प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं का आयोजन किया गया।

महिला सशक्तिकरण से लेकर सतत पर्यटन तक.

सहारा ने प्रारंभिक दौर से ही महिला बचत एवं ऋण समूहों को सहयोग देने के साथ महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यों में भागीदारी की। इसके साथ ही तीर्थन घाटी और आसपास के क्षेत्रों में सतत पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विज़न दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया में भी सहयोग किया गया।

संस्था द्वारा प्रशासन और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर क्षेत्र में निर्माण कार्यों को व्यवस्थित एवं विनियमित करने के विषय पर भी लगातार प्रतिनिधिमंडल, ज्ञापन और पत्राचार किए गए। इसके बाद चार पंचायतों द्वारा पंचायती राज अधिनियम, 1994 के तहत निर्माण कार्यों को विनियमित करने के लिए मॉडल प्लान तैयार किए जाने का उल्लेख संस्था के कार्य विवरण में किया गया है।

कोविड काल में प्रशासन के साथ किया सहयोग.

कोविड-19 महामारी के दौरान भी सहारा ने स्थानीय प्रशासन के सहयोग से स्वैच्छिक रूप से मास्क तैयार करने और उनके वितरण का कार्य किया। संस्था द्वारा प्रशासन और आम जनता के लिए मास्क, M-95 मास्क तथा सैनिटाइजर के वितरण में सहयोग किया गया। इसके साथ ही कोविड काल में वाहनों की आवाजाही और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन में भी स्थानीय प्रशासन को सहयोग देने की बात संस्था ने कही है।
इस दौरान पुलिस विभाग से मिले सहयोग को भी सहारा ने विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया और इसके लिए पुलिस विभाग का आभार व्यक्त किया।

बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री पहुंचाई.

वर्ष 2024-25 में आई भीषण बाढ़ के दौरान भी सहारा ने प्रभावित लोगों की सहायता के लिए कार्य किया। संस्था के अनुसार प्रभावित 33 घरों तक राहत पहुंचाने के साथ राशन, कंबल और तिरपाल जैसी आवश्यक सामग्री का वितरण किया गया।

इस प्रकार संस्था का कार्य केवल पर्यावरण और वन अधिकारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आपदा के समय जरूरतमंद परिवारों तक राहत पहुंचाने और सामुदायिक सहयोग में भी संस्था की भूमिका रही।

प्रशस्ति पत्र में प्रशासन ने की विशेष सराहना.

बंजार प्रशासन की ओर से जारी प्रशस्ति पत्र में कहा गया है कि सहारा के नेतृत्व में सामुदायिक वन अधिकारों की रक्षा, स्थानीय समुदायों में जागरूकता तथा SDLC और DLC के साथ समन्वय के माध्यम से दावों के निष्पक्ष एवं पारदर्शी निपटारे की दिशा में लगातार कार्य किया गया है।

प्रशस्ति पत्र में विशेष रूप से सामुदायिक वन संसाधन (CFR) दावों की मान्यता, वन अधिकार समितियों के गठन एवं सुदृढ़ीकरण, सतत पर्यटन और सामुदायिक कल्याण से जुड़े प्रयासों की सराहना की गई है। प्रशासन ने राजेंद्र सिंह चौहान के समर्पण और सेवा को सराहनीय बताते हुए इसे दूसरों के लिए प्रेरणादायक बताया।

सहारा ने प्रशासन और सहयोगियों का जताया आभार.

सम्मान मिलने के बाद सहारा ने संस्था के सभी शुभचिंतकों, सहयोगी साथियों, अधिकारियों, कर्मचारियों तथा प्रशासन का आभार व्यक्त किया। संस्था ने विशेष रूप से बंजार के एसडीएम पंकज शर्मा के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन द्वारा संस्था के वर्षों से किए जा रहे जनहित के कार्यों का मूल्यांकन कर सम्मानित किया जाना संस्था के लिए प्रोत्साहन का विषय है।

