प्रयोगशाला की उड़ान: सांदीपनि विद्यालय की नई मिसाल
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सुबह का उत्साह और विज्ञान प्रयोगशाला
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नागदा, धार के शांत और हरियाली से घिरे सांदीपनि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आज सुबह का सूर्य एक नई ऊर्जा लेकर आया था। स्कूल का मुख्य द्वार विद्यार्थियों की चहल-पहल और उनके चेहरों की चमक से गुलजार था। आज विद्यालय की विज्ञान प्रयोगशाला (लेबोरेटरी) का माहौल सामान्य दिनों से बिल्कुल अलग था। वहाँ किसी पाठ को रटने की गूँज नहीं, बल्कि कुछ नया करने की छटपटाहट और गहरी उत्सुकता तैर रही थी।
यह सब संभव हुआ स्कूल में चलाए जा रहे विशेष "प्रेरक प्रयास" अभियान के कारण। इसके तहत विद्यालय प्रशासन ने यह ठाना था कि विज्ञान को केवल किताबों और ब्लैकबोर्ड तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उसे प्रयोगशाला के फर्श पर, उपकरणों के बीच जीवंत किया जाएगा।
*जब शिक्षक बने मार्गदर्शक और सारथी*
जैसे ही विज्ञान की घंटी बजी, विद्यालय के चार धुरंधर शिक्षक—धर्मेंद्र जाट (भौतिकी), सरिता शर्मा (रसायन विज्ञान), प्रताप सिंह अजणारे (जीव विज्ञान) और सीमा कच्छावा—पूरी तैयारी और नवाचार की सोच के साथ प्रयोगशाला में पहुँचे। आज का दिन खास था, क्योंकि विद्यार्थियों को किताबों के सिद्धांतों को सीधे अपने हाथों से जाँचने का अवसर मिलने वाला था।
शिक्षकों ने बच्चों पर पाबंदियाँ लगाने के बजाय उन्हें अन्वेषक (Explorer) बनने की पूरी छूट दी। प्रयोगशाला में कदम रखते ही विद्यार्थियों की आँखें चमक उठीं।
"विज्ञान केवल पढ़ने का विषय नहीं है, यह करने और अनुभव करने का नाम है।" — इस मूलमंत्र के साथ शिक्षकों ने बच्चों का मार्गदर्शन शुरू किया।
*प्रयोगों की दुनिया में खोए विद्यार्थी*
विद्यार्थियों ने बिना किसी झिझक के तौलने वाले सटीक उपकरणों (Weighing balances), काँच के चमकते बीकर, बन्सेन बर्नर और विभिन्न रासायनिक घोलों को अपने हाथों में थामा। विद्यार्थियों का एक समूह जहां एक रासायनिक घोल के तापमान में होने वाले बदलावों और उसके परिणामों का सूक्ष्मता से अवलोकन कर रहा था। वही दूसरी और भौतिकी के नियमों को सत्यापित करने के लिए जटिल उपकरणों के संयोजन में जुटा था। अन्य विद्यार्थी सूक्ष्मदर्शियों (Microscopes) के जरिए कोशिकाओं की दुनिया का रहस्य तलाश रहा था।
हर बच्चे के चेहरे पर एक वैज्ञानिक की सी गंभीरता और सफलता की खुशी साफ झलक रही थी। इस व्यावहारिक शिक्षा ने बच्चों के भीतर की झिझक को पूरी तरह मिटा दिया और उनके तार्किक चिंतन (Logical Thinking) को नई धार दी।
*'सिल्वर कैटेगरी' की गौरवशाली उपलब्धि*
इन तमाम रचनात्मक गतिविधियों और उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षण का परिणाम हाल ही में विद्यालय को एक ऐतिहासिक गौरव के रूप में मिला। राज्य शिक्षा केन्द्र, भोपाल द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित School Certification Programme (Cycle-1 Phase-1) में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर सांदीपनि विद्यालय का चयन 'सिल्वर कैटेगरी' (Silver Category) हेतु किया गया है।
यह उपलब्धि रातों-रात नहीं मिली; इसके पीछे विद्यालय परिवार, समस्त समर्पित शिक्षकगण, अनुशासित विद्यार्थियों, जागरूक पालकों और पूरे नागदा समुदाय का अथक सामूहिक प्रयास, अटूट अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण की संस्कृति है।
*भविष्य की ओर एक मजबूत कदम*
आज सांदीपनि विद्यालय का यह मॉडल सिर्फ एक स्कूल की कहानी नहीं है, बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के विद्यालयों के लिए एक मिसाल है। यह प्रयास न केवल विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षाओं के प्रायोगिक और सैद्धांतिक दोनों घटकों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए तैयार कर रहा है, बल्कि उन्हें देश का एक जिम्मेदार, सक्षम और वैज्ञानिक सोच वाला नागरिक भी बना रहा है। विद्यालय परिवार ने इस सफलता पर सभी सहयोगियों, शुभचिंतकों और पालकों का हृदय से आभार व्यक्त किया है और यह संकल्प लिया है कि भविष्य में भी यहाँ का शैक्षणिक वातावरण और बेहतर परिणामों की परंपरा निरंतर ऊँचाइयों को छूती रहेगी।
*उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन*
इस बीच, विद्यालय की कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों ने सत्र 2025-26 की बोर्ड परीक्षा में अपनी मेधा और उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया है। विद्यालय के इन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और उनके प्राप्तांकों का विवरण इस प्रकार है—सुमन नारवाल (96.4%), विवेक चौधरी (95.2%), मोनू भाटी (93.8%), लुभानी भाटी (93.2%), आसीन मंसूरी (93%), सुहाना मेहरा (92.4%), भुवनेश्वरी पांचाल (92%), गायत्री चौधरी (91.6%), निकिता चौधरी (89.8%), जिया मंसूरी (88%), हर्षिता वैष्णव (87.8%), राजश्री डाबी (87.2%), गौरव कुशवाहा (84.8%), जेनाब मंसूरी (84.6%), शारद्धा राठौड़ (83.4%), अंश वैष्णव (83%), शीतल कुशवाहा (82.6%), उषा गौड़ (82.6%), प्रियांशी तंवर (82.2%), मयंक राठौर (81.8%), बादल राठौड़ (81.4%), तनु चौहान (81.2%), दिव्या त्रिवेदी (80.8%), उमेश चौहान (80.8%), नेहा चौधरी (78.8%), प्रांजलि परिहार (78.6%), मुस्कान मंसूरी (78.6%), हिमाक्षी चावड़ा (78.4%), नंदानी सिसोदिया (78.4%), प्रिंसी राठौड़ (78.4%), नैतिक बैरागी (78%), रोशन कामदार (77.8%), निधि यादव (77%), भूमि राठौड़ (76.4%), फातिमा खातून (76.2%), आयुष परमार (75.8%), खुशबू जोशी (75.6%), मेघा चौहान (75.6%), शिवानी डाबी (75.4%), और भावना सुनेर (75.2%)। इन सभी विद्यार्थियों की सफलता से संपूर्ण विद्यालय परिवार में हर्षोल्लास का माहौल है।
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