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स्व-सहायता समूह से मिली नई राह, प्राची ने संवारा अपना भविष्य
सीएससी केंद्र के माध्यम से आत्मनिर्भर बनीं प्राची, अब गांव में ही ग्रामीणों को मिल रही ऑनलाइन सेवाओं की सुविधा
ग्राम पंचायत सेंथरा की प्राची तोमर के लिए स्व-सहायता समूह से जुड़ना केवल एक समूह का हिस्सा बनना नहीं था, बल्कि यह उनके जीवन में एक नई राह की शुरुआत थी। जिस प्राची को कभी स्व-सहायता समूह की अवधारणा और उससे मिलने वाले अवसरों की जानकारी नहीं थी, आज वही प्राची अपना सीएससी केंद्र संचालित कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं और गांव के लोगों के लिए भी उपयोगी सेवाओं का माध्यम बनी हैं।
प्राची बताती हैं कि शुरुआत में उन्हें यह पता नहीं था कि स्व-सहायता समूह क्या होता है और इससे जुड़कर महिलाएं अपनी आजीविका को कैसे आगे बढ़ा सकती हैं। गांव की अन्य महिलाओं से बातचीत के दौरान उन्हें समूह के बारे में जानकारी मिली। समूह से जुड़ी दीदियों ने उन्हें बचत, आपसी सहयोग और ऋण सुविधा के बारे में समझाया। प्राची ने भी पहल की और गांव की 10-12 महिलाओं को साथ लेकर स्व-सहायता समूह का गठन किया। इसके बाद महिलाओं ने नियमित रूप से बचत करना शुरू किया और धीरे-धीरे समूह की गतिविधियां आगे बढ़ने लगीं।
समूह से जुड़ने के बाद प्राची और अन्य महिलाओं के सामने अपने पैरों पर खड़े होने के नए अवसर खुलने लगे। समूह के माध्यम से महिलाओं को ऋण सुविधा मिली। किसी ने कपड़ों की दुकान शुरू की, तो किसी ने चूड़ियों का व्यवसाय। हर महिला ने अपनी रुचि और सामर्थ्य के अनुसार आजीविका का रास्ता चुना।
प्राची ने भी समूह से एक लाख रुपये का ऋण लेकर अपनी आजीविका को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाया। इसके बाद उन्होंने दो लाख रुपये का ऋण लेकर सीएससी केंद्र शुरू किया। लैपटॉप खरीदकर उन्होंने ग्रामीणों के आयुष्मान कार्ड, पैन कार्ड सहित विभिन्न ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराना शुरू किया। अब गांव के लोगों को छोटी-छोटी ऑनलाइन सेवाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। प्राची का केंद्र उनके लिए सुविधा का एक स्थानीय माध्यम बन गया है।
प्राची कहती हैं, “पहले मुझे समूह के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं थी। समूह से जुड़ी दीदियों ने मुझे इसके बारे में बताया और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। समूह के माध्यम से मुझे बचत करने, ऋण लेने और अपना काम शुरू करने का अवसर मिला। आज मैं अपने पैरों पर खड़ी हूं और अपने गांव के लोगों के काम भी आ रही हूं। यह मेरे लिए बहुत संतोष की बात है।”
प्राची की कहानी इस बदलाव की तस्वीर है कि जब महिलाओं को अवसर, सहयोग और सही मार्गदर्शन मिलता है, तो वे अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ-साथ अपने आसपास के समुदाय के लिए भी उपयोगी भूमिका निभा सकती हैं। स्व-सहायता समूह उनके लिए केवल बचत और ऋण का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मविश्वास जगाने, आजीविका से जोड़ने और अपने सपनों को आकार देने का सशक्त माध्यम बन रहे हैं।
प्राची के लिए यह सफर अभी जारी है। कभी समूह की जानकारी से अनजान रहीं प्राची आज अपने सीएससी केंद्र के माध्यम से स्वयं के लिए आय का साधन बना चुकी हैं और गांव के लोगों के लिए भी सेवाओं की सहज उपलब्धता सुनिश्चित कर रही हैं।
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18 views | Morena, Madhya Pradesh | Oct 1, 2026