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धैर्य, उम्मीद और सही इलाज से नन्हीं वामिका ने यूं जीती जिंदगी की जंग
बड़वानी 02 अक्टूबर 2026/ जिला अस्पताल बड़वानी में जन्मी नन्हीं वामिका चौबे के जीवन में एक समय ऐसा आया जब उसके माता-पिता गहरी चिंता में डूब गए थे। जन्म के कुछ समय बाद उन्हें यह स्पष्ट हुआ कि वामिका का शारीरिक और मानसिक विकास अन्य बच्चों की तुलना में धीमा है। उसे डेवलपमेंट डिले (विकासात्मक विलंब) की समस्या थी।
लगभग 14 माह की उम्र तक स्थिति यह थी कि वामिका को भोजन करने में भारी परेशानी होती थी, वह ठीक से बैठ भी नहीं पाती थी और बोलने में भी असमर्थ थी। ऐसी कठिन परिस्थिति में परिवार को जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र (डीईआईसी), बड़वानी के बारे में जानकारी मिली, जो उनके लिए उम्मीद की एक नई किरण साबित हुई।
नियमित थेरेपी से आया सकारात्मक बदलाव
डीईआईसी बड़वानी में पहुंचने पर फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. अर्पित पॉल द्वारा वामिका की स्थिति का बारीकी से आंकलन किया गया और उसे नियमित थेरेपी देना शुरू किया गया। डॉ. पॉल के मार्गदर्शन, चिकित्सा टीम के निरंतर प्रयासों और सबसे बढ़कर वामिका के माता-पिता के अटूट सहयोग व धैर्य का परिणाम यह रहा कि आज 2 वर्ष की आयु में वामिका में अभूतपूर्व सुधार देखा जा रहा है। अब वामिका न केवल सामान्य रूप से भोजन करने लगी है, बल्कि उसने थोड़ा-थोड़ा बोलना भी शुरू कर दिया है। नन्हीं वामिका की इस प्रगति को देखकर उसके माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं है। वामिका के स्वस्थ भविष्य को देखकर उनके माता-पिता ने फिजियोथैरेपिस्ट एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया है।
समय पर पहचान और नियमित थेरेपी, बच्चे के विकास को नई दिशा दे सकती है।” यह सफलता की कहानी उन सभी अभिभावकों के लिए प्रेरणा है, जो अपने बच्चों में विकासात्मक देरी जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। समय पर सही चिकित्सीय सलाह लेकर बच्चों का जीवन संवारा जा सकता है।
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1 views | Barwani, Madhya Pradesh | Oct 2, 2026