*शासकीय कन्या उमावि राजपुर में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस आयोजित*
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*बड़वानी जिले में 5.54 लाख से अधिक बच्चों को कृमिनाशक दवा खिलाने का लक्ष्य*
बड़वानी 06 अक्टूबर 2026/राजपुर के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आज राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. अतुल राठौर, डीपीएम मनीष भद्रावले और डीसीएम अशोक कनाड़े ने स्कूली बच्चों को कृमिनाशक दवा खाने के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी।
डॉ. अतुल राठौर ने बताया कि कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में 1 से 19 वर्ष आयु वर्ग के 5.54 लाख से अधिक हितग्राहियों को कृमिनाशक दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह अभियान 6 अक्टूबर को राष्ट्रीय कृमिमुक्ति दिवस के रूप में चलाया जा रहा है।
*9 अक्टूबर को मॉप-अप दिवस*
अभियान के दौरान किसी कारणवश दवा सेवन से छूटे हुए हितग्राहियों को कवर करने के लिए आगामी 9 अक्टूबर 2026 को मॉप-अप दिवस आयोजित किया जाएगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों एवं प्रजनन आयु वर्ग की गैर-गर्भवती महिलाओं में कृमि संक्रमण की रोकथाम एवं नियंत्रण सुनिश्चित करना तथा उन्हें स्वस्थ एवं बेहतर जीवन प्रदान करना है।
*विभिन्न विभागों का समन्वय*
इस अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के आपसी समन्वय से शासकीय विद्यालयों, निजी स्कूलों, आंगनवाड़ी केन्द्रों और अन्य लक्षित संस्थानों में पात्र हितग्राहियों को निर्धारित कृमिनाशक दवा का सेवन कराया जा रहा है। आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम, सीएचओ, शिक्षक और अन्य मैदानी स्वास्थ्यकर्मी इस अभियान में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
*बच्चों को कृमिनाशक दवा खिलाना क्यों जरूरी है?* आंतों के कृमि बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और उनके शारीरिक व मानसिक विकास को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। कृमि शरीर के आवश्यक पोषक तत्वों का उपयोग कर लेते हैं, जिससे बच्चों में पेट दर्द, भूख में कमी, कमजोरी, थकान, खून की कमी (एनीमिया), कुपोषण और विकास रुकने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यह संक्रमण बच्चों की पढ़ाई, एकाग्रता और दैनिक गतिविधियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इसलिए स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में कृमिनाशक दवा का सेवन बेहद आवश्यक है।
*कृमिनाशक दवा के प्रमुख लाभ-*
ऽ बच्चों को कृमि संक्रमण से बचाना एवं संक्रमण के स्तर को कम करना।
ऽ शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण में सुधार कर शारीरिक विकास को बढ़ावा देना।
ऽ पढ़ाई, एकाग्रता और विद्यालयीन उपस्थिति पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को कम करना।
ऽ समुदाय में कृमि संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने में सहयोग देना
*संक्रमण से बचाव के लिए स्वच्छता है जरूरी*
कृमि संक्रमण से बचाव के लिए केवल दवा का सेवन ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्वच्छता भी उतनी ही आवश्यक है। बच्चों को खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोने, साफ पानी पीने, नाखून छोटे व साफ रखने, खुले में शौच से बचने, फल-सब्जियों को अच्छी तरह धोकर खाने तथा भोजन को हमेशा ढककर रखने की आदत डालनी चाहिए।
अभिभावकों से अपील है कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनके बच्चे स्वच्छ वातावरण में रहें और स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्धारित दिवस पर कृमिनाशक दवा का सेवन अवश्य करें, ताकि कोई भी पात्र हितग्राही इस महत्वपूर्ण अभियान के लाभ से वंचित न रहे।