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Ramchandra Rajput

@raazrajpoothr
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एक बार फिर चर्चा में कदौरा ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायतें

परोसा के बाद अब निस्वा, एकौना और उकुरुआ की बारी—मनरेगा के रिकॉर्ड, श्रमिक डिमांड और धरातल की हकीकत पर उठेंगे सवाल

कागजों में दौड़ रहे मजदूर, जमीन पर पसरा सन्नाटा!

परोसा में तीन महीने से काम बंद होने के आरोप के बावजूद 27 से 29 सितंबर तक 115-115 श्रमिकों की डिमांड का मामला, जांच के भरोसे पर टिकी निगाहें

कदौरा/जालौन
कागजों में कुदाल चली, फाइलों में मिट्टी ढोई गई,
धरती पर नजर पड़ी तो काम की जगह खामोशी मिली।

कदौरा विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्यों को लेकर एक बार फिर सवालों का दौर शुरू हो गया है। परोसा ग्राम पंचायत से सामने आए मामले के बाद अब निस्वा, एकौना और उकुरुआ ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्यों के रिकॉर्ड, श्रमिक डिमांड और मौके की वास्तविक स्थिति को लेकर भी सवाल सामने रखे जाएंगे।

परोसा में सामने आए मामले ने मनरेगा की उस व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है, जिसमें पोर्टल पर श्रमिकों की डिमांड दर्ज होती है और धरातल पर काम होना अपेक्षित है। ग्रामीणों का आरोप है कि रामकरण के खेत से गोपी के खेत तक संपर्क मार्ग निर्माण कार्य करीब तीन महीने से बंद पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद 27, 28 और 29 सितंबर को लगातार 115-115 श्रमिकों की डिमांड दर्ज की गई।

काम बंद तो 115 मजदूरों की डिमांड किसलिए?

मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि ग्रामीणों के दावे के अनुसार कार्यस्थल पर लंबे समय से काम नहीं हो रहा था, तो फिर लगातार तीन दिनों तक 115 श्रमिकों की डिमांड किस आधार पर दर्ज की गई?

क्या मौके पर वास्तव में इतने मजदूर काम कर रहे थे?
क्या मस्टर रोल में दर्ज श्रमिकों ने काम किया?
क्या जियो-टैग फोटो और कार्यस्थल की वास्तविक स्थिति एक-दूसरे से मेल खाती है?
क्या श्रमिकों की डिमांड के अनुरूप धरातल पर कार्य हुआ?

इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।

अदृश्य मजदूरों का सच जांचेगी व्यवस्था?

मनरेगा में मजदूरों को रोजगार देने और उनके खाते में मजदूरी पहुंचाने की व्यवस्था को पारदर्शिता के लिए डिजिटल बनाया गया है। 
ऐसे में यदि किसी कार्यस्थल पर काम नहीं होने के बावजूद श्रमिकों की डिमांड दर्ज होने का आरोप सामने आता है, तो यह केवल एक पंचायत का मामला नहीं बल्कि रिकॉर्ड और धरातल के बीच अंतर की गंभीर जांच का विषय बन जाता है।

मस्टर में मजदूरों की कतार, मौके पर खाली मैदान,
कागज पूछे—काम हुआ, गांव पूछे—कहां है निशान?

अधिकारियों ने जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा

मामले में कदौरा के एपीओ मनरेगा सुशील कुमार से बात की गई तो उन्होंने मामले की जांच कराने और गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की बात कही।

वहीं श्रम उपायुक्त मनरेगा रामेंद्र सिंह कुशवाह ने भी कहा कि यदि मामला शिकायत के अनुरूप पाया जाता है तो जांच कर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

अब देखना यह होगा कि जांच केवल कागजी रिकॉर्ड तक सीमित रहती है या फिर कार्यस्थल पर पहुंचकर श्रमिकों, मस्टर रोल, जियो-टैग फोटो, डिमांड और भुगतान रिकॉर्ड का मिलान कराया जाता है।

सवाल सिर्फ परोसा का नहीं, अगली कड़ियों में सामने आएगी तस्वीर

परोसा के बाद अब निस्वा, एकौना और उकुरुआ ग्राम पंचायतों में भी मनरेगा कार्यों से जुड़े रिकॉर्ड और धरातलीय स्थिति को लेकर सवाल सामने रखे जाएंगे।

कितने श्रमिकों की डिमांड लगी?
कितने दिन तक लगी?
किस कार्य के नाम पर लगी?
मौके पर वास्तव में कितना काम हुआ?
और रिकॉर्ड में दर्ज काम की तस्वीर धरातल से कितनी मेल खाती है?

इन सभी बिंदुओं को सामने रखकर यह देखने की कोशिश होगी कि सरकारी रिकॉर्ड और गांव की जमीन पर दिखाई देने वाली हकीकत में कितना अंतर है।

सरकारी कागज बोल रहा—मजदूरों ने काम किया,
गांव की सूनी पगडंडी पूछे—फिर किसने काम किया?
डिमांड में मजदूर सैकड़ों, मौके पर सन्नाटा भारी,
अब जांच बताएगी आखिर किसकी थी ये जिम्मेदारी।

कुदाल चली या कलम चली, अब जांच से होगा फैसला,
गरीब के हक की मजदूरी पर नहीं चलना चाहिए कोई खेला।
फाइलों से निकलकर साहब, जरा जमीन पर भी आइए,
मनरेगा की असली तस्वीर अपनी आंखों से देख जाइए।

महत्वपूर्ण: परोसा में फर्जी डिमांड, फर्जी हाजिरी या सरकारी धन के गबन की पुष्टि अभी जांच के अधीन है। 
इसलिए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच रिपोर्ट और संबंधित रिकॉर्ड के परीक्षण के बाद ही मानी जाएगी।

अगली कड़ी में—निस्वा, एकौना और उकुरुआ:
कब से चल रहा काम?
 कितने श्रमिकों की लगी डिमांड? 
और रिकॉर्ड में दर्ज काम की मौके पर क्या है हकीकत?
उरई। जिला अस्पताल की सिटी स्कैन यूनिट में आग लग गई।

