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💥 ऐतिहासिक कदम: उत्तराखंड में लागू हुई 'जियोथर्मल एनर्जी पॉलिसी 2025', धरती के भीतर की गर्मी से बनेगी बिजली! 💥 उत्तराखंड सरकार ने राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और प्राकृतिक संसाधनों के सही इस्तेमाल के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रदेश सरकार ने हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद प्राकृतिक गर्म जल स्रोतों (Hot Springs) के इस्तेमाल के लिए 'जियोथर्मल एनर्जी पॉलिसी 2025' (Geothermal Energy Policy 2025) लागू कर दी है। इस नई नीति का मुख्य मकसद बिजली उत्पादन, हीटिंग-कूलिंग सिस्टम और जल शुद्धिकरण जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को धरातल पर उतारना है। 🔥 चमोली के तपोवन में 10 मेगावाट प्रोजेक्ट पर काम शुरू! नीति लागू होते ही सरकार ने ज़मीनी स्तर पर काम भी शुरू कर दिया है: तपोवन में बड़ा पायलट प्रोजेक्ट: चमोली जिले के प्रसिद्ध तपोवन क्षेत्र में 10 मेगावाट की पायलट जियोथर्मल परियोजना के लिए अन्वेषण (Exploration) कार्य तेजी से शुरू कर दिया गया है। क्या है जियोथर्मल ऊर्जा?: धरती के भीतर मौजूद अत्यधिक गर्म भाप या प्राकृतिक गर्म पानी की ऊर्जा का उपयोग कर बिजली पैदा करना और अन्य उपयोग में लाना ही जियोथर्मल एनर्जी कहलाता है। ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता: सरकार का मानना है कि उत्तराखंड के पहाड़ों में छिपे इन गर्म झरनों का सही वैज्ञानिक इस्तेमाल राज्य को हरित और स्वच्छ ऊर्जा (Green Energy) के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगा। 🔥 देश का पहला राज्य बना उत्तराखंड — बीजेपी का दावा इस नीति की घोषणा के बाद राजनीतिक गलियारों में भी इसे एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है: बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता हनी पाठक ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य है, जिसने भू-तापीय ऊर्जा (Geothermal Energy) के उपयोग के लिए इतना ठोस और दूरदर्शी कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यह महत्वाकांक्षी योजना जल्द ही धरातल पर आकार लेगी और उत्तराखंड के विकास में मील का पत्थर (Milestone) साबित होगी। 💡 पहाड़ के विकास में कैसे बदलेगी तस्वीर? अगर यह प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो आने वाले समय में: पहाड़ी क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड के दौरान घरों और इमारतों को गर्म (Heating) रखने के सस्ते विकल्प मिलेंगे। स्थानीय स्तर पर ग्रीन एनर्जी का उत्पादन होगा, जिससे पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम होगी। पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए रोजगार और पर्यटन के नए अवसर खुलेंगे। 💬 आपकी राय और विचार पहाड़ों की प्राकृतिक गर्मी से बिजली बनाने की इस नई 'जियोथर्मल एनर्जी पॉलिसी 2025' पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि यह प्रोजेक्ट उत्तराखंड के लिए गेम-चेंजर साबित होगा? अपने विचार नीचे कमेंट में जरूर बताएं! उत्तराखंड के विकास से जुड़ी इस बड़ी और ज्ञानवर्धक खबर को अपने दोस्तों और स्टडी ग्रुप्स में शेयर करना न भूलें! 👍 #UttarakhandNews #GeothermalEnergy2025 #PushkarSinghDhami #ChamoliTapovan #GreenEnergy #UttarakhandDevelopment #DehradunNews #PublicAwareness

Uttarakhand, India | Jul 23, 2026

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किच्छा में देवभूमि पहाड़ी समाज की बैठक संपन्न, एकजुटता और उत्थान पर हुआ मंथन

