
*जिला प्रशासन और बाल संरक्षण इकाई के प्रयास से 700 ग्राम के नवजात को मिला नया जीवन*
मोतिहारी: 30.09.2026
बिहार सरकार की बाल कल्याण प्राथमिकताओं और जिला प्रशासन, पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) की त्वरित तत्परता से एक नवजात मासूम को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया गया है। परिजनों द्वारा परित्यक्त किए गए महज 700 ग्राम के नवजात शिशु को जिला बाल संरक्षण इकाई और सदर अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने नया जीवन दिया है।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में एक अत्यंत गंभीर स्थिति में 700 ग्राम का एक नवजात शिशु लावारिस हालत में पाया गया था। सूचना मिलते ही मोतिहारी जिला बाल संरक्षण इकाई (सहायक निदेशक बाल संरक्षण) ने मामले का तत्काल संज्ञान लिया। बाल अधिकारों और सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए बच्चे को तुरंत बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया गया और CWC के निर्देश पर अविलंब सदर अस्पताल, मोतिहारी में भर्ती कराया गया।
चुनौतीपूर्ण था इलाज, डॉक्टरों ने जताई थी कम उम्मीद
अत्यंत कम वजन (700 ग्राम) और गंभीर शारीरिक स्थिति को देखते हुए शुरुआत में चिकित्सकों ने बच्चे के बचने की संभावना बहुत कम जताई थी। लेकिन जिला प्रशासन के सतत अनुश्रवण और सदर अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों व मेडिकल स्टाफ की दिन-रात की मेहनत रंग लाई।
1800 ग्राम हुआ वजन, बच्चा पूरी तरह सुरक्षित
सही देख-रेख, बेहतर चिकित्सा सुविधा और पोषण पुनर्वास (Restoration) के बाद मासूम की सेहत में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। जिस बच्चे का वजन महज 700 ग्राम था, वह अब स्वस्थ होकर 1800 ग्राम का हो चुका है। बच्चा लगभग पूरी तरह रिकवर कर चुका है और फिलहाल चिकित्सकों की देख-रेख में सुरक्षित है।
बिहार सरकार और जिला प्रशासन की संवेदनशीलता की मिसाल
यह सफलता बिहार सरकार की 'बाल संरक्षण योजनाओं' और मोतिहारी जिला प्रशासन की जन-संवेदनशीलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। सहायक निदेशक बाल संरक्षण ने बताया कि राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप जिले में हर अनाथ, असहाय और संकटग्रस्त बच्चे की सुरक्षा और स्वास्थ्य देखभाल के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। स्वास्थ्य में पूर्ण सुधार होते ही बच्चे के आगे के पुनर्वास के लिए नियमानुसार प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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