चकबंदी अटकी, तीन बीघा जमीन के मालिकों का एक बीघे पर कब्जा
- अतरौली की महिलाओं ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर डीएम के नाम सौंपा ज्ञापन, बड़े काश्तकारों पर सरकारी व ग्रामीणों की जमीन कब्जाने का आरोप
जासं, चित्रकूट : कागजों में तीन से चार बीघा जमीन, लेकिन मौके पर महज एक बीघे पर कब्जा—अतरौली गांव के ग्रामीण वर्षों से इसी समस्या से जूझ रहे हैं। वर्ष 2016 से चल रही चकबंदी की प्रक्रिया पूरी न होने और जमीनों पर कब्जे को लेकर सोमवार को गांव की महिलाओं ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। महिलाओं ने जिलाधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपकर चकबंदी प्रक्रिया पूरी कराने, सरकारी और ग्रामीणों की जमीन से अवैध कब्जे हटवाने तथा गांव में सार्वजनिक सुविधाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग की।
महिलाओं का आरोप है कि आकार पत्र-5 मिलने के बाद ग्रामीणों को अपनी जमीन का वास्तविक विवरण पता चला। कई ग्रामीणों के नाम तीन से चार बीघा जमीन दर्ज है, लेकिन मौके पर उनका कब्जा महज एक बीघे पर है। शेष जमीन पर गांव के कुछ बड़े काश्तकारों ने कब्जा कर रखा है। आरोप है कि सरकारी भूमि पर भी अवैध कब्जे हैं, जिसके कारण चकबंदी का विरोध किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में शामघाट, खेल मैदान, छोटे खेतों तक जाने के रास्ते और सिंचाई के पानी के लिए नहर जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं है। चकबंदी पूरी होने से सार्वजनिक सुविधाओं के लिए भूमि सुरक्षित होने के साथ ग्रामीणों को उनकी दर्ज जमीन पर वास्तविक कब्जा मिलने की उम्मीद है।
ज्ञापन देने वालों में बुध्दराज सिंह, संतोष कुमार, पप्पू, प्रेमा, चुन्नी और आशा देवी समेत कई ग्रामीण शामिल रहे।
Karwi, Chitrakoot | Oct 6, 2026