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PRO JS Jhabua

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प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से श्री राकेश कुमार भीलोटिया को आर्थिक सहायता का लाभ मिला। योजना से मिली सहायता पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया।
Jansampark Madhya Pradesh CM Madhya Pradesh Indore Commissioner Department of Agriculture, Madhya Pradesh <nis:link nis:type=tag nis:id=jhabua nis:value=Jhabua nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=jansamparkmp nis:value=JansamparkMP nis:enabled=true nis:link/>  <nis:link nis:type=tag nis:id=sevasankalpabhiyan nis:value=SevaSankalpAbhiyan nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=ashirwadkadiya nis:value=AshirwadKaDiya nis:enabled=true nis:link/>
मध्यप्रदेश में सीएसआर का नया रोडमैप, जरूरत के मुताबिक होगा निवेश, परिणाम पर रहेगी नजर -  मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया

61 लाख बच्चों के पोषण और 97,882 आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंच बनाने की तैयारी

मध्यप्रदेश में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) को सरकारी विकास प्राथमिकताओं से जोड़कर शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक विकास के क्षेत्रों में अधिक प्रभावी परिणाम हासिल करने की दिशा में सरकार ने कॉरपोरेट जगत के साथ साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया है। सीएसआर कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि सीएसआर केवल गतिविधियां पूरी करने या निर्धारित लक्ष्य हासिल करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य समुदायों को मजबूत करना और लोगों के जीवन में स्थायी बदलाव लाना होना चाहिए।

मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि मध्यप्रदेश जैसे विविधताओं वाले राज्य में सीएसआर निवेश के लिए एक जैसी कार्ययोजना के बजाय स्थानीय जरूरतों और परिस्थितियों के अनुरूप मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं और कॉरपोरेट संस्थानों की विशेषज्ञता एवं संसाधनों के बीच बेहतर तालमेल से ऐसे परिणाम हासिल किए जा सकते हैं, जिन्हें लंबे समय तक कायम रखा जा सके। उन्होंने सीएसआर साझेदारियों में स्पष्ट प्राथमिकताओं, जरूरतों की पहचान, प्रभावी मॉनिटरिंग और परिणामों के मापन को महत्वपूर्ण बताया। 

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सीएसआर पोर्टल के साथ मध्यप्रदेश का पंखुड़ी पोर्टल भी सरकार की विकास आवश्यकताओं और संभावित सीएसआर साझेदारों के बीच सेतु का काम कर सकता है। इन प्लेटफॉर्म के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों, निवेश की संभावनाओं और उपलब्ध अवसरों की जानकारी साझा कर सरकार, कॉरपोरेट, विकास एजेंसियों और अन्य संस्थाओं के बीच अधिक व्यवस्थित साझेदारी विकसित की जा सकती है। मंत्री ने कहा कि मजबूत सरकारी- सीएसआर सहयोग से विकास के प्रयासों को अतिरिक्त गति देने के साथ उनकी पहुंच और प्रभाव को भी बढ़ाया जा सकता है।

मध्यप्रदेश में 1195 करोड़ से अधिक का सीएसआर निवेश, प्राथमिकताओं से जोड़ने पर जोर
मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) के प्रबंध संचालक श्री चंद्रमौली शुक्ला ने सीएसआर के कानूनी और संस्थागत ढांचे की जानकारी देते हुए कहा कि कंपनी अधिनियम, 2013 के बाद पात्र कंपनियों के लिए सीएसआर एक संस्थागत व्यवस्था के रूप में सामने आया है। निर्धारित पात्रता पूरी करने वाली कंपनियों को पिछले तीन वित्तीय वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का कम से कम दो प्रतिशत सीएसआर गतिविधियों पर व्यय करना होता है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान लगभग 1,195.34 करोड़ रुपये सीएसआर पर खर्च किए गए। हालांकि, इस निवेश में जेंडर इक्विटी और महिला सशक्तिकरण से जुड़े क्षेत्रों की हिस्सेदारी करीब दो प्रतिशत ही है। उन्होंने इसे भविष्य में अधिक सक्रिय सीएसआर भागीदारी की संभावनाओं वाले क्षेत्र के रूप में रेखांकित किया।

श्री शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश में सीएसआर को अधिक प्रभावी बनाने के लिए राज्य और जिला स्तर पर जरूरतों की बेहतर मैपिंग, सरकार की प्राथमिकताओं के साथ सीएसआर कंपनियों की रुचि का मिलान और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करना होगा। उन्होंने सीएसआर पोर्टल को और सुदृढ़ करने, सरकारी विभागों, कॉरपोरेट संस्थानों और अन्य साझेदारों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा ऐसी परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई, जिनके परिणाम स्पष्ट रूप से मापे जा सकें और जिन्हें लंबे समय तक संचालित किया जा सके।

उन्होंने मध्यप्रदेश सीएसआर फैसिलिटेशन गाइडलाइनस 2017 का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में सरकार की भूमिका सुविधा प्रदाता और समन्वयक की है। सीएसआर के प्रभाव को बढ़ाने के लिए सरकारी तंत्र, कंपनियों, विकास संस्थाओं, सिविल सोसायटी और अन्य हितधारकों के बीच साझेदारी को अधिक संरचित स्वरूप देना समय की आवश्यकता है।

