तीन पहिया ऑटो में कुरकुरे-चिप्स लादे, सड़क पर उठ गया अगला हिस्सा
सवारी ऑटो या मालवाहक? अमिलिया की घटना ने यातायात व्यवस्था और जिम्मेदार विभागों की निगरानी पर उठाए सवाल
सीधी। जिले के अमिलिया क्षेत्र में तीन पहिया ऑटो में बड़ी मात्रा में कुरकुरे और चिप्स लोड किए जाने का मामला सामने आया है। सामान इतना अधिक लदा था कि ऑटो का अगला हिस्सा ऊपर उठता नजर आया। घटना का वीडियो/फोटो सामने आने के बाद ऑटो में क्षमता से अधिक माल ढोने और यातायात नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस ऑटो को सवारी परिवहन के लिए बनाया गया है, उसमें इस तरह भारी मात्रा में माल लादकर सड़क पर दौड़ाना कितना सुरक्षित है? वाहन मालिक और चालक को क्या वाहन की क्षमता और निर्धारित उपयोग की जानकारी नहीं है?
जिलेभर में ओवरलोड ऑटो पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि सीधी जिले के अमिलिया सहित विभिन्न तहसील क्षेत्रों में कई ऑटो में क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने के साथ-साथ माल ढोने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। कई बार ऑटो सवारी वाहन के साथ-साथ मालवाहक वाहन की तरह भी इस्तेमाल होते दिखाई देते हैं।
ओवरलोडिंग की स्थिति में वाहन का संतुलन बिगड़ने का खतरा बना रहता है। ऐसी स्थिति में अचानक ब्रेक लगने, मोड़ आने या सड़क पर किसी बाधा के सामने आने पर गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
बीच सड़क पर सवारी उतारना-चढ़ाना भी परेशानी
शहर और कस्बाई क्षेत्रों में ऑटो चालकों द्वारा बीच सड़क पर अचानक वाहन रोककर सवारी उतारने और बैठाने से भी यातायात प्रभावित होने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। इससे पीछे चल रहे वाहनों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है और कई बार जाम की स्थिति बन जाती है।
कार्रवाई के बाद दबाव की राजनीति का भी आरोप
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा रहती है कि जब प्रशासन या यातायात विभाग नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कार्रवाई करता है, तो कुछ लोग गरीब और बेबस होने का हवाला देकर कार्रवाई का विरोध करने लगते हैं। हालांकि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए और वाहन चालक की आर्थिक स्थिति से अधिक महत्वपूर्ण सड़क पर यात्रियों तथा अन्य लोगों की सुरक्षा है।
हादसों के बाद भी नहीं सुधर रही व्यवस्था
ओवरलोडिंग और नियमों की अनदेखी के कारण पूर्व में ऑटो दुर्घटनाओं में लोगों के घायल होने और जान गंवाने जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में सवाल यह है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय जिम्मेदार विभाग नियमित रूप से ऑटो की जांच क्यों नहीं करते?
अब जरूरत है कि परिवहन विभाग और यातायात पुलिस जिलेभर में सवारी ऑटो की क्षमता, फिटनेस, परमिट और ओवरलोडिंग की जांच करें। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि सड़क सुरक्षा से किसी तरह का समझौता न हो।