#कहानी_बदलाव_की
बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर से बदली गिरराज धाकड़ की किस्मत, प्राकृतिक खेती से बने आत्मनिर्भरता के प्रतीक
स्थापित किया डाइजेस्टर बैग; जीवामृत प्रयोग से टमाटर की ली रिकॉर्ड पैदावार
शिवपुरी, 01 अक्टूबर 2026
रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों की बढ़ती लागत के बीच पारंपरिक खेती से सीमित आय प्राप्त होना आज कई किसानों की मुख्य चिंता है। शिवपुरी विकासखंड के ग्राम चंदनपुरा निवासी कृषक श्री गिरराज धाकड़ भी रासायनिक खेती की अधिक लागत और जमीन की घटती उर्वरता को लेकर निरंतर चिंतित रहते थे। कम लागत में गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित उपज प्राप्त करना उनके सामने एक बड़ी चुनौती थी।
श्री गिरराज धाकड़ के जीवन में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत तब हुई, जब वे किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन योजना तथा आत्मा परियोजना के अधिकारियों के संपर्क में आए। विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में उन्होंने रसायनों का त्याग कर पूर्णतः प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपनाने का संकल्प लिया। इसके अंतर्गत उनके प्रक्षेत्र पर बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर की स्थापना की गई, जहाँ से प्राकृतिक खाद और जीवामृत निर्माण की नींव रखी गई।
प्राकृतिक खेती को आधुनिक और सुलभ बनाने के लिए गिरराज धाकड़ ने आत्मा योजना के तहत अपने फार्म पर विशेष डाइजेस्टर बैग लगवाया। वे बताते हैं कि इस बैग में गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी के घोल के साथ-साथ खेत के सड़े-गले अवशेष (जैसे टमाटर व सब्जियों के अपशिष्ट) को डाला जाता है, जिससे लगभग 40 दिनों में अत्यंत प्रभावी द्रव जीवामृत तैयार होता है। इस डाइजेस्टर बैग का दोहरा लाभ यह है कि इससे उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक उर्वरक और कीटनाशक के साथ-साथ मीथेन गैस भी बनती है, जिसका उपयोग वे अपने घर के चूल्हे में रसोई ईंधन के रूप में कर रहे हैं। इससे कचरा प्रबंधन के साथ-साथ घरेलू ईंधन का खर्च भी बच रहा है।
जीवामृत का प्रयोग, टमाटर की रिकॉर्ड उपज और बाजार में सीधी पहुँच
प्राप्त प्रशिक्षण और सहयोग से गिरराज धाकड़ ने जीवामृत निर्माण की विधि को पूरी तरह आत्मसात किया। उन्होंने अपने खेत में तैयार जीवामृत को ड्रिप व सिंचाई के पानी के माध्यम से फसलों में देकर टमाटर का रिकॉर्ड उत्पादन शुरू किया। इस नवाचार के परिणामस्वरूप जहाँ खाद-कीटनाशक का खर्च शून्य हो गया, वहीं फसल की गुणवत्ता और वृद्धि में अप्रत्याशित सुधार हुआ। उत्पादित टमाटरों के विक्रय के लिए उन्होंने जिले में प्रति रविवार को लगने वाले साप्ताहिक प्राकृतिक/जैविक हाट बाजार को जरिया बनाया, जहाँ बिचौलियों के बिना सीधे उपभोक्ताओं को उत्पाद बेचकर उन्हें बेहतरीन मुनाफा प्राप्त हो रहा है।
बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर के माध्यम से अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा
आज गिरराज धाकड़ सिर्फ खुद एक सफल प्राकृतिक कृषक नहीं हैं, बल्कि उनका बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर आसपास के दर्जनों गाँवों के किसानों के लिए एक मॉडल फार्म और प्रशिक्षण केंद्र बन चुका है। वे अन्य किसानों को भी जीवामृत बनाने और प्राकृतिक खेती अपनाने हेतु प्रेरित कर सुरक्षित व रसायनमुक्त कृषि उत्पादों के उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निरीक्षण, सराहना और आभार व्यक्त
परियोजना संचालक आत्मा श्री मुनेश कुमार शाक्य द्वारा ग्राम चंदनपुरा पहुँचकर श्री गिरराज धाकड़ के बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर एवं मॉडल प्राकृतिक फार्म का विस्तृत निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने उनके द्वारा अपनाई गई जीवामृत निर्माण विधि, डाइजेस्टर बैग के उपयोग, टमाटर की प्राकृतिक फसल तथा साप्ताहिक हाट बाजार में सुलभ विक्रय व्यवस्था के प्रयासों की जमकर सराहना की। इस अवसर पर कृषक गिरराज धाकड़ ने कृषि विभाग, आत्मा परियोजना और जिला प्रशासन शिवपुरी के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासकीय सहयोग ने उनके कृषि व्यवसाय को एक नई दिशा और पहचान दी है।
PMO India
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