बताया जा रहा है कि बैटरी में फॉल्ट के बाद धमाका हुआ, जिसके बाद अफरा-तफरी मच गई। कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई।
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कैसे कैसे जमूरों को हम लोग नेता चुनते है, उन्हें खुद पर ही भरोसा नहीं है 

डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के ‘ई-रिक्शा चलाओ’ बयान पर ओपी राजभर का समर्थन, कहा- यूपी की आबादी 25 करोड़ इसमें सबको नौकरी नहीं दी जा सकती, इसलिए टेंपू चलाना गुनाह नहीं, ब्रजेश पाठक ने कुछ गलत नहीं कहा।
पाठक ज़ी कि राय में सुर में सुर मिलाते पीले राजभर 
🤣🤣😂😂🤣🤣
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जालौन पुलिस में मेगा फेरबदल, 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी इधर से उधर

कई चौकी प्रभारियों की कुर्सी बदली, पुलिस लाइन से थानों तक पहुंचाए गए उपनिरीक्षक; नई तैनाती से पुलिस महकमे में हलचल

उरई/जालौन  जिले की पुलिस व्यवस्था में गुरुवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला। 50 से अधिक पुलिसकर्मियों के तबादले कर पुलिस महकमे में व्यापक फेरबदल किया गया है। 
कई चौकी प्रभारियों को नई जिम्मेदारी दी गई है, जबकि पुलिस लाइन में तैनात उपनिरीक्षकों को अलग-अलग थानों में भेजकर जिम्मेदारी संभालने के निर्देश दिए गए हैं।

तबादला सूची सामने आते ही पुलिस महकमे में हलचल बढ़ गई। उरई कोतवाली की मंडी चौकी प्रभारी रमाशंकर तिवारी को अब बल्लभ नगर चौकी की कमान सौंपी गई है। 
वहीं तिलक नगर चौकी प्रभारी वीरेंद्र बहादुर सिंह को मंडी चौकी की जिम्मेदारी दी गई है। यानी उरई शहर की महत्वपूर्ण चौकियों पर भी जिम्मेदारियों में फेरबदल किया गया है।

 थानों में पहुंची नई पुलिस टीम

पुलिस लाइन में तैनात उपनिरीक्षकों को भी अब मैदान में उतारा गया है।
 सूची के अनुसार इदरीस अहमद को डकोर, उदयपाल सिंह को कदौरा, अकील अहमद को कालपी, जितेंद्र सिंह को आटा, अवधेश सिंह को कोंच, बृजकिशोर को नदीगांव, रामजी सिंह को रैढ़र, श्यामवीर सिंह को गोहन, शफीक अहमद को जालौन, कमलेश कुमार को ऐट और चरन सिंह को माधौगढ़ में तैनाती दी गई है।

इसके अलावा कौशलेन्द्र सिंह को चुर्खी, सुनील कुमार और योगेश कुमार को कोतवाली उरई, रामविलास को रामपुरा तथा प्रेम बहादुर सिंह को जगम्मनपुर भेजा गया है।

महिला पुलिसकर्मियों की भी बदली तैनाती

फेरबदल केवल उपनिरीक्षकों और चौकी प्रभारियों तक सीमित नहीं रहा। महिला हेड कांस्टेबल और महिला कांस्टेबलों को भी नई तैनाती दी गई है। इनमें अनीता देवी, प्रियंका देवी और सन्नो देवी समेत अन्य महिला पुलिसकर्मी शामिल हैं।

अब नई जिम्मेदारी, नई चुनौती

50 से अधिक पुलिसकर्मियों के इस बड़े फेरबदल के बाद जिले के कई थानों और चौकियों की तस्वीर बदली है। संबंधित पुलिसकर्मियों को नवीन तैनाती स्थल पर तत्काल पहुंचकर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।

अब नई तैनाती के बाद कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और क्षेत्र में पुलिसिंग की जिम्मेदारी इन अधिकारियों और कर्मचारियों के कंधों पर होगी। 
आने वाले दिनों में इस बदलाव का असर थाना और चौकी स्तर की पुलिस व्यवस्था में दिखाई देने की उम्मीद है।

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परिसर में पेड़ पर पेशाब करने का मामला, विभाग ने लिया संज्ञान

चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राम जी लाल कनौजिया को नोटिस, फोटो के साथ मांगा जवाब

उरई, जालौन। लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड कार्यालय परिसर में सार्वजनिक स्थान पर पेड़ के पास पेशाब करने का मामला सामने आने के बाद विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है। मामले में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राम जी लाल कनौजिया का नाम सामने आया है।

मामले से संबंधित 29 सितंबर 2026 के विभागीय पत्र में कार्यालय परिसर में गंदगी फैलाए जाने का उल्लेख करते हुए संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस के साथ घटना से संबंधित फोटोग्राफ भी संलग्न किए गए हैं।

विभागीय पत्र में कहा गया है कि शासन एवं उच्चाधिकारियों के निर्देश पर कार्यालय और परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन कुछ लोगों द्वारा परिसर में गंदगी फैलाए जाने की बात संज्ञान में आई है। पत्र में यह भी उल्लेख है कि कार्यालय परिसर में महिलाओं का भी आवागमन रहता है, इसलिए इस तरह का आचरण अशोभनीय एवं अनुशासनहीन है।

अधिशासी अभियंता, प्रांतीय खंड, लोक निर्माण विभाग उरई की ओर से जारी पत्र में संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करते हुए अधोहस्ताक्षरी को अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं।

वहीं, परिसर में आने-जाने वाले लोगों का कहना है कि सरकारी कार्यालय में स्वच्छता और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। अब विभागीय कार्रवाई के बाद मामले में आगे क्या कदम उठाया जाता है, इस पर नजर है।
जालौन में सफाई को लेकर डीएम का सख्त निर्देश, बाजार से गलियों तक चलेगा विशेष अभियान