किच्छा। देवभूमि पहाड़ी समाज को एकजुट करने, समाज के उत्थान और विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर मंथन को लेकर किच्छा में पहाड़ी समाज के लोगों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में समाज के वरिष्ठजन एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हुए। इस दौरान समाज के विकास, संगठन की मजबूती और आपसी एकता को लेकर उपस्थित लोगों ने अपने-अपने सुझाव रखे।

बैठक में समाज को संगठित करने के लिए सदस्यता अभियान चलाने तथा संगठन को गैर-राजनीतिक स्वरूप में आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। उपस्थित लोगों ने कहा कि समाज की एकजुटता के लिए सभी वर्गों और क्षेत्रों के लोगों को साथ लेकर चलना आवश्यक है। बैठक के दौरान समाज के उत्थान से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए, जिन पर आगामी बैठक में पुनः विचार-विमर्श किया जाएगा।

बैठक को फिलहाल ‘देवभूमि एकता मंच’ के रूप में आयोजित किया गया। संगठन के स्थायी नाम को लेकर चर्चा हुई और तय किया गया कि आगामी बैठक में शरद समिति की ओर से विचार-विमर्श के बाद संगठन के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। प्रस्तावित रूप से ‘देवभूमि पहाड़ी महासभा’ के नाम पर भी चर्चा हुई।

बैठक में कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में खेम सिंह बिष्ट, उपाध्यक्ष राजा भंडारी एवं प्रेम आर्य, सचिव कुंदन नेगी, उपसचिव प्रमोद और कोषाध्यक्ष नारायण कोरंगा की जिम्मेदारी तय की गई। मीडिया संयोजक की जिम्मेदारी लक्ष्मण सिंह, कैलाश चंद्र बिष्टानिया (कैलाश पंडित) को दी गई।

इसके अलावा संरक्षक मंडल में हरिश्चंद्र पंत, दिलीप सिंह बिष्ट, नारायण सिंह बिष्ट, कमलेंद्र सेमवाल, कमल धानक, नित्यानंद पालीवाल, बंशीधर जोशी, विनोद पंत, रमेश तिवारी गुड्डू सहित अन्य वरिष्ठ लोगों को शामिल किया गया।

बैठक में कमल धानक, नारायण सिंह बिष्ट, कमलेंद्र सेमवाल, विनोद कोरंगा, गुड्डू तिवारी, विनोद पंत, नवल शर्मा, संतोष अधिकारी, भूपेंद्र नेगी, दलीप सिंह बिष्ट, पुष्कर रौतेला, राजा भंडारी, भूपाल शाह, दलीप सिंह जीना, कैलाशी नरेंद्र टाकुली, गगन पंत, श्याम सिंह बिष्ट, प्रकाश पंत, मदन मोहन पांडे, जीवन जोशी, कैलाश जोशी, तनुजा बिष्ट, रेनू बिष्ट, मंजू मेहरा, आशा चंद, यमुना कांडपाल, दीपा भट्ट, पाठक, प्रकाश वोरा, चंदन पांडे, भुवन जोशी और गोपेश पंत सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

बैठक में सर्वसम्मति से समाज को मजबूत बनाने और भविष्य में व्यापक स्तर पर सदस्यता अभियान चलाकर अधिक से अधिक लोगों को संगठन से जोड़ने का निर्णय लिया गया। साथ ही समाज के हित में प्राप्त सुझावों पर आगामी बैठक में फिर से मंथन करने पर सहमति बनी।