61 लाख से अधिक बच्चों के पोषण में सीएसआर की भागीदारी का बड़ा अवसर
महिला एवं बाल विकास आयुक्त श्री संदीप जी. आर. ने सीएसआर को बाल पोषण और शुरुआती बाल विकास से जोड़ते हुए कहा कि बच्चे के जीवन के शुरुआती वर्ष उसके संपूर्ण विकास की बुनियाद तय करते हैं। विशेष रूप से जीवन के पहले छह वर्ष और शुरुआती 1000 दिन पोषण, वृद्धि और विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इस अवधि में समय पर किए गए हस्तक्षेपों का प्रभाव आगे के जीवन पर पड़ता है। उन्होंने बाल विकास के लिए निरंतर देखभाल की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इसके लिए सरकार के साथ समाज और निजी क्षेत्र की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।

आयुक्त ने बताया कि मध्यप्रदेश में लगभग 97,882 आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 61 लाख से अधिक संवेदनशील एवं जरूरतमंद बच्चों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीएसआर के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं को बेहतर बनाने तथा स्थानीय जरूरतों के अनुरूप नवाचारों को बढ़ावा देने की पर्याप्त संभावनाएं हैं।

श्री संदीप ने स्थानीय संसाधनों पर आधारित पोषण समाधानों का उदाहरण देते हुए ‘रंगीन रोटी’ जैसी पहल का उल्लेख किया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक सामग्री, जैसे सहजन की पत्तियों या मिलेट्स को रोजमर्रा के भोजन में शामिल कर ऐसे पोषण मॉडल विकसित किए जा सकते हैं, जो स्थानीय खान-पान की आदतों के अनुरूप होने के साथ व्यवहारिक भी हों। उन्होंने कहा कि इस तरह के स्थानीय और नवाचारी समाधान समुदायों की भागीदारी बढ़ाने के साथ पोषण परिणामों को भी बेहतर कर सकते हैं। उन्होंने सीएसआर की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश देश की आबादी में लगभग छह प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, लेकिन राष्ट्रीय सीएसआर व्यय में राज्य की हिस्सेदारी करीब 1.44 प्रतिशत है। ऐसे में राज्य में सीएसआर निवेश बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने श्योपुर में ब्रिटानिया फाउंडेशन और विदिशा में अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन (AIF) जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी साझेदारियां सरकारी प्रयासों को पूरक समर्थन प्रदान कर सकती हैं।

जरूरत और निवेश के बीच बनेगा सीधा संबंध
कॉन्क्लेव में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि सीएसआर को केवल गतिविधि आधारित व्यय के बजाय स्पष्ट और मापनीय परिणामों से जोड़ा जाए। राज्य और जिलों की वास्तविक जरूरतों की पहचान कर उन्हें सीएसआर संस्थाओं की रुचि, क्षमता और विशेषज्ञता से जोड़ने, परियोजनाओं की निगरानी करने तथा सफल मॉडलों को व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में काम करने पर सहमति बनी।

सत्र में सरकारी विभागों, कॉरपोरेट संस्थानों, विकास एजेंसियों, गैर-सरकारी संगठनों और अन्य हितधारकों के बीच समन्वित साझेदारी को आवश्यक बताया गया। साथ ही इस बात पर बल दिया गया कि सीएसआर परियोजनाएं स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप हों, उनके परिणाम मापे जा सकें और सफल पहल को मौजूदा सरकारी व्यवस्थाओं के साथ जोड़कर दीर्घकालिक रूप से विस्तार दिया जा सके।
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पीएम स्वनिधि योजना से मिला आत्मनिर्भरता का संबल। 🌟

झाबुआ के श्री आनंद गेहलोद को योजना का लाभ मिलने पर उन्होंने खुशी व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के प्रति आभार व्यक्त किया।
Jansampark Madhya Pradesh CM Madhya Pradesh Indore Commissioner General Administration Department, MP <nis:link nis:type=tag nis:id=jhabua nis:value=Jhabua nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=jansamparkmp nis:value=JansamparkMP nis:enabled=true nis:link/>  <nis:link nis:type=tag nis:id=sevasankalpabhiyan nis:value=SevaSankalpAbhiyan nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=ashirwadkadiya nis:value=AshirwadKaDiya nis:enabled=true nis:link/>
आकांक्षी विकासखंड थांदला में <nis:link nis:type=tag nis:id=सेवा_संकल्प_अभियान nis:value=सेवा_संकल्प_अभियान nis:enabled=true nis:link/> के तहत आयोजित हुआ ‘आँगन मिलन सेवा कार्यक्रम’

आकांक्षी विकासखंड थांदला में आज महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित सभी सेक्टरों में सेवा संकल्प अभियान के तहत ‘आँगन मिलन सेवा कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आँगनवाड़ी सेवाओं को सुदृढ़ करना, विभागीय गतिविधियों को प्रोत्साहित करना तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाली आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन करना रहा।

कार्यक्रम में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), थांदला श्री भास्कर गाचले, जनप्रतिनिधियों एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे सराहनीय कार्यों की प्रशंसा की गई। इस अवसर पर उत्कृष्ट एवं सराहनीय कार्य करने वाली आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि आँगनवाड़ी कार्यकर्ता शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उनके समर्पण एवं सक्रिय सहभागिता से महिला एवं बाल विकास विभाग की सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम से आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा एवं उत्साह का संचार हुआ। कार्यक्रम के माध्यम से समुदाय की सहभागिता बढ़ाने तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने का संकल्प लिया गया।
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🏠 पक्के घर से साकार हुआ अपना आशियाना

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत पिंकी चारेल को पक्के आवास का लाभ मिला। अपने घर की सौगात मिलने पर उन्होंने खुशी व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार जताया।
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जिला जेल झाबुआ का औचक निरीक्षण एवं विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, झाबुआ श्रीमती आशिता श्रीवास्तव द्वारा 29 सितम्बर 2026 को जिला जेल झाबुआ का औचक निरीक्षण एवं विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।

