भारतीय न्याय संहिता (BNS) की नवीन धारा 152
जो कोई, प्रयोजनपूर्वक या जानबूझकर, बोले गए या लिखे गए शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा, या दृश्यरूपण या इलैक्ट्रानिक संसूचना द्वारा या वित्तीय साधन के प्रयोग द्वारा या अन्यथा अलगाव या सशस्त्र विद्रोह या विध्वंसक क्रियाकलापों को प्रदीप्त करता है या प्रदीप्त करने का प्रयत्न करता है या अलगाववादी क्रियाकलापों की भावना को बढ़ावा देता है या भारत की संप्रभुता या एकता और अखंडता को खतरे में डालता है या ऐसे कृत्य में सम्मिलित होता है या उसे कारित करता है, वह आजीवन कारावास से या ऐसे कारावास से जो सात वर्ष तक हो सकेगा, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
स्पष्टीकरण- इस धारा में निर्दिष्ट क्रियाकलाप प्रदीप्त किए बिना या प्रदीप्त करने का प्रयत्न के बिना विधिपूर्ण साधनों द्वारा उनको परिवर्तित कराने की दृष्टि से सरकार के उपायों या प्रशासनिक या अन्य क्रिया के प्रति अननुमोदन प्रकट करने वाली टीका-टि
25 views | Jaipur, Rajasthan | Aug 13, 2026