किच्छा में देवभूमि पहाड़ी समाज की बैठक संपन्न, एकजुटता और उत्थान पर हुआ मंथन किच्छा। देवभूमि पहाड़ी समाज को एकजुट करने, समाज के उत्थान और विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर मंथन को लेकर किच्छा में पहाड़ी समाज के लोगों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में समाज के वरिष्ठजन एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हुए। इस दौरान समाज के विकास, संगठन की मजबूती और आपसी एकता को लेकर उपस्थित लोगों ने अपने-अपने सुझाव रखे। बैठक में समाज को संगठित करने के लिए सदस्यता अभियान चलाने तथा संगठन को गैर-राजनीतिक स्वरूप में आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। उपस्थित लोगों ने कहा कि समाज की एकजुटता के लिए सभी वर्गों और क्षेत्रों के लोगों को साथ लेकर चलना आवश्यक है। बैठक के दौरान समाज के उत्थान से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए, जिन पर आगामी बैठक में पुनः विचार-विमर्श किया जाएगा। बैठक को फिलहाल ‘देवभूमि एकता मंच’ के रूप में आयोजित किया गया। संगठन के स्थायी नाम को लेकर चर्चा हुई और तय किया गया कि आगामी बैठक में शरद समिति की ओर से विचार-विमर्श के बाद संगठन के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। प्रस्तावित रूप से ‘देवभूमि पहाड़ी महासभा’ के नाम पर भी चर्चा हुई। बैठक में कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में खेम सिंह बिष्ट, उपाध्यक्ष राजा भंडारी एवं प्रेम आर्य, सचिव कुंदन नेगी, उपसचिव प्रमोद और कोषाध्यक्ष नारायण कोरंगा की जिम्मेदारी तय की गई। मीडिया संयोजक की जिम्मेदारी लक्ष्मण सिंह, कैलाश चंद्र बिष्टानिया (कैलाश पंडित) को दी गई। इसके अलावा संरक्षक मंडल में हरिश्चंद्र पंत, दिलीप सिंह बिष्ट, नारायण सिंह बिष्ट, कमलेंद्र सेमवाल, कमल धानक, नित्यानंद पालीवाल, बंशीधर जोशी, विनोद पंत, रमेश तिवारी गुड्डू सहित अन्य वरिष्ठ लोगों को शामिल किया गया। बैठक में कमल धानक, नारायण सिंह बिष्ट, कमलेंद्र सेमवाल, विनोद कोरंगा, गुड्डू तिवारी, विनोद पंत, नवल शर्मा, संतोष अधिकारी, भूपेंद्र नेगी, दलीप सिंह बिष्ट, पुष्कर रौतेला, राजा भंडारी, भूपाल शाह, दलीप सिंह जीना, कैलाशी नरेंद्र टाकुली, गगन पंत, श्याम सिंह बिष्ट, प्रकाश पंत, मदन मोहन पांडे, जीवन जोशी, कैलाश जोशी, तनुजा बिष्ट, रेनू बिष्ट, मंजू मेहरा, आशा चंद, यमुना कांडपाल, दीपा भट्ट, पाठक, प्रकाश वोरा, चंदन पांडे, भुवन जोशी और गोपेश पंत सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। बैठक में सर्वसम्मति से समाज को मजबूत बनाने और भविष्य में व्यापक स्तर पर सदस्यता अभियान चलाकर अधिक से अधिक लोगों को संगठन से जोड़ने का निर्णय लिया गया। साथ ही समाज के हित में प्राप्त सुझावों पर आगामी बैठक में फिर से मंथन करने पर सहमति बनी।

Kichha, Udham Singh Nagar | Aug 16, 2026

गोला नदी में छात्र के बहने से हड़कंप, NDRF- SDRF का सघन रेस्क्यू अभियान जारी

शांतिपुरी। शांतिपुरी नंबर-4 के समीप गोला नदी में नहाने के दौरान 11वीं कक्षा के एक छात्र के तेज जलप्रवाह में बह जाने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन के साथ NDRF और SDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं और छात्र की तलाश में सघन खोज एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया।