निरीक्षण के दौरान प्रधान जिला न्यायाधीश द्वारा जेल की प्रत्येक पुरुष एवं महिला बैरक में जाकर बंदियों से सीधे संवाद किया गया तथा उनके प्रकरणों की स्थिति, न्यायालय में प्रकरण की वर्तमान स्थिति, अधिवक्ता उपलब्ध होने अथवा नहीं होने सहित अन्य आवश्यक जानकारी प्राप्त की गई। बंदियों को उनकी समझ के अनुरूप सरल भाषा में न्यायालयीन कार्यवाही एवं अपील करने की प्रक्रिया के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई।

निरीक्षण के दौरान जिन बंदियों के प्रकरणों में अधिवक्ता उपलब्ध नहीं पाए गए, उनके संबंध में प्रधान जिला न्यायाधीश द्वारा जेल अधीक्षक को निर्देशित किया गया कि ऐसे बंदियों से आवेदन प्राप्त कर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को अविलंब भिजवाया जाए, ताकि उन्हें नियमानुसार निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया जा सके।

उन्होंने बंदियों को उपलब्ध कराए जा रहे भोजन की गुणवत्ता एवं व्यवस्था के संबंध में जानकारी प्राप्त की गई। इसके साथ ही जेल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, चिकित्सक की उपलब्धता, बंदियों के स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार की व्यवस्था के संबंध में भी जानकारी ली गई। उन्होंने बंदियों की दैनिक आवश्यकताओं एवं उन्हें उपलब्ध कराई जा रही मूलभूत सुविधाओं के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की।

प्रधान जिला न्यायाधीश ने जेल प्रशासन को निर्देशित किया कि बंदियों को उनके विधिक अधिकारों एवं उपलब्ध निःशुल्क विधिक सेवाओं की जानकारी निरंतर प्रदान की जाए तथा जिन बंदियों को विधिक सहायता की आवश्यकता है, उन्हें समय पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए। निरीक्षण के दौरान जेल प्रशासन द्वारा की जा रही व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया गया। उक्त शिविर में जिविसेप्रा झाबुआ के सचिव श्री शिव कुमार डाबर, जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री जयदेव माणिक, जेल अधीक्षक श्री सुजित खरे, जेल स्टॉफ एवं प्राधिकरण के कर्मचारी उपस्थित रहें।
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कुपोषित बच्चों की मदद अब होगी ट्रैक

‘भावनी’ बताएगा किस बच्चे को कितनी जरूरत

सत्यापित आंकड़ों से चिन्हित होंगे बच्चे

समाज के मददगार सीधे जुड़ेंगे

सहायता से पोषण सुधार तक हर कदम का रहेगा डिजिटल रिकॉर्ड
 
कुपोषण के खिलाफ मध्यप्रदेश में सरकारी प्रयासों के साथ अब समाज, स्वयंसेवी संस्थाओं और दानदाताओं की भागीदारी को तकनीक के माध्यम से जोड़ने की पहल की गई है। 'भावनी' पोर्टल ऐसा डिजिटल मंच है, जो पोषण संबंधी आवश्यकता वाले बच्चों को मार्गदर्शकों, सहयोगी संस्थाओं और दानदाताओं से पारदर्शी तरीके से जोड़ने का काम करता है। पोर्टल का उद्देश्य केवल किसी बच्चे तक सहायता पहुंचाना नहीं, बल्कि सहायता मिलने के बाद उसकी पोषण स्थिति में हुए बदलाव की निरंतर निगरानी और मॉनिटरिंग सुनिश्चित करना भी है।

पहचान छिपी रहेगी, जरूरत सामने होगी
'भावनी' पोर्टल पर महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रणालियों से सत्यापित बाल आंकड़े प्राप्त किए जाते हैं। बच्चों की निजता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उनकी व्यक्तिगत पहचान सार्वजनिक नहीं की जाती। पोर्टल पर बच्चों की जानकारी अनाम रूप में प्रदर्शित होती है, ताकि जरूरतमंद बच्चे तक सहायता पहुंचने के साथ उसकी गोपनीयता भी सुरक्षित रहे।

बच्चे की जरूरत के अनुसार तय होती है सहायता
'भावनी' पोर्टल पर मार्गदर्शक समग्र पहचान क्रमांक के साथ अथवा उसके बिना पंजीयन कर सकते हैं। पंजीयन के बाद वे अपने क्षेत्र में उपलब्ध बच्चों की सूची देख सकते हैं और बच्चे की पोषण स्थिति तथा आवश्यकता के अनुसार उसका चयन कर सकते हैं। सहायता का प्रकार, कितनी बार सहायता दी जाएगी और सहायता से संबंधित अन्य विवरण दर्ज करने के बाद संबंधित बच्चे के लिए विशिष्ट सहायता पहचान क्रमांक तैयार होता है।

इस व्यवस्था से सहायता को सामान्य रूप से वितरित करने के बजाय बच्चे की वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप लक्षित किया जा सकता है। इससे सहयोग करने वाले व्यक्ति या संस्था को भी यह स्पष्ट रहता है कि सहायता किस उद्देश्य से और किस प्रकार उपलब्ध कराई जा रही है।

