
युवा राष्ट्र का भविष्य, लेकिन सही दिशा जरूरी : डॉ. शंकरलाल माली
आरएसएस के संघ शताब्दी वर्ष के युवा कार्यक्रम में युवाओं से राष्ट्र निर्माण में ऊर्जा लगाने का आह्वान
भीलवाडा / आसींद :राजकुमार गोयल। संघ शताब्दी वर्ष के छठे युवा आधारित कार्यक्रम के तहत सरेरी खंड के करजालिया मंडल के दुल्हेपुरा में युवाओं का कार्यक्रम आयोजित हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत कार्यवाह डॉ. शंकरलाल माली ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र का भविष्य होते हैं, लेकिन उनकी ऊर्जा को सही दिशा मिलना जरूरी है।
डॉ. माली ने कहा कि युवा निरंतर बहने वाली ऊर्जा के समान है। दिशा सही हो तो यही ऊर्जा परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण और त्याग में बदल जाती है। उन्होंने युवाओं से केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए जीने का आह्वान किया।
“भारत को जानो, मानो और भारत जैसा बनने का प्रयास करो”
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक जीवंत रखने में लोककलाओं, खेलों और नाटकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। राजा हरिश्चंद्र और राजा भर्तृहरि जैसे पात्रों के जीवन से त्याग और समर्पण की प्रेरणा ली जा सकती है।
डॉ. माली ने कहा कि भारत का युवा “भारत को जानने, भारत को मानने, भारत जैसा बनने और भारत को बनाने” की भावना के साथ आगे बढ़े। भारतीय चिंतन सनातन परंपरा पर आधारित है, जो विश्व कल्याण की भावना में विश्वास रखता है।
स्वाधीनता सेनानियों के बलिदान से लें प्रेरणा
करीब 70 मिनट के उद्बोधन में डॉ. माली ने स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों के बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन्होंने भारत माता की स्वतंत्रता और खुशहाली के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया, अब राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी युवाओं के कंधों पर है।
उन्होंने युवाओं से विदेशी ताकतों के बहकावे से बचकर अपनी ऊर्जा को भारत को वैभवशाली और सशक्त राष्ट्र बनाने में लगाने का आह्वान किया। साथ ही रसायन मुक्त जैविक खेती, पर्यावरण संतुलन तथा संविधान से मिले अधिकारों के साथ कर्तव्यों के प्रति जागरूकता पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि अधिकार और कर्तव्य के संतुलन, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना से ही युवा शक्ति देश को नई दिशा दे सकती है।