🔸51 शक्तिपीठों के शक्ति धाम प्रकल्प से देश में आध्यात्मिक चेतना का होगा विस्तार- विधानसभा अध्यक्ष श्री तोमर
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🔸आध्यात्मिकता और धार्मिक संस्कारों से सशक्त होगा राष्ट्र- उपमुख्यमंत्री श्री शुक्ल
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🔸दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन, वक्ताओं ने 51 शक्तिपीठों को एक साथ मूर्त रूप देने के प्रकल्प को बताया राष्ट्र की आध्यात्मिक विरासत को सशक्त बनाने वाला महत्वपूर्ण कदम
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🔸उज्जैन, 9 अक्टूबर। देवी के प्रमुख 51 शक्तिपीठों पर आधारित शक्ति धाम प्रकल्प भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाने की व्यापक परिकल्पना है। यह प्रकल्प देशभर के लोगों को प्रेरणा देने के साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। महान उद्देश्य की पूर्ति के लिए ज्ञान को साधना में ढालना और आध्यात्मिक ऊर्जा को समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाना आवश्यक है।
,🔸यह विचार मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को श्री बालमुकुंद आश्रम, झालरिया मठ में 51 शक्तिपीठों पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन अवसर पर व्यक्त किए। शक्ति धाम न्यास, संस्कृति विभाग, मध्य प्रदेश शासन तथा कालिदास संस्कृत अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष श्री तोमर ने कहा कि नवरात्रि के प्रारंभ होने से पहले मां भगवती का स्मरण करते हुए देवी के 51 शक्तिपीठों की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में विचार-विमर्श करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। शक्ति की आराधना, श्रद्धापूव्रक स्मरण और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं का अध्ययन हमारे जीवन को सार्थक, प्रेरणास्पद और सुगम बनाता है। उन्होंने कहा कि केवल ज्ञान प्राप्त कर लेना ही पर्याप्त नही है, बल्कि उस ज्ञान को साधना और व्यवहार में उतारकर अपने जीवन, देश की प्रगति तथा समाज के कल्याण के लिए उपयोग करना आवश्यक है। 51 शक्तिपीठों की परिकल्पना को मूर्त रूप देने के लिए सभी प्रयासरत हैं। दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के माध्यम से इस विषय से जुड़े गूढ़ रहस्यों और आध्यात्मिक पहलुओं को समझने का अवसर मिला है। यह पहल स्वागत योग्य है। जब यह प्रकल्प साकार होगा, तब देशभर के श्रद्धालुओं को प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी के सामूहिक प्रयासों से इस महत्वपूर्ण प्रकल्प को पूर्णता प्रदान की जाएगी। समापन कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक बटुकों द्वारा स्वस्तिवाचन के साथ हुआ। अतिथियों का परिचय कालिदास संस्कृत अकादमी के निदेशक श्री गोविंद गंधे ने दिया। दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का प्रतिवेदन शक्ति धाम न्यास के सचिव श्री राकेश शर्मा ने प्रस्तुत किया।
🔸आध्यात्मिकता और धार्मिक संस्कारों से सशक्त होगा राष्ट्र- उपमुख्यमंत्री श्री शुक्ल
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी अध्यात्मपरक परंपरा, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत में निहित है। देश में आध्यात्मिकता का विकास आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढिय़ों में धार्मिक चेतना, मानवीय संवेदनाओं और सेवा के संस्कारों का विकास हो सके। इन संस्कारों से प्रेरित होकर युवा पीढ़ी पीडि़त मानवता की सेवा में अपना योगदान दे सकेगी। उन्होंने कहा कि धर्म और आध्यात्म के क्षेत्र में भारत की विशिष्ट पहचान है। भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक ज्ञान के प्रति विश्वभर में सम्मान का भाव है। धार्मिक परंपराएं समाज को नैतिक मूल्यों, सदाचार और मानव कल्याण की प्रेरणा देती है। श्री शुक्ल ने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जहां-जहां माता सती के शरीर के अंग गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई। नर्मदा नदी के किनारे देवी के 51 शक्तिपीठों को एक साथ स्थापित करने की परिकल्पना साकार होने