सहायता के बाद भी मॉनिटरिंग जारी रहेगी
'भावनी' पोर्टल की विशेषता यह है कि इसमें सहायता उपलब्ध कराने के बाद प्रक्रिया समाप्त नहीं होती। ‘मेरे बच्चों की सूची’ के माध्यम से मार्गदर्शक संबंधित बच्चों को दी जा रही सहायता की स्थिति तथा उनकी पोषण संबंधी प्रगति का अनुश्रवण कर सकते हैं।

निर्धारित साप्ताहिक अथवा मासिक अंतराल पर बच्चे की स्थिति को अद्यतन किया जाता है। प्रत्येक प्रविष्टि में सहायता की तिथि, सहायता का स्वरूप, बच्चे की पोषण स्थिति, अवलोकन और उपलब्ध प्रमाण दर्ज किए जाते हैं। इससे बच्चे की सहायता और उसकी प्रगति का व्यवस्थित अभिलेख तैयार होता है।

सरकार और समाज के बीच बनेगा मजबूत सेतु
'भावनी' पोर्टल सरकारी तंत्र और समाज के बीच समन्वय स्थापित करने का माध्यम भी है। प्रशासनिक स्तर पर पंजीकृत मार्गदर्शकों, सहयोगी संस्थाओं तथा उनसे जुड़े बच्चों की जानकारी देखी जा सकती है। इससे विभाग को यह जानने में सुविधा होती है कि किन बच्चों को सहयोग मिल रहा है और उनकी पोषण स्थिति में क्या परिवर्तन आया है।

इस व्यवस्था में समाज के विभिन्न वर्ग अपनी क्षमता के अनुसार योगदान कर सकते हैं। मार्गदर्शक, सामाजिक संस्थाएं और दानदाता जरूरतमंद बच्चों की पहचान के बाद उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहयोग उपलब्ध करा सकते हैं। इस प्रकार कुपोषण से निपटने के सरकारी प्रयासों को सामुदायिक सहभागिता से और व्यापक बनाया जा सकता है।

वर्ष 2022 में विकसित किया गया पोर्टल
'भावनी' पोर्टल का निर्माण सूचना प्रौद्योगिकी प्रकोष्ठ, मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, भोपाल द्वारा वर्ष 2022 में किया गया है। पोर्टल को इस उद्देश्य से विकसित किया गया कि जरूरतमंद बच्चों की पहचान, उन्हें सहायता से जोड़ने तथा सहायता के बाद उनकी प्रगति पर नजर रखने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाया जा सके।

महिला एवं बाल विकास विभाग की सत्यापित प्रणालियों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के माध्यम से सहायता की जरूरत वाले बच्चों तक सहयोग पहुंचाने की प्रक्रिया को व्यवस्थित किया जाता है।

तकनीक और संवेदना का संगम
'भावनी' पोर्टल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें तकनीक को सामाजिक संवेदना और सामुदायिक सहभागिता से जोड़ा गया है। विभाग अपनी योजनाओं और सेवाओं के माध्यम से कुपोषण के खिलाफ निरंतर कार्य करता है, वहीं समाज के सक्षम व्यक्ति और संस्थाएं जरूरतमंद बच्चों के लिए अतिरिक्त सहयोग उपलब्ध करा सकते हैं।
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कहानी बदलाव की

वाहन चालक से बने स्वयं के व्यवसाय के मालिक, भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना ने गोतम गामड़ के सपने को दिए पहिए

18.75 लाख रुपये के ऋण से खरीदी जीप-टैक्सी, प्रतिमाह लगभग 45 हजार रुपये की आय के साथ एक अन्य व्यक्ति को भी दिया रोजगार

सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत “कहानी बदलाव की” में झाबुआ निवासी श्री गोतम गामड़ की स्वरोजगार की यात्रा इस बात का उदाहरण है कि शासन की योजनाओं का लाभ और सही मार्गदर्शन मिलने पर व्यक्ति अपने अनुभव और कौशल को आजीविका के स्थायी साधन में बदल सकता है। कभी स्वयं वाहन चालक के रूप में रोजगार करने वाले श्री गामड़ आज अपनी जीप-टैक्सी के मालिक हैं और प्रतिमाह लगभग 45 हजार रुपये की आय अर्जित करने के साथ एक अन्य व्यक्ति को भी चालक के रूप में रोजगार दे रहे हैं।

पॉलिटेक्निक कॉलेज के गेट के सामने, झाबुआ निवासी श्री गोतम गामड़ स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद परिवार के साथ परम्परागत कृषि कार्य से जुड़े थे। इसके साथ ही उन्होंने वाहन चालक के रूप में भी कार्य किया। वाहन चलाने का अनुभव होने के कारण उनके मन में स्वयं की जीप-टैक्सी खरीदकर स्वरोजगार स्थापित करने की इच्छा थी, लेकिन वाहन खरीदने के लिए आवश्यक पूंजी की व्यवस्था उनके लिए बड़ी चुनौती थी।

इसी दौरान श्री गामड़ को मध्यप्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम द्वारा संचालित भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना की जानकारी मिली। उन्होंने जिला स्तर पर मध्यप्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम, झाबुआ से संपर्क किया। यहां अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा उन्हें योजना, पात्रता एवं ऋण प्रक्रिया के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

मध्यप्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम झाबुआ के प्रभारी श्री दिनेश श्रीवास द्वारा आवश्यक दस्तावेजों की जांच के उपरांत भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना के तहत उनका ऋण प्रकरण एमपी ऑनलाइन के माध्यम से सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, झाबुआ को प्रेषित किया गया। बैंक द्वारा प्रकरण का परीक्षण कर 18.75 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया।