वन अधिकार से पर्यावरण संरक्षण तक, सहारा के कार्यों को प्रशासन ने सराहा। स्वतंत्रता दिवस समारोह में निदेशक राजेंद्र सिंह चौहान को प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित। गांव, जंगल और नदी के अधिकारों की लड़ाई से लेकर आपदा राहत तक निभाई महत्वपूर्ण भूमिका। सहारा संस्था के 25 साल की जनसेवा को मिला प्रशासन का सम्मान। Kullu Times 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के 80वें वर्ष के अवसर पर बंजार में आयोजित समारोह के दौरान सामाजिक संस्था सहारा (SAHARA) द्वारा लंबे समय से किए जा रहे जनहित, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक विकास के कार्यों को प्रशासन ने सराहा है। संस्था के निदेशक राजेंद्र सिंह चौहान को उनके नेतृत्व में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान बंजार के उप-मंडलाधिकारी पंकज शर्मा द्वारा प्रदान किया गया। प्रशस्ति पत्र में वन अधिकार अधिनियम 2006 के क्रियान्वयन, पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक वन अधिकारों की रक्षा, स्थानीय समुदायों में जागरूकता पैदा करने तथा उप-मंडल स्तरीय समिति और जिला स्तरीय समिति के साथ समन्वय के लिए सहारा के कार्यों की सराहना की गई है। 2000 से जनहित और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय. सहारा की शुरुआत वर्ष 2000 के आसपास ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के साथ एक साझेदार संगठन के रूप में हुई। संस्था का उद्देश्य इकोज़ोन क्षेत्र में स्थानीय लोगों के लिए सतत आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना रहा। प्रारंभिक दौर में महिलाओं के बचत एवं ऋण समूहों को सहयोग देने के साथ संस्था ने समुदाय आधारित कार्यों की शुरुआत की। वर्ष 2002 से 2004 के दौरान सहारा ने स्थानीय समुदाय और पूर्व विधायक दिलाराम शबाब के साथ मिलकर तीर्थन नदी को प्रस्तावित जलविद्युत परियोजनाओं से बचाने के लिए अभियान चलाया। संस्था इस मामले में शिमला उच्च न्यायालय में सह-याचिकाकर्ता भी रही। वर्ष 2005 में सहारा ने सैंज-रोपा/साई रोपा में वर्ल्ड माउंटेन पीपल एसोसिएशन के सम्मेलन का आयोजन किया तथा सिक्किम में आयोजित सम्मेलन में भी भागीदारी की। नेशनल पार्क की निहारनी जन सुनवाई में निभाई भूमिका. वर्ष 2013-14 के दौरान सहारा ने स्थानीय समुदायों को उनके अधिकारों के प्रति संगठित करने तथा ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क क्षेत्र में विश्व धरोहर स्थल के गठन एवं प्रबंधन से जुड़े विषयों पर निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था के लिए UNESCO के साथ पैरवी और संवाद किया। संस्था के अनुसार, इन प्रयासों का एक प्रमुख परिणाम निहारनी जन सुनवाई के रूप में सामने आया। वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन पर विशेष जोर. वर्ष 2014 के बाद सहारा ने बंजार विकासखंड में वन अधिकार अधिनियम 2006 के क्रियान्वयन को अपने प्रमुख कार्यक्षेत्रों में शामिल किया। संस्था ने ग्रामीणों को वन अधिकारों के प्रति जागरूक करने, दावों की प्रक्रिया को समझाने तथा SDLC और DLC के साथ समन्वय एवं संवाद में सहयोग किया। वर्तमान समय में भी वन अधिकार कानून के तहत ग्राम स्तर पर कार्य, वन अधिकार समितियों का गठन एवं प्रशिक्षण, सामुदायिक वन अधिकार दावों की प्रक्रिया और देव स्थलों एवं वनों से संबंधित दस्तावेजीकरण जैसे कार्य किए जा रहे हैं। सहारा के अनुसार वर्ष 2022-23 के दौरान ग्राम सभाओं को 24 सामुदायिक वन अधिकार दावों के अधिकार-पत्र प्राप्त हुए। संस्था ने CFR प्रक्रिया के तहत Google Earth के माध्यम से देव स्थलों की मैपिंग का कार्य भी किया। इसके अलावा वन अधिकार समितियों के गठन और क्षमता