जनता दर्शन से लेकर स्कूल के बेंच तक—श्रुति की पढ़ाई को लेकर डीएम साहब का साफ संदेश
इच्छाशक्ति हो तो बदलाव संभव है।
अभिभावकों के लिए भी यह एक प्रेरणा है कि वे हर हाल में अपने बच्चों को पढ़ाएं।"
शिक्षा पर हर बच्चे का बराबर अधिकार है, और जब खुद जिलाधिकारी एक दिव्यांग बच्ची का हाल जानने स्कूल पहुँचें,
तो यह प्रशासन संवेदनशील होने का सबसे बड़ा प्रमाण है।
कोई भी बच्चा अब संसाधनों या परिस्थितियों के अभाव में पीछे नहीं छूटेगा