71 साल के बुजुर्ग की दृढ़ इच्छाशक्ति ने सैकड़ों ग्रामीणों को दिलाई सड़क की सौगात!!
दस साल तक सड़क के लिए जारी रखा संघर्ष, अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर जिलाधिकारी ने किया सम्मानित,
डॉ. कृष्णानंद डिमरी ने कहा—सेवानिवृत्ति के बाद भी जनसेवा को बनाया जीवन का लक्ष्य,,
रुद्रप्रयाग। उम्र के 71वें पड़ाव पर भी जज्बा ऐसा कि वर्षों से उपेक्षित गांवों की सड़क के लिए संघर्ष छेड़ दिया और आखिरकार सैकड़ों ग्रामीणों को सड़क की सौगात दिलाकर ही दम लिया। भरदार क्षेत्र के स्वीली सेम और डुंगरी गांवों में सड़क निर्माण के लिए करीब एक दशक तक लगातार प्रयास करने वाले वरिष्ठजन डॉ. कृष्णानंद डिमरी को अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर जिला सभागार, कलेक्ट्रेट में आयोजित सम्मान समारोह में जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने सम्मानित किया।
समारोह में वरिष्ठजनों के अनुभव और युवा पीढ़ी की प्रतिभा का अनूठा संगम देखने को मिला। सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. कृष्णानंद डिमरी, अनुसूया प्रसाद मलासी समेत 10 वरिष्ठजनों को सम्मानित किया गया। इस दौरान वरिष्ठजनों ने अपने जीवन के संघर्ष, अनुभव और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्य साझा कर युवाओं को समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया।
डॉ. कृष्णानंद डिमरी ने बताया कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपना जीवन क्षेत्र की जनता की सेवा के लिए समर्पित करने का संकल्प लिया। भरदार क्षेत्र के स्वीली सेम और डुंगरी गांवों में सड़क समेत अन्य समस्याओं के समाधान को लेकर उन्होंने लगातार अधिकारियों और संबंधित स्तरों पर आवाज उठाई। करीब दस वर्षों के प्रयासों के बाद दोनों गांवों को सड़क की सुविधा मिल सकी।
सामाजिक सरोकारों के लिए डॉ. डिमरी को विभिन्न मंचों पर सम्मान भी मिल चुका है। इनमें आइकोनिक पीस अवार्ड काउंसिल, नई दिल्ली की मानद डॉक्टरेट एवं अशोका अवार्ड, आगरा में गढ़वाल भ्रातृ सभा के कौथिग महोत्सव में विशिष्ट विभूति अवार्ड तथा रुद्र रत्न सम्मान प्रमुख हैं।
71 की उम्र में भी संघर्ष की यह कहानी बताती है कि बदलाव के लिए उम्र नहीं, दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास जरूरी हैं।