*पांचवीं ‘मंजूषा हटिया’ में लोककला और स्थानीय हुनर की रही धूम, 20 हजार रुपये से अधिक की कलाकृतियों की हुई बिक्री*
भागलपुर, 06 अक्टूबर 2026।
अंग प्रदेश की समृद्ध लोक परंपरा और प्राचीन लोकचित्रकला ‘मंजूषा कला’ के संरक्षण, संवर्धन एवं कलाकारों को बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भागलपुर संग्रहालय परिसर में आयोजित पांचवीं ‘मंजूषा हटिया सह लोक कला प्रदर्शनी’ आज उत्साहपूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुई। कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार, जिला कला एवं संस्कृति कार्यालय, भागलपुर तथा भागलपुर संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय कलाकारों, कला प्रेमियों, आम नागरिकों एवं युवाओं ने भाग लिया। पूरे परिसर में दिनभर मेले जैसा माहौल बना रहा।
कार्यक्रम का उद्घाटन अलंकृता पाण्डेय, भा.प्र.से., जिला पदाधिकारी, भागलपुर ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर अंकित रंजन, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी, भागलपुर, मंजूषा कला से जुड़े वरिष्ठ एवं युवा कलाकार राजीवकांत मिश्रा, मनोज पंडित, उलूपी झा सहित बड़ी संख्या में कलाकार, कला प्रेमी एवं आमजन उपस्थित रहे।
मंजूषा हटिया में स्थानीय कलाकारों द्वारा तैयार की गई विभिन्न प्रकार की कलाकृतियों एवं हस्तशिल्प उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री की गई। इस दौरान 20 हजार रुपये से अधिक मूल्य की कलाकृतियों एवं हस्तनिर्मित सामग्री की बिक्री हुई। इस बार मंजूषा कला के पारंपरिक स्वरूप के साथ-साथ कलाकारों द्वारा किए जा रहे नए प्रयोग विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। मंजूषा टी-शर्ट, स्क्रीन प्रिंटिंग से तैयार कपड़े, जूट से बने क्राफ्ट वर्क, साड़ियां, दुपट्टे, रुमाल, बैग, मंजूषा शो-पीस, सजावटी पंखे सहित अनेक उपयोगी एवं सजावटी वस्तुओं को लोगों ने खूब पसंद किया और खरीदा।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण बाढ़ राहत शिविर में रहने वाले बच्चों द्वारा तैयार की गई मंजूषा कलाकृतियों की प्रदर्शनी रही। इन बच्चों ने राहत शिविर में आयोजित कला गतिविधियों के दौरान मंजूषा कला के माध्यम से अपनी रचनात्मकता को अभिव्यक्त किया था। जिला पदाधिकारी अलंकृता पाण्डेय ने बच्चों द्वारा बनाई गई एक मंजूषा कलाकृति को स्वयं खरीदकर उनका उत्साहवर्धन किया। इस पहल से बच्चों में अपनी कला एवं प्रतिभा के प्रति आत्मविश्वास बढ़ा और उपस्थित लोगों को भी यह संदेश मिला कि कला विषम परिस्थितियों में भी बच्चों के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और रचनात्मकता का संचार कर सकती है।
इस अवसर पर जिला पदाधिकारी अलंकृता पाण्डेय ने मंजूषा हटिया की पहल की सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय कला एवं कलाकारों को सीधे बाजार से जोड़ने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण और सराहनीय नवाचार है। उन्होंने कहा कि कला केवल प्रदर्शनी तक सीमित न रहे, बल्कि कलाकारों को उनके उत्पादों का उचित बाजार और व्यापक ग्राहक वर्ग उपलब्ध हो, इस दिशा में निरंतर प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने डिजिटल मार्केट एवं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से मंजूषा कलाकारों और उनके उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि मंजूषा जैसी लोककलाओं को नई पीढ़ी से जोड़ते हुए आधुनिक माध्यमों और बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप नए प्रयोग किए जाने चाहिए, ताकि कलाकारों को कला के माध्यम से स्थायी आर्थिक अवसर प्राप्त हो सकें।
जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने कहा कि मंजूषा हटिया का आयोजन प्रत्येक माह प्रथम रविवार को भागलपुर संग्रहालय परिसर में किया जाता है। इस बार प्रथम रविवार को जितिया पर्व होने के कारण मंजूषा हटिया का आयोजन मंगलवार को किया गया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल कलाकृतियों की बिक्री करना नहीं है, बल्कि मंजूषा कलाकारों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना, कलाकारों के बीच संवाद एवं अनुभवों का आदान-प्रदान बढ़ाना और स्थानीय कला को आम लोगों के जीवन से जोड़ना भी है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक आयोजन के साथ नए कलाकार