*गुलामी का प्रतीक इंडिया अब गर्व से भारत बोलो, हिंदी हो हमारी राष्ट्रभाषा-आचार्य पुलकसागर*
*जिस देश को अपनी भाषा एवं सभ्यता संस्कृति पर गर्व नहीं होता उसे गुलाम होने से कोई नहीं रोक सकता*
*चित्रकूटधाम में आचार्य पुलकसागरजी के देश भक्ति के पैगाम से हुआ ज्ञान गंगा महोत्सव का भव्य आगाज*
भीलवाड़ा:निलेश काठेड़ ( वरिष्ठ पत्रकार), 16 अगस्त। धर्मनगरी भीलवाड़ा में श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से भीलवाड़ा में पहली बार पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज के सानिध्य में 30 अगस्त तक चलने वाले ज्ञान गंगा महोत्सव का भव्य आगाज राष्ट्रीय पर्व स्वाधीनता दिवस पर जश्ने आजादी के साथ हुआ। नगर निगम के चित्रकूटधाम में करीब तीन घंटे तक चले इस आयोजन में आचार्यश्री के मुखारबिंद से राष्ट्र भक्ति की भावना जागृत करने वाला प्रेरणादायी उद्बोधन हुआ तो देशभक्ति के भावों से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुई। पूरा पांडाल राष्ट्रभक्ति के रंगों में रंगा नजर आया। पहले ही दिन हजारों श्रद्धालु ज्ञान की गंगा में डूबकी लगाने पहुंचे। आचार्य पुलकसागर महाराज ने 80वें स्वाधीनता दिवस का संदेश देते हुए कहा कि स्वाधीनता दिवस के अवसर पर आज तीन प्रश्नों का उत्तर खोजने की जरूरत है जब हमारा देश आजाद हो चुका तो अब नाम इंडिया क्यों है, हमारे देश की भाषा क्या है ओर हमारी सभ्यता, संस्कृति व परिधान क्या है। यदि देश का नाम भारत है तो आजादी के इतने वर्ष बाद भी इंडिया क्यो बोलते है। मैं 80 वर्ष के इंडिया को फिर से भारत बनाने का प्रयास करना चाहता हूं। इंडिया गुलामी के दिन याद दिलाता है ओर भारत बोलते है तो ऋषभदेव पुत्र भरत, शकुन्तला पुत्र भरत ओर दशरथ पुत्र भरत की याद आती है। गुलामी के प्रतीक इंडिया शब्द का बहिष्कार कर गर्व से भारत बोलो। उन्होंने भाषागत गुलामी से बचने का आह्वान करते हुए कहा कि हमारे नेता वोट तो हमारी भाषा में मांगते ओर संसद में अंग्रेजी बोलते है। देश में मराठी, गुजराती, तमिल, बंगाली सहित 18 भाषाएं है ओर सभी हमारी माताएं है पर इन माताओं के माथे की बिंदी हिंदी है। अंग्रेजी वैश्विक भाषा ओर व्यापार की भाषा हो सकती पर राष्ट्रभाषा हिंदी ही हो सकती है। हिंदी हमारे रिश्तों ओर दिलों की भाषा है पर अफसोस आजादी के 80 वर्ष बाद भी उसे राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं मिल पाया है, उसकी प्राण प्रतिष्ठा होनी चाहिए। आचार्य पुलकसागर ने कहा कि जिस देश के लोगों को अपनी भाषा,नाम, सभ्यता, संस्कृति, परिधान, रीति रिवाज पर गर्व नहीं होता उसे गुलाम होने से कोई नहीं रोक सकता। हमे इंडिया में फिर से भारत की स्थापना करनी है तो संस्कृति के नाम पर वेलेन्टाइन डे ओर रोज डे को छोड़ राम नवमी, रक्षाबंधन, दीपावली ओर महावीर जयंति जैसे पर्व मनाने है। उन्होंने कहा कि भारत भूमि को नमन करते हुए कहा कि यही एक मात्र ऐसा देश है जहां जन्म लेने को देवता भी तरसते है। दुनिया में भारत जैसा कोई देश नहीं जिसे माता कहकर बुलाते हो। आचार्य पुलकसागर महाराज ने कश्मीर में धारा 370 समाप्त करने का जिक्र करते हुए कहा कि देश को आजादी 1947 मंें मिल गई पर कश्मीर को वास्तविक आजादी 2019 में धारा 370 हटाने से मिली। कश्मीर भारत मां की मांग का सिंदूर है जिसे कोई नहीं छीन सकता। भारत अब बदल चुका है ओर बदला लेना जानता है। आज का भारत किसी को छेड़ता नहीं है ओर कोई छेड़ दे तो उसे छोड़ता नहीं है। आचार्य पुलकसागर महाराज ससंघ के सानिध्य में जश्ने आजादी में दस