कल धूमधाम से मनाया गया 15 अगस्त… लेकिन क्या आप जानते हैं LSM Campus का नाम लक्ष्मण सिंह महर के नाम पर क्यों रखा गया? 🇮🇳
पिथौरागढ़ की आज़ादी की लड़ाई के इतिहास में श्री लक्ष्मण सिंह महर का नाम बेहद महत्वपूर्ण है। 24 जनवरी 1893 को पिथौरागढ़ के चैसर गांव में जन्मे महर जी ने कुली बेगार आंदोलन से लेकर सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो आंदोलन तक अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष किया और कई बार जेल भी गए।
आजादी के बाद भी उन्होंने सीमांत क्षेत्र में शिक्षा, जनसेवा, स्कूल, अस्पताल और सड़कों के विकास के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इन्हीं स्वतंत्रता संग्राम और समाजसेवा के योगदान को सम्मान देते हुए उत्तराखंड सरकार ने पिथौरागढ़ के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय का नाम “लक्ष्मण सिंह महर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय” रखा।
यानी जिस परिसर में आज हम आज़ादी का जश्न मनाते हैं, उसका नाम भी एक ऐसे स्वतंत्रता सेनानी की याद दिलाता है, जिन्होंने इस धरती पर आज़ादी की अलख जगाई थी। 🇮🇳
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