जालौन जिलाधिकारी समीर ने नगर निकायों एवं नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर विशेष सफाई अभियान को व्यापक स्तर पर चलाने के निर्देश दिए। 
डीएम ने कहा कि बाजार, धार्मिक स्थल, मुख्य मार्ग, चौराहे, नालियां और सार्वजनिक स्थलों के साथ-साथ मोहल्लों की गलियों में भी सफाई सुनिश्चित हो।

उन्होंने सफाई के बाद कचरे का नियमानुसार एवं पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप निस्तारण कराने तथा अभियान की लगातार निगरानी के निर्देश दिए। 
महापुरुषों की मूर्तियों के आसपास भी विशेष सफाई कराने को कहा गया।

डीएम ने आम लोगों से भी सहयोग की अपील करते हुए कहा कि किसी वार्ड या मोहल्ले में सफाई न होने अथवा गंदगी पड़े होने की सूचना मोबाइल नंबर 9936256363 पर दी जा सकती है।
 सूचना मिलने पर संबंधित अधिकारियों को अवगत कराकर आवश्यक कार्रवाई कराई जाएगी।

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एक ही रात में 5 ट्यूबवेलों पर चोरों का धावा, किसानों में मचा हड़कंप

स्टार्टर, केबल समेत लाखों का सामान चोरी होने की आशंका, बंगरा रोड के मनकापुर मौजा का मामला

जालौन
 बंगरा रोड स्थित मनकापुर मौजा क्षेत्र में चोरों ने एक ही रात में खेतों में लगे पांच ट्यूबवेलों को निशाना बनाकर किसानों की चिंता बढ़ा दी।
 बंबी के आसपास खेतों में लगे ट्यूबवेलों से चोर स्टार्टर, केबल समेत अन्य विद्युत उपकरण चोरी कर ले गए।

बताया जा रहा है कि चोरों ने अंधेरे का फायदा उठाते हुए अलग-अलग ट्यूबवेलों पर धावा बोला और सामान समेटकर मौके से फरार हो गए।
 सुबह जब किसान अपने खेतों पर पहुंचे तो ट्यूबवेलों से उपकरण गायब देखकर उनके होश उड़ गए। एक साथ कई ट्यूबवेलों में चोरी की जानकारी मिलते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

किसानों ने घटना की सूचना पुलिस को दी। 
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण करते हुए चोरी की घटनाओं की जांच शुरू कर दी। 
एक ही रात में पांच ट्यूबवेलों में चोरी की वारदात सामने आने से पुलिस की रात्रि गश्त पर भी सवाल उठने लगे हैं।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और चोरी की घटनाओं में शामिल आरोपियों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
 चोरी हुए सामान की वास्तविक कीमत का आकलन भी किया जा रहा है।

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जालौन

उरई में एसडीएम व सीओ ने ARTO दफर का किया निरीक्षण,

एसडीएम-सीओ के निरीक्षण से एआरटीओ कार्यालय में मचा हड़कंप,

निरीक्षण के दौरान मौके पर तीन कर्मचारी मिले अनुपस्थित,

सदर एसडीएम उत्तम कुमार ने आवश्यक कार्रवाई के दिए निर्देश,

एआरटीओ कार्यालय में घूम रहे संदिग्ध लोगों से भी अधिकारियों ने की पूछताछ,

एसडीएम और सीओ ने कार्यालय के विभिन्न पटलों का किया निरीक्षण,

जालौन के उरई स्थित एआरटीओ कार्यालय का मामला।
वारंटी अपराधियों पर जालौन पुलिस का शिकंजा, तीन गिरफ्तार

जालौन। वांछित एवं वारंटी अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत जालौन पुलिस को सफलता मिली है। 
कोतवाली जालौन, थाना रेंढर और थाना चुर्खी पुलिस ने अलग-अलग कार्रवाई करते हुए तीन वारंटी अभियुक्तों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया।

पुलिस के अनुसार कोतवाली जालौन पुलिस ने मुदित पुत्र अरविंद नारायण निवासी बालमभट्ट, कस्बा व कोतवाली जालौन को गिरफ्तार किया। 
वहीं थाना रेंढर पुलिस ने चन्द्रभान पुत्र जगदीश निवासी ग्राम तोरसा को वारंट के आधार पर पकड़ा।

इसी क्रम में थाना चुर्खी पुलिस ने किशन प्रसाद उर्फ किशुन प्रसाद पुत्र राम सहाय निवासी ग्राम पट्टीपुरा को गिरफ्तार किया।
 तीनों अभियुक्तों को आवश्यक कानूनी कार्रवाई के बाद न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया।

पुलिस की इस कार्रवाई को वांछित एवं वारंटी अभियुक्तों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा बताया गया है।

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चिकासी मोहाना बेतवा पुल चढ़ा पूरी तरह भ्रष्टाचार की भेंट

कुछ ही महीनों में करोड़ो गटक गए जिम्मेदार 

नितिन गडकरी भी फेल

गड्ढा मुक्त करने चले थे खड्डा ही खड्डा कर दिए 

कमेंट करके बताएं आपके यहां सड़क कितने दिन में उखड़ जाती है ? 

कमेंट करे अगर आपके यहां सड़क में खड़े हो
प्रयागराज-झांसी स्नातक सीट से अशोक राठौर भाजपा प्रत्याशी

क्या बीजेपी में अमीरो को ही टिकट दिए जाते है ? जो सबसे ज्यादा चंदा दे, इनके प्रोग्राम में खर्चा करे, उनकी पूछ होती है - सूत्र

क्या कोई जमीनी, युवा नेता नहीं मिलते अब जमाना gen z ka है 

जालौन। प्रयागराज-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा ने अशोक राठौर को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। 

इस निर्वाचन क्षेत्र में प्रयागराज, कौशांबी, फतेहपुर, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, जालौन, झांसी और ललितपुर जिले शामिल हैं। भाजपा के उम्मीदवार की घोषणा के साथ ही क्षेत्र में चुनावी गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

वहीं, समाजवादी पार्टी की ओर से पिछली बार के एमएलसी डॉ. मान सिंह यादव भी मैदान में हैं। इनको तो अपनी ही जाति के आलावा कुछ मुक्त ही नहीं है 

क्षेत्र में लंबे समय से उनकी सक्रियता और मजबूत पकड़ के चलते उनकी दावेदारी को भी मजबूत माना जा रहा है।

अशोक राठौर और डॉ. मान सिंह यादव की उम्मीदवारी को लेकर आपकी क्या राय है? अपनी बात कमेंट में बताएं।

जनता क्या करे , आगे कुआँ पीछे खाई साझ सकते क्या होगा

एक पुल की हालात से समझो कैसे ये सरकार चल रही है, और आगे केसे चलेगी
नियम तोड़ने वाली बसों पर चला एआरटीओ का चाबुक...

उरई। उत्तर प्रदेश के परिवहन आयुक्त के निर्देशों के तहत सड़कों पर यात्रियों की सुरक्षा पुख्ता करने और डग्गामार व मानकों के विपरीत दौड़ रही बसों पर नकेल कसने के लिए तीन दिवसीय विशेष प्रवर्तन अभियान 'ऑपरेशन कवच-2.0' का आगाज कर दिया गया है। 28, 29 और 30 सितंबर 2026 तक 24 घंटे लगातार चलने वाले इस चेकिंग अभियान में बस-बॉडी कोड, ऊंचाई के मानकों के उल्लंघन और छतों पर क्षमता से अधिक सामान लादकर यात्रा कराने वालों पर पैनी नजर रखी जा रही है। जिले में अधिकारियों की कमी को देखते हुए परिवहन विभाग ने पड़ोसी संभागीय अधिकारियों को भी मोर्चे पर तैनात किया है, ताकि जांच में कोई ढील न रहे।
अभियान के पहले ही दिन से परिवहन विभाग की टीमों ने सड़कों पर उतरकर ताबड़तोड़ चेकिंग शुरू कर दी। 28 सितंबर की रात से लेकर 29 सितंबर की दोपहर तक चलाए गए इस सर्च ऑपरेशन में जालौन के एआरटीओ (प्रवर्तन) राजेश कुमार ने नियमों की धज्जियां उड़ा रही 02 स्लीपर बसों पर गाज गिराई, वहीं झांसी से विशेष ड्यूटी पर आए एआरटीओ (प्रवर्तन) हेमचंद्र गौतम ने भी 02 स्लीपर बसों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया। इसके साथ ही जालौन के यात्रीकर/मालकर अधिकारी आनंद राय कुरील ने 01 स्लीपर बस को कब्जे में लेकर चालान और सीज की कार्रवाई की। इन सभी 05 अवैध स्लीपर बसों को जनपद के अलग-अलग थानों में बंद करा दिया गया है, जबकि दर्जनों अन्य यात्री बसों पर विभिन्न यातायात नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना ठोका गया है।
प्रशासनिक टीम ने कार्रवाई के दौरान बसों में मौजूद यात्रियों की सहूलियत का पूरा ख्याल रखा। जिन बसों को सीज कर थानों में खड़ा कराया गया, उनमें सवार यात्रियों को उनके गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) उरई डिपो की बसों से तत्काल वैकल्पिक इंतजाम किए गए। एआरटीओ अधिकारियों का कहना है कि सड़कों पर अवैध रूप से दौड़ रही बसों से यात्रियों की जान को खतरा रहता है, इसलिए सफर को पूरी तरह महफूज और व्यवस्थित बनाने के लिए यह विशेष चेकिंग अभियान अग्रिम आदेशों तक बिना रुके लगातार जारी रहेगा।
जालौन में बीच चौराहे पर देखने को मिली रईसजादों की दबंगई, मच्छर चौराहे पर लगे सीसीटीवी कैमरा में कैद हुई पूरी वारदात

बिना नंबर की बुलेट बाइक रोकना ट्रैफिक सिपाही को पड़ा भारी

ब्लैक फ़िल्म लगी थार चालक का भी बीच चौराहे पर देखने क़ो मिला तांडव

नियमों का पालन कराने वाले ट्रैफिक सिपाही से भिड़े रईसजादे

थार गाड़ी  बीजेपी का झंडा लगाकर आए  थे अमीर जादे 

ट्रैफिक प्रभारी को कॉल लगाकर दी देख। लेने की धमकी

सड़क पर तैनात होमगार्ड का मोबाइल भी छीना, बड़े ही मुश्किल से लौटाया
 
प्रदेश लेवल के नेता का करीबी बताया जा रहे कथित नेता जी

कोतवाली से 10 कदम की दूरी पर रईसजादों ने खुलेआम ट्रैफिक सिपाही को धमकाया

बीच चौराहे पर ट्रैफिक सिपाही से गाली-गलौज कर दिखाई दबंगई

ट्रैफिक सिपाही से गाली-गलौज और धमकाते रईसजादों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

जालौन के उरई कोतवाली क्षेत्र के शहीद भगतसिंह चौराहे का मामला
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जालौन के कैफे में हुक्का बार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

उरई के सुशील नगर स्थित डी ब्लैक वेंचर पॉइंट कैफे-रेस्टोरेंट का बताया जा रहा वीडियो

नाबालिग लड़कों को हुक्का पिलाने के आरोप, वीडियो की सत्यता की पुष्टि होना बाकी

कैफे के अंदर बालाओं के डांस का वीडियो भी सामने आया

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद कैफे की गतिविधियों को लेकर उठे सवाल

बिना वैध अनुमति हुक्का संचालन के आरोपों की जांच की मांग

अब देखना होगा कि पुलिस-प्रशासन वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर क्या कार्रवाई करता है
ARTO के बहाने खनन विभाग पर दबाव का खेल तो नहीं?

घाट शुरू होने से पहले ही ‘फ्री में ट्रक भरवाने’ की प्लानिंग का सवाल, सख्त प्रवर्तन के बीच उठे कई गंभीर सवाल

जालौन में बालू घाटों के संचालन का समय जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है, वैसे-वैसे खनन और परिवहन व्यवस्था को लेकर चर्चाएं भी तेज होती दिखाई दे रही हैं। 
इसी बीच ARTO राजेश कुमार वर्मा को लेकर लगातार उठाए जा रहे सवालों के पीछे अब एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है—क्या मामला केवल परिवहन विभाग तक सीमित है या इसके पीछे खनन व्यवस्था को प्रभावित करने की कोई कोशिश भी हो सकती है?

यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बालू घाटों के संचालन के साथ ही वैध परिवहन, ओवरलोडिंग, परमिट, ई-रवन्ना और राजस्व से जुड़े नियमों का पालन बेहद अहम हो जाता है। 
ऐसे में प्रवर्तन कार्रवाई में सख्ती होने पर उन लोगों के हित प्रभावित हो सकते हैं, जिन्हें नियमों की अनदेखी से फायदा मिलने की आशंका हो।

ARTO पर दबाव क्यों? सवाल कई, जवाब अभी बाकी

चर्चाओं में यह सवाल भी सामने आ रहा है कि क्या कुछ वाहन मालिकों या उनसे जुड़े लोगों को नियमों से इतर किसी प्रकार का लाभ दिलाने के लिए विभागीय कार्रवाई को प्रभावित करने का प्रयास हो सकता है?

यह आरोप नहीं, बल्कि जांच की मांग करने वाला सवाल है।

यदि वास्तव में किसी अधिकारी के खिलाफ शिकायतें हैं तो उनके समर्थन में दस्तावेज, रिकॉर्ड अथवा ठोस प्रमाण सार्वजनिक किए जाने चाहिए। 
वहीं यदि अधिकारी की कार्रवाई नियमों के अनुरूप है तो उसका मूल्यांकन भी आधिकारिक आंकड़ों और कार्रवाई के रिकॉर्ड के आधार पर होना चाहिए।

राजस्व वसूली और प्रवर्तन बना चर्चा का केंद्र

राजेश कुमार वर्मा की कार्यशैली को लेकर विभागीय स्तर पर राजस्व वसूली और प्रवर्तन कार्रवाई पर जोर दिए जाने की चर्चा है। 
ऐसे में सवाल यह भी है कि किसी अधिकारी की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं से किया जाएगा या सरकारी रिकॉर्ड और उपलब्ध आंकड़ों से?

अगर कार्रवाई वास्तव में ओवरलोडिंग, अवैध परिवहन और राजस्व हानि रोकने के उद्देश्य से की जा रही है, तो उसके परिणामों की निष्पक्ष समीक्षा जरूरी है।

घाट शुरू होने से पहले ही क्यों उठ रहा ‘फ्री ट्रक’ का सवाल?

सबसे गंभीर सवाल बालू घाटों के संचालन से पहले संभावित व्यवस्थाओं को लेकर है। आखिर क्या घाट शुरू होने से पहले ही कुछ चुनिंदा वाहनों को नियमों से अलग फायदा दिलाने की कोई कोशिश हो रही है?

क्या ARTO के खिलाफ बनाया जा रहा दबाव किसी बड़े समीकरण का हिस्सा है?

क्या परिवहन विभाग में सख्ती कम कराने के जरिए खनन कारोबार से जुड़े किसी नेटवर्क को लाभ पहुंचाने की कोशिश हो सकती है?

इन सवालों के जवाब अभी सामने नहीं आए हैं।

पुराने दौर की भी होगी पड़ताल

बालू परिवहन को लेकर पिछले वर्षों में भी अलग-अलग शिकायतें और विवाद सामने आते रहे हैं। 
इसलिए मौजूदा परिस्थितियों को समझने के लिए पुराने रिकॉर्ड, चालान, ओवरलोडिंग कार्रवाई, राजस्व वसूली, ई-रवन्ना और वाहनों की जांच से जुड़े आंकड़ों की भी पड़ताल जरूरी होगी।

अगर इस बार नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं, तो इससे व्यवस्था की पारदर्शिता मजबूत होगी। वहीं यदि किसी अधिकारी के खिलाफ वास्तविक शिकायत है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

सरकारी राजस्व किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि जनता और सरकार से जुड़ा धन है।
 इसलिए सवाल किसी अधिकारी के पक्ष या विपक्ष का नहीं, बल्कि नियमों के समान अनुपालन और सरकारी राजस्व की सुरक्षा का होना चाहिए।

अब घाट खुलेंगे तो सामने आएगी असली तस्वीर

बालू घाटों के संचालन के बाद परिवहन विभाग की कार्रवाई, ओवरलोडिंग पर शिकंजा, ई-रवन्ना की जांच, वाहनों पर कार्रवाई और राजस्व वसूली के आंकड़े काफी हद तक स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।

अब देखना यह होगा कि घाट शुरू होने के बाद नियम सभी के लिए एक समान लागू होते हैं या नहीं।

कौन नियमों का पालन करता है, कौन उल्लंघन करता है और शिकायतों के पीछे वास्तविक तथ्य क्या हैं—इसकी तस्वीर आने वाले दिनों में सामने आ सकती है।

सबसे बड़ा सवाल यही है—ARTO के खिलाफ उठ रहे सवाल महज परिवहन विभाग की कार्यशैली को लेकर हैं या इनके पीछे खनन व्यवस्था को प्रभावित करने का कोई बड़ा दबाव भी काम कर रहा है?

इस पूरे मामले में पिछले वर्षों के बालू परिवहन, ओवरलोडिंग, कार्रवाई और राजस्व वसूली के रिकॉर्ड की पड़ताल बेहद जरूरी है। 
आखिर पहले क्या व्यवस्था थी और इस बार क्या बदल रहा है—अगली पड़ताल में दस्तावेजों और आंकड़ों के आधार पर सामने रखेंगे पूरी तस्वीर।
न्याय मांगने थाने पहुंची महिला, समझौते की पर्ची लेकर लौटी! 😄

जालौन में पुलिस पर जबरन समझौता कराने का आरोप, महिला बोली—“शिकायत लेकर गई थी, समझौता करवाकर भेज दिया”

जालौन। कोतवाली जालौन क्षेत्र के ग्राम पंचायत मकरंदपुरा में विवाद के बाद एक महिला ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। महिला का आरोप है कि वह शिकायत लेकर थाने पहुंची थी, लेकिन कार्रवाई की उम्मीद के बजाय उस पर समझौते का दबाव बनाया गया।

मोहल्ला चुर्खीबाल निवासी राशि प्रजापति पत्नी संजय का आरोप है कि मकरंदपुरा में दो पक्षों के बीच विवाद के बाद वह अपनी शिकायत लेकर कोतवाली पहुंचीं। महिला के मुताबिक, हल्का प्रभारी ने दोनों पक्षों को बैठाया और कथित तौर पर उस पर दबाव बनाकर समझौता करा दिया।

महिला का कहना है कि वह न्याय की उम्मीद लेकर थाने पहुंची थी, लेकिन मामला कार्रवाई से आगे बढ़ने के बजाय सीधे “चलो भाई, समझौता करो” वाली स्थिति में पहुंच गया। महिला ने हल्का प्रभारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।

हालांकि, महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि पूरे मामले में वास्तव में क्या हुआ और समझौता किन परिस्थितियों में कराया गया।
जालौन में दो जगह सांप-अजगर से हड़कंप

कोंच CHC की कैंटीन में 5 फीट लंबा सांप निकला, उरई में कार में घुसा अजगर—वन विभाग ने किया रेस्क्यू

जालौन में अलग-अलग स्थानों पर सांप और अजगर निकलने से अफरा-तफरी मच गई। 

कोंच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) की कैंटीन परिसर में करीब 5 फीट लंबा सांप दिखाई देने से हड़कंप मच गया। 
सांप को देखकर कैंटीन में मौजूद लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। काफी मशक्कत के बाद सांप को पकड़ा गया। 
सांप को निकालने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वहीं दूसरी घटना उरई कोतवाली क्षेत्र की है, जहां रात के अंधेरे में एक युवक की कार में अजगर घुस गया। 
सुबह कार में अजगर होने की जानकारी मिलते ही हड़कंप मच गया। 
सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद अजगर को सुरक्षित तरीके से कार से बाहर निकाला। 
दोनों घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं।

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रोडवेज डिपो में कथित मंथली का खेल? ऑनलाइन ट्रांजैक्शन से उठे बड़े सवाल

संविदा परिचालक ने डीएम को सौंपा शिकायती पत्र, पैसे मांगने, धमकी और मारपीट के लगाए आरोप; फोनपे लेनदेन व मेडिकल रिपोर्ट देने का दावा

 सरकारी रोडवेज डिपो की कार्यप्रणाली को लेकर एक शिकायत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 
उरई डिपो में संविदा परिचालक के पद पर कार्यरत विकास कुमार ने 28 सितंबर को जिलाधिकारी को शिकायत देकर कथित रूप से नियमित पैसे की मांग, ऑनलाइन लेनदेन, नौकरी से हटाने की धमकी और मारपीट के आरोप लगाए हैं।

शिकायतकर्ता के मुताबिक वह वर्ष 2018 से संविदा परिचालक के रूप में कार्यरत है।
 उसका आरोप है कि पहले उससे कथित रूप से पैसे लिए जाते थे, लेकिन पैसा देना बंद करने के बाद उस पर कार्रवाई का दबाव बनाया गया। 
शिकायत में दावा किया गया है कि ड्राइवर और अन्य कर्मचारियों के माध्यम से अधिकारियों तक पैसा पहुंचाने के लिए ऑनलाइन लेनदेन कराया जाता था।

मामला तब और गंभीर हो गया जब शिकायतकर्ता ने कथित फोनपे ट्रांजैक्शन का विवरण जिलाधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत करने और मेडिकल रिपोर्ट संलग्न करने की बात कही। 
अब जांच का सबसे बड़ा बिंदु यही है कि जिन रकमों का विवरण शिकायत के साथ दिया गया है, वे आखिर किस खाते से किस खाते में गईं? 
रकम किस तारीख को भेजी गई और उसका वास्तविक उद्देश्य क्या था?

23 सितंबर की घटना ने बढ़ाया विवाद

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि 23 सितंबर को झांसी से उरई लौटते समय पिरौना नहर के पास बस संख्या UP78 LN 3340 को रोका गया। शिकायत के अनुसार वहां पैसे को लेकर बातचीत हुई और बाद में नौकरी समाप्त करने की धमकी तथा मारपीट का आरोप लगाया गया।

वहीं दूसरी तरफ प्रकाशित रिपोर्टों में 23 सितंबर की बस चेकिंग के दौरान बिना टिकट यात्रियों को लेकर विवाद और परिचालक पर अधिकारियों के साथ मारपीट के आरोपों की बात सामने आई है। इस संबंध में थाने में रिपोर्ट दर्ज होने की भी बात कही गई है।

ऐसे में सवाल सिर्फ शिकायत के आरोपों का नहीं, बल्कि 23 सितंबर को मौके पर वास्तव में क्या हुआ था, इसका भी है।

डिजिटल रिकॉर्ड से खुल सकता है पूरा राज?

यदि शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए ऑनलाइन लेनदेन के दस्तावेज सही हैं तो जांच एजेंसियों के सामने कई महत्वपूर्ण बिंदु होंगे—किस खाते में रकम पहुंची, खाताधारक कौन है, रकम कितनी थी, कितनी बार लेनदेन हुआ और क्या इन लेनदेन का संबंध कथित ‘मंथली’ से था?

