बच्चों की आवाज को मिला नया आत्मविश्वास, अमखेड़ा विद्यालय में विशेष स्पीच थेरेपी सेशन
माधौगढ़, जालौन। बच्चों की आवाज उनके शब्दों के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास और व्यक्तित्व की भी पहचान होती है। इसी सोच के साथ महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर विकासखंड माधौगढ़ के प्राथमिक विद्यालय अमखेड़ा में बोलने संबंधी कठिनाइयों से जूझ रहे बच्चों के लिए विशेष स्पीच थेरेपी सेशन आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य बच्चों को सहजता से बोलने, अपनी बात व्यक्त करने और आत्मविश्वास बढ़ाने में सहयोग देना रहा।
कार्यक्रम में गांव के ऐसे बच्चों और उनके अभिभावकों को आमंत्रित किया गया, जिन्हें तुतलाने, हकलाने, कम बोलने, शब्दों के स्पष्ट उच्चारण या अपनी बात कहने में कठिनाई होती है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक विपिन उपाध्याय ने बच्चों को बोलने से जुड़े सरल एवं उपयोगी अभ्यास कराए और अभिभावकों को घर पर नियमित अभ्यास कराने के तरीके भी बताए।
प्रधानाध्यापक विपिन उपाध्याय ने कहा कि बच्चों की बोलने संबंधी कठिनाइयों को समय रहते समझना और उन्हें सहयोग देना जरूरी है। विद्यालय की जिम्मेदारी केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे की जरूरत पहचानकर उसे आगे बढ़ने का अवसर देना भी है। धैर्य, प्रोत्साहन और नियमित अभ्यास से बच्चों के आत्मविश्वास को मजबूत किया जा सकता है।
सेशन के दौरान बच्चों के लिए सहज और अपनत्वपूर्ण वातावरण बनाया गया। शिक्षक श्याम जी ने बच्चों के साथ सक्रिय सहभागिता करते हुए विभिन्न अभ्यासों और गतिविधियों को रोचक बनाया। बच्चों ने उत्साह के साथ गतिविधियों में हिस्सा लिया और बिना झिझक बोलने का प्रयास किया।
कार्यक्रम में अभिभावक सोनू दुबे, सत्यनारायण दुबे, सुशील कुमार, जगमोहन, मुन्नी देवी, विनोद द्विवेदी, यश कुमार और पप्पू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं अभिभावक मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने विद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों की छोटी-छोटी कठिनाइयों को पहचानकर उनके समाधान के लिए प्रयास करना सराहनीय है। यह पहल सामान्य शिक्षण से आगे बढ़कर बच्चों के आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और अभिव्यक्ति के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम के माध्यम से संदेश दिया गया कि हर बच्चे की आवाज महत्वपूर्ण है। बोलने की कठिनाई किसी बच्चे की प्रतिभा और आत्मविश्वास के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए। अमखेड़ा विद्यालय की यह पहल शिक्षा को अधिक संवेदनशील, समावेशी और बाल-केंद्रित बनाने की दिशा में सार्थक प्रयास के रूप में सामने आई।
Orai, Jalaun | Oct 2, 2026