
500 का डस्टबिन 15 हजार में कैसे? बिहार में उठे घोटाले के सवाल पर अधिकारियों का सीधा जवाब।
बिहार की सियासत में इन दिनों स्वास्थ्य विभाग की एक खरीद को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। विपक्ष ने सरकार पर 'डस्टबिन घोटाले' का गंभीर आरोप लगाया है।
📌 क्या है पूरा मामला?
विपक्ष का सीधा आरोप है कि बाजार में जो सामान्य डस्टबिन मात्र ₹500 से ₹1,500 में मिलते हैं, उन्हें स्वास्थ्य विभाग ने ₹11,000 और ₹15,490 प्रति पीस के हिसाब से खरीदा है। राजद नेत्री रोहिणी आचार्य और अन्य विपक्षी नेताओं ने इसे सरकारी खजाने का भारी दुरुपयोग बताया है।
📌 विभाग का क्या है तर्क?
इस बड़े विवाद के बाद एक्शन मोड में आए अधिकारियों (BMSICL) ने अपनी तरफ से स्थिति स्पष्ट की है। उनका कहना है कि:
🔹 ये कोई म्युनिसिपल या घरों में इस्तेमाल होने वाले सामान्य कूड़ेदान नहीं हैं।
🔹 ये अस्पतालों के लिए खास माइक्रोवेव और ऑटोक्लेव-सेफ बायोमेडिकल कंटेनर हैं।
🔹 इन्हें इंफेक्शन रोकने और हाई टेम्परेचर सहने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है, इसलिए इनकी तकनीकी लागत ज्यादा है।
📌 आगे क्या?
सत्ता पक्ष का साफ कहना है कि सिर्फ सोशल मीडिया पर बयानबाजी से भ्रष्टाचार साबित नहीं होता, यदि कोई अनियमितता है तो CAG (कैग) की रिपोर्ट में सब साफ हो जाएगा।
🗣️ आपकी क्या राय है?
क्या आपको लगता है कि विशेष तकनीक के नाम पर इतनी कीमत चुकाना सही है या यह वाकई एक बड़ा घोटाला है? अपनी बेबाक राय नीचे कमेंट्स में जरूर बताएं! 👇
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