जानकारी के अनुसार पंतनगर टा कॉलोनी निवासी मुन्ना चौहान का पुत्र पवन अपने मित्रों के साथ 15 अगस्त को सुबह 10 बजे के करीब शांतिपुरी क्षेत्र में गोला नदी में नहाने गया था। इसी दौरान अचानक पैर फिसलने से वह नदी के गहरे और तेज बहाव में चला गया तथा देखते ही देखते लापता हो गया। हादसे के बाद उसके साथ मौजूद दोस्तों में चीख-पुकार मच गई।
सूचना मिलते ही NDRF एवं SDRF के संयुक्त दल आवश्यक जीवनरक्षक उपकरणों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और नदी में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। नदी के तेज बहाव और अधिक गहराई के चलते रेस्क्यू टीम को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस एवं प्रशासन की टीमें भी नदी के किनारे और संभावित स्थानों पर लगातार खोजबीन कर रही हैं।
घटना की जानकारी मिलते ही पूर्व विधायक राजेश शुक्ला मौके पर पहुंचे और पवन के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह बेहद दुखद और हृदयविदारक घटना है। इस कठिन समय में हम पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं। छात्र की तलाश के लिए चलाए जा रहे रेस्क्यू अभियान में किसी भी स्तर पर कमी नहीं आने दी जाएगी और हरसंभव सहयोग किया जाएगा।
पूर्व विधायक ने मौके पर मौजूद संबंधित अधिकारियों से रेस्क्यू अभियान की प्रगति की जानकारी ली और अभियान को पूरी गंभीरता एवं तत्परता के साथ जारी रखने की बात कही। उन्होंने अधिकारियों से नदी के तेज बहाव और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों को देखते हुए सभी आवश्यक संसाधनों के साथ छात्र की तलाश में जुटे रहने का आग्रह किया।
इस दौरान NDRF एवं SDRF की टीमें तथा पंतनगर थानाध्यक्ष नंदन रावत के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर मौजूद रही। घटना के बाद क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल बना हुआ है तथा परिजन और स्थानीय लोग छात्र के सकुशल मिलने की प्रार्थना कर रहे हैं।

गोला नदी में छात्र के बहने से हड़कंप, NDRF- SDRF का सघन रेस्क्यू अभियान जारी शांतिपुरी। शांतिपुरी नंबर-4 के समीप गोला नदी में नहाने के दौरान 11वीं कक्षा के एक छात्र के तेज जलप्रवाह में बह जाने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन के साथ NDRF और SDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं और छात्र की तलाश में सघन खोज एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया। जानकारी के अनुसार पंतनगर टा कॉलोनी निवासी मुन्ना चौहान का पुत्र पवन अपने मित्रों के साथ 15 अगस्त को सुबह 10 बजे के करीब शांतिपुरी क्षेत्र में गोला नदी में नहाने गया था। इसी दौरान अचानक पैर फिसलने से वह नदी के गहरे और तेज बहाव में चला गया तथा देखते ही देखते लापता हो गया। हादसे के बाद उसके साथ मौजूद दोस्तों में चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही NDRF एवं SDRF के संयुक्त दल आवश्यक जीवनरक्षक उपकरणों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और नदी में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। नदी के तेज बहाव और अधिक गहराई के चलते रेस्क्यू टीम को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस एवं प्रशासन की टीमें भी नदी के किनारे और संभावित स्थानों पर लगातार खोजबीन कर रही हैं। घटना की जानकारी मिलते ही पूर्व विधायक राजेश शुक्ला मौके पर पहुंचे और पवन के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह बेहद दुखद और हृदयविदारक घटना है। इस कठिन समय में हम पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं। छात्र की तलाश के लिए चलाए जा रहे रेस्क्यू अभियान में किसी भी स्तर पर कमी नहीं आने दी जाएगी और हरसंभव सहयोग किया जाएगा। पूर्व विधायक ने मौके पर मौजूद संबंधित अधिकारियों से रेस्क्यू अभियान की प्रगति की जानकारी ली और अभियान को पूरी गंभीरता एवं तत्परता के साथ जारी रखने की बात कही। उन्होंने अधिकारियों से नदी के तेज बहाव और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों को देखते हुए सभी आवश्यक संसाधनों के साथ छात्र की तलाश में जुटे रहने का आग्रह किया। इस दौरान NDRF एवं SDRF की टीमें तथा पंतनगर थानाध्यक्ष नंदन रावत के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर मौजूद रही। घटना के बाद क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल बना हुआ है तथा परिजन और स्थानीय लोग छात्र के सकुशल मिलने की प्रार्थना कर रहे हैं।

