सफलता की कहानी
अररिया, 26 अगस्त 2026
मिट्टी के बर्तन निर्माण से आत्मनिर्भर बनीं बबली देवी
मदनपुर, अररिया निवासी बबली देवी का परिवार पारंपरिक रूप से मिट्टी के बर्तन बनाने का कार्य करता है। परिवार में पति-पत्नी, तीन बेटियाँ (15, 13 एवं 11 वर्ष) तथा एक 8 वर्षीय बेटा सहित कुल छह सदस्य हैं। पति की नियमित आय नहीं होने के कारण परिवार का मुख्य सहारा बबली देवी का व्यवसाय ही है। सीमित आय के कारण परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था तथा बच्चों की पढ़ाई और घरेलू खर्चों का प्रबंधन भी चुनौतीपूर्ण था।
गांव की अन्य जीविका दीदियों के प्रेरित करने पर बबली देवी स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें नियमित बचत, बैठक, बैंकिंग व्यवस्था तथा ऋण सुविधा की जानकारी मिली। आवश्यकता पड़ने पर उन्होंने समूह के माध्यम से ऋण लेकर अपने पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।
जीविका से जुड़ने के बाद बबली देवी ने मिट्टी के बर्तन निर्माण के कार्य को अधिक व्यवस्थित तरीके से करना शुरू किया। समूह से प्राप्त सहयोग और वित्तीय सहायता के कारण उन्होंने कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित की तथा उत्पादन बढ़ाया। वर्तमान में उनकी मासिक आय लगभग ₹8,000 हो गई है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई है। वे धीरे-धीरे अपने ऋण का भी भुगतान कर रही हैं।
जीविका से जुड़ने के बाद बबली देवी के परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। अब वे बच्चों की शिक्षा, घरेलू आवश्यकताओं तथा अन्य खर्चों का बेहतर ढंग से प्रबंधन कर पा रही हैं। समूह से जुड़ने के कारण उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है और वे नियमित रूप से समूह की बैठकों एवं सामुदायिक गतिविधियों में भाग लेती हैं।
बबली देवी का कहना है कि जीविका से जुड़ना उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण निर्णय रहा। इससे उन्हें आर्थिक सहायता के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला। उनका अनुभव जीविका के साथ अत्यंत सकारात्मक रहा है।
Araria, Araria | Aug 26, 2026