
“भैया छोड़ दो… छोड़ दो…!” — शाम के अंधेरे में नाबालिग छात्रा के साथ कथित हैवानियत,
वीडियो वायरल होने से मचा हड़कंप।
जमुई में शाम करीब 6:30 से 7 बजे के बीच नाबालिग छात्रा के साथ कथित अभद्रता और जबरदस्ती का मामला, छात्रा अपने क्लासमेट दोस्त के साथ घर लौट रही थी
जमुई। सोशल मीडिया पर सामने आए एक कथित वीडियो ने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। बताया जा रहा है कि शाम करीब साढ़े छह से सात बजे के बीच एक नाबालिग छात्रा अपने स्कूल के क्लासमेट दोस्त के साथ कहीं से घूमकर अपने घर की ओर लौट रही थी। इसी दौरान रास्ते में कुछ युवकों द्वारा कथित तौर पर छात्रा के साथ अभद्रता और जबरदस्ती किए जाने का मामला सामने आया है।
वीडियो में छात्रा लगातार “भैया छोड़ दो… छोड़ दो… प्लीज छोड़ दो… जाने दो…” जैसी गुहार लगाती नजर आती है। लेकिन आरोप है कि उसकी इस गुहार के बावजूद उसके साथ कथित तौर पर बदसलूकी की गई। घटनास्थल पर मौजूद कुछ लोग इस पूरे घटनाक्रम को रोकने या बच्ची की मदद करने के बजाय मोबाइल फोन से वीडियो बनाते दिखाई देते हैं।
वीडियो में एक युवक, जिसके चेहरे पर गमछा बंधा हुआ दिखाई दे रहा है, कथित तौर पर छात्रा को सड़क किनारे ले जाने की कोशिश करता नजर आता है। वहीं छात्रा के साथ मौजूद उसका क्लासमेट दोस्त उसे बचाने की कोशिश करता दिखाई देता है। वह कथित तौर पर छात्रा को आरोपित युवक से दूर करने और उसे सुरक्षित स्थान की ओर ले जाने का प्रयास करता नजर आता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब एक नाबालिग लड़की मदद के लिए गुहार लगा रही थी, तब वहां मौजूद लोगों में से कितने लोगों ने उसकी मदद करने के बजाय अपने मोबाइल कैमरे निकाल लिए? अगर किसी व्यक्ति ने घटना को रोकने और पीड़िता की सहायता करने के बजाय वीडियो बनाया या उसे आगे प्रसारित किया, तो उसकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
यह मामला केवल कथित अपराध तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। किसी पीड़ित की मदद करना इंसानियत है, जबकि ऐसी घटना को तमाशे की तरह रिकॉर्ड करना बेहद चिंताजनक रवैया है।
यदि वायरल वीडियो और सामने आए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ कानून के तहत तत्काल, निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। खासकर क्योंकि मामला नाबालिग से जुड़ा बताया जा रहा है, इसलिए जांच और कार्रवाई के दौरान उसकी पहचान और गरिमा की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
साथ ही, इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने वालों की भूमिका की भी जांच आवश्यक है। नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाला या उसकी गरिमा को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी कंटेंट आगे प्रसारित नहीं किया जाना चाहिए।
ऐसी घटनाओं पर गुस्सा स्वाभाविक है, लेकिन कानून अपने हाथ में लेना किसी समाधान का रास्ता नहीं है। दोषियों को सजा दिलाने का रास्ता न्यायिक प्रक्रिया से होकर गुजरता है और समाज की जिम्मेदारी है कि वह पीड़िता के साथ खड़ा हो तथा जांच एजेंसियों को निष्पक्ष कार्रवाई के लिए जवाबदेह बनाए।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ केवल नारा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। जब किसी नाबालिग बच्ची के साथ कथित तौर पर ऐसी घटना सामने आती है, तो समाज और प्रशासन दोनों को संवेदनशीलता के साथ खड़ा होना चाहिए।
आज जरूरत है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो, आरोपों की सच्चाई सामने आए, दोष सिद्ध होने पर आरोपियों को कानून के मुताबिक कड़ी सजा मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।