निर्माण के लिए प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। महिला सशक्तिकरण से लेकर सतत पर्यटन तक. सहारा ने प्रारंभिक दौर से ही महिला बचत एवं ऋण समूहों को सहयोग देने के साथ महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यों में भागीदारी की। इसके साथ ही तीर्थन घाटी और आसपास के क्षेत्रों में सतत पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विज़न दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया में भी सहयोग किया गया। संस्था द्वारा प्रशासन और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर क्षेत्र में निर्माण कार्यों को व्यवस्थित एवं विनियमित करने के विषय पर भी लगातार प्रतिनिधिमंडल, ज्ञापन और पत्राचार किए गए। इसके बाद चार पंचायतों द्वारा पंचायती राज अधिनियम, 1994 के तहत निर्माण कार्यों को विनियमित करने के लिए मॉडल प्लान तैयार किए जाने का उल्लेख संस्था के कार्य विवरण में किया गया है। कोविड काल में प्रशासन के साथ किया सहयोग. कोविड-19 महामारी के दौरान भी सहारा ने स्थानीय प्रशासन के सहयोग से स्वैच्छिक रूप से मास्क तैयार करने और उनके वितरण का कार्य किया। संस्था द्वारा प्रशासन और आम जनता के लिए मास्क, M-95 मास्क तथा सैनिटाइजर के वितरण में सहयोग किया गया। इसके साथ ही कोविड काल में वाहनों की आवाजाही और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन में भी स्थानीय प्रशासन को सहयोग देने की बात संस्था ने कही है। इस दौरान पुलिस विभाग से मिले सहयोग को भी सहारा ने विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया और इसके लिए पुलिस विभाग का आभार व्यक्त किया। बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री पहुंचाई. वर्ष 2024-25 में आई भीषण बाढ़ के दौरान भी सहारा ने प्रभावित लोगों की सहायता के लिए कार्य किया। संस्था के अनुसार प्रभावित 33 घरों तक राहत पहुंचाने के साथ राशन, कंबल और तिरपाल जैसी आवश्यक सामग्री का वितरण किया गया। इस प्रकार संस्था का कार्य केवल पर्यावरण और वन अधिकारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आपदा के समय जरूरतमंद परिवारों तक राहत पहुंचाने और सामुदायिक सहयोग में भी संस्था की भूमिका रही। प्रशस्ति पत्र में प्रशासन ने की विशेष सराहना. बंजार प्रशासन की ओर से जारी प्रशस्ति पत्र में कहा गया है कि सहारा के नेतृत्व में सामुदायिक वन अधिकारों की रक्षा, स्थानीय समुदायों में जागरूकता तथा SDLC और DLC के साथ समन्वय के माध्यम से दावों के निष्पक्ष एवं पारदर्शी निपटारे की दिशा में लगातार कार्य किया गया है। प्रशस्ति पत्र में विशेष रूप से सामुदायिक वन संसाधन (CFR) दावों की मान्यता, वन अधिकार समितियों के गठन एवं सुदृढ़ीकरण, सतत पर्यटन और सामुदायिक कल्याण से जुड़े प्रयासों की सराहना की गई है। प्रशासन ने राजेंद्र सिंह चौहान के समर्पण और सेवा को सराहनीय बताते हुए इसे दूसरों के लिए प्रेरणादायक बताया। सहारा ने प्रशासन और सहयोगियों का जताया आभार. सम्मान मिलने के बाद सहारा ने संस्था के सभी शुभचिंतकों, सहयोगी साथियों, अधिकारियों, कर्मचारियों तथा प्रशासन का आभार व्यक्त किया। संस्था ने विशेष रूप से बंजार के एसडीएम पंकज शर्मा के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन द्वारा संस्था के वर्षों से किए जा रहे जनहित के कार्यों का मूल्यांकन कर सम्मानित किया जाना संस्था के लिए प्रोत्साहन का विषय है।

Kullu, Kullu | Aug 16, 2026

ढालपुर में आयोजित मॉनसून सॉकर फेस्ट 2026 का समापन नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष गोपाल कृष्ण महंत मुख्यतिथि के तौर पर उपस्थित लाइव। Kullu Times

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