भैरव कृषि अकादमी में प्रेरणादायी कृषि संगोष्ठी, मुख्य अतिथि धर्म सिंह मीणा ने दिए सफलता के मूल मंत्र
गंगापुर सिटी शहर की प्रतिष्ठित भैरव कृषि अकादमी में शुक्रवार को प्रेरणादायी कृषि संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संयुक्त निदेशक कृषि करौली धर्म सिंह मीणा, विशिष्ट अतिथि के रूप में उप निदेशक कृषि चेतराम मीणा एवं अध्यक्षता सहायक कृषि अधिकारी पिंटू मीणा पहाड़ी ने की।
संगोष्ठी में व्याख्याता, लेखक एवं समाजसेवी तथा हिमानी धर्मार्थ संस्था नादौती के शैलेंद्र कुमार मीणा मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कृषि विद्यार्थियों के साथ शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, कृषि क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं और भविष्य की चुनौतियों को लेकर सार्थक संवाद किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती व महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री के चित्रपट समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। अकादमी के निदेशक मनोज कमालपुरा एवं विक्रम ने सभी अतिथियों का माला एवं साफा पहनाकर स्वागत एवं सम्मान किया। इस दौरान छात्र-छात्राओं द्वारा बीच-बीच में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए। विद्यार्थियों ने राजस्थानी लोकगीत, स्वागत गीत एवं देशभक्ति से ओतप्रोत मनमोहक प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में उत्साह और ऊर्जा का संचार कर दिया।
मुख्य अतिथि धर्म सिंह मीणा ने अपने उद्बोधन में कहा कि कृषि का दायरा अब बहुत बढ़ चुका है। कृषि अब केवल हल और खेत तक सीमित नहीं रही है। आज कृषि अनुसंधान, कृषि अधिकारी, उद्यान विभाग, पशुपालन, कृषि व्यवसाय, बैंकिंग, कृषि बीमा, कृषि तकनीक और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगार के हजारों अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि भैरव कृषि अकादमी की छात्र-छात्राओं में काफी प्रतिभा है, आवश्यकता है सही दिशा और निरंतर कठोर परिश्रम की। लक्ष्य बड़ा रखो तो सफलता अवश्य मिलेगी। उन्होंने महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री के विचारों पर भी प्रकाश डाला
विशिष्ट अतिथि चेतराम मीणा ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए पाठ्यक्रम को गहराई से समझना और निरंतर दोहराव करना सबसे आवश्यक है। बिना योजना के की गई तैयारी अधूरी रह जाती है।
वहीं कार्यक्रम अध्यक्ष पिंटू मीणा पहाड़ी सहायक कृषि अधिकारी ने कहा कि असफलता से घबराना नहीं चाहिए। जीवन में असफलता ही सफलता की पहली सीढ़ी है। असफल होने पर लक्ष्य नहीं, बल्कि अपनी कार्ययोजना बदलनी चाहिए। निरंतर प्रयास करने वाला विद्यार्थी एक दिन अवश्य सफल होता है।
मुख्य वक्ता के रूप में शैलेंद्र कुमार मीणा ने विद्यार्थियों को सफलता के पाँच मूल मंत्र दिए। उन्होंने कहा- पहला, अपना लक्ष्य निर्धारित कीजिए और लक्ष्य के अनुसार ही तैयारी कीजिए। दूसरा, पुस्तक को अपना सबसे अच्छा साथी और ज्ञान को अपनी सबसे बड़ी शक्ति बनाइए। तीसरा, प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए प्रतिदिन थोड़ा नहीं, बल्कि प्रतिदिन बेहतर बनने का प्रयास कीजिए। चौथा, आप केवल अपने भविष्य के लिए नहीं पढ़ रहे हैं, बल्कि किसान, कृषि और समाज के भविष्य को सशक्त बनाने के लिए तैयार हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कृषि विद्यार्थी होना कमजोरी नहीं, बल्कि देश के भविष्य को दिशा देने की बड़ी जिम्मेदारी है। आज परिश्रम कीजिए ताकि कल आपको अवसर खोजने की आवश्यकता न पड़े, बल्कि अवसर स्वयं आपकी प्रतीक्षा करें।
इस अवसर पर कृषि विभाग से सहायक कृषि अधिकारी मनोज कमालपुरा, सहायक कृषि अनुसंधान अधिकारी विक्रम, सी.एल. मीणा मण्डावरा, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद से डॉ. विक्रम मीणा, राजस्थान सामान्य ज्ञान विशेषज्ञ बी.एस. जोरवाल, नन्हे-मुन्ने छात्र भुवनेश सेमाड़ा सहित अकादमी के समस्त अध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में कृषि विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में अकादमी निदेशक मनोज कमालपुरा एवं समस्त कर्मचारी साथियों ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भैरव कृषि अकादमी आगे भी विद्यार्थियों के हित में इस प्रकार की प्रेरणादायी संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी।