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सावन के तृतीय सोमवार पर नागचंद्रेश्वर स्वरूप में सजे भोलेनाथ, हरदा मंडी के पंच पिपलेश्वर महादेव मंदिर में हुआ 104वां श्रृंगार 22 वर्षों से निरंतर भगवान शिव का श्रृंगार कर रहे कलाकार जयकृष्ण चांडक, सात घंटे में तैयार किया अद्भुत स्वरूप; मिट्टी, रंग, चमकीले कपड़े और फूलों से सजा दरबार अनोखा तीर, हरदा। पवित्र सावन माह के तृतीय सोमवार एवं नागपंचमी के पावन अवसर पर हरदा मंडी प्रांगण स्थित श्री पंच पिपलेश्वर महादेव मंदिर में भगवान भोलेनाथ का विशेष एवं मनोहारी श्रृंगार किया गया। इस अवसर पर भगवान शिव को नागचंद्रेश्वर स्वरूप में सजाया गया, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा। भगवान भोलेनाथ के दिव्य स्वरूप के दर्शन करने के लिए मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए और भक्तिमय वातावरण में हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे। सावन सोमवार और नागपंचमी के विशेष संयोग को देखते हुए मंदिर में भगवान शिव के इस विशेष स्वरूप का श्रृंगार श्रद्धा एवं आकर्षक कलात्मकता के साथ किया गया। भगवान के मस्तक पर विराजमान नाग, जटाओं और श्रृंगार की बारीक सजावट के साथ तैयार किया गया स्वरूप श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता रहा। भगवान भोलेनाथ का यह मनोहारी रूप धार्मिक आस्था के साथ-साथ कलाकार की कला और कल्पनाशीलता का भी सुंदर उदाहरण दिखाई दिया। 22 वर्षों से श्रृंगार की परंपरा, यह 104वां श्रृंगार भगवान पंच पिपलेश्वर महादेव के विशेष श्रृंगार की इस परंपरा से कलाकार जयकृष्ण चांडक पिछले करीब 22 वर्षों से निरंतर जुड़े हुए हैं। इन वर्षों में उन्होंने अलग-अलग पर्वों और अवसरों पर भगवान शिव के विविध एवं आकर्षक स्वरूपों को अपने हाथों से आकार दिया है। नागपंचमी एवं सावन के तृतीय सोमवार पर किया गया यह श्रृंगार उनका 104वां श्रृंगार बताया गया है। लगातार 22 वर्षों तक भगवान शिव की सेवा के रूप में श्रृंगार करते आना अपने आप में श्रद्धा और समर्पण का उदाहरण है। प्रत्येक श्रृंगार में अलग स्वरूप और नई कल्पना के माध्यम से भगवान भोलेनाथ को सजाने का प्रयास किया जाता है, जिससे श्रद्धालुओं को हर बार कुछ नया और विशेष देखने को मिलता है। करीब सात घंटे में तैयार हुआ दिव्य स्वरूप नागचंद्रेश्वर स्वरूप को तैयार करने में कलाकार जयकृष्ण चांडक को करीब सात घंटे का समय लगा। इस दौरान भगवान के स्वरूप की बारीक सजावट से लेकर विभिन्न हिस्सों को आकर्षक रूप देने तक काफी मेहनत की गई। श्रृंगार को अंतिम रूप देने में रोहित सोनी का भी सहयोग रहा। श्रृंगार में भगवान शिव के स्वरूप को उभारने के लिए विभिन्न पारंपरिक एवं सजावटी सामग्रियों का उपयोग किया गया। इसमें मिट्टी, रंग, चमकदार कपड़ा, पेरिस, चुनरी कपड़ा, फूलों की मालाएं और रंगोली सहित अन्य सामग्री का प्रयोग किया गया। इन सामग्रियों के संयोजन से भगवान भोलेनाथ का स्वरूप अत्यंत आकर्षक एवं जीवंत नजर आया। ### नागचंद्रेश्वर स्वरूप ने मोहा श्रद्धालुओं का मन नागपंचमी के अवसर पर भगवान शिव का नागचंद्रेश्वर स्वरूप विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए भगवान के मस्तक पर नाग की सुंदर आकृति के साथ विशेष सजावट की गई। भगवान के चेहरे की सौम्यता, जटाओं में किया गया कलात्मक श्रृंगार और चारों ओर की सजावट ने पूरे स्वरूप को भव्यता प्रदान की। मंदिर में भगवान के दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं ने इस विशेष श्रृंगार की सराहना की। भक्तों ने भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना की। मंदिर परिसर में सावन सोमवार और नागपंचमी के कारण विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिला। ### आस्था के साथ कला का अद्भुत संगम पंच पिपलेश्वर महादेव मंदिर में किया गया यह श्रृंगार केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था और कला के सुंदर संगम के रूप में भी सामने आया। मिट्टी और रंगों के साथ कपड़े, फूलों और सजावटी सामग्री का प्रयोग कर भगवान शिव के स्वरूप को विशेष रूप देना कलाकार की रचनात्मकता को दर्शाता है। कलाकार जयकृष्ण चांडक द्वारा पिछले 22 वर्षों से लगातार किए जा रहे श्रृंगार श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का विषय रहे हैं। 104वें श्रृंगार के रूप में नागचंद्रेश्वर स्वरूप को तैयार कर उन्होंने एक बार फिर अपनी कला और भगवान शिव के प्रति श्रद्धा को प्रदर्शित किया। मंदिर में बना रहा भक्तिमय माहौल सावन के तृतीय सोमवार एवं नागपंचमी के अवसर पर मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आस्था देखने को मिली। भगवान के विशेष श्रृंगार के बाद मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और हर-हर महादेव के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो उठा। पंच पिपलेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव के नागचंद्रेश्वर स्वरूप का यह विशेष श्रृंगार श्रद्धालुओं के लिए यादगार बन गया। 22 वर्षों की निरंतर श्रृंगार परंपरा और 104वें श्रृंगार ने इस अवसर को और भी विशेष बना दिया। - Harda News