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केदारघाटी–: क्या पाताललोक में समा रही जमीन? भूस्खलन से हाइवे भी प्रभावित!! उच्च हिमालय क्षेत्र पर मंडराया बड़ा खतरा!! लगातार भूस्खलन से चिंता में लोग!! केदारनाथ यात्रा के रामपुर बाजार पर मंडराया भूस्खलन का बड़ा खतरा - रुद्रप्रयाग के रामपुर बाजार पर इन दिनों भूस्खलन का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। केदारनाथ हाईवे के किनारे लगातार हो रहे भूधंसाव ने अब बाजार की ओर रुख कर लिया है। सड़क का आधे से अधिक हिस्सा भूधंसाव की चपेट में बताया जा रहा है, जबकि आसपास बने भवनों पर भी खतरा मंडराने लगा है। लगातार बारिश के बीच स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। केदारघाटी में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने रामपुर बाजार के समीप स्थित संवेदनशील भूस्खलन जोन की चिंता बढ़ा दी है। जून माह से यहां लगातार जमीन धंस रही है और अब इसका असर बाजार क्षेत्र की ओर साफ दिखाई देने लगा है। सड़क के साथ-साथ आसपास की जमीन भी लगातार खिसक रही है। रामपुर बाजार के समीप लंबे समय से सक्रिय इस भूस्खलन क्षेत्र में पहले भी हाईवे की सुरक्षा दीवार धंस चुकी है। राजमार्ग विभाग की कार्यदायी संस्था ने सुरक्षा दीवार का निर्माण कराया था, लेकिन जुलाई के अंतिम सप्ताह में हुई भारी बारिश के बाद यह दीवार दोबारा धंस गई। इसके बाद से भूधंसाव लगातार बढ़ता जा रहा है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि भूधंसाव अब सड़क तक सीमित नहीं रह गया है। बाजार की ओर बढ़ते भूधंसाव से आसपास बने भवनों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर भी खतरा मंडराने लगा है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि अगर समय रहते स्थायी और वैज्ञानिक उपचार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं। स्थानीय लोगों ने राजमार्ग विभाग के अधिकारियों पर भी सवाल उठाए हैं। व्यापारियों का आरोप है कि इतना संवेदनशील मामला होने के बावजूद मौके का समुचित निरीक्षण नहीं किया जा रहा है। उन्होंने विशेषज्ञों की टीम बुलाकर क्षेत्र का भू-वैज्ञानिक सर्वे कराने और वैज्ञानिक तरीके से ट्रीटमेंट की मांग की है। वहीं, लगातार जारी बारिश ने खतरे को और बढ़ा दिया है। स्थानीय लोगों को आशंका है कि अगर बारिश का दौर इसी तरह जारी रहा तो भूधंसाव की रफ्तार और बढ़ सकती है। ऐसे में रामपुर बाजार और केदारनाथ हाईवे की सुरक्षा को लेकर तत्काल ठोस कदम उठाना जरूरी हो गया है। फिलहाल, रामपुर बाजार में लगातार बढ़ते भूधंसाव ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि प्रशासन और राजमार्ग विभाग इस संवेदनशील क्षेत्र में कितनी तेजी से स्थायी और वैज्ञानिक सुरक्षा उपाय लागू करता है, ताकि किसी बड़े हादसे को समय रहते टाला जा सके। - Uttarakhand News