सभी को सेवा जोहार
खजुराहो भोरमदेव मंदिर अलगी ही एक कहानी है प्राकृतिक के गोद मे बसा कलाकृती दशाता है
कवर्धा जिला के भोरमदेव मंदिर इस मंदिर का नाम गोंड राजाओं के कुलदेवता 'भोरमदेव' के नाम पर पड़ा है, जो कि भगवान शिव का ही एक रूप माने जाते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, गोंड आदिवासियों की अगाध आस्था के कारण इस मंदिर को यह नाम मिला। इतिहास के पन्नों को पलटें तो यह मंदिर 11वीं शताब्दी (सन 1089) का है। इसे फणि नागवंश के राजा रामचंद्र देव ने बनवाया था। चारों ओर मैकल पर्वत श्रृंखलाओं से घिरे इस मंदिर की दीवारों पर खजुराहो जैसी अद्भुत शिल्पकला उकेरी गई है, इसीलिए इसे 'छत्तीसगढ़ का खजुराहो' भी कहा जाता है।
कालांतर मे कुछ मूर्तिया हटाकर गणेश जी की मूर्तिया लगा दी गई है
ये सातवी से दसवी सदी तक का प्रणाम मिलता है
इस पे सभी अधिकार जताने की कोशिश कर रहे है वहा पुजारी तक ब्राह्मण बैठा के रख दिया है
आदिवासीयो के भावना हो को आहात पहचाने वाली कृतघट रहे है
जमी
Korba, Korba | Oct 7, 2026