औरंगाबाद में मानवता की मिसाल: 100 वर्षीय बुजुर्ग की मौत पर मोहल्ले ने पेश की इंसानियत की मिसाल, चंदा जुटाकर कराया अंतिम संस्कार।
औरंगाबाद के वार्ड नंबर 31 गंगटी गांव की घटना, गरीब परिवार के सामने आई दाह संस्कार की चुनौती तो पूरा मोहल्ला बना सहारा
औरंगाबाद (बिहार)
नगर थाना क्षेत्र के सदर प्रखंड अंतर्गत वार्ड नंबर 31 के गंगाटी गांव में इंसानियत आज भी जिंदा है, इसका उदाहरण देखने को मिला है। यहां 100 वर्षीय राम पुकार गिरी के निधन के बाद उनका परिवार अंतिम संस्कार तक कराने में असमर्थ था, तब पूरे मोहल्ले ने एकजुट होकर मानवता की मिसाल पेश की।
बताया जाता है कि राम पुकार गिरी बेहद गरीब परिवार से थे। उनके पुत्र केश्वर गिरी दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनकी पत्नी भी मजदूरी कर घर चलाने में सहयोग करती हैं। ऐसे में बुजुर्ग पिता के अचानक निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और आर्थिक तंगी के कारण अंतिम संस्कार की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो गया।
खबर मिलते ही मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई, लेकिन इसी बीच मोहल्लेवासियों ने तय किया कि इस दुख की घड़ी में परिवार को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।
*चंदा जुटाकर किया अंतिम संस्कार*
मोहल्ले के लोगों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर राम पुकार गिरी का पूरे सम्मान के साथ दाह संस्कार कराया। इतना ही नहीं, दाह संस्कार के बाद होने वाले ब्रह्मभोज की व्यवस्था भी आपसी सहयोग से करने का निर्णय लिया गया है।
*पत्रकार मंटू ठाकुर के नेतृत्व में पहल*
इस नेक पहल का नेतृत्व पत्रकार मंटू ठाकुर ने किया। उनके साथ डॉ. रूपेश कुमार, अनुज विश्वकर्मा, विकास पासवान, राजेश्वर प्रजापति, प्रदीप पासवान, मुकेश गिरी, राघव ठाकुर सहित मोहल्ले के कई युवा, बुजुर्ग और महिलाओं ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया। महिलाओं ने भी आपस में चर्चा कर पीड़ित परिवार की मदद के लिए आगे आने में अहम भूमिका निभाई।
मोहल्लेवासियों ने कहा, "आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के संकट में साथ खड़ा होना ही सच्ची इंसानियत है। हम सिर्फ अंतिम संस्कार ही नहीं, आगे भी परिवार को हरसंभव मदद देंगे।"
स्थानीय स्तर पर इस पहल की खूब सराहना हो रही है। लोग कह रहे हैं कि सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ देकर ही समाज में मानवीय संवेदना और एकजुटता को मजबूत किया जा सकता है।
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