ऋण राशि प्राप्त होने के बाद श्री गोतम गामड़ ने स्वयं की जीप खरीदी और उसे शासकीय कार्यालय की सेवा में लगाया। स्वरोजगार की इस पहल से आज उन्हें प्रतिमाह लगभग 45 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने वाहन के संचालन के लिए एक अन्य व्यक्ति को चालक के रूप में रोजगार भी उपलब्ध कराया है। इस प्रकार योजना ने न केवल श्री गामड़ को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया, बल्कि उनके माध्यम से एक अन्य व्यक्ति के लिए भी रोजगार का साधन तैयार हुआ।

श्री गोतम गामड़ बताते हैं कि पहले उन्हें स्वयं रोजगार के लिए प्रयास करना पड़ता था, लेकिन आज स्वयं का व्यवसाय स्थापित होने से परिवार को नियमित आय का आधार मिला है। वे अपनी इस उपलब्धि का श्रेय भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना तथा मध्यप्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम से मिले सहयोग और मार्गदर्शन को देते हैं।

अपनी सफलता से उत्साहित श्री गामड़ युवाओं को संदेश देते हैं कि वे अपने हुनर और रुचि को पहचानकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ें तथा शासन द्वारा संचालित स्वरोजगार योजनाओं का लाभ लें। दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
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<nis:link nis:type=tag nis:id=जनसुनवाई nis:value=जनसुनवाई nis:enabled=true nis:link/> में सुनी नागरिकों की समस्याएं, प्राप्त हुए 45 आवेदन

विभिन्न विभागों से संबंधित आवेदनों के गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निराकरण के दिए निर्देश

जिला मुख्यालय पर मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री जितेन्द्र सिंह चौहान एवं अपर कलेक्टर श्री सी.एस. सोलंकी ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों की समस्याएं एवं शिकायतें गंभीरतापूर्वक सुनीं। जनसुनवाई में विभिन्न विभागों से संबंधित कुल 45 आवेदन प्राप्त हुए। अधिकारियों ने संबंधित विभागों को आवेदनों की वास्तविक स्थिति का परीक्षण करते हुए पात्रतानुसार गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जनसुनवाई में ग्राम कुशलपुरा, श्रीनाथ कॉलोनी के पीछे झाबुआ निवासी श्री रणजीत पिता स्व. तोलसिंह भूरिया ने आवेदन प्रस्तुत कर बताया कि उनके मकान एवं खेत तक आने-जाने के लिए पिछले कई वर्षों से उपयोग किए जा रहे एकमात्र रास्ते को विपक्षीगण द्वारा बंद कर दिया गया है। इससे उनके सहित लगभग 11 परिवारों को आवागमन में परेशानी हो रही है। उन्होंने मामले की जांच कर रास्ता खुलवाए जाने का अनुरोध किया।

ग्राम चूलिया छोटी के गोवाल फलिया, तहसील रामा के ग्रामीणों ने फलिये में विद्युत सुविधा उपलब्ध नहीं होने की समस्या से अवगत कराया। ग्रामीणों ने बताया कि विद्युत सुविधा के अभाव में फलिये में निवासरत परिवारों को विभिन्न कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने विद्युत डी.पी. स्थापित कर विद्युत सुविधा उपलब्ध कराने के संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया।

ग्राम ढोकरवानी, तहसील झाबुआ निवासी श्री जामसिंह पिता केशिया चरपोटा ने आवास योजना से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि आवास योजना में पात्र होने के बावजूद उनका नाम अपात्र श्रेणी में कर दिया गया है। उन्होंने प्रकरण की जांच कर पात्रतानुसार आवास योजना का लाभ प्रदान किए जाने का अनुरोध किया।

ग्राम ठिकरिया, ग्राम पंचायत करड़ावद, तहसील पेटलावद निवासी श्रीमती भेरकीबाई पति धन्ना मैड़ा ने अपने घर के आंगन में स्थापित विद्युत डी.पी. को लेकर आवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि डी.पी. उनकी अनुमति के बिना स्थापित की गई है तथा इससे दुर्घटना एवं जनहानि की आशंका बनी हुई है। उन्होंने डी.पी. को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किए जाने की मांग की।

ग्राम नवागांव, तहसील झाबुआ निवासी श्रीमती सुमित्रा पति दुबलिया भूरिया एवं श्रीमती पिंकी पति मुकेश भूरिया ने निजी भूमि से संबंधित शिकायत प्रस्तुत की। उन्होंने विपक्षीगण द्वारा रात्रि के समय ट्रैक्टर से निजी भूमि जोतने तथा धमकी दिए जाने की शिकायत करते हुए प्रकरण में आवश्यक जांच एवं कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया।

इसी प्रकार ग्राम झकनावदा एवं झोसरपाड़ा के ग्रामीण किसानों ने आवागमन की समस्या को लेकर आवेदन प्रस्तुत किया। किसानों ने बताया कि ग्राम झकनावदा के श्मशान घाट से मधुकन्या नदी होकर झोसरपाड़ा एवं आसपास के क्षेत्रों में जाने वाले मार्ग का उपयोग 100 से अधिक किसान अपने खेतों तक पहुंचने के लिए करते थे। माही डेम निर्माण के बाद नदी में पानी भरा रहने के कारण यह मार्ग बाधित हो गया है, जिससे किसानों को खेती-किसानी के कार्यों के लिए खेतों तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है। ग्रामीणों ने आवागमन सुगम बनाने के लिए उक्त स्थान पर पुलिया निर्माण की मांग की।

