*सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जनजातीय कला-कौशल प्रशिक्षण, नर्मदा डैम घाट पर रंगोली बनाकर जलाए दीप*
*गोंडी चित्रकला को साड़ी, टी-शर्ट, पर्स और बैग पर उकेरकर विद्यार्थियों ने दिखाई रचनात्मकता*
*पारंपरिक कला-संस्कृति को प्रोत्साहन देने के साथ युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल*
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत शासकीय चंद्र विजय महाविद्यालय, डिंडौरी में जनजातीय कला-कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को गोंडी चित्रकला एवं पारंपरिक जनजातीय कला का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता और नवाचार का परिचय देते हुए साड़ी, टी-शर्ट, पर्स एवं बैग पर गोंडी कला को उकेरकर आकर्षक कलाकृतियां तैयार कीं।
इसी क्रम में बुधवार को मां नर्मदा डैम घाट, डिंडौरी में विद्यार्थियों एवं सहभागियों द्वारा आकर्षक रंगोली बनाई गई तथा दीप प्रज्वलित किए गए। इस गतिविधि के माध्यम से स्थानीय कला, सांस्कृतिक परंपराओं और जनभागीदारी को प्रोत्साहित करते हुए सेवा संकल्प अभियान के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए उसे व्यापक पहचान दिलाना तथा युवाओं को कौशल विकास के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है।
गोंडी चित्रकला को दैनिक उपयोग की वस्तुओं से जोड़कर विद्यार्थी अपनी कलात्मक प्रतिभा को नए स्वरूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। इससे स्थानीय कला एवं हस्तशिल्प को प्रोत्साहन मिलने के साथ युवाओं के लिए स्वरोजगार और आजीविका के नए अवसर विकसित होने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से पारंपरिक कला, स्थानीय कौशल और सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि जनजातीय संस्कृति को नई पहचान मिले और युवा कौशल आधारित आजीविका अपनाकर आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ सकें।
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