‘एक कचौड़ी, दो समोसा—इन मर्दों का क्या भरोसा’ जैसे नारों पर विवेक पांडे ने जताई आपत्ति
कहा—दोषी व्यक्ति के खिलाफ आवाज उठाइए, लेकिन पूरे पुरुष समाज का अपमान स्वीकार नहीं
सीधी। सोशल मीडिया पर इन दिनों ‘एक कचौड़ी, दो समोसा—इन मर्दों का क्या भरोसा’ जैसे नारे तेजी से वायरल हो रहे हैं। इसको लेकर शिवसेना प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पांडे ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन किसी व्यक्ति की गलती के विरोध में पूरे पुरुष समाज को अपमानित करना उचित नहीं है।
विवेक पांडे ने कहा कि नारी और पुरुष एक-दूसरे के पूरक हैं। हमारी मां भी नारी है, जिसने हमें जन्म दिया है। भारतीय संस्कृति में नारी को आदिशक्ति का स्थान दिया गया है और नारी समाज का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति गलत करता है तो उसके खिलाफ आवाज उठनी चाहिए और कानून के माध्यम से न्याय की मांग की जानी चाहिए। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या किसी व्यक्ति की गलती के लिए उसके पिता, भाई और परिवार के सभी पुरुषों को भी उसी कटघरे में खड़ा किया जा सकता है?
उन्होंने कहा कि हजारों पिता अपनी बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य के लिए पूरी जिंदगी मेहनत करते हैं। इसलिए किसी एक व्यक्ति के कृत्य को आधार बनाकर पूरे पुरुष समाज पर टिप्पणी करना उचित नहीं है।
विवेक पांडे की अपील
उन्होंने कहा कि गलत के खिलाफ आवाज जरूर उठाएं, न्याय की मांग करें, लेकिन विरोध की भाषा में मर्यादा और संस्कार भी बनाए रखें। व्यक्ति गलत हो सकता है, लेकिन पूरे समाज को गलत नहीं ठहराया जा सकता।
वायरल हो रही 4 प्रमुख लाइनें
नारी शक्ति का सम्मान हमारा संस्कार है।
गलत के खिलाफ आवाज उठाना अधिकार है।
लेकिन पूरे पुरुष समाज का अपमान स्वीकार नहीं।
व्यक्ति गलत हो सकता है, पूरा समाज नहीं।