से श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर सभी शक्तिपीठों के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो सकेगा। इससे देश में धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक चेतना को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकल्प के अंतर्गत भव्य भवन का निर्माण और संकल्प की पूर्णता हम सभी का सामूहिक दायित्व है। इस पुनीत कार्य में योगदान देने का अवसर मिलना सौभाग्य की बात होगी। शक्ति धाम प्रकल्प विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने तथा भारत को सनातन धर्म और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में और अधिक सशक्त बनाने में योगदान देगा।
🔸भारत की आध्यात्मिक परंपरा विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है-श्री भैयाजी जोशी
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री सुरेश उपाख्य भैयाजी जोशी ने कहा कि 51 शक्तिपीठ शक्तिधाम प्रकल्प को साकार करने के संकल्प के साथ सभी यहां से जाएंगे। यह हम सभी का सौभाग्य है कि भारत में हो रहे महत्वपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों के साक्षी बन रहे है। उन्होंने कहा कि भारत की भूमि देवभूमि, पुण्यभूमि और तपस्वियों की साधना भूमि है। यहां ऋषि-मुनियों ने साधना और चिंतन के माध्यम से मानवता को मार्गदर्शन प्रदान किया है। भारत की पहचान यहां के तीर्थस्थलों, मंदिरों, मठों, धार्मिक यात्राओं, मेलों और साधु-संतों की परंपरा से है। यह भूमि महापुरुषों, चिंतकों और महान विचारकों की कर्मभूमि रही है। भारत का चिंतन शाश्वत है और समस्त मानवता के कल्याण की भावना से प्रेरित है। श्री जोशी ने कहा कि विश्व में भारत की प्रासंगिकता कभी समाप्त नही हो सकती। देश को ऐसा समाज बनाना होगा, जो दुर्बल नहीं, बल्कि शक्ति-संपन्न हो और विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने में सक्षम हो। महान ऋषि-मुनियों के योगदान तथा समग्र दृष्टिकोण पर आधारित भारतीय शास्त्र परंपरा ने भारत को विश्व में विशिष्ट स्थान प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति को विशेष सम्मान प्राप्त है। देवी शक्ति के प्रति करोड़ों लोगों की श्रद्धा और आस्था भारतीय समाज की सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण आधार है। शक्ति की उपासना समाज को सामथ्र्य, संरक्षण और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। 51 शक्तिपीठों पर आधारित शक्तिधाम प्रकल्प इसी आध्यात्मिक चेतना को व्यापक स्वरूप प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
कार्यक्रम में संत समाज के अध्यक्ष संत श्री रितेश दास महाराज, सिंहस्थ केंद्रीय समिति के पूर्व अध्यक्ष श्री मखन सिंह चौहान, महापौर श्री मुकेश टटवाल, मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष श्री ओम जैन, सिंहस्थ प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री जगदीश अग्रवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कमला कुंवर तथा जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती शिवानी कुंवर मंचासीन रहे। इस अवसर पर मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष श्री सौभाग्य सिंह, शक्तिधाम न्यास के अध्यक्ष श्री प्रशांत हरतालकर, श्री विभाष उपाध्याय, श्री सुरेश गिरी, नगर निगम के पूर्व अध्यक्ष श्री सोनू गेहलोत, कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज, एमआईसी सदस्य श्री शिवेंद्र तिवारी, श्री रघुवीर सिंह, श्री केतन भाई, श्री दिनेश गौतम, श्री आदित्य अग्रवाल, श्री प्रशांत त्रिपाठी और श्री अरुण व्यास सहित गणमान्य नागरिक, वैदिक बटुक तथा आमंत्रित वक्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन श्री दीपक उपाध्याय ने किया तथा आभार प्रदर्शन श्री राधेश्याम गुरुजी ने किया। कार्यक्रम के अंत में विश्व कल्याण की कामना के साथ सामूहिक शक्तिपाठ किया गया। इसके पश्चात वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ।
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CM Madhya Pradesh JDjansampark Ujjain
Rajendra Shukla
PRO Ujjain
Umaria, Madhya Pradesh | Oct 9, 2026