हालांकि केवल स्क्रीनशॉट या ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड से यह स्वतः साबित नहीं होता कि पैसा किस उद्देश्य से भेजा गया था।
 इसके लिए बैंक रिकॉर्ड, खाताधारकों का विवरण, कॉल/मैसेज संबंधी उपलब्ध साक्ष्य, विभागीय रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों के बयान की जांच जरूरी होगी।

अब जांच पर टिकी निगाहें

शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। 
जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष भी जांच के दौरान सामने आना जरूरी है।
 यदि आरोप गलत हैं तो जांच से स्थिति स्पष्ट होगी और यदि डिजिटल लेनदेन व अन्य साक्ष्यों से आरोपों की पुष्टि होती है तो मामला गंभीर विभागीय जांच का विषय बन सकता है।

अब बड़ा सवाल यही है—क्या उरई रोडवेज डिपो में कर्मचारियों से कथित नियमित पैसों के लेनदेन की कोई व्यवस्था थी, या फिर यह पूरा विवाद 23 सितंबर की बस चेकिंग के बाद पैदा हुआ?

इसका जवाब आरोपों से नहीं, बल्कि डिजिटल ट्रांजैक्शन, बैंक रिकॉर्ड, मेडिकल दस्तावेज, विभागीय रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच से सामने आएगा।

 वीडियो आखिर तक जरूर देखें और सुनें—जिलाधिकारी को ज्ञापन देने के बाद कैमरे के सामने पीड़ित ने आखिर क्या-क्या कहा।

आप भी अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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🚨 सख्ती बढ़ी तो विरोध भी तेज!

राजेश कुमार की कार्रवाई से परिवहन विभाग में ‘ब्रेक’ या दलालों के धंधे पर ब्रेक?

राजस्व वसूली में शानदार आंकड़े, मगर विरोध की गूंज ने खड़े किए सवाल—आखिर सख्ती से किसकी ‘सवारी’ छूटी?

उरई (जालौन)। परिवहन विभाग जालौन में इन दिनों माहौल कुछ ऐसा है कि एक तरफ सरकारी आंकड़े कह रहे हैं—“कमाई बढ़िया चल रही है”, तो दूसरी तरफ विरोध के स्वर पूछ रहे हैं—“भाई इतनी सख्ती आखिर क्यों?” अब आम आदमी भी सोच रहा है कि मामला नियम-कायदे का है या फिर कहीं किसी की सुविधा वाली गाड़ी पर अचानक ब्रेक लग गया है।

एआरटीओ प्रवर्तन राजेश कुमार की सख्त कार्यशैली इन दिनों चर्चा में है। अगस्त 2026 में उनके संवर्ग को 36 लाख रुपये का मासिक प्रशमन शुल्क वसूली लक्ष्य मिला था, जिसके मुकाबले 51.27 लाख रुपये की वसूली दर्ज की गई। अप्रैल से अगस्त तक 1.80 करोड़ रुपये के लक्ष्य के सापेक्ष 2.567 करोड़ रुपये की वसूली बताई गई। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार संबंधित संवर्ग ने प्रदेश स्तरीय श्रेणीकरण में पहला स्थान हासिल किया।

यानी सरकारी आंकड़ों की भाषा में तस्वीर चमकदार है। लेकिन कहानी का दूसरा सीन भी है—विरोध के स्वर!

अब सवाल उठता है कि आखिर परेशानी किस बात की है? नियमों का पालन कराने से? कार्रवाई से? या फिर उस व्यवस्था से जिसमें बिना “सिफारिशी हवा” के काम कराने की आदत पड़ चुकी हो?

इधर यात्रीकर एवं मालकर अधिकारी आनंद राय कुरील के स्तर पर भी अगस्त में 30 लाख रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 37.46 लाख रुपये और अप्रैल से अगस्त तक 1.50 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 1.7708 करोड़ रुपये की वसूली बताई गई है।

मतलब राजस्व की गाड़ी तो रफ्तार पकड़ रही है, लेकिन विरोध की गाड़ी भी पीछे-पीछे हॉर्न बजाती नजर आ रही है।

कार्यालय में कथित दलालों की सक्रियता और अनधिकृत तरीके से काम कराने की चर्चाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। हालांकि इन चर्चाओं की वास्तविकता जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकती है। सवाल यह भी है कि अगर व्यवस्था पारदर्शी है तो फिर दलाली की चर्चाओं पर पूर्ण विराम क्यों नहीं लगता?

सबसे बड़ा सवाल यही है—सख्ती से अगर नियमों का पालन हो रहा है तो विरोध की वजह क्या है? और अगर किसी को कार्रवाई से वास्तविक शिकायत है तो उसके पास क्या तथ्य और दस्तावेज हैं?

बहरहाल, सरकारी आंकड़े विभाग की राजस्व उपलब्धियों की कहानी बता रहे हैं, जबकि विरोध और चर्चाएं व्यवस्था के दूसरे पहलू की ओर इशारा कर रही हैं। अब जनता की नजर इस बात पर है कि आखिर परिवहन विभाग की ‘असली कहानी’ सरकारी फाइल बताएगी या विरोध की आवाज?

फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है—
सड़क पर वाहनों की चेकिंग तेज है, विभाग में सख्ती तेज है और चर्चाओं का ट्रैफिक भी फुल स्पीड में है। अब देखना यह है कि जांच की गाड़ी किस मोड़ पर जाकर रुकती है!

✍️ संजयकुमार पत्रकार जालौन 

      मो.7905184371
काश हमेशा कार्यवाही हो।

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जालौन परिवहन विभाग में प्रवर्तन कार्रवाई चर्चा में, सख्ती के बीच उठे सवाल

राजस्व वसूली और नियमों के पालन को लेकर विभागीय कार्रवाई पर नजर, कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चा

जालौन। जिले के परिवहन विभाग में इन दिनों प्रवर्तन कार्रवाई और राजस्व वसूली को लेकर चर्चा बनी हुई है। विभाग की ओर से नियमों के अनुपालन और अनधिकृत परिवहन के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की बात सामने आती रही है।

एआरटीओ राजेश कुमार वर्मा के कार्यकाल में विभागीय स्तर पर प्रवर्तन गतिविधियों को लेकर चर्चा है। हालांकि कार्रवाई की वास्तविक स्थिति और इसके परिणामों का आकलन सरकारी रिकॉर्ड और विभागीय आंकड़ों के आधार पर ही किया जा सकता है।

वहीं, एआरटीओ कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि एपीएन न्यूज़ द्वारा नहीं की गई है। इसलिए किसी व्यक्ति या समूह पर किसी प्रकार का आरोप लगाना उचित नहीं होगा।

आखिर सवाल क्या हैं?

