सीधी के बढ़ौरा नाथ शिव मंदिर की राह में जलमग्न पुल, आस्था के सामने प्रशासन की बेबसी या लापरवाही?
सवाल सिर्फ एक पुल का नहीं, श्रद्धालुओं की आस्था और उनकी सुरक्षा का है।
सीधी जिले के बढ़ौरा नाथ शिव मंदिर जाने वाले मार्ग पर बनी वर्षों पुरानी पुलिया इन दिनों पानी में डूबी हुई है। पुल के ऊपर से पानी का बहाव जारी है और ऐसे हालात में मंदिर तक पहुंचना श्रद्धालुओं के लिए जान जोखिम में डालने जैसा साबित हो सकता है।
दूर-दराज से भगवान भोलेनाथ के दर्शन की आस लेकर पहुंचे श्रद्धालुओं को जब सीधी पुलिस ने जलमग्न पुल पार करने से रोका, तो कई श्रद्धालुओं को बिना दर्शन किए ही वापस लौटना पड़ा।
महिला के बहने की भी सूचना, पुष्टि का इंतजार
इसी बीच एक महिला के पानी के तेज बहाव में बह जाने की सूचना भी सामने आ रही है। हालांकि महिला की स्थिति क्या है—वह सुरक्षित है या उसके साथ कोई अनहोनी हुई है—इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
पुलिस एवं प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही इस घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे संवेदनशील मामले में बिना पुष्टि किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
🚨 वायरल वीडियो में दिखी पुलिस की सख्ती
वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी श्रद्धालुओं को समझाते नजर आ रहे हैं कि पानी के बहाव के बीच पुल पार करना बेहद खतरनाक है। इसी दौरान एक श्रद्धालु को रोकने के दौरान एक पुलिसकर्मी द्वारा कथित तौर पर दो थप्पड़ मारने का दृश्य भी सामने आया है।
हालांकि इसके बाद श्रद्धालुओं ने पुल पार करना बंद कर दिया।
पुलिस की चिंता अपनी जगह जायज है—किसी की जान जोखिम में नहीं डाली जा सकती। लेकिन सवाल यह है कि श्रद्धालुओं को बार-बार रोकने की नौबत आखिर क्यों आई?
🕉️ सवाल व्यवस्था से है…
जब चुनाव के दौरान कोई नेता सांसद या विधायक का पर्चा दाखिल करता है, तो मंदिरों में जाकर माथा टेकना और आशीर्वाद लेना प्राथमिकता बन जाता है।
लेकिन सवाल यह है कि चुनाव के बाद उन्हीं धार्मिक स्थलों तक पहुंचने वाले रास्तों और पुलों की सुध क्यों नहीं ली जाती?
अगर यह पुल वर्षों पुराना है और बारिश के दिनों में हर साल जलमग्न होकर श्रद्धालुओं के लिए खतरा बनता है, तो इसका स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं हुआ?
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?
आखिर गलती किसकी है?
क्या गलती उन श्रद्धालुओं की है, जो कई किलोमीटर दूर से भगवान शंकर के दर्शन करने पहुंचे?
या फिर उस व्यवस्था की, जो वर्षों से इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं कर सकी?
स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर जिला प्रशासन और संबंधित विभागों तक—क्या किसी ने इस मार्ग और पुल की स्थायी व्यवस्था को लेकर गंभीरता से विचार किया?
श्रद्धालुओं को सुरक्षा देना जरूरी है, लेकिन उन्हें हर बारिश में भगवान के दर्शन से वंचित होने की स्थिति में छोड़ देना भी समाधान नहीं है।
भोलेनाथ के भक्त आस्था लेकर आते हैं, मौत से खेलने नहीं।
जरूरत है कि प्रशासन तत्काल सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करे और इस पुराने पुल के स्थायी जीर्णोद्धार अथवा नए पुल के निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाए।
क्योंकि सवाल सिर्फ आज के दर्शन का नहीं है—
सवाल यह है कि अगली बारिश में क्या फिर यही तस्वीर देखने को मिलेगी?
कड़क सवाल
“चुनाव के समय मंदिर याद, बारिश के समय श्रद्धालु क्यों नहीं?”
“आस्था के रास्ते में हर साल पानी क्यों, स्थायी समाधान कब?”
“हादसा होने से पहले जागेगा प्रशासन या फिर किसी अनहोनी का इंतजार है?”
“श्रद्धालुओं को रोकना आसान है, लेकिन वर्षों पुरानी समस्या का समाधान करना मुश्किल क्यों?”
नोट: महिला के बहने से संबंधित सूचना की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। प्रशासन/पुलिस की पुष्टि के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
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