Kichha, Udham Singh Nagar | Aug 16, 2026

💥 ऐतिहासिक कदम: उत्तराखंड में लागू हुई 'जियोथर्मल एनर्जी पॉलिसी 2025', धरती के भीतर की गर्मी से बनेगी बिजली! 💥 उत्तराखंड सरकार ने राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और प्राकृतिक संसाधनों के सही इस्तेमाल के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रदेश सरकार ने हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद प्राकृतिक गर्म जल स्रोतों (Hot Springs) के इस्तेमाल के लिए 'जियोथर्मल एनर्जी पॉलिसी 2025' (Geothermal Energy Policy 2025) लागू कर दी है। इस नई नीति का मुख्य मकसद बिजली उत्पादन, हीटिंग-कूलिंग सिस्टम और जल शुद्धिकरण जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को धरातल पर उतारना है। 🔥 चमोली के तपोवन में 10 मेगावाट प्रोजेक्ट पर काम शुरू! नीति लागू होते ही सरकार ने ज़मीनी स्तर पर काम भी शुरू कर दिया है: तपोवन में बड़ा पायलट प्रोजेक्ट: चमोली जिले के प्रसिद्ध तपोवन क्षेत्र में 10 मेगावाट की पायलट जियोथर्मल परियोजना के लिए अन्वेषण (Exploration) कार्य तेजी से शुरू कर दिया गया है। क्या है जियोथर्मल ऊर्जा?: धरती के भीतर मौजूद अत्यधिक गर्म भाप या प्राकृतिक गर्म पानी की ऊर्जा का उपयोग कर बिजली पैदा करना और अन्य उपयोग में लाना ही जियोथर्मल एनर्जी कहलाता है। ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता: सरकार का मानना है कि उत्तराखंड के पहाड़ों में छिपे इन गर्म झरनों का सही वैज्ञानिक इस्तेमाल राज्य को हरित और स्वच्छ ऊर्जा (Green Energy) के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगा। 🔥 देश का पहला राज्य बना उत्तराखंड — बीजेपी का दावा इस नीति की घोषणा के बाद राजनीतिक गलियारों में भी इसे एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है: बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता हनी पाठक ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य है, जिसने भू-तापीय ऊर्जा (Geothermal Energy) के उपयोग के लिए इतना ठोस और दूरदर्शी कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यह महत्वाकांक्षी योजना जल्द ही धरातल पर आकार लेगी और उत्तराखंड के विकास में मील का पत्थर (Milestone) साबित होगी। 💡 पहाड़ के विकास में कैसे बदलेगी तस्वीर? अगर यह प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो आने वाले समय में: पहाड़ी क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड के दौरान घरों और इमारतों को गर्म (Heating) रखने के सस्ते विकल्प मिलेंगे। स्थानीय स्तर पर ग्रीन एनर्जी का उत्पादन होगा, जिससे पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम होगी। पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए रोजगार और पर्यटन के नए अवसर खुलेंगे। 💬 आपकी राय और विचार पहाड़ों की प्राकृतिक गर्मी से बिजली बनाने की इस नई 'जियोथर्मल एनर्जी पॉलिसी 2025' पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि यह प्रोजेक्ट उत्तराखंड के लिए गेम-चेंजर साबित होगा? अपने विचार नीचे कमेंट में जरूर बताएं! उत्तराखंड के विकास से जुड़ी इस बड़ी और ज्ञानवर्धक खबर को अपने दोस्तों और स्टडी ग्रुप्स में शेयर करना न भूलें! 👍 #UttarakhandNews #GeothermalEnergy2025 #PushkarSinghDhami #ChamoliTapovan #GreenEnergy #UttarakhandDevelopment #DehradunNews #PublicAwareness - Uttarakhand News