ग्रुपों ने राष्ट्रभक्ति के जज्बे से ओतप्रोत एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी तो पांडाल भारत माता की जय ओर जय हिंद के उद्घोष से गूंजायमान हो उठा। प्रस्तुतियां इतनी राष्ट्रीय के भावों से भरपुर थी कि निर्णायकों के लिए विजेताओं का चयन करना आसान नहीं रहा। इस प्रतियोगिता में प्रथम संभव ग्रुप, द्वितीय भारत की बेटियां ग्रुप एवं तृतीय आजादी की वीरांगना ग्रुप रहा। विजेता ग्रुप को चातुर्मास समिति द्वारा नगद पुरस्कार से सम्मानित किया गया। आयोजन के शुरू में ध्वजारोहण सांसद दामोदर अग्रवाल ने किया। आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन एवं श्रीफल समर्पित कर अभिनंदन भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशान्त मेवाड़ा, पूर्व विधायक विट्ठलशंकर अवस्थी ने किया। अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा आदि पदाधिकारियों ने किया। संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया। राजस्थान के उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने शनिवार दोपहर सूर्यमहल पहुंचकर वहां विराजित राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। बैरवा ने आचार्यश्री से विभिन्न विषयों पर धर्म चर्चा भी की।
*प्रेम को बना ले जीवन का महामंत्र जीने का आनंद आ जाएगा*
ज्ञान गंगा महोत्सव में रविवार सुबह आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि हमारे पास सब कुछ है फिर भी घर में सुख शांति नहीं है, सब कुछ सेट है पर दिमाग अपसेट है। उस दिमाग को सेट करने के लिए ज्ञान गंगा महोत्सव प्रारंभ किया है। यहां ज्ञान की नहीं प्रेम की गंगा बहाने आया हूं। घर को स्वर्ग बनाना है ओर जीने का आनंद उठाना है तो प्रेम को जीवन का महामंत्र बना ले। प्रेम के महामंत्र को जपने की नहीं जीने की जरूरत है। प्रेम के ढाई अक्षर को जीवन का आधार बनो ले। उन्होंने जीवन में प्रेम का महत्व समझाते हुए कहा कि प्रेम की भाषा इंसान ही नहीं जानवर भी समझ जाते है। हर तरफ प्रेम की बांसुरी बजनी चाहिए। घर में पैसा, संपति सब कुछ होकर भी प्रेम नहीं बचा तो दुनिया जीने लायक नहीं रहेगी। जिस घर में प्रेम होता है वहां 90 वर्ष का बुर्जुग भी जीने की कामना करता है ओर जहां प्रेम का अभाव हो जाता है वहां 20 वर्ष का युवा भी आत्महत्या कर लेता है। आचार्यश्री ने कहा कि जहां प्रेम प्रगाढ़ होता है वहां वाणी मौन हो जाती है। हर घर के आंगन में प्रेम का पौधा लगना चाहिए ओर उसमें समझदारी रूपी एक लौटा जल रोजाना डालना चाहिए। उन्होंने कहा कि घरों में प्रेम बढ़ाने के लिए सप्ताह में एक बार ओर संभव नहीं हो तो कम से कम माह में एक बार सभी सदस्य साथ बैठकर भोजन करे। प्रवचन के प्रारंभ में दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के सदस्यों ने प्राप्त किया। इनमें समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह, सह संयोजक लोकेश अजमेरा, महामंत्री जयकुमार पाटनी आदि शामिल थे। विशिष्ट अतिथि दिल्ली से आए हंसकुमार जैन, दीपेश जैन एवं इन्दौर के नेमीचंद जैन का स्वागत चातुर्मास समिति द्वारा किया गया। श्री पार्श्वनाथ महिला मण्डल की सदस्यों ने स्वागत नृत्य की प्रस्तुति दी। ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत 30 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10 बजे तक चित्रकूटधाम में प्रवचन होंगे। है। शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है जिसमें भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे है।