
भरतपुर: पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह की पोस्ट से सियासी हलचल, पार्टी नेतृत्व पर साधा निशाना
पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर एक भावुक और तल्ख पोस्ट साझा कर पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने लिखा कि उन्होंने जीवन में हमेशा अपने इष्ट गिरिराज महाराज और अंतरात्मा की आवाज सुनकर ही फैसले लिए हैं।
विश्वेंद्र सिंह ने पोस्ट में कहा कि कुछ “छुटभैये और तथाकथित नेताओं” द्वारा दिए गए अनर्गल बयानों से उनके कार्यकर्ताओं में आक्रोश है और उनका अंतरमन भी दुखी एवं व्यथित है। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी के लिए उन्होंने अपना जीवन न्यौछावर कर दिया, यदि उसी पार्टी ने उनकी निष्ठा, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता का यह सिला दिया है तो वे अंदर से बहुत आहत हुए हैं।
उन्होंने अपने मान-सम्मान और स्वाभिमान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने कभी अपने उसूलों और आदर्शों से समझौता नहीं किया। साथ ही मौजूदा “चापलूसी की परंपरा” को लेकर कार्यकर्ताओं में नाराजगी की बात कही।
विश्वेंद्र सिंह ने लिखा कि यदि सच को सच कहना और गलत व झूठ का साथ नहीं देना पाप है, तो वे यह काम हर बार करेंगे। उन्होंने कहा, “मैं न गलत करता हूं, न ही गलत सहन करता हूं।”
पोस्ट में उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन को जनता की देन बताते हुए कहा कि उनका जीवन खुली किताब और बेदाग है। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं, मतदाताओं, क्षेत्रवासियों और प्रदेशवासियों के लिए जीवन समर्पित करने की बात कही।
सबसे अहम बात में विश्वेंद्र सिंह ने लिखा कि “ऐसी परिस्थिति में दम घुटने से मरने के बजाय स्वाभिमान की मौत मरना बेहतर है” और अपने पुरखों के सिद्धांतों का अनुसरण करते हुए पार्टी नेतृत्व को “अलविदा” कहने में ही अपनी भलाई समझते हैं।
उन्होंने अंत में लिखा कि शायद अब वे पार्टी की “गलत रीति-नीति” के साथ कदमताल नहीं कर पाएंगे। पोस्ट के साथ उन्होंने राहुल गांधी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, अशोक गहलोत, सचिन पायलट, गोविंद सिंह डोटासरा और टीकाराम जूली को भी टैग किया है।
विश्वेंद्र सिंह की इस पोस्ट के बाद राजस्थान कांग्रेस, खासकर भरतपुर की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हालांकि, पोस्ट में उन्होंने औपचारिक रूप से पार्टी छोड़ने की घोषणा की है या यह नाराजगी के बीच दिया गया राजनीतिक संदेश है, यह आगे उनके अगले कदम से स्पष्ट