क्या प्रवर्तन कार्रवाई में तेजी आई है?
क्या राजस्व वसूली के आंकड़ों में बदलाव आया है?
क्या कार्यालय की कार्यप्रणाली में कोई प्रशासनिक सुधार हुआ है?
और यदि किसी पक्ष को कार्रवाई या व्यवस्था को लेकर आपत्ति है, तो उसका वास्तविक आधार क्या है?

इन सभी सवालों का जवाब आधिकारिक आंकड़ों, विभागीय रिपोर्ट और संबंधित पक्षों के बयान से ही स्पष्ट हो सकता है।

विभाग का पक्ष भी महत्वपूर्ण

परिवहन विभाग की कार्रवाई को लेकर यदि कोई उपलब्धि या बेहतर राजस्व वसूली के आंकड़े हैं, तो उनका श्रेय संबंधित विभागीय टीम के सामूहिक प्रयासों को दिया जाना चाहिए। वहीं, यदि किसी स्तर पर शिकायतें हैं तो उनकी जांच संबंधित सक्षम अधिकारी द्वारा तथ्यों के आधार पर की जानी चाहिए।

समय टाइम्स न्यूज़ किसी व्यक्ति पर लगाए गए किसी आरोप की पुष्टि नहीं करता है। खबर का उद्देश्य केवल विभागीय कार्रवाई और उससे जुड़े सार्वजनिक सवालों को सामने रखना है। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

जालौन परिवहन विभाग की मौजूदा स्थिति की वास्तविक तस्वीर आधिकारिक रिकॉर्ड, कार्रवाई के आंकड़ों और संबंधित पक्षों के बयानों से ही स्पष्ट होगी।

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Video 23
सख्ती बढ़ी तो विरोध भी तेज! राजेश कुमार वर्मा की कार्रवाई से बदली परिवहन विभाग की तस्वीर?

राजस्व वसूली और प्रवर्तन कार्रवाई को लेकर चर्चा, दलालों पर शिकंजे के बीच उठे सवाल—आखिर विरोध की वजह क्या?

जालौन परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली इन दिनों चर्चा के केंद्र में है। 
एक ओर राजस्व वसूली और प्रवर्तन कार्रवाई को लेकर विभागीय स्तर पर उपलब्धियों की बात सामने आ रही है, वहीं दूसरी ओर एआरटीओ कार्यालय की सख्त कार्यशैली को लेकर विरोध के स्वर भी सुनाई देने लगे हैं। 
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब नियमों के मुताबिक कार्रवाई और राजस्व बढ़ाने की कोशिश हो रही है, तो आखिर इस सख्ती से परेशानी किसे है?

राजेश कुमार वर्मा की कार्यशैली को लेकर विभागीय स्तर पर यह चर्चा है कि उन्होंने परिवहन व्यवस्था में लापरवाही के बजाय नियमों के अनुपालन और प्रवर्तन कार्रवाई पर जोर दिया है। 
अवैध परिवहन तथा अनधिकृत गतिविधियों पर कार्रवाई बढ़ने के साथ ही कार्यालय की व्यवस्था को लेकर भी सवाल-जवाब का दौर तेज हुआ है।

एआरटीओ कार्यालय में दलालों की सक्रियता और अवैध वसूली को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। 
प्रशासनिक स्तर पर जांच और कार्रवाई के दौरान संदिग्ध लोगों के खिलाफ कदम उठाए जाने तथा आम लोगों से सीधे कार्यालय में अपना कार्य कराने की अपील भी की गई है।
 ऐसे में कार्यालय में सख्ती बढ़ने के बाद विरोध के सुरों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

सवाल यह नहीं कि कार्रवाई क्यों हुई, सवाल यह है कि कार्रवाई से परेशानी किसे?

अगर कोई अधिकारी नियमों के तहत कार्रवाई करता है, अवैध परिवहन पर शिकंजा कसता है और सरकारी राजस्व बढ़ाने के लिए प्रवर्तन अभियान चलाता है, तो उसके काम का मूल्यांकन आंकड़ों, सरकारी रिकॉर्ड और कार्रवाई की रिपोर्ट के आधार पर होना चाहिए।

राजस्व वसूली के मामले में जालौन की उपलब्धियों को लेकर भी विभागीय स्तर पर चर्चा है।
 यदि जिले की रैंकिंग प्रदेश स्तर पर बेहतर रही है, तो उसका श्रेय पूरी टीम और विभागीय व्यवस्था के सामूहिक प्रयास को दिया जाना चाहिए। साथ ही किसी भी दावे की वास्तविक स्थिति सरकारी आंकड़ों से ही स्पष्ट हो सकती है।

विरोध के पीछे क्या है वजह?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सख्ती से उन लोगों को परेशानी हो रही है जो पहले व्यवस्था की कमजोरियों का फायदा उठाते थे, या फिर अधिकारी की कार्यशैली को लेकर उठाए जा रहे सवालों के पीछे कोई वास्तविक प्रशासनिक कारण है?

इसका जवाब आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि तथ्यों, रिकॉर्ड और आधिकारिक आंकड़ों से सामने आना चाहिए।

पत्रकारिता का काम सवाल उठाना भी है और उपलब्धियों को सामने रखना भी। इसलिए किसी अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है, वहीं अधिकारी की कार्रवाई और उपलब्धियों का भी निष्पक्ष परीक्षण होना चाहिए।

फिलहाल जालौन परिवहन विभाग में एक बात जरूर चर्चा में है—सख्ती बढ़ी तो हलचल भी बढ़ गई। 
अब असली तस्वीर आरोपों से नहीं, बल्कि कार्रवाई और राजस्व के आधिकारिक आंकड़ों से साफ होगी।

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