जनसुनवाई में प्राप्त अन्य आवेदनों को भी संबंधित विभागों को आवश्यक परीक्षण एवं नियमानुसार कार्रवाई के लिए प्रेषित किया गया। इस दौरान विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
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🏠 पक्के घर का सपना हुआ साकार

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत श्रीमती संगीता भूरिया को पक्के आवास का लाभ मिला। अपने घर की सौगात मिलने पर उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया।
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कहानी बदलाव की

खेत और पशुधन के संसाधनों से बनाई जैविक खाद, श्री कुकला ने घटाई खेती की लागत

परम्परागत कृषि विकास योजना से मिला मार्गदर्शन, एक एकड़ में सालाना लगभग 10 हजार रुपये की हो रही बचत

खेती में बढ़ती लागत के बीच खेत और पशुधन से उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। विकासखण्ड मेघनगर के ग्राम हात्यादेली के कृषक श्री कुकला ने इसे अपने खेत में अपनाकर दिखाया है। परम्परागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत मिले प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन से उन्होंने स्वयं वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने के साथ जैविक कीट एवं रोग नियंत्रण के उपाय अपनाए। इससे रासायनिक उर्वरकों एवं दवाओं पर उनकी निर्भरता कम हुई और खेती की लागत में भी कमी आई है।

42 वर्षीय श्री कुकला एवं उनके भाई के पास कुल 1.50 हेक्टेयर सिंचित कृषि भूमि है। पांच सदस्यीय परिवार की आजीविका मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है। वे खरीफ में मक्का, कपास एवं सोयाबीन तथा रबी में गेहूं एवं चना की खेती करते हैं। कृषि के साथ पशुपालन भी उनकी आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनके पास 2 बैल, एक गाय, 3 भैंस एवं 2 पड़ापाड़ी हैं। पशुओं से मिलने वाले गोबर को बेकार जाने देने के बजाय वे इसका उपयोग जैविक खाद तैयार करने में कर रहे हैं।

परम्परागत कृषि विकास योजना से बदला खेती का तरीका
पूर्व में श्री कुकला फसल उत्पादन के लिए मुख्य रूप से रासायनिक उर्वरकों एवं अन्य बाहरी कृषि आदानों पर निर्भर थे। कम लागत में बेहतर खेती के विकल्प तलाशने के दौरान वे परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) के अंतर्गत गठित क्लस्टर से जुड़े। योजना के माध्यम से उन्हें जैविक खेती का प्रशिक्षण, कृषक भ्रमण एवं तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। प्रशिक्षण में सीखी तकनीकों को उन्होंने केवल जानकारी तक सीमित न रखकर अपने खेत में प्रयोग करना शुरू किया।

योजना के अंतर्गत श्री कुकला को वर्मी कम्पोस्ट इकाई की स्थापना के लिए 5 हजार रुपये का अनुदान मिला। उन्होंने इकाई का नियमित संचालन करते हुए अपने पशुधन से प्राप्त गोबर का उपयोग वर्मी कम्पोस्ट बनाने में किया। श्री कुकला के अनुसार अब तक इस इकाई के माध्यम से लगभग 50 हजार रुपये मूल्य की वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार की गई है, जिसका उपयोग स्वयं के खेत में किया गया। इससे बाजार से खाद खरीदने की आवश्यकता कम हुई है।

एक एकड़ में लगभग 10 हजार रुपये सालाना की बचत
श्री कुकला बताते हैं कि स्वयं तैयार जैविक खाद एवं जैविक कीट नियंत्रण उपायों के उपयोग से रासायनिक उर्वरक और दवाओं पर होने वाले खर्च में उल्लेखनीय कमी आई है। उनके द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार एक एकड़ भूमि पर प्रतिवर्ष लगभग 10 हजार रुपये तक की लागत की बचत हो रही है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से कृषि आदानों की पूर्ति होने के कारण बाजार पर उनकी निर्भरता भी कम हुई है।

गेहूं की फसल में भी अपना रहे जैविक तकनीक
वर्तमान रबी मौसम में श्री कुकला गेहूं की खेती में भी जैविक पद्धतियों का प्रयोग कर रहे हैं। बुवाई से पूर्व वर्मी कम्पोस्ट में ट्राइकोडर्मा का मिश्रण कर बीज उपचार किया गया तथा फसल की प्रारंभिक अवस्था में वर्मी-वॉश का छिड़काव किया गया। कृषक के अनुसार इससे अच्छा अंकुरण एवं फसल की स्वस्थ वृद्धि देखने को मिली है।

फसल में कीट एवं रोग नियंत्रण के लिए भी वे स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से जैविक घोल एवं अन्य सामग्री तैयार कर आवश्यकता के अनुसार उपयोग करते हैं। इसके साथ ही फसल की नियमित निगरानी कर समय पर जैविक कीट एवं रोग प्रबंधन के उपाय किए जाते हैं।

कृषि और पशुपालन को बनाया एक-दूसरे का पूरक
श्री कुकला की खेती की विशेषता कृषि और पशुपालन का समन्वित उपयोग है। पशुओं से प्राप्त गोबर से वर्मी कम्पोस्ट तैयार होती है और यही खाद पुनः खेतों में उपयोग की जाती है। इस तरह खेत एवं पशुधन से उपलब्ध संसाधनों का पुनः कृषि उत्पादन में उपयोग कर बाहरी कृषि आदानों पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

श्री कुकला बताते हैं कि जैविक खेती के शुरुआती वर्ष में उत्पादन में कुछ कमी महसूस हुई, लेकिन बाजार से रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशक नहीं खरीदने के कारण खेती की लागत भी कम हुई। लगातार जैविक तकनीकों के उपयोग और फसल की नियमित निगरानी से उनका जैविक खेती के प्रति विश्वास बढ़ा है।

