
बेटियों की बेबसी और जर्जर मकान के खतरे के साथ 100 साल पुराने घर में कैद 6 जिंदगियां… मदद की आस में पूरा परिवार
#प्रतापगढ़ के रानीगंज से सामने आई ये तस्वीर सिर्फ एक जर्जर मकान की नहीं है…
ये तस्वीर है एक ऐसे परिवार की, जो हर रात मौत के साये में सोने को मजबूर है।
गाँव—पंडित का पुरवा,
ब्लॉक—शिवगढ़,
जिला—प्रतापगढ़।
यहां दिवाकर मिश्रा का परिवार करीब 100 साल पुराने कच्चे और जर्जर मकान में रहने को मजबूर है।
मकान की हालत ऐसी है कि पता नहीं…किस दिन दीवार भरभराकर गिर जाए और पूरा परिवार मलबे के नीचे दब जाए।
घर में रहने वाली 6 जिंदगियां हर पल खतरे में हैं।
लेकिन इस परिवार की कहानी सिर्फ टूटती दीवारों तक सीमित नहीं है…
इस परिवार ने जिंदगी बचाने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया।
पिता की जिंदगी बचाने के लिए उनकी पत्नी ने अपने जेवर तक बेच दिए… जमीन तक बेच दी।
जो कुछ था, इलाज में चला गया।
आज हालात ये हैं कि परिवार के पास ना सहारा है, ना आमदनी का कोई मजबूत जरिया।
चार बेटियां हैं… लेकिन उनके सिर से पिता का साया उठ चुका है।
सोचिए…
जिस घर में बेटियों की शादी और भविष्य के सपने सजने चाहिए थे,
आज उसी घर में हर दिन ये डर बना रहता है कि—
कहीं अगली सुबह देखने से पहले घर की छत ही ना गिर जाए।
एक तरफ गरीबी…
दूसरी तरफ जर्जर मकान…
और तीसरी तरफ परिवार की मजबूरी।
आखिर इन बेटियों का क्या कसूर है?
क्या इनका हक नहीं कि इन्हें एक सुरक्षित छत मिले?
क्या किसी गरीब परिवार की मदद तभी होगी, जब कोई बड़ा हादसा हो जाए?
प्रशासन से सवाल है—क्या इस परिवार के घर का निरीक्षण हुआ है?
क्या किसी अधिकारी ने मौके पर जाकर परिवार की स्थिति देखी है?
क्या इन्हें आवास योजना या किसी सरकारी सहायता का लाभ मिला है?
और अगर नहीं मिला, तो आखिर क्यों?
आज जरूरत है सिर्फ सवाल पूछने की नहीं…
जरूरत है इस परिवार के साथ खड़े होने की।
अगर आप सक्षम हैं, तो इस परिवार की मदद कीजिए।
अगर मदद नहीं कर सकते, तो कम से कम **इस कहानी को इतना शेयर कीजिए कि इसकी आवाज जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचे।
क्योंकि हो सकता है आपका एक शेयर…
किसी अधिकारी की नजर इस परिवार तक पहुंचा दे।
आपका छोटा सा सहयोग
इन चार बेटियों के सिर पर एक सुरक्षित छत दे सकता है।
आइए…इस परिवार को अकेला मत छोड़िए।
पंडित का पुरवा, प्रतापगढ़ का ये परिवार मदद की उम्मीद में आपकी ओर देख रहा है।
6 जिंदगियां खतरे में हैं…
एक परिवार बेसहारा है…
और हमें तय करना है कि हम सिर्फ तमाशबीन बनकर देखेंगे या इंसानियत के नाते इनके साथ खड़े होंगे
इनका सहारा बनिए…
इनकी आवाज बनिए…
और अगर संभव हो तो इनकी मदद जरूर कीजिए।
क्योंकि किसी गरीब की जिंदगी बचाने से बड़ा कोई धर्म नहीं।
संपर्क सूत्र 091708 27891