जुड़ रहे हैं और नए दर्शक भी पहुंच रहे हैं। कलाकार पारंपरिक मंजूषा कला के साथ नए माध्यमों और नए उत्पादों पर प्रयोग कर रहे हैं। मंजूषा हटिया कलाकारों के लिए एक प्रकार का गेट-टुगेदर भी बन गया है, जहां वरिष्ठ कलाकार युवा कलाकारों से मिलते हैं, उनके कार्यों को देखते हैं और उन्हें मार्गदर्शन मिलता है। इससे कलाकारों में आत्मविश्वास बढ़ रहा है तथा वे आर्थिक रूप से भी सबल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन स्थानीय कलाकारों के लिए कला, संवाद और बाजार—तीनों को एक साथ उपलब्ध कराने का कार्य कर रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान आम्रपाली कला प्रशिक्षण केंद्र, भागलपुर के बच्चों द्वारा जिला पदाधिकारी एवं उपस्थित अतिथियों के समक्ष मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुति भी दी गई। बच्चों की प्रस्तुति ने आयोजन में सांस्कृतिक रंग भर दिया और उपस्थित दर्शकों ने तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।
मंजूषा हटिया की एक और विशेषता यह रही कि कलाकारों ने स्वयं दूसरे कलाकारों की कलाकृतियां खरीदकर एक-दूसरे की प्रतिभा का सम्मान किया। इससे कलाकारों के बीच सहयोग, आत्मीयता एवं सामूहिकता की भावना मजबूत हुई। कई कलाकारों ने अपने साथियों की कलाकृतियों को खरीदकर यह संदेश दिया कि स्थानीय कला के संरक्षण और कलाकारों के आर्थिक सशक्तीकरण की जिम्मेदारी केवल प्रशासन या खरीदारों की ही नहीं, बल्कि कलाकार समुदाय की भी सामूहिक जिम्मेदारी है।
आयोजन में बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने अपनी पसंद के अनुसार मंजूषा टी-शर्ट, रुमाल, साड़ी, दुपट्टा, शो-पीस, पंखा, बैग एवं अन्य हस्तनिर्मित सामग्री खरीदी। पारंपरिक कला को आधुनिक उपयोगी वस्तुओं के रूप में प्रस्तुत करने के प्रयास को लोगों ने विशेष रूप से पसंद किया। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि मंजूषा कला को समकालीन जीवनशैली से जोड़कर नए बाजार की संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं।
इस अवसर पर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत टाउन हॉल में नाटक की प्रस्तुति देने वाले 35 कलाकारों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन द्वारा कलाकारों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। इस सम्मान से कलाकारों का उत्साहवर्धन हुआ तथा कला एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय योगदान देने वाले कलाकारों के प्रति जिला प्रशासन एवं कला एवं संस्कृति विभाग की प्रतिबद्धता भी प्रदर्शित हुई।
पांचवीं मंजूषा हटिया के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली कुमारी श्वेता, वरिष्ठ मंजूषा कलाकार एवं संयोजक, तथा सुरभि सुमन, युवा मंजूषा कलाकार एवं संयोजक को जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अंकित रंजन ने कहा कि कुमारी श्वेता एवं सुरभि सुमन ने आयोजन की तैयारियों एवं कलाकारों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दोनों संयोजकों ने लगातार प्रयास करते हुए कई नए कलाकारों को भी मंजूषा हटिया से जोड़ा है, जिसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ और युवा कलाकारों का इस प्रकार मिलकर कार्य करना मंजूषा कला के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है।
मंजूषा कलाकारों ने आयोजन के सफल संचालन एवं कलाकारों को मंच तथा बाजार उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन, भागलपुर तथा कला एवं संस्कृति विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। कलाकारों ने कहा कि नियमित रूप से आयोजित होने वाली मंजूषा हटिया के कारण उन्हें अपनी कला प्रदर्शित करने, नए ग्राहकों से जुड़ने और अपनी रचनाओं को बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन ने यह संदेश दिया कि लोककला का संरक्षण केवल उसके पारंपरिक स्वरूप को बचाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे कलाकारों की आजीविका, नए प्रयोग, आधुनिक बाजार और नई पीढ़ी से जोड़ना भी उतना ही आवश्यक है। मंजूषा हटिया इसी दिशा में भागलपुर की लोककला एवं कलाकारों को एक मजबूत मंच प्रदान करने की निरंतर पहल है।
जिला जन-सम्पर्क कार्यालय,
भागलपुर
Information & Public Relations Department, Government of Bihar
2 views | Bhagalpur, Bihar | Oct 6, 2026