सेवा-संकल्प अभियान अंतर्गत श्री कुकला की यह “कहानी बदलाव की” बताती है कि शासन की योजना से मिले प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग को स्थानीय संसाधनों के साथ जोड़कर किसान खेती की लागत कम करने की दिशा में सार्थक प्रयास कर सकते हैं। स्वयं निर्मित जैविक खाद, पशुधन का उपयोग और जैविक कीट प्रबंधन अपनाकर श्री कुकला कम लागत एवं टिकाऊ खेती की ओर आगे बढ़ रहे हैं।
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उल्लास एक अभिनव प्रयोग-2026 के अंतर्गत पीजी ग्राउंड झाबुआ में एक दिवसीय क्रिकेट टूर्नामेंट आयोजित

आरसीटी थांदला टीम ने फाइनल मुकाबला जीतकर अपने नाम किया खिताब

रनअप टीम लॉयर्स किंग झाबुआ रही

उच्च न्यायालय जबलपुर एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, झाबुआ के तत्वावधान में संचालित “उल्लास एक अभिनव प्रयोग-2026” के अंतर्गत 27 सितम्बर-2026 को पीजी ग्राउंड, झाबुआ में एक दिवसीय टेनिस बॉल क्रिकेट टूर्नामेंट का उत्साहपूर्वक आयोजन किया गया। टूर्नामेंट का आयोजन प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, झाबुआ श्रीमती आशिता श्रीवास्तव के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में किया गया। आयोजन में जिला अभिभाषक संघ, झाबुआ का विशेष सहयोग रहा।

क्रिकेट टूर्नामेंट में कुल 08 टीमों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। दिनभर चले मुकाबलों में खिलाड़ियों ने खेल भावना, अनुशासन एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिचय दिया। रोमांचक मुकाबलों के पश्चात आरसीटी थांदला टीम ने फाइनल मुकाबला जीतकर टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम किया। रनअप टीम लॉयर्स किंग झाबुआ रही। पूरे टूर्नामेंट का वातावरण उत्साह, उमंग और उल्लास से भरपूर रहा तथा बड़ी संख्या में उपस्थित दर्शकों ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, झाबुआ श्रीमती आशिता श्रीवास्तव ने कहा कि “उल्लास एक अभिनव प्रयोग” का उद्देश्य केवल खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करना नहीं, बल्कि न्यायिक परिवार, अधिवक्ताओं, कर्मचारियों एवं उनके परिवारों के बीच आपसी सौहार्द, सहयोग, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा एवं सकारात्मक वातावरण को बढ़ावा देना है। खेल हमें अनुशासन, टीम भावना, धैर्य और एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना सिखाते हैं। ऐसे आयोजनों से कार्यस्थल पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है। उन्होंने सभी टीमों एवं खिलाड़ियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बधाई देते हुए कहा कि जीत और हार से अधिक महत्वपूर्ण खेल भावना के साथ सहभागिता करना है। उन्होंने ने कहा कि इस क्रिकेट प्रतियोगिता की सबसे सुंदर विशेषताओं में से एक यह रही कि प्रत्येक टीम में महिला खिलाड़ियों को भी समान रूप से स्थान दिया गया। पुरुष एवं महिला खिलाड़ियों ने एक ही टीम का हिस्सा बनकर जिस उत्साह और खेल भावना के साथ सहभागिता की, वह आपसी सहयोग, समान अवसर और टीम भावना का प्रेरणादायी उदाहरण है।

टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों सहित अंपायरों को ट्रॉफी एवं प्रमाण-पत्र देकर पुरूस्कृत किया गया।

कार्यक्रम के दौरान अधिवक्ता श्री मुकेश बैरागी ने मैच की कमेंट्री स्थानीय भीली भाषा, अधिवक्ता श्री उमंग सक्सेना एवं अधिवक्ता पेटलावद श्री अविनाश उपाध्याय ने हिंदी भाषा में की, जिससे खिलाड़ियों के साथ-साथ उपस्थित दर्शकों ने भी पूरे मैच का भरपूर आनंद लिया और आयोजन का वातावरण और अधिक जीवंत एवं रोचक बना रहा। टूर्नामेंट की अंपायरिंग श्री नरेश राजपुरोहित, श्री जुल्फिकार अली सैयद, श्री विनोद बढ़ई, श्री संजय पण्डया, श्री दिलीप कुशवाहा ने की एवं स्कोरर के रूप में अधिवक्ता श्री पर्वत पचाहा, श्री सौरभ सोनी रहें।

इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री शिव कुमार डाबर द्वारा उपस्थित दर्शकों एवं खिलाड़ियों को प्राधिकरण द्वारा संचालित विभिन्न निःशुल्क विधिक सहायता, मध्यस्थता, लोक अदालत एवं अन्य विधिक सेवा योजनाओं की जानकारी दी गई तथा पात्र व्यक्तियों को विधिक सहायता एवं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में अभिभाषक संघ, झाबुआ एवं सभी सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। आयोजन ने खेल के माध्यम से न्यायिक परिवार में आपसी सहभागिता, सौहार्द एवं सकारात्मक ऊर्जा का संदेश दिया।
 
उक्त कार्यक्रम में प्रथम जिला न्यायाधीश श्री प्रकाश केरकेट्टा, द्वितीय जिला न्यायाधीश श्री राकेश कुमार पाटीदार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री नितिन कुमार मुजाल्दा, जिविसेप्रा के सचिव श्री शिव कुमार डाबर, न्यायिक मजिस्ट्रेट सुश्री श्रद्धा पटेल, तहसील पेटलावद से न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री प्रियम कुमार सक्सेना, जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री जयदेव माणिक, जिला अभिभाषक संघ झाबुआ के अध्यक्ष श्री हेमेन्द्र प्रसाद अग्निहोत्री, उपाध्यक्ष श्री पर्वतसिंह पचाहा, श्री कृष्णलाल शाह, सचिव श्री प्रतीक मेहता, अभिभाषक संघ के पदाधिकारी, अभिभाषक संघ पेटलावद के अध्यक्ष श्री अविनाश उपाध्याय, अभिभाषक संघ थांदला के उपाध्यक्ष श्री निसार शेरानी, न्यायालयीन कर्मचारीगण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारीगण एवं बड़ी संख्या में दर्शक आदि उपस्थित रहे।
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🎯 सही मार्गदर्शन से संवरेगा भविष्य, सपनों को मिलेगी नई उड़ान

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत <nis:link nis:type=tag nis:id=मेरे_सपनों_का_भारत nis:value=मेरे_सपनों_का_भारत nis:enabled=true nis:link/> थीम के तहत शासकीय हाई स्कूल तलावली में विशेष करियर काउंसलिंग सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कक्षा 9वीं एवं 10वीं के 142 छात्र-छात्राओं तथा 16 शिक्षकों ने सहभागिता की।

सहायक श्रम पदाधिकारी श्री निलेश डामोर ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए विभिन्न प्रवेश एवं प्रतियोगी परीक्षाओं, उच्च शिक्षा, कौशल विकास तथा स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी दी। साथ ही विद्यार्थियों को अपनी रुचि एवं क्षमता के अनुरूप करियर का चयन कर लक्ष्य की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
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🎯 सपनों को सही दिशा देने की पहल

शा. उ.मा.वि. खरड़ू बड़ी में 175 विद्यार्थियों के लिए करियर काउंसलिंग आयोजित हुई। सहायक संचालक पिछड़ा वर्ग श्री रविपाल मोरी ने विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, ITI, पॉलिटेक्निक व स्वरोजगार के अवसरों पर मार्गदर्शन दिया।
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🎯 सही मार्गदर्शन से संवरेंगे सपने, लक्ष्य की ओर बढ़ेंगे कदम
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत शासकीय हाई स्कूल दौलतपुरा में कक्षा 9वीं एवं 10वीं के विद्यार्थियों के लिए करियर काउंसलिंग सत्र आयोजित किया गया।

सीएमओ झाबुआ श्री मिलन पटेल ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए विभिन्न प्रवेश एवं प्रतियोगी परीक्षाओं, उच्च शिक्षा के अवसरों, कौशल विकास, स्वरोजगार तथा टाइम मैनेजमेंट के संबंध में उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान किया।

विद्यालय में कक्षा 9वीं एवं 10वीं के कुल 116 विद्यार्थियों में से 54 विद्यार्थी सत्र में उपस्थित रहे। इस दौरान विद्यालयीन स्टाफ की भी सहभागिता रही।
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🌾 किसान का सम्मान, खुशहाली की ओर बढ़ते कदम

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से मिली आर्थिक सहायता श्री बद्री के लिए खेती की जरूरतों को पूरा करने में मददगार बनी है। योजना से मिले सहयोग ने उनके कृषि कार्यों को आर्थिक संबल प्रदान किया है।

लाभ मिलने पर श्री बद्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया।
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सपनों को सही दिशा, सफलता के लिए मार्गदर्शन! 🎯📚

‘मेरे सपनों का भारत’ थीम के अंतर्गत माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर पिटोल में आयोजित करियर काउंसलिंग सत्र में एसडीएम श्री महेश मंडलोई ने छात्राओं से संवाद कर सफलता के मंत्र साझा किए।

उन्होंने 10वीं के बाद रुचि एवं क्षमता के अनुरूप विषय चयन, बोर्ड परीक्षा की तैयारी तथा 12वीं के बाद NEET, JEE एवं प्रशासनिक सेवाओं में करियर बनाने के लिए आवश्यक तैयारी और रणनीति की जानकारी दी। छात्राओं ने भी खुलकर करियर से जुड़े सवाल पूछे और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान पाया।

एसडीएम श्री मंडलोई ने छात्राओं को लक्ष्य स्पष्ट रखने, नियमित अध्ययन, निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
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सही विषय का चयन, स्पष्ट लक्ष्य और निरंतर प्रयास ही बेहतर भविष्य की नींव है।

सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत शासकीय हाई स्कूल अंतरवेलिया, विकासखंड झाबुआ में करियर काउंसलिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 248 विद्यार्थियों ने सहभागिता की।

जिला विपणन अधिकारी सुश्री अमिता मोरे ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए कक्षा 10वीं के बाद अपनी रुचि एवं क्षमता के अनुरूप विषय चयन तथा इससे जुड़ी आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी। साथ ही कक्षा 12वीं के बाद NEET, JEE, CLAT, MPPAT एवं CA Entrance सहित विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं एवं करियर विकल्पों के बारे में विस्तार से बताया।

प्रश्नोत्तरी के दौरान विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए MPPSC परीक्षा एवं उससे संबंधित अवसरों की जानकारी भी दी गई।

विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करते हुए संदेश दिया गया कि “नशा नाश है”। साथ ही उन्हें असफलता से निराश न होकर उससे सीख लेते हुए नए तरीके और नई ऊर्जा के साथ पुनः प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
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